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BNS की धारा 81 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 81 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 81 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 81? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 81 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला से झूठ बोलकर या धोखा देकर यह यकीन दिलाता है कि वह कानूनन उसका पति है, जबकि वास्तव में उनसे कोई वैध विवाह नहीं हुआ है, और इसी झूठे विश्वास के आधार पर उस महिला से शारीरिक संबंध (सहवास/मैथुन) बनाता है, तो वह धारा 81 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-493) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 81 का विवरण (Section 81 BNS)

BNS की धारा 81 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को शादी का झूठा भरोसा देकर या खुद को उसका वैध पति बताकर उससे शारीरिक संबंध बनाना कानूनन अपराध है, तो वह धारा 81 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 81 के अनुसार (BNS Section 81 in Hindi)

81. विधिपूर्ण विवाह का प्रवंचना से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास - प्रत्येक पुरुष, किसी ऐसी महिला को, जो विधिपूर्वक उससे विवाहित न हो, प्रवंचना से यह विश्वास कारित करेगा कि वह विधिपूर्वक उससे विवाहित है और इस विश्वास में उस महिला से, अपने साथ सहवास या मैथुन कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 81 के अनुसार (BNS Section 81 in English)

81. Cohabitation caused by man deceitfully inducing belief of lawful marriage. Every man who by deceit causes any woman who is not lawfully married to him to believe that she is lawfully married to him and to cohabit or have sexual intercourse with him in that belief, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 81 एवंम् आईपीसी की धारा 493 मे अंतर

  • अपराध की परिभाषा और सजा दोनों धाराओं में समान हैं।
  • बीएनएस की धारा 81, आईपीसी की धारा 493 का आधुनिक और पुनर्गठित रूप है।
  • मुख्य अंतर कानून का नाम और भाषा का है, जिससे प्रावधान अधिक स्पष्ट हो गया है।
  • बीएनएस लागू होने के बाद नए मामलों में धारा 81 और पुराने मामलों में धारा 493 लागू होगी।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 493BNS Section 81जुर्माना अनिवार्य

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 10 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पुरूष व्दारा महिला को, जो उससे विधिपूर्वक विवाहित नही है, प्रवचना से विश्वास कारित करके कि वह उससे विधिपूर्वक विवाहित है, उस विश्वास मे उससे सहवास करना।10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानागैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट।

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 81 (BNS 81) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 81 क्या है?

कोई पुरुष किसी महिला को धोखे से यह विश्वास दिलाता है कि वह उसका वैध पति है, जबकि वास्तव में उनसे कोई कानूनी विवाह नहीं हुआ होता, और इसी विश्वास के आधार पर उससे शारीरिक संबंध (सहवास/मैथुन) बनाता है।

Q2. इस धारा के अंतर्गत अपराध कब बनता है?

जब तीन बातें एक साथ हों— पुरुष और महिला के बीच कोई विधिपूर्वक विवाह नहीं हुआ हो, या पुरुष द्वारा प्रवंचना (धोखा) देकर विवाह का झूठा विश्वास दिलाया गया हो, या उसी झूठे विश्वास के कारण महिला ने सहवास के लिए सहमति दी हो।

Q3. इस अपराध में सजा क्या है?

दोषी पाए जाने पर आरोपी को 10 वर्ष तक का कारावास और साथ में जुर्माना हो सकता है।

Q4. क्या इस धारा में न्यूनतम सजा निर्धारित है?

नहीं, इस धारा में न्यूनतम सजा तय नहीं की गई है, केवल अधिकतम सजा का प्रावधान है।

Q5. क्या यह अपराध महिला की सहमति से होने पर भी अपराध माना जाएगा?

