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भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 | Indian Contract Act Section 188

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-188) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 के अनुसार किसी कार्य को करने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसा कार्य करने के लिए आवश्यक हो, जिसे IC Act Section-188 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 (Indian Contract Act Section-188) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 IC Act Section-188 के अनुसार किसी कार्य को करने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसा कार्य करने के लिए आवश्यक हो।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 188 (IC Act Section-188 in Hindi)

अभिकर्ता के प्राधिकार का विस्तार-

किसी कार्य को करने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसा कार्य करने के लिए आवश्यक हो।
किसी कारबार को चलाने का प्राधिकार रखने वाला अभिकर्ता हर ऐसी विधिपूर्ण बात करने का प्राधिकार रखता है जो ऐसे कारबार के संचालन के प्रयोजन के लिए आवश्यक हो या उसके अनुक्रम में प्रायः की जाती हो।
दृष्टांत
(क) ख, जो लंदन में रहता है, अपने को शोध्य ऋण मुम्बई में वसूल करने के लिए क को नियोजित करता है। क उस ऋण को वसूल करने के प्रयोजनों के लिए आवश्यक कोई भी विधिक प्रक्रिया अपना सकेगा और उसके लिए विधिमान्य उन्मोचन दे सकेगा।
(ख) क अपना पोत-निर्माता का कारबार चलाने के लिए ख को अपना अभिकर्ता बनाता है । ख उस कारबार को चलाने के प्रयोजन के लिए काष्ठ और अन्य सामग्री खरीद सकेगा और कर्मकारों को भाड़े पर रख सकेगा।

Indian Contract Act Section-188 (IC Act Section-188 in English)

Extent of agent’s authority-

An agent, having an authority to do an act, has authority to do every lawful thing which is necessary in order to do such act.
An agent having an authority to carry on a business, has authority to do every lawful thing necessary for the purpose, or usually done in the course, of conducting such business.
Illustrations
(a) A is employed by B, residing in London, to recover at Bombay a debt due to B. A may adopt any legal process necessary for the purpose of recovering the debt, and may give a valid discharge for the same.
(b) A constitutes B his agent to carry on his business of a shipbuilder. B may purchase timber and other materials, and hire workmen, for the purpose of carrying on the business.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 188 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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