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आईपीसी की धारा 211 | क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप | IPC Section- 211 in hindi | False charge of offence made with intent to injure.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 211? साथ ही हम आपको IPC की धारा 211 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 211 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 211 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिये कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है, क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दाण्डिक कार्यवाही संस्थित करेगा, या करवायेगा, या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगायेगा कि उसने अपराध किया है, यदि किसी व्यक्ति द्वारा मिथ्या आरोप लगाया जाएगा, तो वह धारा 211 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 211 के अनुसार

क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप-

जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिये कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है, क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दाण्डिक कार्यवाही संस्थित करेगा, या करवायेगा, या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगायेगा कि उसने अपराध किया है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जायेगा;
तथा यदि ऐसी दाण्डिक कार्यवाही मृत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय अपराध के मिथ्या आरोप पर संस्थित की जाये, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

False charge of offence made with intent to injure-
Whoever, with intent to cause injury to any person, institutes or causes to be instituted any criminal proceeding against that person, or falsely charges any person with having committed an offence, knowing that there is no just or lawful ground for such proceeding or charge against that person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both;
and if such criminal proceeding be instituted on a false charge of an offence punishable with death, imprisonment for life, or imprisonment for seven years or upwards, shall be punishable with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यदि आरोपित अपराध सात वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यदि आरोपित अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 211 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिये कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है, क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दाण्डिक कार्यवाही संस्थित करेगा, या करवायेगा, या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगायेगा कि उसने अपराध किया है, यदि किसी व्यक्ति द्वारा मिथ्या आरोप लगाएगा, तो वह दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंडित किया जायेगा। यदि आरोपित अपराध सात वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय है, तो वह सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माने से दंडित किया होगा, इसी तरह से यदि यदि आरोपित अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है, तो भी वह सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माने से दंडित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 211 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि आरोपित अपराध सात वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दंडनीय है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि आरोपित अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 211 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 210 | ऐसी राशि के लिये जो शोध्य नहीं है, कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना | IPC Section- 210 in hindi | Fraudulently obtaining decree for sum not due.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 210 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 210? साथ ही हम आपको IPC की धारा 210 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 210 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 210 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, या जो शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी सम्पत्ति या सम्पत्ति में के हित के लिये, जिसका वह हकदार न हो, डिक्री या आदेश को कपटपूर्वक अभिप्राप्त कर लेगा, तो वह धारा 210 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 210 के अनुसार-

ऐसी राशि के लिये जो शोध्य नहीं है, कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना—

जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, या जो शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी सम्पत्ति या सम्पत्ति में के हित के लिये, जिसका वह हकदार न हो, डिक्री या आदेश को कपटपूर्वक अभिप्राप्त कर लेगा या किसी डिक्री या आदेश को, उसके तुष्ट कर दिये जाने के पश्चात् या ऐसी बात के लिए, जिसके विषय में उस डिक्री या आदेश की तुष्टि कर दी गई हो, किसी व्यक्ति के विरुद्ध कपटपूर्वक निष्पादित करवायेगा या अपने नाम में कपटपूर्वक ऐसा कोई कार्य किया जाना सहन करेगा या किये जाने की अनुज्ञा देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Fraudulently obtaining decree for sum not due-
Whoever fraudulently obtains a decree or order against any person for a sum not due, or for a larger sum than is due, or for any property or interest in property to which he is not entitled, or fraudulently causes a decree or order to be executed against any person after it has been satisfied or for anything in respect of which it has been satisfied, or fraudulently suffers or permits any such act to be done in his name shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

ऐसी राशि के लिये जो शोध्य नहीं है, कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 210 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, या जो शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी सम्पत्ति या सम्पत्ति में के हित के लिये, जिसका वह हकदार न हो, डिक्री या आदेश को कपटपूर्वक अभिप्राप्त कर करता है, तो वह दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 210 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसी राशि के लिये जो शोध्य नहीं है, कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 210 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 209 | बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना | IPC Section- 209 in hindi | Dishonestly making false claim in Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 209 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 209? साथ ही हम आपको IPC की धारा 209 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 209 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 209 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से या किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ कारित करने के आशय से न्यायालय में कोई ऐसा दावा करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता हो, तो वह धारा 209 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 209 के अनुसार-

बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना-

जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से या किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ कारित करने के आशय से न्यायालय में कोई ऐसा दावा करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Dishonestly making false claim in Court-
Whoever fraudulently or dishonestly, or with intent to injure or annoy any person, makes in a Court of Justice any claim which he knows to be false, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 209 के अंतर्गत जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से या किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ कारित करने के आशय से न्यायालय में कोई ऐसा दावा करेगा जिसका मिथ्या होना वह जानता हो, तो वह दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 209 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 209 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 208 | ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना | IPC Section- 208 in hindi | Fraudulently suffering decree for sum not due.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 208 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 208? साथ ही हम आपको IPC की धारा 208 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 208 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 208 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति के वाद में ऐसी राशि के लिये, जो ऐसे व्यक्ति को शोध्य न हो या शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी ऐसी सम्पत्ति या सम्पत्ति में के हित के लिये, जिसका ऐसा व्यक्ति हकदार न हो, अपने विरुद्ध कोई डिक्री या आदेश कपटपूर्वक पारित करवायेगा, या पारित किया जाना सहन करेगा, तो वह धारा 208 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 208 के अनुसार

ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना-

जो कोई किसी व्यक्ति के वाद में ऐसी राशि के लिये, जो ऐसे व्यक्ति को शोध्य न हो या शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी ऐसी सम्पत्ति या सम्पत्ति में के हित के लिये, जिसका ऐसा व्यक्ति हकदार न हो, अपने विरुद्ध कोई डिक्री या आदेश कपटपूर्वक पारित करवायेगा, या पारित किया जाना सहन करेगा अथवा किसी डिक्री या आदेश को उसके तुष्ट कर दिये जाने के पश्चात् या किसी ऐसी बात के लिये, जिसके विषय में उस डिक्री या आदेश की तुष्टि कर दी गयी हो, अपने विरुद्ध कपटपूर्वक निष्पादित करवायेगा या किया जाना सहन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।
दृष्टान्त
य के विरुद्ध एक वाद क संस्थित करता है। य यह सम्भाव्य जानते हुये कि क उसके विरुद्ध डिक्री अभिप्राप्त कर लेगा, ख के बाद में, जिसका उसके विरुद्ध कोई न्यायसंगत दावा नहीं है, अधिक रकम के लिये अपने विरुद्ध निर्णयः किया जाना इसलिये कपटपूर्वक सहन करता है कि ख स्वयं अपने लिये या य के फायदे के लिये य की सम्पत्ति के किसी ऐसे विक्रय के आगमों का अंश ग्रहण करे, जो क की डिक्री के अधीन दिया जाये। य ने इस धारा के अधीन अपराध किया है।

Fraudulently suffering decree for sum not due-
Whoever fraudulently causes or suffers a decree or order to be passed against him at the suit of any person for a sum not due or for a larger sum than is due to such person or for any property or interest in property to which such person is not entitled, or fraudulently causes or suffers a decree or order to be executed against him after it has been satisfied, or for anything in respect of which it has been satisfied, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.
Illustration
A, institutes a suit against Z. Z, knowing that A is likely to obtain a decree against him. fraudulently suffers a judgment to pass against him for a larger amount at the suit of B, who has no just claim against him, in order that B, either on his own account or for the benefit of Z, may share in the proceeds of any sale of Z’s property which may be made under A’s decree. Z has committed an offence under this section.

लागू अपराध

ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना।
सजा– दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 208 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति के वाद में ऐसी राशि के लिये, जो ऐसे व्यक्ति को शोध्य न हो या शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी ऐसी सम्पत्ति या सम्पत्ति में के हित के लिये, जिसका ऐसा व्यक्ति हकदार न हो, अपने विरुद्ध कोई डिक्री या आदेश कपटपूर्वक पारित करवायेगा, या पारित किया जाना सहन करेगा, तो वह दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 208 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसी राशि के लिये, जो शोध्य न हो, कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 208 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 207 | सम्पत्ति पर उसके समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये कपटपूर्वक दावा | IPC Section- 207 in hindi | Fraudulent claim to property to prevent its seizure as forfeited or in execution.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 207 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 207? साथ ही हम आपको IPC की धारा 207 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 207 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 207 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति या हित पर उसका कोई अधिकार या अधिकारपूर्ण दावा नहीं है, कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, या उस पर दावा करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 207 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 207 के अनुसार