हां। यदि सहमति धोखे और झूठे वैवाहिक विश्वास पर आधारित है, तो वह वैध सहमति नहीं मानी जाएगी।

Q6. इस धारा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

महिलाओं को धोखे से बनाए गए शारीरिक संबंधों से बचाना और उनके सम्मान व अधिकारों की रक्षा करना।

BNS की धारा 80 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 80 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 80 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 80? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 80 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की शादी के 7 साल के भीतर- जलने से, शारीरिक चोट के कारण, या सामान्य परिस्थितियों के अलावा किसी और कारण से मृत्यु हो जाती है और यह साबित हो जाए कि उसकी मृत्यु से कुछ समय पहले उसके पति या उसके पति के किसी रिश्तेदार ने उससे दहेज की मांग को लेकर उसके साथ क्रूरता की थी या उसे परेशान किया था, तो ऐसी मौत को “दहेज मृत्यु” कहा जाएगा, तो वह धारा 80 के अन्तर्गत 7 वर्ष तक का कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-304B) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 80 का विवरण (Section 80 BNS)

BNS की धारा 80 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की शादी के 7 साल के भीतर- जलने से, शारीरिक चोट के कारण, या सामान्य परिस्थितियों के अलावा किसी और कारण से मृत्यु हो जाती है, तो वह धारा 80 के अन्तर्गत कम से कम 7 वर्ष तक का कारावास, जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा।

बीएनएस की धारा 80 के अनुसार (BNS Section 80 in Hindi)

80. दहेज मृत्यु - (1) जहाँ किसी महिला की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी मृत्यु के कुछ पूर्व उसके पति या उसके पति के किसी नातेदार द्वारा, दहेज की किसी मांग के लिए, या उसके सम्बन्ध में, उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था, वहाँ ऐसी मृत्यु को "दहेज मृत्यु" कहा जाएगा, और ऐसा पति या नातेदार उसकी मृत्यु कारित करने वाला समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "दहेज" का वही अर्थ है, जो दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (1961 का 28) की धारा 2 में है।
(2) जो कोई दहेज मृत्यु कारित करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा।

BNS की धारा 80 के अनुसार (BNS Section 80 in English)

80. Dowry death.-(1) Where the death of a woman is caused by any burns or bodily injury or occurs otherwise than under normal circumstances within seven years of her marriage and it is shown that soon before her death she was subjected to cruelty or harassment by her husband or any relative of her husband for, or in connection with, any demand for dowry, such death shall be called "dowry death", and such husband or relative shall be deemed to have caused her death.
Explanation- For the purposes of this sub-section, "dowry" shall have the same meaning as in Section 2 of the Dowry Prohibition Act, 1961 (28 of 1961).
(2) Whoever commits dowry death shall be punished with imprisonment for a term which shall not be less than seven years but which may extend to imprisonment for life.

बीएनएस की धारा 80 एवंम् आईपीसी की धारा 304B मे अंतर

  • अपराध की परिभाषा, शर्तें और सजा दोनों में समान हैं।
  • बीएनएस की धारा 80, आईपीसी की धारा 304B का आधुनिक और पुनर्गठित रूप है।
  • मुख्य अंतर केवल कानून का नाम और भाषा का है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 304BBNS Section 80कानून का नाम और भाषा

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • कम से कम 7 वर्ष के लिये कारावास
  • किन्तु जो आजीवन कारावास हो सकता है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
दहेज मृत्युकम से कम 7 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगा।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 80 (BNS 80) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 80 क्या है?

धारा 80 दहेज मृत्यु से संबंधित है। यदि किसी महिला की शादी के 7 वर्ष के भीतर असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हो जाती है और मृत्यु से कुछ समय पहले दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया गया हो, तो इसे दहेज मृत्यु माना जाता है।

Q2. दहेज मृत्यु किन परिस्थितियों में मानी जाती है?

जब— महिला की मृत्यु जलने से, शारीरिक चोट से या सामान्य परिस्थितियों के अलावा होती है या मृत्यु विवाह के 7 वर्ष के भीतर हुई हो, और
मृत्यु से पहले पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा दहेज के लिए क्रूरता या उत्पीड़न किया गया हो।

Q3. इस अपराध में किसे दोषी माना जाता है?

महिला का पति या पति का कोई भी रिश्तेदार, जिसने दहेज की मांग को लेकर क्रूरता की हो, कानूनन दोषी माना जाएगा।

Q4. धारा 80 के अंतर्गत सजा क्या है?

दोषी पाए जाने पर आरोपी को— कम से कम 7 वर्ष की जेल, जो आजीवन कारावास तक हो सकती है।

Q5. क्या सीधे हत्या साबित करना आवश्यक है?

