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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 176 | Indian Contract Act Section 176

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-176) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 176 के अनुसार यदि पणयमकार उस ऋण के संदाय में या अनुबद्ध समय पर उस वचन का पालन करने में, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया था, व्यतिक्रम करता है तो पणयमकार उस ऋण या वचन पर पणयमकार के विरुद्ध वाद ला सकेगा और गिरवी माल का साम्पाश्विक प्रतिभूति के रूप में प्रतिधारण कर सकेगा, या गिरवी चीज को बेचने की युक्तियुक्त सूचना पणयमकार को देकर उस चीज को बेच सकेगा, जिसे IC Act Section-176 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 176 (Indian Contract Act Section-176) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 176 IC Act Section-176 के अनुसार यदि पणयमकार उस ऋण के संदाय में या अनुबद्ध समय पर उस वचन का पालन करने में, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया था, व्यतिक्रम करता है तो पणयमकार उस ऋण या वचन पर पणयमकार के विरुद्ध वाद ला सकेगा और गिरवी माल का साम्पाश्विक प्रतिभूति के रूप में प्रतिधारण कर सकेगा, या गिरवी चीज को बेचने की युक्तियुक्त सूचना पणयमकार को देकर उस चीज को बेच सकेगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 176 (IC Act Section-176 in Hindi)

पणयमदार का अधिकार जहां कि पणयमकार व्यतिक्रम करता है-

यदि पणयमकार उस ऋण के संदाय में या अनुबद्ध समय पर उस वचन का पालन करने में, जिसके लिए माल गिरवी रखा गया था, व्यतिक्रम करता है तो पणयमकार उस ऋण या वचन पर पणयमकार के विरुद्ध वाद ला सकेगा और गिरवी माल का साम्पाश्विक प्रतिभूति के रूप में प्रतिधारण कर सकेगा, या गिरवी चीज को बेचने की युक्तियुक्त सूचना पणयमकार को देकर उस चीज को बेच सकेगा।
यदि ऐसे विक्रय के आगम उस रकम से कम हों, जो ऋण या वचन के बारे में शोध्य है, तो पणयमकार बाकी के संदाय के लिए तब भी दायी रहता है। यदि विक्रय के आगम उस रकम से अधिक हों जो ऐसे शोध्य हैं तो पणयमदार वह अधिशेष पणयमकार को देगा।

Indian Contract Act Section-176 (IC Act Section-176 in English)

Pawnee’s right where pawnor makes default-

If the pawnor makes default in payment of the debt, or performance, at the stipulated time of the promise, in respect of which the goods were pledged, the pawnee may bring a suit against the pawnor upon the debt or promise, and retain the goods pledge as a collateral security; or he may sell the thing pledged, on giving the pawnor reasonable notice of the sale.
If the proceeds of such sale are less than the amount due in respect of the debt or promise, the pawnor is still liable to pay the balance. If the proceeds of the sale are greater than the amount so due, the pawnee shall pay over the surplus to the pawnor.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 176 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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