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आईपीसी की धारा 205 | वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण | IPC Section- 205 in hindi | False personation for purpose of act or proceeding in suit or prosecution.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 205 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 205? साथ ही हम आपको IPC की धारा 205 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 205 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 205 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी दूसरे का मिथ्या प्रतिरूपण करेगा और ऐसे धरे हुए रूप में किसी वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई स्वीकृति या कथन करेगा, या दावे की संस्वीकृति करेगा, या कोई आदेशिका निकलवायेगा या जमानतदार या प्रतिभू बनेगा या कोई भी अन्य कार्य करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 205 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 205 के अनुसार

वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण-

जो कोई किसी दूसरे का मिथ्या प्रतिरूपण करेगा और ऐसे धरे हुए रूप में किसी वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई स्वीकृति या कथन करेगा, या दावे की संस्वीकृति करेगा, या कोई आदेशिका निकलवायेगा या जमानतदार या प्रतिभू बनेगा या कोई भी अन्य कार्य करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

False personation for purpose of act or proceeding in suit or prosecution-
Whoever falsely personates another, and in such assumed character makes any admission or statement, or confesses judgment, or causes any process to be issued or becomes bail or security, or does any other act in any suit or criminal prosecution, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई कार्य या कार्यवाही करने या जमानतदार या प्रतिभू बनने के प्रयोजन के लिए मिथ्या प्रतिरूपण।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 205 के अंतर्गत जो कोई किसी दूसरे का मिथ्या प्रतिरूपण करेगा और ऐसे धरे हुए रूप में किसी वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई स्वीकृति या कथन करेगा, या दावे की संस्वीकृति करेगा, या कोई आदेशिका निकलवायेगा या जमानतदार या प्रतिभू बनेगा या कोई भी अन्य कार्य करेगा, तो वह व्यक्ति तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 205 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई कार्य या कार्यवाही करने या जमानतदार या प्रतिभू बनने के प्रयोजन के लिए मिथ्या प्रतिरूपण।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 205 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 204 | साक्ष्य के रूप में किसी [दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] का पेश किया जाना निवारित करने के लिये उसको नष्ट करना | IPC Section- 204 in hindi | Destruction of [document or electronic record] to prevent its production as evidence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 204 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 204? साथ ही हम आपको IPC की धारा 204 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 204 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 204 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी ऐसे दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को छिपायेगा या नष्ट करेगा, जिसे किसी न्यायालय में या ऐसी कार्यवाही में, पेश किया जाना जरूरी हो, जो कोई व्यक्ति दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को छिपायेगा या नष्ट करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 204 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 204 के अनुसार-

साक्ष्य के रूप में किसी [दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] का पेश किया जाना निवारित करने के लिये उसको नष्ट करना-

जो कोई किसी ऐसे [दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] को छिपायेगा या नष्ट करेगा, जिसे किसी न्यायालय में या ऐसी कार्यवाही में, जो किसी लोक-सेवक के समक्ष उसकी वैसी हैसियत में विधिपूर्वक की गई है, साक्ष्य के रूप में पेश करने के लिये उसे विधिपूर्वक विवश किया जा सके, या पूर्वोक्त न्यायालय या लोक-सेवक के समक्ष साक्ष्य के रूप में पेश किये जाने या उपयोग में लाये जाने से निवारित करने के आशय से, या उस प्रयोजन के लिये उस [दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] को पेश करने को उसे विधिपूर्वक समनित या अपेक्षित किये जाने के पश्चात्, ऐसे सम्पूर्ण [दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख] को, या उसके किसी भाग को, मिटायेगा, या ऐसा बनायेगा, जो पढ़ा न जा सके, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Destruction of [document or electronic record] to prevent its production as evidence-
Whoever secretes or destroys any [document or electronic record] which he may be lawfully compelled to produce as evidence in a Court of Justice, or in any proceeding lawfully held before a public servant, as such, or obliterates or renders illegible the whole or any part of such ‘[document or electronic record] with the intention of preventing the same from being produced or used as evidence before such Court or public servant as aforesaid, or after he shall have been lawfully summoned or required to produce the same for that purpose, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with
fine, or with both.