नहीं। यदि कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तो कानून पति या रिश्तेदार को मृत्यु का जिम्मेदार मान लेता है

BNS की धारा 79 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 79 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 79 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 79? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 79 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की इज्जत (लज्जा) को ठेस पहुँचाने के इरादे से अश्लील या अपमानजनक शब्द बोलता है या कोई अशोभनीय आवाज़ निकालता है या कोई इशारा/हाव-भाव (अंगविक्षेप) करता है या कोई आपत्तिजनक वस्तु/चित्र इस तरह दिखाता है कि महिला उसे देखे या या महिला की निजता (एकांतता) में जबरन दखल देता है, तो वह धारा 79 के अन्तर्गत 3 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-509) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 79 का विवरण (Section 79 BNS)

BNS की धारा 79 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को अपमानित करने, शर्मिंदा करने या उसकी निजता भंग करने के लिए शब्द, इशारे या किसी भी तरह का अशोभनीय व्यवहार करना अपराध है, तो वह धारा 79 के अन्तर्गत प्रथम बार दोषी होने पर 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना (Fine) से दंडित किया जा सकेगा।

बीएनएस की धारा 79 के अनुसार (BNS Section 79 in Hindi)

79. शब्द, अंगविक्षेप या कार्य, जो किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है- जो कोई, किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहता है, कोई ध्वनि या अंगविक्षेप करता है, या कोई वस्तु किसी रूप में प्रदर्शित करता है, इस आशय से कि ऐसी महिला द्वारा ऐसा शब्द या ध्वनि सुनी जाए, या ऐसा अंगविक्षेप या वस्तु देखी जाए, या ऐसी महिला की एकान्तता का अतिक्रमण करता है, वह साधारण कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।

BNS की धारा 79 के अनुसार (BNS Section 79 in English)

79. Word, gesture or act intended to insult modesty of a woman. Whoever, intending to insult the modesty of any woman, utters any words, makes any sound or gesture, or exhibits any object in any form, intending that such word or sound shall be heard, or that such gesture or object shall be seen, by such woman, or intrudes upon the privacy of such woman, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to three years, and also with fine.

बीएनएस की धारा 79 एवंम् आईपीसी की धारा 509 मे अंतर

  • बीएनएस की धारा 79, आईपीसी की धारा 509 का विस्तारित और सख्त रूप है।
  • महिला की निजता और एकांतता को बीएनएस में अधिक स्पष्ट संरक्षण दिया गया है।
  • मुख्य अंतर सजा, भाषा और दायरे का है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 509BNS Section 79महिला की गरिमा और निजता की बेहतर सुरक्षा
महिला की लज्जा की रक्षा

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 3 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना
  • साथ ही जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
महिला की लज्जा का अनादर करने के आशय से कोई शब्द कहना या कोई अंगविक्षेप करना आदि3 वर्ष तक का सादा कारावास और जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 79 (BNS 79) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. धारा 79 के अंतर्गत कौन-कौन से कृत्य अपराध माने जाते हैं?

किसी महिला के लिए अश्लील या अपमानजनक शब्द कहना
अशोभनीय आवाज़ निकालना
अश्लील इशारे या हाव-भाव करना
कोई आपत्तिजनक वस्तु/चित्र इस तरह दिखाना कि महिला उसे देखे
महिला की एकांतता या निजता में जबरन दखल देना

Q2. क्या यह अपराध सार्वजनिक स्थान पर ही लागू होता है?

नहीं, यह अपराध सार्वजनिक और निजी दोनों स्थानों पर लागू हो सकता है, यदि महिला की लज्जा भंग करने का आशय हो।

Q3. क्या महिला की सहमति होने पर अपराध बनता है?

नहीं, यदि महिला की सहमति से कोई कार्य किया गया है, तो धारा 79 के तहत अपराध नहीं बनता।

Q4. धारा 79 के अंतर्गत क्या सजा है?

दोषी पाए जाने पर आरोपी को 3 वर्ष तक का साधारण कारावास और साथ में जुर्माना हो सकता है।

Q5. क्या इस धारा में न्यूनतम सजा तय है?

नहीं, इस धारा में न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है, केवल अधिकतम सजा 3 वर्ष का प्रावधान है।

Q6. क्या धारा 79 एक संज्ञेय अपराध है?

