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NRC क्या है :-

NRC क्यों जरूरी

NRC का सीधा मतलब (The National Register of Citizens) राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर है, यह उन सभी भारतीय नागरिको का एक रजिस्टर है जिसका गठन नागरिकता अधिनियम 1955 के 2003 संसोधन द्वारा अनिवार्य है। इसका उद्देश्य सभी नागरिको को दस्तावेज देना है ताकि कानूनी तरीके से अवैध प्रवासियो की पहचान की जा सके।

NRC हमारे भारतीय प्रवासी होने का प्रमाणित करता है। यह सुप्रीम कोर्ट के आधार पर असम के प्रवासियो, की वैध पहचान कराना है। इसमे उन सभी व्यक्तियो के बारे मे जनसंख्यिकी जानकारी शामिल है जो सच मे भारतीय नागरिक है।

NRC के तहत एक व्यक्ति भारत का नागरिक होने के योग्य, यदि वे साबित करते है कि उनके पूर्वज (24 मार्च 1971) या उससे पहले भारत मे थे। इसलिये असम मे NRC प्रकिया को हटाने के लिये विरोध किया जा रहा है।

जिसमें सभी वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम हैं। वर्तमान मे केवल असम मे ही ऐसा रजिस्टर है। वर्तमान मे केन्द्र सरकार व्दारा यह नियम सम्पूर्ण भारत मे लागू किया जा सकता है। नागालैंड पहले से ही एक समान डेटाबेस बना रहा है जिसे “रजिस्टर ऑफ इंडिजिनस इनहेबिटेंट्स” के रूप में जाना जाता है। केन्द्र एक राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) बनाने की योजना बना रहा है, जिसमें नागरिको के जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक विवरण होंगे।

असम मे NRC:-

असम में NRC मूलरूप से राज्य में रहने वाले भारतीय नागरिकों की एक सूची है। नागरिकों का रजिस्टर बांग्लादेश की सीमा वाले राज्य में विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए निर्धारित करता है।

असम मे रजिस्टर को अपडेट करने की प्रक्रिया 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई। जिसमें राज्य के लगभग 33 मिलियन (3 करोड़ 30 लाख) लोगों ने साबित किया कि वे (24 मार्च 1971) से पहले के भारतीय नागरिक थे ।

असम में बुनियादी मापदंडों में से एक यह भी था। कि आवेदक के परिवार के सदस्यों का नाम या तो 1951 में तैयार पहले NRC में होना चाहिए या (24 मार्च 1971) तक के मतदाता सूची में होना चाहिए ।

इसके अलावा आवेदकों के पास शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, एलआईसी पॉलिसी, भूमि और किरायेदारी रिकॉर्ड, नागरिकता प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, सरकार द्वारा जारी लाइसेंस या प्रमाण पत्र, बैंक / डाकघर के खाते, स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज पेश करने का विकल्प भी था। सरकारी रोजगार प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र और न्यायालय रिकॉर्ड अथवा कोई ऐसा प्रमाण जिससे यह प्रमाणित किया जा सके कि वह भारत का नागरिक है ।

असम के नागरिको राज्य भर मे स्थापित NRC सेवा केन्द्रो को नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करने के लिये कहा गया था। अब तक राष्ट्र मे NRC अभी तक लागू नही किया गया है, किन्तु केन्द्र सरकार व राज्य सरकार व्दारा बहुत ही जल्द लागू किया जायेगा ।

बहिष्कृत व्यक्तियों के साथ क्या किया जायेगा :-

सरकार ने कहा कि एनआरसी में किसी व्यक्ति के नाम को शामिल न करने से उसके पास कोई राशि नहीं होती है। ऐसे व्यक्तियों के पास विदेशियों के न्यायाधिकरणों के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने का विकल्प होगा। 

यदि कोई न्यायाधिकरण में मुकदमा हार जाता है, तो व्यक्ति उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकता है। 

असम के मामले में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी व्यक्ति को तब तक नहीं छोड़ेगी जब तक कि उसे विदेशियों के न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित नहीं किया जाता है।

सरकार ने असम के हर जिले में एनआरसी सेवा केंद्र स्थापित किए हैं जो लोगों को विरासत डेटा की खोज करने विरासत डेटा कोड जारी करने और NRC आवेदन पत्र प्राप्त करने में सहायता करते हैं।

इस सूची में वे लोग शामिल थे-

  • जो 26 जनवरी 1950 को भारत में रहते थे।
  • वे भारत में पैदा हुए थे या उनके माता-पिता थे।
  • जो भारत में पैदा हुए थे।
  • 26 जनवरी 1950 को कट-ऑफ से कम से कम पांच साल पहले भारत में रहे थे। 
Rahul Pal (Prasenjit)
Rahul Pal (Prasenjit)https://mylegallaw.com
मै पिछसे 8 वर्षो से टैक्स सलाहकार के रूप मे कार्यरत् हूं, इसके अलावा मेरा शौक टैक्स सम्बन्धी आर्टिकल एवंम् कानून से सम्बन्धित जानकारियां आपके साथ साझा करने का है। पेशे से मै एक वकील एवंम् कर सलाहकार हूं।
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2 COMMENTS

  1. बहुत अच्छी बात बताई है, जिसकी जानकारी मुझको क्या बहुत लोगों को नही थी।

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