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अनुच्छेद और धारा में अंतर

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अनुच्छेद और धारा में अंतर

अनुच्छेद

कानून (Law) भारतीय संविधान के आधार पर बनाया गया था । भारतीय संविधान के अन्तर्गत अनुच्छेद (Article) का निर्माण हुआ । इन अनुच्छेद के अनुसार ही सरकार व्दारा किसी कानून अथवा अधिनियम पारित किये जाते है जिसे हम Act या अधिनियम भी कहते हैं । (Article) अनुच्छेद पूर्व में 395 थे, जो 22 भागो में विभाजित थे, इसमें केवल 8 अनुसूचियां थी। जबकि वर्तमान में आज 448 (Article) अनुच्छेद है, जो 25 भागो में विभाजित है, इनको 12 अनुसूचियों में रखा गया है। इस तरह से ज्ञात होता है कि भारतीय संविधान के अन्तर्गत बने कानूनों में बहुत से अनुच्छेद जोड़े गए है, जिसके अन्तर्गत नई धारा का निर्माण भी किया गया है। इनको Provision Act भी कहा जाता है, कानून की ड्राफ्टिंग भी कह सकते है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा पूर्ण रूप लागू किया जाता है । जो भारतीय संविधान के अनुरूप ही होना चाहिए, अन्यथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे बदलाव अथवा हटाया भी जा सकता है ।

पुराने समय से ही (Article) अनुच्छेद शब्द का प्रयोग उस धारणा को बताने के लिए होता आ रहा है कि जो किसी व्यक्ति की मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए किसी धारा का निर्माण किया जाता है । धारा का निर्माण भारत के संविधान के अनुरुप ही (Article) अनुच्छेद में ही विभाजित करके धारा का निर्माण किया जाता है।

धारा

धारा का कार्य भी लगभग अनुच्छेद के समान है, ये भी विभाजन का कार्य करती है. जहाँ अनुच्छेद अर्थात (Article) वे नियम होते है जिनसे मिलकर हमारे संविधान का निर्माण हुआ है तो दूसरी तरफ धारा अर्थात section वे नियम होते है जिनसे मिलकर भारतीय दण्ड संहिता जैसे अन्य का निर्माण हुआ है । लेकिन इसका ये अर्थ नहीं है कि भारतीय दण्ड संहिता अर्थात Act में अनुच्छेद नहीं हो सकते या संविधान में धारा नहीं हो सकती, दोनों ही विभाजन के साथ साथ अपने कुछ और भी महत्व रखते हैं ।

अन्तर

अनुच्छेद (Article) वे हैं जिनसे भारत का संविधान बना है जबकि धारा वे नियम हैं जिनसे भारतीय दण्ड संहिता जैसे कानून के निर्माण के लिए किया जाता है ।

2 COMMENTS

  1. बहुत अच्छा लिखा है। तुम एक दिन बहुत अच्छा काम करोगो

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