यह अपराध प्रक्रिया कानून के अनुसार संज्ञेय/असंज्ञेय के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जिसकी प्रकृति मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

BNS की धारा 78 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 78 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 78 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 78? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 78 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 78 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ जबरदस्ती संपर्क बढ़ाने के इरादे से, उसके मना करने के बावजूद बार-बार उसका पीछा करता है, उसे छूता है या छूने की कोशिश करता है अथवा कोई पुरुष किसी महिला की ऑनलाइन गतिविधियों—जैसे इंटरनेट, ई-मेल, सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों—पर नज़र रखता है या निगरानी करता है, तो वह धारा 78 के अन्तर्गत कम से कम से 3 वर्ष से 5 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-354D) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 78 का विवरण (Section 78 BNS)

BNS की धारा 78 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के मना करने के बाद भी उसका पीछा करना, जबरदस्ती संपर्क बनाने की कोशिश करना या उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना कानूनन अपराध है, तो वह धारा 78 के अन्तर्गत प्रथम बार दोषी होने पर 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना, दूसरी बार या अपराध दोहराने का दोषी होने पर 5 वर्ष का कारावास और जुर्माना (Fine) से दंडित किया जा सकेगा।

बीएनएस की धारा 78 के अनुसार (BNS Section 78 in Hindi)

78. पीछा करना- (1) ऐसा कोई पुरुष, जो-
(i) किसी महिला का, उससे व्यक्तिगत अन्योन्यक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस महिला द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किए जाने के बावजूद, बारंबार पीछा करता है और स्पर्श करता है या स्पर्श करने का प्रयत्न करता है; या
(ii) किसी महिला द्वारा इंटरनेट, ई-मेल या किसी अन्य प्ररूप की इलेक्ट्रानिक संसूचना का प्रयोग किए जाने को मानीटर करता है,
पीछा करने का अपराध करता है :
परन्तु ऐसा आचरण पीछा करने की कोटि में नहीं आएगा, यदि वह पुरुष, जो ऐसा करता है, यह साबित कर देता है कि-
(i) ऐसा कार्य अपराध के निवारण या पता लगाने के प्रयोजन के लिए किया गया था और पीछा करने वाले अभियुक्त पुरुष को राज्य द्वारा उस अपराध के निवारण और पता लगाने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था; या
(ii) ऐसा कार्य किसी विधि के अधीन किया गया था या किसी विधि के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा अधिरोपित किसी शर्त या अपेक्षा का पालन करने के लिए किया गया था; या
(iii) विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसा आचरण युक्तियुक्त और न्यायोचित था।
(2) जो कोई, पीछा करने का अपराध कारित करता है, तो वह प्रथम दोषसिद्धि पर, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और द्वितीय एवं पश्चातवर्ती किसी दोषसिद्धि पर दोनों में से किसी भी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 78 के अनुसार (BNS Section 78 in English)

78. Stalking.-(1) Any man who-
(i) follows a woman and contacts, or attempts to contact such woman to foster personal interaction repeatedly despite a clear indication of disinterest by such woman; or
(ii) monitors the use by a woman of the internet, e-mail or any other form of electronic communication,
commits the offence of stalking:
Provided that such conduct shall not amount to stalking if the man who pursued it proves that-
(i) it was pursued for the purpose of preventing or detecting crime and the man accused of stalking had been entrusted with the responsibility of prevention and detection of crime by the State; or
(ii) it was pursued under any law or to comply with any condition or requirement imposed by any person under any law; or
(iii) in the particular circumstances such conduct was reasonable and justified.
(2) Whoever commits the offence of stalking shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine; and be punished on a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 78 एवंम् आईपीसी की धारा 354D मे अंतर

  • दोनों धाराओं में अपराध और सजा लगभग समान हैं।
  • बीएनएस की धारा 78, आईपीसी की धारा 354D का आधुनिक और स्पष्ट रूप है।
  • बीएनएस में स्पर्श/स्पर्श के प्रयास को अधिक स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 354DBNS Section 78बीएनएस में स्पर्श/स्पर्श के प्रयास को अधिक स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

पहली बार दोषी होने पर:

  • 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

दूसरी या उसके बाद की बार दोषी होने पर:

  • 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पीछा करना3 वर्ष तक का कारावास और जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट
व्दितीय या पश्ताच्वर्ती दोषसिद्ध5 वर्ष तक का कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 78 (BNS 78) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस अधिनियम की धारा 78 क्या है?

बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता), 2023 की धारा 78 पीछा करने (Stalking) से संबंधित है। जब कोई पुरुष किसी महिला के मना करने के बावजूद बार-बार उसका पीछा करता है, संपर्क बढ़ाने की कोशिश करता है या उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखता है, तो यह अपराध माना जाता है।

Q2. क्या ऑनलाइन निगरानी भी अपराध है?

हां, बिना सहमति महिला की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखना धारा 78 के अंतर्गत अपराध है।

Q3. धारा 78 के अंतर्गत सजा क्या है?

प्रथम दोषसिद्धि पर: अधिकतम 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
द्वितीय या बाद की दोषसिद्धि पर: अधिकतम 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

Q4. क्या महिला की स्पष्ट असहमति आवश्यक है?

हां, महिला द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा व्यक्त किए जाने के बाद भी यदि पीछा किया जाता है, तभी यह अपराध बनता है।

Q5. धारा 78 का व्यावहारिक महत्व क्या है?

यह धारा महिला उत्पीड़न, साइबर स्टॉकिंग और मानसिक प्रताड़ना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Q6. धारा 78 के अंतर्गत कौन-कौन से कृत्य अपराध हैं?

महिला के मना करने के बावजूद बार-बार उसका पीछा करना
उसे छूना या छूने का प्रयास करना
जबरदस्ती व्यक्तिगत संपर्क बनाने की कोशिश करना
महिला की इंटरनेट, ई-मेल, सोशल मीडिया या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की निगरानी करना

BNS की धारा 77 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 77 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 77 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 77? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 77 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 77 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी महिला को उस समय घूरकर देखता है, जब वह कोई निजी काम कर रही हो और उसे यह उम्मीद हो कि कोई उसे देख नहीं रहा है अथवा कोई व्यक्ति उस महिला की तस्वीर या वीडियो बनाता है, या किसी और से बनवाता है, या फिर उस तस्वीर/वीडियो को फैलाता (शेयर/प्रसारित) है, तो वह धारा 77 के अन्तर्गत कम से कम से 1 वर्ष तक का कारावास, जो 7 वर्ष तक की हो सकती है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-354C) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 77 का विवरण (Section 77 BNS)

BNS की धारा 77 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को उस समय घूरकर देखता है, जब वह कोई निजी काम कर रही हो और उसे यह उम्मीद हो कि कोई उसे देख नहीं रहा है अथवा कोई व्यक्ति उस महिला की तस्वीर या वीडियो बनाता है, या किसी और से बनवाता है, या फिर उस तस्वीर/वीडियो को फैलाता (शेयर/प्रसारित) है, तो वह धारा 77 के अन्तर्गत प्रथम बार दोषी होने पर कम से कम 1 से 3 वर्ष का कारावास और जुर्माना, दूसरी बार या अपराध दोहराने का दोषी होने पर कम से कम 3 से 7 वर्ष का कारावास और जुर्माना (Fine) से दंडित किया जा सकेगा।

बीएनएस की धारा 77 के अनुसार (BNS Section 77 in Hindi)