लागू अपराध

साक्ष्य के रूप में किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का पेश किया जाना निवारित करने के लिये उसको नष्ट करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 204 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को छिपाता या नष्ट करता है, जिसे किसी न्यायालय में या ऐसी कार्यवाही में, पेश किया जाना जरूरी है, जो कोई व्यक्ति दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को छिपायेगा या नष्ट करेगा तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 204 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
साक्ष्य के रूप में किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख का पेश किया जाना निवारित करने के लिये उसको नष्ट करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 204 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 203 | किये गये अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना | IPC Section- 203 in hindi | Giving false information respecting an offence committed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 203 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 203? साथ ही हम आपको IPC की धारा 203 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 203 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 203 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई ऐसी इत्तिला देगा, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास हो, तो वह व्यक्ति धारा 203 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 203 के अनुसार-

किये गये अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना-

जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई ऐसी इत्तिला देगा, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण- धारा 201 और 202 में और इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई ऐसा कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता तो निम्नलिखित धारा, अर्थात् 302, 304, 382, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 402, 435, 436, 449, 450, 457, 458, 459 तथा 460 में से किसी भी धारा के अधीन दण्डनीय होता।

Giving false information respecting an offence committed-
Whoever, knowing or having reason to believe that an offence has been committed gives any information respecting that offence which he knows or believes to be false, shall be punished with imprisonment, of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.
Explanation-In Sections 201 and 202 and in this section the word “offence” includes any act committed at any place out of India, which, if committed in India, would be punishable under any of the following Sections, namely, 302, 304, 382, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 402, 435, 436, 449, 450, 457, 458, 459 and 460.

लागू अपराध

किये गये अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 203 के अंतर्गत जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई मिथ्या इत्तिला देता है, तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 203 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किये गये अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 203 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 202 | इत्तिला देने के लिये आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप | IPC Section- 202 in hindi | Intentional omission to give information of offence by person bound to inform.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 202 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 202? साथ ही हम आपको IPC की धारा 202 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 202 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 202 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई इत्तिला, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध हो, देने का साशय लोप करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 202 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 202 के अनुसार-

इत्तिला देने के लिये आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप—

जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई इत्तिला, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध हो, देने का साशय लोप करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Intentional omission to give information of offence by person bound to inform-
Whoever, knowing or having reason to believe that an offence has been committed, intentionally omits to give any information respecting that offence which he is legally bound to give, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine, or with both.

लागू अपराध

इत्तिला देने के लिये आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप।
सजा- छह मास के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 202 के अंतर्गत जो कोई यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई इत्तिला, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध हो, देने का साशय लोप करेगा, तो वह व्यक्ति छह मास के लिए कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंड का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 202 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
इत्तिला देने के लिये आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की इत्तिला देने का साशय लोप।छह मास के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 202 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 201 | अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देना | IPC Section- 201 in hindi | Causing disappearance of evidence of offence, or giving false information to screen offender.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 201? साथ ही हम आपको IPC की धारा 201 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 201 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 201 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देगा, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है या आजीवन कारावास से दंडनीय हो अथवा यदि दस वर्ष से कम के कारावास से दण्डनीय हो, तो वह व्यक्ति धारा 201 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 201 के अनुसार

अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देना-

जो कोई यह जानते हुये, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुये कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के किये जाने के किसी साक्ष्य का विलोप, इस आशय से कारित करेगा कि अपराधी को वैध दण्ड से प्रतिच्छादित करे या उस आशय से उस अपराध से सम्बन्धित कोई ऐसी इत्तिला देगा जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है;
यदि अपराध मृत्यु से दण्डनीय हो- यदि वह अपराध जिसके किये जाने का उसे ज्ञान या विश्वास है, मृत्यु से दण्डनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा;
यदि आजीवन कारावास से दण्डनीय हो- और यदि वह अपराध आजीवन कारावास से, या ऐसे कारावास से, जो दस वर्ष तक का हो सकेगा, दण्डनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा;
यदि दस वर्ष से कम के कारावास से दण्डनीय हो- और यदि वह अपराध ऐसे कारावास से उतनी अवधि के लिये दण्डनीय हो, जो दस वर्ष तक की न हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबन्धित भांति के कारावास से उतनी अवधि के लिये जो उस अपराध के लिये उपबन्धित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक-चौथाई तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।दृष्टान्त
क यह जानते हुये कि ख ने य की हत्या की है, ख को दण्ड से प्रतिच्छादित करने के आशय से मृत शरीर को छिपाने में ख की सहायता करता है। क सात वर्ष के लिये दोनों में से किसी भांति के कारावास से, और जुर्माने से भी दण्डनीय है।

