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IPC और CRPC मे क्या अन्तर है?

IPC (The Indian Penal Code)-

IPC (भारतीय दण्ड संहिता) अग्रेजो व्दारा सन् 1834 (पहला विधि आयोग) बना, जो लार्ड मैकाले के नेत्तृव मे बनाया गया था। जिसे सन् 1860 मे लागू किया गया । IPC मे कुल 511 धाराये है, जिसमे 23 भाग या अध्याय भी कहा जा सकता है । भारतीय दण्ड संहिता को उर्दू मे ताज-इरात-ए-हिन्द कहते है । IPC पुलिस एवंम् कोर्ट प्रकिया के अन्तर्गत अपराधी को उसके अपराध से अवगत कराता है, कि अपराधी व्दारा जो अपराध किया गया है उस पर कौन सी धारा लगेगी । IPC (भारतीय दण्ड संहिता) अपराधी के अपराध की धारा बताने की मौलिक विधि भी कह सकते है ।

CRPC (Criminal Pressure Code)-

CRPC (दण्ड प्रकिया संहिता) भारत सरकार व्दारा सन् 1973 मे काग्रेस सरकार व्दारा कानून को बनाया गया था । जिसमे कुल 484 धाराये है। CRPC (दण्ड प्रकिया संहिता) के अन्तर्गत अपराधी के अपराध सिद्ध हो जाने के पश्चात् अपराधी को अपराध को दण्ड कैसे देना है यह बताता है । CRPC (दण्ड प्रकिया संहिता) एक प्रकिया विधि है, जिसके अन्तर्गत अपराधी को अपराध को दण्ड देने अथवा उसे किस तरह दण्ड दिया जाना चाहिये, यह बतलाता है। प्रक्रियाओं का विवरण इस प्रकार है-

• अपराध की जांच (Investigation of crime)
• संदिग्धों के प्रति बरताव (Treatment of the suspects)
• साक्ष्य संग्रह प्रक्रिया (Evidence collection process)
• यह निर्धारित करना कि अपराधी दोषी है या नहीं

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