77. दृश्यरतिकता- जो कोई निजी कार्य में लगी हुई किसी महिला को, उन परिस्थितियों में, जिनमें वह प्रायः यह प्रत्याशा करती है कि उसे देखा नहीं जा रहा है, एकटक देखता है या उस कृत्य में लिप्त व्यक्ति या उस कृत्य में लिप्त व्यक्ति के कहने पर कोई अन्य व्यक्ति उसका चित्र खींचता है या उस चित्र को प्रसारित करता है, प्रथम दोषसिद्धि पर वह, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा और द्वितीय या पश्चात्वर्ती किसी दोषसिद्धि पर, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण 1- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "निजी कार्य" के अन्तर्गत ताकने का ऐसा कोई कृत्य आता है जो ऐसे किसी स्थान में किया जाता है, जिसके सम्बन्ध में, परिस्थितियों के अधीन, युक्तियुक्त रूप से यह प्रत्याशा की जाती है कि वहां एकांतता होगी और जहां कि पीड़िता के जननांगों, नितंबों या वक्षस्थलों को अभिदर्शित किया जाता है या केवल अधोवस्त्र से ढंका जाता है या जहां पीड़िता किसी शौचघर का प्रयोग कर रही है; या जहां पीड़िता ऐसा कोई लैंगिक कृत्य कर रही है जो ऐसे प्रकार का नहीं है जो साधारणतया सार्वजनिक तौर पर किया जाता है।
स्पष्टीकरण 2- जहां पीड़िता चित्रों या किसी अभिनय के चित्र को खींचने के लिए सहमति देती है, किन्तु अन्य व्यक्तियों को उन्हें प्रसारित करने की सहमति नहीं देती है और जहां उस चित्र या अभिनय का प्रसारण किया जाता है वहां ऐसे प्रसारण को इस धारा के अधीन अपराध माना जाएगा।

BNS की धारा 77 के अनुसार (BNS Section 77 in English)

77. Voyeurism.-Whoever watches, or captures the image of a woman engaging in a private act in circumstances where she would usually have the expectation of not being observed either by the perpetrator or by any other person at the behest of the perpetrator or disseminates such image shall be punished on first conviction with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year, but which may extend to three years, and shall also be liable to fine, and be punished on a second or subsequent conviction, with imprisonment of either description for a term which shall not be less than three years, but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Explanation 1.- For the purpose of this section, "private act" includes an act of watching carried out in a place which, in the circumstances, would reasonably be expected to provide privacy and where the victim's genitals, posterior or breasts are exposed or covered only in underwear, or the victim is using a lavatory; or the victim is doing a sexual act that is not of a kind ordinarily done in public.
Explanation 2.- Where the victim consents to the capture of the images or any act, but not to their dissemination to third persons and where such image or act is disseminated, such dissemination shall be considered an offence under this section.

बीएनएस की धारा 77 एवंम् आईपीसी की धारा 354C मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा दोनों धाराओं में समान हैं।
  • मुख्य अंतर कानून के नाम और भाषा का है।
  • बीएनएस की धारा 77, आईपीसी की धारा 354C का संशोधित और आधुनिक रूप है।
  • बीएनएस में परिभाषाएँ अधिक स्पष्ट और पीड़िता-केंद्रित हैं।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 354CBNS Section 77कानून के नाम और भाषा

“निजी कार्य” का मतलब क्या है?

निजी कार्य से आशय ऐसे काम से है, जो महिला एकांत में करती है:

  • किसी एकांत स्थान पर कर रही हो,
  • जैसे कपड़े बदलना या
  • जहां उसके गुप्त अंग, नितंब या स्तन दिखाई दे रहे हों या केवल अंतर्वस्त्र से ढके हों,
  • या वह शौचालय का उपयोग कर रही हो,
  • या कोई ऐसा लैंगिक कार्य कर रही हो जो आमतौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

पहली बार दोषी होने पर:

  • कम से कम 1 वर्ष से लेकर 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

दूसरी या उसके बाद की बार दोषी होने पर:

  • कम से कम 3 वर्ष से लेकर 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
दृश्यरतिकताकम से कम 1 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो 3 वर्ष का हो सकेगा और जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयसेशन न्यायालय
व्दितीय या पश्ताच्वर्ती दोषसिद्धकम से कम 3 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो 7 वर्ष का हो सकेगा और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 77 (BNS 77) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. धारा 77 (दृश्यरतिकता) क्या है?

यह धारा उस अपराध से संबंधित है, जिसमें कोई व्यक्ति किसी महिला को उसके निजी कार्य के दौरान घूरकर देखता है, उसकी तस्वीर/वीडियो बनाता है या उसे बिना अनुमति प्रसारित करता है।

Q2. “दृश्यरतिकता” का सरल अर्थ क्या है?

किसी महिला की निजी गतिविधियों को चोरी-छिपे देखना, ताकना या रिकॉर्ड करना और उसका दुरुपयोग करना ही दृश्यरतिकता है।

Q3. “निजी कार्य” से क्या आशय है?

