नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 81 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 81? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 81 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला से झूठ बोलकर या धोखा देकर यह यकीन दिलाता है कि वह कानूनन उसका पति है, जबकि वास्तव में उनसे कोई वैध विवाह नहीं हुआ है, और इसी झूठे विश्वास के आधार पर उस महिला से शारीरिक संबंध (सहवास/मैथुन) बनाता है, तो वह धारा 81 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-493) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 81 का विवरण (Section 81 BNS)
BNS की धारा 81 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को शादी का झूठा भरोसा देकर या खुद को उसका वैध पति बताकर उससे शारीरिक संबंध बनाना कानूनन अपराध है, तो वह धारा 81 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।
बीएनएस की धारा 81 के अनुसार (BNS Section 81 in Hindi)
81. विधिपूर्ण विवाह का प्रवंचना से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास - प्रत्येक पुरुष, किसी ऐसी महिला को, जो विधिपूर्वक उससे विवाहित न हो, प्रवंचना से यह विश्वास कारित करेगा कि वह विधिपूर्वक उससे विवाहित है और इस विश्वास में उस महिला से, अपने साथ सहवास या मैथुन कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
BNS की धारा 81 के अनुसार (BNS Section 81 in English)
81. Cohabitation caused by man deceitfully inducing belief of lawful marriage. Every man who by deceit causes any woman who is not lawfully married to him to believe that she is lawfully married to him and to cohabit or have sexual intercourse with him in that belief, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years and shall also be liable to fine.
बीएनएस की धारा 81 एवंम् आईपीसी की धारा 493 मे अंतर
- अपराध की परिभाषा और सजा दोनों धाराओं में समान हैं।
- बीएनएस की धारा 81, आईपीसी की धारा 493 का आधुनिक और पुनर्गठित रूप है।
- मुख्य अंतर कानून का नाम और भाषा का है, जिससे प्रावधान अधिक स्पष्ट हो गया है।
- बीएनएस लागू होने के बाद नए मामलों में धारा 81 और पुराने मामलों में धारा 493 लागू होगी।
| IPC के तहत धारा | BNS के तहत धारा | प्रमुख बदलाव (Major Changement) |
|---|---|---|
| IPC 493 | BNS Section 81 | जुर्माना अनिवार्य |
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
- 10 वर्ष के लिये कारावास
- और जुर्माना भी
जमानत (Bail) का प्रावधान
| अपराध | सजा | अपराध श्रेणी | जमानत | विचारणीय |
|---|---|---|---|---|
| पुरूष व्दारा महिला को, जो उससे विधिपूर्वक विवाहित नही है, प्रवचना से विश्वास कारित करके कि वह उससे विधिपूर्वक विवाहित है, उस विश्वास मे उससे सहवास करना। | 10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना | गैर-संज्ञेय | गैर-जमानतीय | प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट। |
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 81 (BNS 81) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. बीएनएस की धारा 81 क्या है?
कोई पुरुष किसी महिला को धोखे से यह विश्वास दिलाता है कि वह उसका वैध पति है, जबकि वास्तव में उनसे कोई कानूनी विवाह नहीं हुआ होता, और इसी विश्वास के आधार पर उससे शारीरिक संबंध (सहवास/मैथुन) बनाता है।
Q2. इस धारा के अंतर्गत अपराध कब बनता है?
जब तीन बातें एक साथ हों— पुरुष और महिला के बीच कोई विधिपूर्वक विवाह नहीं हुआ हो, या पुरुष द्वारा प्रवंचना (धोखा) देकर विवाह का झूठा विश्वास दिलाया गया हो, या उसी झूठे विश्वास के कारण महिला ने सहवास के लिए सहमति दी हो।
Q3. इस अपराध में सजा क्या है?
दोषी पाए जाने पर आरोपी को 10 वर्ष तक का कारावास और साथ में जुर्माना हो सकता है।
Q4. क्या इस धारा में न्यूनतम सजा निर्धारित है?
नहीं, इस धारा में न्यूनतम सजा तय नहीं की गई है, केवल अधिकतम सजा का प्रावधान है।
Q5. क्या यह अपराध महिला की सहमति से होने पर भी अपराध माना जाएगा?
हां। यदि सहमति धोखे और झूठे वैवाहिक विश्वास पर आधारित है, तो वह वैध सहमति नहीं मानी जाएगी।
Q6. इस धारा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
महिलाओं को धोखे से बनाए गए शारीरिक संबंधों से बचाना और उनके सम्मान व अधिकारों की रक्षा करना।