Causing disappearance of evidence of offence, or giving false information to screen offender-
Whoever, knowing or having reason to believe that an offence has been committed. causes any evidence of the commission of that offence to disappear, with the intention of screening the offender from legal punishment, or with that intention gives any information respecting the offence which he knows or believes to be false.
if punishable with imprisonment for life- and if the offence is punishable with imprisonment for life, or with imprisonment which may extend to ten years, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine;
if punishable with less than ten years’ imprisonment- and if the offence is punishable with imprisonment for any term not extending to ten years, shall be punished with imprisonment of the description provided for the offence, for a term which may extend to one-fourth part of the longest term of the imprisonment provided for the offence, or with fine or with both.
Illustration
A, knowing that B has murdered Z, assists B to hide the body with the intention of screening B from punishment. A is liable to imprisonment of either description for seven years, and also to fine.

लागू अपराध

किए गए अपराध के साक्ष्य का विलोपन कारित करना या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देना, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक जमानतीय, अपराध की श्रेणी अपराध अनुसार संज्ञेय/गैर-संज्ञेय अपराध में आएगा। सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध में आएगा। प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यदि दस वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय है।
सजा- उस दीर्घतम् अवधि की एक चौथाई का कारावास जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या और जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध में आएगा। वह न्यायालय जिसके द्वारा अपराध विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के अंतर्गत जो कोई किसी अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देगा, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है, तो वह व्यक्ति सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माने का भागीदार होगा। इसी तरह से यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है। तो वह व्यक्ति तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना से दंडित किया जायेगा और यदि दस वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय है, तो वह व्यक्ति उस दीर्घतम् अवधि की एक चौथाई का कारावास जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या और जुर्माना या दोनो से दंडित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 201 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किए गए अपराध के साक्ष्य का विलोपन कारित करना या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या इत्तिला देना, यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।अपराधनुसारजमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
यदि आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास से दंडनीय है।तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि दस वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय है।उस दीर्घतम् अवधि की एक चौथाई का कारावास जो उस अपराध के लिए उपबन्धित है, या और जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयवह न्यायालय जिसके द्वारा अपराध विचारणीय है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 201 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 200 | ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में काम में लाना | IPC Section- 200 in hindi | Using as true such declaration knowing it to be false.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 200 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 200? साथ ही हम आपको IPC की धारा 200 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 200 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 200 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी ऐसी घोषणा को, यह जानते हुये कि वह किसी तात्विक बात के सम्बन्ध में मिथ्या है, भ्रष्टतापूर्वक सच्ची के रूप में उपयोग में लाएगा या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 200 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 200 के अनुसार-

ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में काम में लाना-

जो कोई किसी ऐसी घोषणा को, यह जानते हुये कि वह किसी तात्विक बात के सम्बन्ध में मिथ्या है, भ्रष्टतापूर्वक सच्ची के रूप में उपयोग में लाएगा या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा, मानो उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो।
स्पष्टीकरण-कोई घोषणा, जो केवल किसी अप्ररूपिता के आधार पर अग्राह्य है, धारा 199 और धारा 200 के अर्थ के अन्तर्गत घोषणा है।

Using as true such declaration knowing it to be false-
Whoever corruptly uses or attempts to use as true any such declaration, knowing the same to be false in any material point, shall be punished in the same manner as if he gave false evidence.
Explanation- A declaration which is inadmissible merely upon the ground of
some informality, is a declaration within the meaning of Sections 199 and 200.

लागू अपराध

ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में काम में लाना।
सजा- वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं। दंड या जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 200 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसी घोषणा को, यह जानते हुये कि वह कोई तात्विक बात के सम्बन्ध में मिथ्या है, भ्रष्टतापूर्वक सच्ची के रूप में उपयोग में लाएगा या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, तो वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 200 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में काम में लाना।वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं।गैर-संज्ञेयजमानतीयउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 200 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।