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आईपीसी की धारा 463 | कूटरचना| IPC Section- 463 in hindi | Forgery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 463 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 463? साथ ही हम आपको IPC की धारा 463, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 463 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 463 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 463 कूटरचना (Forgery) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 463 के अनुसार

कूटरचना–

जो कोई, किसी मिथ्या दस्तावेज या मिथ्या इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख के किसी भाग को इस आशय से रचता है कि लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित की जाये, या किसी दावे या हक का समर्थन किया जाए, या यह कारित किया जाए कि कोई व्यक्ति, सम्पत्ति अलग करे या कोई अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा करे या इस आशय से रचता है कि कपट करे, या कपट किया जा सके, वह कूट-रचना करता है।

Forgery-
Whoever makes any false documents or false electronic record or part of a document or electronic record, with intent to cause damage or injury], to the public or to any person, or to support any claim or title, or to cause any person to part with property, or to enter into any express or implied contract, or with intent to commit fraud or that fraud may be committed, commits forgery.

कूटरचना क्या है?

साधारण भाषा में कूटरचना (Forgery), जो कोई व्यक्ति किसी झूठे दस्तावेज या झूठे इलैक्ट्रानिक अभिलेख अथवा दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख, इस आशय से अपने फायदे हेतु रचता है कि किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति पहुचां सके या किसी दावे या हक का समर्थन कर सके। इस कपटपूर्वक आशय से रचता है, या कपट किया जा सके, वह कूट-रचना करता है। इसे ही कूटरचना (Forgery) कहते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 463 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

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