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कंपनी अधिनियम की धारा 130| Companies Act Section 130

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-130 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 130 के अनुसार कोई कंपनी तब तक अपनी लेखा बहियों को पुनः नहीं खोलेगी और अपने वित्तीय विवरणों को पुनः तैयार नहीं करेगी जब तक कि केंद्रीय सरकार, आय-कर प्राधिकारियों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, किसी अन्य कानूनी विनियामक निकाय या प्राधिकारी या किसी संबंधित व्यक्ति द्वारा इस संबंध में कोई आवेदन नहीं किया जाता है और सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा इस आशय का कोई आदेश नहीं दिया जाता है, जिसे Companies Act Section-130 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 130 (Companies Act Section-130) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 130 Companies Act Section-130 के अनुसार कोई कंपनी तब तक अपनी लेखा बहियों को पुनः नहीं खोलेगी और अपने वित्तीय विवरणों को पुनः तैयार नहीं करेगी जब तक कि केंद्रीय सरकार, आय-कर प्राधिकारियों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, किसी अन्य कानूनी विनियामक निकाय या प्राधिकारी या किसी संबंधित व्यक्ति द्वारा इस संबंध में कोई आवेदन नहीं किया जाता है और सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा इस आशय का कोई आदेश नहीं दिया जाता है।

कंपनी अधिनियम की धारा 130 (Companies Act Section-130 in Hindi)

न्यायालय या अधिकरण के आदेशों पर लेखाओं को पुनः खोलना-

कोई कंपनी तब तक अपनी लेखा बहियों को पुनः नहीं खोलेगी और अपने वित्तीय विवरणों को पुनः तैयार नहीं करेगी जब तक कि केंद्रीय सरकार, आय-कर प्राधिकारियों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, किसी अन्य कानूनी विनियामक निकाय या प्राधिकारी या किसी संबंधित व्यक्ति द्वारा इस संबंध में कोई आवेदन नहीं किया जाता है और सक्षम अधिकारिता वाले किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा इस आशय का कोई आदेश नहीं दिया जाता है कि-
(i) सुसंगत पूर्व लेखे कपटपूर्ण रीति में तैयार किए गए थे या
(ii) सुसंगत अवधि के दौरान कंपनी के मामले इस प्रकार कुव्यवस्थित थे जो वित्तीय विवरणों की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करते हैं:
परंतु यथास्थिति, न्यायालय या अधिकरण, केंद्रीय सरकार, आय-कर प्राधिकारियों, प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या किसी अन्य कानूनी विनियामक निकाय या संबंधित प्राधिकारी को सूचना देगा और इस धारा के अधीन कोई आदेश पारित करने के पूर्व उस सरकार या प्राधिकारियों. प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या निकाय या संबंधित प्राधिकारी द्वारा किए गए अभ्यावेदनों पर, यदि कोई हों, विचार करेगा।
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, उपधारा (1) के अधीन इस प्रकार पुनरीक्षित या पुनसंत्यक्त लेखे अंतिम होंगे।

Companies Act Section-130 (Company Act Section-130 in English)

Re-opening of accounts on court‘s or Tribunal‘s orders-

(1) A company shall not re-open its books of account and not recast its financial statements, unless an application in this regard is made by the Central Government, the Income-tax authorities, the Securities and Exchange Board, any other statutory regulatory body or authority or any person concerned and an order is made by a court of competent jurisdiction or the Tribunal to the effect that—
(I) the relevant earlier accounts were prepared in a fraudulent manner; or
(ii) the affairs of the company were mismanaged during the relevant period, casting doubt on the reliability of financial statements:
Provided that the court or the Tribunal, as the case may be, shall give notice to the Central Government, the Income-tax authorities, the Securities and Exchange Board or any other statutory regulatory body or authority concerned and shall take into consideration the representations, if any, made by that Government or the authorities, Securities and Exchange Board or the body or authority concerned before passing any order under this section.
(2) Without prejudice to the provisions contained in this Act the accounts so revised or re-cast under sub-section (1) shall be final.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 130 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

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