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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 | Indian Contract Act Section 51

 भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-51) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 के अनुसार जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो, जिसे IC Act Section-51 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 (Indian Contract Act Section-51) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 IC Act Section-51 के अनुसार जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 51 (IC Act Section-51 in Hindi)

वचनदाता पालन करने के लिए आबद्ध नहीं है जब तक कि व्यतिकारी वचनग्रहीता पालन के लिए तैयार और रजामन्द न हो-

जबकि कोई संविदा साथ-साथ पालन किए जाने वाले व्यतिकारी वचनों से गठित हो तब किसी भी वचनदाता के लिए अपने वचन का पालन करना आवश्यक नहीं है जब तक कि वचनग्रहीता अपने व्यतिकारी वचन का पालन करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।
दृष्टान्त
(क) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘ख’ को ‘क’ माल परिदत्त करेगा जिसके लिए संदाय माल के परिदान पर ‘ख’ द्वारा किया जाएगा। माल का परिदान करना ‘क’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि ‘ख’ परिदान पर माल के लिए संदाय करने को तैयार और रजामन्द न हो। |
माल के लिए संदाय करना ‘ख’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि संदाय पर माल को परिदत्त करने के लिए ‘क’ तैयार और रजामन्द न हो।
(ख) ‘क’ और ‘ख’ संविदा करते हैं कि ‘क’ किस्तों में दी जाने वाली कीमत पर ‘ख’ को माल परिदत्त करेगा और पहली किस्त परिदान पर दी जानी है। माल का परिदान करना ‘क’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि ‘ख’ परिदान पर पहली किस्त देने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।
पहली किस्त देना ‘ख’ के लिए आवश्यक नहीं है जब तक कि वह पहली किस्त में संदाय पर माल परिदत्त करने के लिए तैयार और रजामन्द न हो।

Indian Contract Act Section-51 (IC Act Section-51 in English)

Promisor not bound to perform, unless reciprocal promisee ready and willing to perform-

When a contract consists of reciprocal promises to be simultaneously performed, no promisor need perform his promise unless the promisee is ready and willing to perform his reciprocal promise. 
Illustrations
(a) A and B contract that A shall deliver goods to B to be paid for by B on delivery. A need not deliver the goods, unless B is ready and willing to pay for the goods on delivery.
B need not pay for the goods, unless A is ready and willing to deliver them on payment
(b) A and B contract that A shall deliver goods to B at a price to be paid by installments, the first installment to be paid on delivery. A need not deliver, unless B is ready and willing to pay the first installment on delivery.
B need not pay the first installment, unless A is ready and willing to deliver the goods on payment of the first installment.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 51 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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