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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 195 | Indian Contract Act Section 195

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-195) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 195 के अनुसार जहां अपने मालिक के लिए ऐसा अभिकर्ता चुनने में अभिकर्ता उतना ही विवेक प्रयुक्त करने के लिए आबद्ध है जितना मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति अपने निजी मामले में करता और यदि वह ऐसा करता है तो वह ऐसे चुने गए अभिकर्ता के कार्यों या उपेक्षा के लिए मालिक के प्रति उत्तरदायी नहीं है, जिसे IC Act Section-195 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 195 (Indian Contract Act Section-195) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 195 IC Act Section-195 के अनुसार जहां अपने मालिक के लिए ऐसा अभिकर्ता चुनने में अभिकर्ता उतना ही विवेक प्रयुक्त करने के लिए आबद्ध है जितना मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति अपने निजी मामले में करता और यदि वह ऐसा करता है तो वह ऐसे चुने गए अभिकर्ता के कार्यों या उपेक्षा के लिए मालिक के प्रति उत्तरदायी नहीं है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 195 (IC Act Section-195 in Hindi)

ऐसे व्यक्ति को नामित करने में अभिकर्ता का कर्तव्य-

अपने मालिक के लिए ऐसा अभिकर्ता चुनने में अभिकर्ता उतना ही विवेक प्रयुक्त करने के लिए आबद्ध है जितना मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति अपने निजी मामले में करता और यदि वह ऐसा करता है तो वह ऐसे चुने गए अभिकर्ता के कार्यों या उपेक्षा के लिए मालिक के प्रति उत्तरदायी नहीं है।
दृष्टांत
(क) क अपने लिए एक पोत खरीदने के लिए ख को, जो एक वणिक है, अनुदेश देता है। ख अच्छी ख्याति वाले एक पोतसर्वेक्षक को क के लिए पोत पसन्द करने को नियोजित करता है। वह सर्वेक्षक पसन्द करने में उपेक्षा बरतता है और पोत-तरण अयोग्य निकलता है और नष्ट हो जाता है। क के प्रति ख नहीं वरन् वह सर्वेक्षक उत्तरदायी है।
(ख) ख को, जो एक वणिक है, क विक्रय के लिए माल परेषित करता है । ख सम्यक् अनुक्रम में अच्छे प्रत्यय वाले एक नीलामकर्ता को क का माल बेचने के लिए नियोजित करता है, और नीलामकर्ता को विक्रय के आगम प्राप्त करने के लिए अनुज्ञात करता है। नीलामकर्ता तत्पश्चात् उन आगमों का लेखा-जोखा दिए बिना दिवालिया हो जाता है। ख उन आगमों के लिए क के प्रति उत्तरदायी नहीं है।

Indian Contract Act Section-195 (IC Act Section-195 in English)

Agent’s duty in naming such person-

In selecting such agent for his principal, an agent is bound to exercise the same amount of discretion as a man of ordinary prudence would exercise in his own case; and, if he does this, he is not responsible to the principal for the acts or negligence of the agent so selected.
Illustrations
(a) A instructs B, a merchant, to buy a ship for him. B employs a ship-surveyor of good reputation to choose a ship for A. The surveyor makes the choice negligently and the ship turns out to be unseaworthy and is lost. B is not, but the surveyor is, responsible to A.
(b) A consigns goods to B, a merchant, for sale. B, in due course, employs an auctioneer in good credit to sell the goods of A, and allows the auctioneer to receive the proceeds of the sale. The auctioneer afterwards becomes insolvent without having accounted for the proceeds. B is not responsible to A for the proceeds.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 195 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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