ऐसे कार्य जो महिला एकांत में करती है, जैसे कपड़े बदलना, शौचालय का उपयोग करना, या कोई ऐसा निजी/लैंगिक कार्य जो सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता।

Q4. क्या केवल घूरकर देखने से भी अपराध बनता है?

हां, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर निजी स्थिति में महिला को एकटक देखता है, तो यह भी अपराध माना जाएगा।

Q5. बिना अनुमति फोटो या वीडियो बनाना क्या अपराध है?

हां, किसी महिला की निजी अवस्था में फोटो या वीडियो बनाना या बनवाना इस धारा के अंतर्गत अपराध है।

Q6. अगर महिला ने फोटो खींचने की अनुमति दी हो, तो क्या वह अपराध है?

फोटो खींचने की अनुमति होने पर अपराध नहीं बनता, लेकिन उस फोटो या वीडियो को बिना अनुमति शेयर या प्रसारित करना अपराध है।

BNS की धारा 76 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 76 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 76 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 76? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 76 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 76 के अनुसार यदि कोई पुरुष किसी महिला को कपड़े उतारने के इरादे से या उसे जबरदस्ती निर्वस्त्र करने के लिए उस पर हमला करता है, जोर-जबरदस्ती (आपराधिक बल) करता है, या किसी और से ऐसा करवाता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा, तो वह धारा 76 के अन्तर्गत कम से कम से 3 वर्ष तक का कारावास, जो 7 वर्ष तक की हो सकती है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-354B) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 76 का विवरण (Section 76 BNS)

BNS की धारा 76 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी महिला की इज्जत और मर्यादा को ठेस पहुँचाने के लिए उसे कपड़े उतारने पर मजबूर करना या ऐसा करने की कोशिश करता है, तो वह धारा 76 के अन्तर्गत 3 वर्ष तक का कारावास, जो 7 वर्ष तक का हो सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जायेगा।

बीएनएस की धारा 76 के अनुसार (BNS Section 76 in Hindi)

76. विवस्त्र करने के आशय से महिला पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग - जो कोई किसी महिला को विवस्त्र करने या निर्वस्त्र होने के लिए बाध्य करने के आशय से उस पर हमला करता है या उसके प्रति आपराधिक बल का प्रयोग करता है या ऐसे कृत्य का दुष्प्रेरण करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 76 के अनुसार (BNS Section 76 in English)

76. Assault or use of criminal force to woman with intent to disrobe.. Whoever assaults or uses criminal force to any woman or abets such act with the intention of disrobing or compelling her to be naked, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than three years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 76 एवंम् आईपीसी की धारा 354B मे अंतर

बीएनएस की धारा 76 मूल रूप से आईपीसी की धारा 354B का आधुनिक और संशोधित रूप है। दोनों में अपराध की प्रकृति और दंड लगभग समान हैं।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 354BBNS Section 76मंशा पर ज़ोर

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 3 वर्ष तक का कारावास
  • जो 7 वर्ष तक की हो सकती है
  • साथ ही जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विवस्त्र करने के आशय से महिला पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोगकम से कम 3 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो 7 वर्ष का हो सकेगा और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 76 (BNS 76) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 76 क्या है?

बीएनएस की धारा 76 महिला को विवस्त्र करने या निर्वस्त्र होने के लिए मजबूर करने के इरादे से किए गए हमले या आपराधिक बल से संबंधित अपराध को परिभाषित करती है।

Q2. क्या बीएनएस धारा 76 और आईपीसी धारा 354B में अपराध अलग है?

नहीं, दोनों धाराओं में अपराध की प्रकृति लगभग समान है। अंतर मुख्य रूप से कानून के नाम और भाषा का है।

Q3. इस अपराध में सजा क्या है?

दोषी पाए जाने पर आरोपी को न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर अधिकतम 7 वर्ष तक का कारावास और साथ में जुर्माना हो सकता है।

Q4. क्या इस धारा में महिला की सहमति का महत्व है?

यदि कृत्य महिला की इच्छा के विरुद्ध और विवस्त्र करने के आशय से किया गया है, तो यह अपराध माना जाएगा।

Q5. इस धारा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

महिलाओं की गरिमा, सम्मान और निजता की रक्षा करना तथा ऐसे गंभीर अपराधों पर सख्त दंड सुनिश्चित करना।