सम्पत्ति पर उसके समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये कपटपूर्वक दावा-

जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति या हित पर उसका कोई अधिकार या अधिकारपूर्ण दावा नहीं है, कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, या उस पर दावा करेगा अथवा किसी सम्पत्ति या उसमें के किसी हित पर किसी अधिकार के बारे में इस आशय से प्रवंचना करेगा कि तद्द्वारा वह उस सम्पत्ति या उसमें के हित का ऐसे दण्डादेश के अधीन, जो न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाया जा चुका है या जिसके बारे में वह जानता है कि न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसका सुनाया जाना सम्भाव्य है, समपहरण के रूप में या जुर्माने के चुकाने के लिये लिया जाना, या ऐसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में, जो सिविल बाद में न्यायालय द्वारा दिया गया हो, या जिसके बारे में वह जानता है कि सिविल वाद में न्यायालय द्वारा उसका दिया जाना सम्भाव्य है, लिया जाना निवारित करे, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Fraudulent claim to property to prevent its seizure as forfeited or in execution-
Whoever fraudulently accepts, receives or claims any property or any interest therein, knowing that he has no right or rightful claim to such property or interest, or practices any deception touching any right to any property or any interest therein, intending thereby to prevent that property or interest therein from being taken as a forfeiture or in satisfaction of a fine, under a sentence which has been pronounced, or which he knows to be likely to be pronounced by a Court of Justice or other competent authority, or from being taken in execution of a decree or order which has been made, or which he knows to be likely to be made by a Court of Justice in a civil suit, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

सम्पत्ति पर उसके समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये कपटपूर्वक दावा।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 207 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति या हित पर उसका कोई अधिकार या अधिकारपूर्ण दावा नहीं है, कपटपूर्वक प्रतिगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, या उस पर दावा करेगा, तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 207 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
सम्पत्ति पर उसके समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये कपटपूर्वक दावा।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 207 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 206 | सम्पत्ति को समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना | IPC Section- 206 in hindi | Fraudulent removal or concealment of property to prevent its seizure as forfeited or in execution.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 206 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 206? साथ ही हम आपको IPC की धारा 206 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 206 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 206 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति को समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये उसे कपटपूर्वक हटाएगा या छिपाएगा, जबकि पूर्व में ही न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाया जा चुका है या जिसके बारे में वह जानता है, फिर भी कपटपूर्वक हटाता या छिपाता है, तो वह व्यक्ति धारा 206 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 206 के अनुसार

सम्पत्ति को समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना-

जो कोई किसी सम्पत्ति को, या उसमें के किसी हित को, इस आशय से कपटपूर्वक हटायेगा, छिपायेगा या किसी व्यक्ति को अन्तरित या परिदत्त करेगा कि तदद्वारा वह उस सम्पत्ति या उसमें के किसी हित का ऐसे दण्डादेश के अधीन, जो न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाया जा चुका है या जिसके बारे में वह जानता है कि न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसका सुनाया जाना सम्भाव्य है, समपहरण के रूप में या जुर्माने के चुकाने के लिये लिया जाना या ऐसी डिक्री या आदेश के निष्पादन में, जो सिविल वाद में न्यायालय द्वारा दिया गया हो या जिसके बारे में वह जानता है कि सिविल वाद में न्यायालय द्वारा उसका सुनाया जाना सम्भाव्य है, लिया जाना निवारित करे, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Fraudulent removal or concealment of property to prevent its seizure as forfeited or in execution-
Whoever fraudulently removes, conceals, transfers or delivers to any person any property or any interest therein, intending thereby to prevent that property or interest therein from being taken as a forfeiture or in satisfaction of a fine, under a sentence which has been pronounced, or which he knows to be likely to be pronounced, by a Court of Justice or other competent authority, or from being taken in execution of a decree or order which has been made, or which he knows to be likely to be made by a Court of Justice in a civil suit, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

सम्पत्ति को समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 206 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति को समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये उसे कपटपूर्वक हटाएगा या छिपाएगा, जबकि पूर्व में ही न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनाया जा चुका है या जिसके बारे में वह जानता है, फिर भी कपटपूर्वक हटाता या छिपाता है, तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 206 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
सम्पत्ति को समपहरण किये जाने में या निष्पादन में अभिगृहीत किये जाने से निवारित करने के लिये उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 206 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।