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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 179 | Indian Contract Act Section 179

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-179) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 179 के अनुसार जबकि पणयमकार ने अपने द्वारा गिरवीकृत माल का कब्जा धारा 19 या धारा 19क के अधीन शून्यकरणीय किसी संविदा के अधीन अभिप्राप्त किया हो, किन्तु संविदा गिरवी के समय विखण्डित न हो चुकी हो, तो पणयमदार उस माल पर अच्छा हक अर्जित कर लेता है, परन्तु यह तब जबकि वह सद्भावपूर्वक और पणयमकार के हक की त्रुटि की सूचना के बिना कार्य करे, जिसे IC Act Section-179 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 179 (Indian Contract Act Section-179) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 179 IC Act Section-179 के अनुसार जबकि पणयमकार ने अपने द्वारा गिरवीकृत माल का कब्जा धारा 19 या धारा 19क के अधीन शून्यकरणीय किसी संविदा के अधीन अभिप्राप्त किया हो, किन्तु संविदा गिरवी के समय विखण्डित न हो चुकी हो, तो पणयमदार उस माल पर अच्छा हक अर्जित कर लेता है, परन्तु यह तब जबकि वह सद्भावपूर्वक और पणयमकार के हक की त्रुटि की सूचना के बिना कार्य करे।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 179 (IC Act Section-179 in Hindi)

गिरवी जहां कि पणयमकार केवल परिसीमित हित रखता है-

जहां कि कोई व्यक्ति ऐसे माल को गिरवी रखता है जिसमें वह केवल परिसीमित हित रखता है, वहां गिरवी उस हित के विस्तार तक विधिमान्य है।

Indian Contract Act Section-179 (IC Act Section-179 in English)

Pledge where pawnor has only a limited interest-

Where a person pledges goods in which he has only a limited interest, the pledge is valid to the extent of that interest.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 179 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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