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आईपीसी की धारा 199 | ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन | IPC Section- 199 in hindi | False statement made in declaration which is by law receivable as evidence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 199 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 199? साथ ही हम आपको IPC की धारा 199 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 199 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 199 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई अपने द्वारा की गयी या हस्ताक्षरित किसी घोषणा में, जिसकी किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में लेने के लिये कोई न्यायालय या कोई लोक सेवक या अन्य व्यक्ति विधि द्वारा आबद्ध या प्राधिकृत हो, ऐसी घोषणा की जाये या उपयोग में लाई जाये, मिथ्या है और जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है तो वह व्यक्ति धारा 199 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 199 के अनुसार-

ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन-

जो कोई अपने द्वारा की गयी या हस्ताक्षरित किसी घोषणा में, जिसकी किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में लेने के लिये कोई न्यायालय या कोई लोक सेवक या अन्य व्यक्ति विधि द्वारा आबद्ध या प्राधिकृत हो, कोई ऐसा कथन करेगा, जो किसी ऐसी बात के सम्बन्ध में, जो उस उद्देश्य के लिये तात्विक हो जिसके लिये वह घोषणा की जाये या उपयोग में लाई जाये, मिथ्या है और जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है, वह उसी प्रकार दण्डित किया जायेगा, मानो उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो।

False statement made in declaration which is by law receivable as evidence-
Whoever, in any declaration made or subscribed by him, which declaration any Court of Justice, or any public servant or other person is bound or authorized by law to receive as evidence of any fact, makes any statement which is false, and which he either knows or believes to be false or does not believe to be true, touching any point material to the object for which the declaration is made or used, shall be punished in the same manner as if he gave false evidence.

लागू अपराध

ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन।
सजा- वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं। दंड या जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 199 के अंतर्गत जो कोई ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन है और जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, या जिसके सत्य होने का उसे विश्वास नहीं है तो वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 199 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसी घोषणा में, जो साक्ष्य के रूप में विधि द्वारा ली जा सके, किया गया मिथ्या कथन।वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं।गैर-संज्ञेयजमानतीयउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 199 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 196 | उस साक्ष्य को काम में लाना जिसका मिथ्या होना ज्ञात है | IPC Section- 196 in hindi | Using evidence known to be false.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 196 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 196? साथ ही हम आपको IPC की धारा 196 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 196 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 196 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति किसी साक्ष्य को, जिसका मिथ्या होना या गढ़ा होना वह जानता है, सच्चे या असली साक्ष्य के रूप में भ्रष्टतापूर्वक उपयोग में लाएगा, या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 196 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 196 के अनुसार-

उस साक्ष्य को काम में लाना जिसका मिथ्या होना ज्ञात है-

जो कोई किसी साक्ष्य को, जिसका मिथ्या होना या गढ़ा होना वह जानता है, सच्चे या असली साक्ष्य के रूप में भ्रष्टतापूर्वक उपयोग में लाएगा, या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, वह ऐसे दण्डित किया जाएगा मानो उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो या गढ़ा हो।

Using evidence known to be false—
Whoever corruptly uses or attempts o use as true or genuine evidence any evidence which he knows to be false fabricated, shall be punished in the same manner as if he gave or fabricated false evidence.

लागू अपराध

उस साक्ष्य की न्यायिक कार्यवाही में काम में लाना, जिसका मिथ्या होना या गढ़ा होना ज्ञात है।
सजा- वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं।
यह अपराध मिथ्या साक्ष्य देने के अनुसार अपराध जमानतीय या गैर-जमानतीय है, साथ ही यह गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 196 के अंतर्गत जो कोई किसी साक्ष्य को, जिसका मिथ्या होना या गढ़ा होना वह जानता है, सच्चे या असली साक्ष्य के रूप में भ्रष्टतापूर्वक उपयोग में लाएगा, या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, तो मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार) दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 196 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में अपराधनुसार जमानतीय/ गैर-जमानतीय (Baileble/Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध के अनुसार ही जमानत मिलेगी या नहीं मिलेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उस साक्ष्य की न्यायिक कार्यवाही में काम में लाना, जिसका मिथ्या होना या गढ़ा होना ज्ञात है।वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं।गैर-संज्ञेयअपराधनुसारउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 196 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 198 | प्रमाण पत्र को जिसका मिथ्या होना ज्ञात है, सच्चे के रूप में काम में लाना | IPC Section- 198 in hindi | Using as true a certificate known to be false.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 198 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 198? साथ ही हम आपको IPC की धारा 198 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 198 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 198 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी ऐसे प्रमाण पत्र को यह जानते हुये कि वह किसी तात्विक बात के सम्बन्ध में मिथ्या है, सच्चे प्रमाण-पत्र के रूप में भ्रष्टतापूर्वक उपयोग में लाएगा, या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 198 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 198 के अनुसार-

