भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 178 | Indian Contract Act Section 178

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-178) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 178 के अनुसार जहां कि कोई वाणिज्यिक अभिकर्ता स्वामी की सम्मति से माल पर या माल के हक की दस्तावेजों पर कब्जा रखता है वहां वाणिज्यिक अभिकर्ता के कारवार के मामूली अनुक्रम में कार्य करते हुए उसके द्वारा की गई गिरवी उतनी ही विधिमान्य होगी मानो वह माल के स्वामी द्वारा, उसे करने के लिए अभिव्यक्त रूप से प्राधिकृत हो, परन्तु यह तब जबकि पणयमदार सद्भावपूर्वक कार्य करे और गिरवी के समय उसे वह सूचना न हो कि पणयमकार गिरवी करने का प्राधिकार नहीं रखता, जिसे IC Act Section-178 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 178 (Indian Contract Act Section-178) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 178 IC Act Section-178 के अनुसार जहां कि कोई वाणिज्यिक अभिकर्ता स्वामी की सम्मति से माल पर या माल के हक की दस्तावेजों पर कब्जा रखता है वहां वाणिज्यिक अभिकर्ता के कारवार के मामूली अनुक्रम में कार्य करते हुए उसके द्वारा की गई गिरवी उतनी ही विधिमान्य होगी मानो वह माल के स्वामी द्वारा, उसे करने के लिए अभिव्यक्त रूप से प्राधिकृत हो, परन्तु यह तब जबकि पणयमदार सद्भावपूर्वक कार्य करे और गिरवी के समय उसे वह सूचना न हो कि पणयमकार गिरवी करने का प्राधिकार नहीं रखता।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 178 (IC Act Section-178 in Hindi)

वाणिज्यिक अभिकर्ता द्वारा गिरवी-

जहां कि कोई वाणिज्यिक अभिकर्ता स्वामी की सम्मति से माल पर या माल के हक की दस्तावेजों पर कब्जा रखता है वहां वाणिज्यिक अभिकर्ता के कारवार के मामूली अनुक्रम में कार्य करते हुए उसके द्वारा की गई गिरवी उतनी ही विधिमान्य होगी मानो वह माल के स्वामी द्वारा, उसे करने के लिए अभिव्यक्त रूप से प्राधिकृत हो, परन्तु यह तब जबकि पणयमदार सद्भावपूर्वक कार्य करे और गिरवी के समय उसे वह सूचना न हो कि पणयमकार गिरवी करने का प्राधिकार नहीं रखता।
स्पष्टीकरण-इस धारा में “वाणिज्यिक अभिकर्ता और “हक की दस्तावेजों पदों के वे ही अर्थ होंगे जो उन्हें भारतीय माल विक्रय अधिनियम, 1930 (1930 का 3) में समनुदिष्ट हैं।

Indian Contract Act Section-178 (IC Act Section-178 in English)

Pledge by mercantile agent-

Where a mercantile agent is, with the consent of the owner, in possession of goods or the document of title to goods, any pledge made by him, when acting in the ordinary course of business of a mercantile agent, shall be as valid as if he were expressly authorised by the owner of the goods to make the same; provided that the pawnee acts in good faith and has not at the time of the pledge notice that the pawnor has not authority to pledge.
Explanation.—In this section, the expressions “mercantile agent” and “documents of title” shall have the meanings assigned to them in the Indian Sale of Goods Act, 1930 (3 of 1930).

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 178 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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