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कंपनी अधिनियम की धारा 73| Companies Act Section 73

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-73 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 73 के अनुसार कोई कंपनी, साधारण अधिवेशन में किसी संकल्प के पारित किए जाने के अधीन रहते हुए और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित किए जाएं, ऐसे निबंधनों और ऐसी शर्तों पर अपने सदस्यों से निक्षेप स्वीकार कर सकेगी, जिसके अन्तर्गत प्रतिभूति, यदि कोई हो या ब्याज सहित ऐसे निक्षेपों के प्रतिसदाय के लिए उपबंध भी हैं, जिसे Companies Act Section-73 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 73 (Companies Act Section-73) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 73 Companies Act Section-73 के अनुसार कोई कंपनी, साधारण अधिवेशन में किसी संकल्प के पारित किए जाने के अधीन रहते हुए और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित किए जाएं, ऐसे निबंधनों और ऐसी शर्तों पर अपने सदस्यों से निक्षेप स्वीकार कर सकेगी, जिसके अन्तर्गत प्रतिभूति, यदि कोई हो या ब्याज सहित ऐसे निक्षेपों के प्रतिसदाय के लिए उपबंध भी हैं।

कंपनी अधिनियम की धारा 73 (Companies Act Section-73 in Hindi)

जनता से से निक्षेप स्वीकार करने का प्रतिषेध

 (1) इस अधिनियम के प्रारंभ को और उसके पश्चात्, कोई कंपनी इस अध्याय के अधीन उपबंधित रीति के सिवाय इस अधिनियम के अधीन जनता से निक्षेप आमंत्रित नहीं करेगी, स्वीकार नहीं करेगी या उनका नवीकरण नहीं करेगी:

परंतु इस उपधारा की कोई बात भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 में यथापरिभाषित किसी बैंककारी कंपनी और गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी और ऐसी अन्य कंपनी को लागू नहीं होगी, जिसे केंद्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श करने के पश्चात् इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे |

(2) कोई कंपनी, साधारण अधिवेशन में किसी संकल्प के पारित किए जाने के अधीन रहते हुए और ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए, जो भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से विहित किए जाएं, ऐसे निबंधनों और ऐसी शर्तों पर अपने सदस्यों से निक्षेप स्वीकार कर सकेगी, जिसके अन्तर्गत प्रतिभूति, यदि कोई हो या ब्याज सहित ऐसे निक्षेपों के प्रतिसदाय के लिए उपबंध भी हैं, जो कंपनी और उसके सदस्यों के बीच निम्नलिखित शर्तों को पूरा करने के अधीन रहते हुए करार पाई जाएं, अर्थात्:-

(क) अपने सदस्यों को परिपत्र जारी करना, जिसके अन्तर्गत उसमें कंपनी की वित्तीय स्थिति, अभिप्राप्त क्रेडिट रेटिंग, निक्षेपकर्ताओं की कुल संख्या तथा कंपनी द्वारा स्वीकृत किन्हीं पूर्ववर्ती निक्षेपों के संबंध में निक्षेपों के मद्दे शोध्य रकम और ऐसी अन्य विशिष्टियां, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, दर्शाने वाला विवरण भी है;

(ख) परिपत्र जारी करने की तारीख से पहले तीस दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास ऐसे विवरण सहित परिपत्र की एक प्रति फाइल करना;

(ग) ऐसी राशि जमा करना, जो निक्षेप प्रतिसंदाय आरक्षिति लेखा के रूप में ज्ञात किसी अनुसूचित बैंक के किसी पृथक् बैंक खाते में किसी वित्तीय वर्ष और ठीक बाद के वित्तीय वर्ष के दौरान परिपक्व होने वाले उसके निक्षेपों की रकम के पन्द्रह प्रतिशत से कम नहीं होगी;

(घ) ऐसी रीति में और ऐसी सीमा तक जो विहित की जाए, ऐसे निक्षेप बीमा का उपबंध करना;

(ङ) यह प्रमाणित करना कि कंपनी ने इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व या उसके पश्चात् स्वीकार किए गए निक्षेपों के प्रतिसंदाय या ऐसे निक्षेपों पर ब्याज के संदाय में व्यतिक्रम नहीं किया है;

