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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 130 | Indian Contract Act Section 130

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-130) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 130 के अनुसार चलत प्रत्याभूति का भावी संव्यवहारों के बारे में प्रतिसंहरण लेनदार को सूचना द्वारा किसी भी समय प्रतिभू कर सकेगा, जिसे IC Act Section-130 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 130 (Indian Contract Act Section-130) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 130 IC Act Section-130 के अनुसार चलत प्रत्याभूति का भावी संव्यवहारों के बारे में प्रतिसंहरण लेनदार को सूचना द्वारा किसी भी समय प्रतिभू कर सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 130 (IC Act Section-130 in Hindi)

चलत प्रत्याभूति का प्रतिसंहरण-

चलत प्रत्याभूति का भावी संव्यवहारों के बारे में प्रतिसंहरण लेनदार को सूचना द्वारा किसी भी समय प्रतिभू कर सकेगा।
दृष्टांत
(क) ऐसे विनिमय-पत्रों को, जो ग के पक्ष में हों, क की प्रार्थना पर ख द्वारा मितिकाटे पर भुगतान के प्रतिफलस्वरूप ख को क ऐसे सब विनिमय-पत्रों पर 5,000 रुपए तक सम्यक् संदाय की प्रत्याभूति बार मास के लिए देता है। 2,000 रुपए तक के ऐसे विनिमयपत्रों को जो, ग के पक्ष में हैं, ख मितिकाटे पर भुगतान करता है, तत्पश्चात् तीन मास का अंत होने पर क उस प्रत्याभूति का प्रतिसंहरण कर लेता है । यह प्रतिसंहरण क को ख के प्रति किसी भी पश्चात्वर्ती मितिकाटे पर भुगतान के लिए समस्त दायित्व से उन्मोचित कर देता है। किन्तु ग द्वारा व्यतिक्रम होने पर, क उन 2000 रुपयों के लिए ख के प्रति दायी है।
(ख) ख को क 1,000 रुपए तक की यह प्रत्याभूति देता है कि ग उन सब विनिमय-पत्रों का, जो ख उसके नाम लिखेगा, संदाय करेगा। ग के नाम ख विनिमय-पत्र लिखता है। ग उस विनिमय-पत्र को प्रतिगृहीत करता है । क प्रतिसंहरण की सूचना देता है । ग उस विनिमय-पत्र उसके परिपक्व होने पर अनादृत कर देता है। क अपनी प्रत्याभूति के अनुसार दायी है।

Indian Contract Act Section-130 (IC Act Section-130 in English)

Revocation of continuing guarantee-

A continuing guarantee may at any time be revoked by the surety, as to future transactions, by notice to the creditor.
Illustrations
(a) A, in consideration of B‟s discounting, at A‟s request, bills of exchange for C, guarantees to B, for twelve months, the due payment of all such bills to the extent of 5,000 rupees. B discounts bills for C to the extent of 2,000 rupees. Afterwards, at the end of three months, A revokes the guarantee. This revocation discharges A from all liability to B for any subsequent discount. But A is liable to B for the 2,000 rupees, on default of C.
(b) A guarantees to B, to the extent of 10,000 rupees, that C shall pay all the bills that B shall draw upon him. B draws upon C. C accepts the bill. A gives notice of revocation. C dishonours the bill at maturity. A is liable upon his guarantee.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 130 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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