प्रमाण पत्र को जिसका मिथ्या होना ज्ञात है, सच्चे के रूप में काम में लाना-

जो कोई किसी ऐसे प्रमाण पत्र को यह जानते हुये कि वह किसी तात्विक बात के सम्बन्ध में मिथ्या है, सच्चे प्रमाण-पत्र के रूप में भ्रष्टतापूर्वक उपयोग में लाएगा, या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा, वह ऐसे दण्डित किया जायेगा, मानो उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो।

Using as true a certificate known to be false-
Whoever corruptly uses or attempts to use any such certificate as a true certificate, knowing the same to be false in any material point, shall be punished in the same manner as if he gave false evidence.

लागू अपराध

प्रमाणपत्र को जिसका तात्विक बात के संबंध में मिथ्या होना ज्ञात है, सच्चे प्रमाणपत्र के रूप में काम में लाना।
सजा- वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं। दंड या जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 198 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे प्रमाण पत्र को यह जानते हुये कि वह किसी तात्विक बात के सम्बन्ध में मिथ्या है, सच्चे प्रमाण-पत्र के रूप में भ्रष्टतापूर्वक उपयोग में लाएगा, या उपयोग में लाने का प्रयत्न करेगा तो मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति वही जो उस अपराध के लिए हैं दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 198 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
प्रमाणपत्र को जिसका तात्विक बात के संबंध में मिथ्या होना ज्ञात है, सच्चे प्रमाणपत्र के रूप में काम में लाना।वही जो मिथ्या साक्ष्य देने या गढ़ने के लिए हैं। दंड या जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 198 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 197 | मिथ्या प्रमाण-पत्र जारी करना या हस्ताक्षरित करना | IPC Section- 197 in hindi | Issuing or signing false certificate.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 197 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 197? साथ ही हम आपको IPC की धारा 197 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 197 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 197 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई ऐसा प्रमाण-पत्र, जिसका दिया जाना या हस्ताक्षरित किया जाना विधि द्वारा अपेक्षित है, यह जानते हुए या विश्वास करते हुए कि वह किसी तात्विक बात के बारे में मिथ्या है, वैसा प्रमाण-पत्र जारी करेगा या हस्ताक्षरित करेगा, तो वह व्यक्ति धारा 197 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 197 के अनुसार-

मिथ्या प्रमाण-पत्र जारी करना या हस्ताक्षरित करना-

जो कोई ऐसा प्रमाण-पत्र, जिसका दिया जाना या हस्ताक्षरित किया जाना विधि द्वारा अपेक्षित हो, या जो किसी ऐसे तथ्य से सम्बन्धित हो जिसका वैसा प्रमाण-पत्र विधि द्वारा साक्ष्य में ग्राह्य हो, यह जानते हुए या विश्वास करते हुए कि वह किसी तात्विक बात के बारे में मिथ्या है, वैसा प्रमाण-पत्र जारी करेगा या हस्ताक्षरित करेगा, वह उसी प्रकार दण्डित किया जाएगा, मानो उसने मिथ्या साक्ष्य दिया हो।

Issuing or signing false certificate-
Whoever issues or signs any certificate
required by law to be given or signed, or relating to any fact of which such certificate is by law admissible in evidence, knowing or believing that such certificate is false in any material point, shall be punished in the same manner as if he gave false evidence.

लागू अपराध

किसी ऐसे तथ्य से संबंधित मिथ्या प्रमाणपत्र जानते हुए देना या हस्ताक्षरित करना जिसके लिए ऐसा प्रमाणपत्र विधि द्वारा साक्ष्य में ग्राह्य है।
सजा- वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार) दंड या जुर्माने।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 197 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को किसी ऐसे तथ्य से संबंधित मिथ्या प्रमाणपत्र जानते हुए देना या हस्ताक्षरित करना जिसके लिए ऐसा प्रमाणपत्र विधि द्वारा साक्ष्य में ग्राह्य है, तो मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार) दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 197 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी ऐसे तथ्य से संबंधित मिथ्या प्रमाणपत्र जानते हुए देना या हस्ताक्षरित करना जिसके लिए ऐसा प्रमाणपत्र विधि द्वारा साक्ष्य में ग्राह्य है।अपराधनुसारगैर-संज्ञेयजमानतीयउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 197 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 195A | किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना या उत्प्रेरित करना | IPC Section- 195A in hindi | Threatening any person to give false evidence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 195A के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 195A? साथ ही हम आपको IPC की धारा 195A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 195A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 195A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी दूसरे व्यक्ति को, उसके शरीर, ख्याति या सम्पत्ति को अथवा ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिसमें वह व्यक्ति हितबद्ध है, यह कारित करने के आशय से कोई क्षति करने की धमकी देता है, कि वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य दे, तो वह व्यक्ति धारा 195A के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 195A के अनुसार

किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना या उत्प्रेरित करना-

जो कोई किसी दूसरे व्यक्ति को, उसके शरीर, ख्याति या सम्पत्ति को अथवा ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिसमें वह व्यक्ति हितबद्ध है, यह कारित करने के आशय से कोई क्षति करने की धमकी देता है, कि वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य दे तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा;
और यदि कोई निर्दोष व्यक्ति ऐसे मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप मृत्यु से या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दोषसिद्ध और दण्डादिष्ट किया जाता है तो ऐसा व्यक्ति, जो धमकी देता है, उसी दण्ड से दण्डित किया जाएगा और उसी रीति में और उसी सीमा तक दण्डादिष्ट किया जाएगा जैसे निर्दोष व्यक्ति दण्डित और दण्डादिष्ट किया गया है।

Threatening any person to give false evidence—
Whoever threatens another with any injury to his person, reputation or property or to the person or reputation of any one in whom that person is interested, with intent to cause tha person to give false evidence shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both;and if innocent person is convicted and sentenced in consequence of such fals evidence, with death or imprisonment for more than seven years, the person who threatens shall be punished with the same punishment and setnence in the same manner and to the same extent such innocent person is punished and sentenced.

लागू अपराध

किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकी देना।
सजा- सात वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनो।
यदि किसी निर्दोष व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाता है और मृत्यु या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दंडित किया जाता है।
सजा- वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार) दंड या जुर्माने।
यह एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 195A के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकी देता है तो वह व्यक्ति सात वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनो से  दंडित किया जाएगा। इसी तरह से यदि किसी निर्दोष व्यक्ति   मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया गया है और यदि मृत्यु या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दंडित किया जा रहा है, तो मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार) दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 195A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकी देना।
सात वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।
यदि किसी निर्दोष व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाता है और मृत्यु या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दंडित किया जाता है।
अपराधनुसार दंड और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयउसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है जहां मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 195A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 195 | आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना | IPC Section- 195 in hindi | Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of offence punishable with imprisonment for life or imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 195 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 195? साथ ही हम आपको IPC की धारा 195 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 195 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 195 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, तो वह व्यक्ति धारा 195 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 195 के अनुसार-

आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना-

जो कोई इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि एतद्द्वारा वह किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिये; जो भारत में तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा मृत्यु से दण्डनीय न हो, किन्तु आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय हो, दोषसिद्ध कराये, मिथ्या साक्ष्य देगा या गढ़ेगा, वह वैसे ही दण्डित किया जाएगा जैसे वह व्यक्ति दण्डनीय होता जो उस अपराध के लिये दोषसिद्ध होता।
दृष्टान्त
क न्यायालय के समक्ष इस आशय से मिथ्या साक्ष्य देता है कि एतद्द्वारा य डकैती के लिए दोषसिद्ध किया जाए। डकैती का दण्ड जुर्माना सहित या रहित, आजीवन कारावास या ऐसा कठिन कारावास है, जो दस वर्ष तक की अवधि का हो सकता है। क इसलिए जुर्माने सहित या रहित आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय है।

Giving or fabricating false evidence with intent to procure conviction of offence punishable with imprisonment for life or imprisonment-
Whoever gives or fabricates false evidence intending thereby to cause, or knowing it to be likely that he will thereby cause, any person to be convicted of an offence which by the law for the time being in force in India is not capital, but punishable with imprisonment for life, or imprisonment for a term of seven years or upwards, shall be punished as a person convicted of that offence would be liable to be punished.
Illustration
A gives false evidence before a Court of Justice, intending thereby to cause Z to be convicted of a dacoity. The punishment of dacoity is imprisonment for life or rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, with or without fine. A, therefore, is liable to imprisonment for life or imprisonment, with or without fine.

लागू अपराध

आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना।
सजा- वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार)
यह एक गैर-जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 195 के अंतर्गत जो कोई आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करेगा या गढ़ेगा तो वह व्यक्ति वही जो उस अपराध के लिए हैं। (अपराधनुसार) दंड या जुर्माने का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 195 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना।अपराधनुसारगैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 195 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।