(च) निक्षेप या उस पर ब्याज की रकम के, शोध्य प्रतिसंदाय के लिए ऐसी प्रतिभूति का, यदि कोई हो, उपबंध करना, जिसके अन्तर्गत कम्पनी की सम्पत्ति या उसकी आस्तियों पर ऐसे भार का सृजन भी है :

परन्तु ऐसे मामले में जहां कोई कंपनी निक्षेपों को प्रतिभूत नहीं करती है या आंशिक रूप से ऐसे निक्षेपों को प्रतिभूत करती है वहां निक्षेपों को ‘अप्रतिभूत निक्षेप’ कहा जाएगा और उनको निक्षेपों के आमंत्रण या स्वीकृति से संबंधित प्रत्येक परिपत्र, प्ररूप, विज्ञापन या किसी दस्तावेज इसी प्रकार उत्कथित किया जाएगा।

( 3 ) उपधारा (2) के अधीन किसी कंपनी द्वारा स्वीकृत प्रत्येक निक्षेप का उस उपधारा में निर्दिष्ट करार के निबंधन और शर्तों के अनुसार ब्याज सहित प्रतिसंदाय किया जाएगा।

(4) जहां कंपनी उपधारा (3) के अधीन निक्षेप या उसके भाग का या उस पर किसी ब्याज का प्रतिसंदाय करने में असफल रहती है, वहां संबद्ध निक्षेपकर्ता कंपनी को ऐसे असंदाय के परिणामस्वरूप उसके द्वारा उपगत किसी हानि या नुकसान के लिए या शोध्य रकम का संदाय करने का निदेश देने वाले आदेश के लिए और ऐसे अन्य आदेशों के लिए अधिकरण को आवेदन कर सकेगा, जो अधिकरण ठीक समझे।

(5) उपधारा (2) के खण्ड (ग) में निर्दिष्ट निक्षेप प्रतिसंदाय आरक्षिति खाता, निक्षेपों के प्रतिसंदाय से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए कंपनी द्वारा उपयोग नहीं किया जाएगा।

Companies Act Section-73 (Company Act Section-73 in English)

Prohibition on acceptance of deposits from public

(1) On and after the commencement of this Act, no company shall invite, accept or renew deposits under this Act from the public except in a manner provided under this Chapter: Provided that nothing in this sub-section shall apply to a banking company and nonbanking financial company as defined in the Reserve Bank of India Act, 1934 (2 of 1934) and to such other company as the
Central Government may, after consultation with the Reserve Bank of India, specify in this behalf.
(2) A company may, subject to the passing of a resolution in a general meeting and subject to such rules as may be prescribed in consultation with the Reserve Bank of India, accept deposits from its members on such terms and conditions, including the provision of security, if any, or for the repayment of such deposits with interest, as may be agreed upon between the company and its members, subject to the fulfillment of the following conditions, namely:—
(a) issuance of a circular to its members including therein a statement showing the financial position of the company, the credit rating obtained, the total number of depositors, and the amount due towards deposits in respect of any previous deposits accepted by the company and such other particulars in such form and in such manner as may be prescribed;
(b) filing a copy of the circular along with such statement with the Registrar within thirty days before the date of issue of the circular;
(c) depositing such sum which shall not be less than fifteen percent. of the amount of its deposits maturing during a financial year and the financial year next following, and kept in a scheduled bank in a separate bank account to be called as deposit repayment reserve account;
(d) providing such deposit insurance in such manner and to such extent as may be prescribed;
(e) certifying that the company has not committed any default in the repayment of deposits accepted either before or after the commencement of this Act or payment of interest on such deposits; and
(f) providing security, if any for the due repayment of the amount of deposit or the interest thereon including the creation of such charge on the property or assets of the company:
Provided that in case where a company does not secure the deposits or secures such deposits partially, then, the deposits shall be termed as unsecured deposits‘‘ and shall be so quoted in every circular, form, advertisement, or in any document related to invitation or acceptance of deposits.

(3) Every deposit accepted by a company under sub-section (2) shall be repaid with interest in accordance with the terms and conditions of the agreement referred to in that sub-section.
(4) Where a company fails to repay the deposit or part thereof or any interest thereon under subsection (3), the depositor concerned may apply to the Tribunal for an order directing the company to pay the sum due or for any loss or damage incurred by him as a result of such non-payment and for such other
orders as the Tribunal may deem fit.
(5) The deposit repayment reserve account referred to in clause (c) of sub-section (2) shall not be used by the company for any purpose other than repayment of deposits.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 73 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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