fbpx

कंपनी अधिनियम की धारा 48| Companies Act Section 48

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-48 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 48 के अनुसार जहां कंपनी की शेयर पूंजी शेयरों के विभिन्न वर्गों में विभाजित की जाती है, वहां किसी वर्ग के शेयरों से संलग्न अधिकारों में उस वर्ग के जारी शेयरों से तीन-चौथाई से अन्यून के धारकों की लिखित सहमति से या उस वर्ग के जारी शेयर धारकों के पृथक् अधिवेशन में पारित किसी विशेष संकल्प द्वारा, तभी फेरफार हो सकेगा, जिसे Companies Act Section-48 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 48 (Companies Act Section-48) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 48 Companies Act Section-48 के अनुसार जहां कंपनी की शेयर पूंजी शेयरों के विभिन्न वर्गों में विभाजित की जाती है, वहां किसी वर्ग के शेयरों से संलग्न अधिकारों में उस वर्ग के जारी शेयरों से तीन-चौथाई से अन्यून के धारकों की लिखित सहमति से या उस वर्ग के जारी शेयर धारकों के पृथक् अधिवेशन में पारित किसी विशेष संकल्प द्वारा, तभी फेरफार हो सकेगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 48 (Companies Act Section-48 in Hindi)

शेयर धारको के अधिकारों में फेरफार

(1) जहां कंपनी की शेयर पूंजी शेयरों के विभिन्न वर्गों में विभाजित की जाती है, वहां किसी वर्ग के शेयरों से संलग्न अधिकारों में उस वर्ग के जारी शेयरों से तीन-चौथाई से अन्यून के धारकों की लिखित सहमति से या उस वर्ग के जारी शेयर धारकों के पृथक् अधिवेशन में पारित किसी विशेष संकल्प द्वारा, तभी फेरफार हो सकेगा,

(क) यदि ऐसे फेरफार के संबंध में उपबंध, कंपनी के ज्ञापन या अनुच्छेद में अंतर्विष्ट है; या

(ख) ज्ञापन या अनुच्छेद में किसी ऐसे उपबंध के न होने की दशा में, यदि ऐसा फेरफार उस वर्ग के शेयरों के जारी किए जाने के निबंधनों द्वारा प्रतिषिद्ध नहीं है।

परंतु यदि शेयर धारकों के एक वर्ग द्वारा किया गया फेरफार शेयर धारकों के किसी अन्य वर्ग के अधिकारों को प्रभावित करता है तो शेयर धारकों के ऐसे अन्य वर्ग के तीन-चौथाई की सहमति भी प्राप्त की जाएगी और इस धारा के उपबंध ऐसे फेरफार को लागू होंगे।

(2) जहां किसी वर्ग के जारी शेयरों के दस प्रतिशत से अन्यून के धारक ऐसे फेरफार को सहमति नहीं देते हैं या फेरफार के लिए विशेष संकल्प के पक्ष में मत नहीं देते हैं तो वे फेरफार को रद्द किए जाने के लिए अधिकरण को आवेदन कर सकेंगे और जहां कोई ऐसा आवेदन किया जाता है वहां फेरफार का तब तक प्रभाव नहीं होगा, जब तक उसकी अधिकरण द्वारा पुष्टि न कर दी गई हो :

परंतु इस धारा के अधीन कोई आवेदन उस तारीख के. जिसको, यथास्थिति, सहमति दी गई थी या संकल्प पारित किया गया था, इक्कीस दिन के भीतर किया जाएगा और आवेदन करने के लिए हकदार शेयर धारकों की ओर से, उनकी एक या अधिक ऐसी संख्याओं से किया जा सकेगा, जो वे इस प्रयोजन के लिए लिखित में नियत करे।

(3) उपधारा (2) के अधीन किसी आवेदन पर अधिकरण का विनिश्चय शेयर धारकों पर आबद्धकर होगा।

(4) कंपनी, अधिकरण के आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार को, उसकी प्रति फाइल करेगी ।

(5) जहां इस धारा के उपबंधों के अनुपालन में कोई व्यतिक्रम किया जाता है वहां कंपनी ऐसे जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से अन्यून का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, ऐसी अवधि के कारावास से, जो छह मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से अन्यून का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा।

Companies Act Section-48 (Company Act Section-48 in English)

Variations of shareholders‘ rights

(1) Where a share capital of the company is divided into  different classes of shares, the rights attached to the shares of any class may be varied with the consent in writing of the holders of not less than three-fourths of the issued shares of that class or by means of a  special resolution passed at a separate meeting of the holders of the issued shares of that class,— 

(a) if provision with respect to such variation is contained in the memorandum or articles of the  company; or 

(b) in the absence of any such provision in the memorandum or articles, if such variation is not  prohibited by the terms of issue of the shares of that class: 

Provided that if variation by one class of shareholders affects the rights of any other class of  shareholders, the consent of three-fourths of such other class of shareholders shall also be obtained and  the provisions of this section shall apply to such variation. 

(2) Where the holders of not less than ten percent. of the issued shares of a class did not consent to  such variation or vote in favor of the special resolution for the variation, they may apply to the Tribunal  to have the variation canceled, and where any such application is made, the variation shall not have effect  unless and until it is confirmed by the Tribunal: 

Provided that an application under this section shall be made within twenty-one days after the date on  which the consent was given or the resolution was passed, as the case may be, and may be made on behalf of the shareholders entitled to make the application by such one or more of their number as they may appoint in writing for the purpose. 

(3) The decision of the Tribunal on any application under sub-section (2) shall be binding on the shareholders. 

(4) The company shall, within thirty days of the date of the order of the Tribunal, file a copy thereof with the Registrar. 

(5) Where any default is made in complying with the provisions of this section, the company shall be punishable with a fine which shall not be less than twenty-five thousand rupees but which may extend to five lakh rupees and every officer of the company who is in default shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to six months or with fine which shall not be less than twenty-five thousand rupees but which may extend to five lakh rupees, or with both.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 48 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

Leave a Comment