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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 | Juvenile Justice Act Section 47

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-47) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 के अनुसार राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से प्रत्येक जिला या जिलों के समूह में संप्रक्षण गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक को अस्थायी रूप से रखने, उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए इस अधिनियम की धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा, जिसे JJ Act Section-47 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 (Juvenile Justice Act Section-47) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 JJ Act Section-47 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से प्रत्येक जिला या जिलों के समूह में संप्रक्षण गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक को अस्थायी रूप से रखने, उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए इस अधिनियम की धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 47 (JJ Act Section-47 in Hindi)

संप्रेक्षण गृह

(1) राज्य सरकार, स्वयं या स्वैच्छिक अथवा गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से प्रत्येक जिला या जिलों के समूह में संप्रक्षण गृह स्थापित कर सकेगी और उनका रखरखाव कर सकेगी जिन्हें इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक को अस्थायी रूप से रखने, उसकी देखरेख और पुनर्वास के लिए इस अधिनियम की धारा 41 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा ।
(2) जहां राज्य सरकार की यह राय है कि उपधारा (1) के अधीन स्थापित या अनुरक्षित किसी गृह से भिन्न कोई रजिस्ट्रीकृत संस्था, इस अधिनियम के अधीन किसी जांच के लंबित रहने के दौरान विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित ऐसे बालक को अस्थायी रूप से रखने के योग्य है, तो वह इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसी संस्था को संप्रेक्षण गृह के रूप में रजिस्ट्रीकृत कर सकेगी।
(3) राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा संप्रेक्षण गृहों के प्रबंध और मानीटरी के लिए उपबंध कर सकेगी, जिसके अंतर्गत विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित किसी बालक के पुनर्वास और उसको समाज में मिलाने के लिए उनके द्वारा दी गई सेवाओं का स्तर और विभिन्न किस्में तथा ऐसी परिस्थितियां, जिनके अधीन और वह रीति भी है, जिसमें किसी संप्रेक्षण गृह का रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया और वापस लिया जा सकेगा।
(4) विधि का उल्लंघन करने के लिए अभिकथित प्रत्येक ऐसे बालक को, जो माता या पिता,संरक्षक के भारसाधन में नहीं रखा जाता है और किसी संप्रेक्षण गृह में भेजा जाता है, बालक की शारीरिक और मानसिक प्रास्थिति और कारित अपराध की कोटि पर सम्यक विचार करने के पश्चात् बालक की आयु और लिंग के अनुसार उसे अलग रखा जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-47 (JJ Act Section-47 in English)

Observation homes

(1) The State Government shall establish and maintain in every district or a group of districts, either by itself, or through voluntary or non-governmental organisations, observation homes, which shall be registered under section 41 of this Act, for temporary reception, care and rehabilitation of any child alleged to be in conflict with law, during the pendency of any inquiry under this Act.
(2) Where the State Government is of the opinion that any registered institution other than a home established or maintained under sub-section (1), is fit for the temporary reception of such child alleged to be in conflict with law during the pendency of any inquiry under this Act, it may register such institution as an observation home for the purposes of this Act.
(3) The State Government may, by rules made under this Act, provide for the management and monitoring of observation homes, including the standards and various types of services to be provided by them for rehabilitation and social integration of a child alleged to be in conflict with law and the circumstances under which, and the manner in which, the registration of an observation home may be granted or withdrawn.
(4) Every child alleged to be in conflict with law who is not placed under the charge of parent or guardian and is sent to an observation home shall be segregated according to the child’s age and gender, after giving due consideration to physical and mental status of the child and degree of the offence committed.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 47 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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