भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 | Indian Contract Act Section 208

भारतीय संविदा अधिनियम Indian Contract Act (ICA Section-208) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा, जिसे IC Act Section-208 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 (Indian Contract Act Section-208) का विवरण

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 IC Act Section-208 के अनुसार जहां कि यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा हो कि अभिकरण को किसी कालावधि के लिए चालू रहना है वहां पर्याप्त कारण के बिना अभिकरण के किसी पूर्वतन प्रतिसंहरण या त्यजन का प्रतिकर, यथास्थिति, अभिकर्ता को मालिक या मलिक को अभिकर्ता देगा।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 208 (IC Act Section-208 in Hindi)

अभिकर्ता के प्राधिकार का पर्यवसान कब अभिकर्ता के सम्बन्ध में और कब पर-व्यक्तियों के सम्बन्ध में प्रभावी होता है-

अभिकर्ता के प्राधिकार का पर्यवसान, जहाँ तक अभिकर्ता से सम्बन्ध है, उसे उसका ज्ञान होने से पूर्व, अथवा जहां तक पर-व्यक्तियों से सम्बन्ध है उन्हें उसका ज्ञान होने से पूर्व, प्रभावी नहीं होता।
दृष्टांत
(क) ख को क अपनी ओर से माल बेचने का निदेश देता है और माल की जो कीमत मिले उस पर ख को पांच प्रतिशत कमीशन देने का करार करता है । तत्पश्चात् क पत्र द्वारा ख के प्राधिकार का प्रतिसंहरण करता है । ख उस पत्र के भेजे जाने के पश्चात् किन्तु उसकी प्राप्ति से पूर्व माल को 100 रुपए में बेच देता है। क इस विक्रय से आबद्ध है और ख पांच रुपए कमीशन का हकदार है।
(ख) क जो मद्रास में है, पत्र द्वारा अपनी ओर से ख को मुम्बई में एक भाण्डागार में रखी हुई कुछ रुई बेचने का निदेश देता है और तत्पश्चात् पत्र द्वारा उसके विक्रय प्राधिकार का प्रतिसंहरण करता है और ख को उस रुई को मद्रास भेजने का निदेश देता है। ख, दूसरा पत्र पाने के पश्चात् ग के साथ, जिसे पहले पत्र का तो ज्ञान है किन्तु दूसरे नहीं, उस रुई को उसे बेचने की संविदा करता है । ख को ग उसकी कीमत संदत्त कर देता है और ख उसे लेकर फरार हो जाता है। क के विरुद्ध ग का संदाय प्रभावी है।
(ग) क अपने अभिकर्ता ख को अनुक धनराशिग को देने का निदेश देता है। क मर जाता है और घ उसकी बिल का प्रोबेट लेता है। क की मृत्यु के पश्चात् किन्तु मृत्यु की खबर सुनने से पूर्व ग को ख रुपए संदत्त कर देता है। निष्पादक घ के विरुद्ध यह संदाय प्रभावी है।

Indian Contract Act Section-208 (IC Act Section-208 in English)

When termination of agent’s authority takes effect as to agent, and as to third persons-

The termination of the authority of an agent does not, so far as regards the agent, take effect before it becomes known to him, or, so far as regards third persons, before it becomes known to them.
Illustrations
(a) A directs B to sell goods for him, and agrees to give B five per cent. commission on the price fetched by the goods. A afterwards, by letter, revoke B‟s authority. B, after the letter is sent, but before he receives it, sells the goods for 100 rupees. The sale is binding on A, and B is entitled to five rupees as his commission.
(b) A, at Madras, by letter, directs B to sell for him some cotton lying in a warehouse in Bombay, and afterwards, by letter, revokes his authority to sell, and directs B to send the cotton to Madras. B, after receiving the second letter, enters into a contract with C, who knows of the first letter, but not of the second, for the sale to him of the cotton. C pays B the money, with which B absconds. C‟s payment is good as against A.
(c) A directs B, his agent, to pay certain money to C. A dies, and D takes out probate to his will. B, after A‟s death, but before hearing of it, pays the money to C. The payment is good as against D, the executor.

हमारा प्रयास भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act Section) की धारा 208 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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