नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 69 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 69? साथ ही हम आपको BNS की धारा 69 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 में यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलकर/धोखा देकर किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह अपराध है, भले ही वह कृत्य बलात्कार की कानूनी परिभाषा में न आता हो, तो वह धारा 69 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। यह BNS की धारा 69 को नया जोड़ा गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 69 का विवरण (Section 69 BNS)
BNS की धारा 69 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलकर (जैसे शादी करने का वादा, जबकि शादी करने का इरादा ही न हो),या धोखा देकर नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन, प्रमोशन का लालच या अपनी पहचान छिपाकर शादी के लिए प्रेरित करना, इन सब के ज़रिये महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार करता है, भले ही वह कृत्य बलात्कार की कानूनी परिभाषा में न आता हो, तो वह धारा 69 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा। यह नये कानून के तहत जोड़ा गया है।
बीएनएस की धारा 69 के अनुसार (BNS Section 69 in Hindi)
69. प्रवंचनापूर्ण साधनों, आदि का प्रयोग करके मैथुन- जो कोई, प्रवंचनापूर्ण साधनों द्वारा या किसी ऐसी अवधि महिला को विवाह करने का वचन देकर, उसे पूरा करने के किसी आशय के बिना, उसके साथ मैथुन करता है, ऐसा मैथुन बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के ऐसी के कारावास से जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा। स्पष्टीकरण- "प्रवंचनापूर्ण साधनों" में नियोजन या प्रोन्नति, या पहचान छिपाकर विवाह करने के लिये उत्प्रेरण या उनका मिथ्या वचन सम्मिलित है।
BNS की धारा 69 के अनुसार (BNS Section 69 in English)
69. Sexual intercourse by employing deceitful means, etc.- Whoever, by deceitful means or by making promise to marry to a woman without any intention of fulfilling the same, has sexual intercourse with her, such soul intercourse not amounting to the offence of rape, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten yeun and shall also be liable to fine. Explanation.- "deceitful means" shall include inducement for, or fe promise of employment or promotion, or marrying by suppressing identity.
यह अपराध कब बनता है?
जब कोई व्यक्ति—
झूठा वादा करके (जैसे शादी करने का वादा, जबकि शादी करने का इरादा ही न हो), या
धोखे के तरीके अपनाकर
नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन, प्रमोशन का लालच या
अपनी पहचान छिपाकर शादी के लिए प्रेरित करना।
इत्यादि उपायों का उपयोग करके किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, वह बीएनएस की धारा 69 के अन्तर्गत दंडित होगा।
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
अधिकतम 10 साल तक
और इसके साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।
जमानत (Bail) का प्रावधान
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
प्रवंचनापूर्ण उपायों, आदि का उपयोग करके मैथुन करना।
कारावास जो 10 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 69(BNS 69) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. “प्रवंचनापूर्ण साधन” का क्या अर्थ है?
प्रवंचनापूर्ण साधन में शामिल हैं: शादी करने का झूठा वादा, नौकरी या प्रमोशन दिलाने का झूठा आश्वासन या अपनी पहचान छिपाकर शादी के लिए प्रेरित करना कोई भी ऐसा झूठ जिससे महिला को शारीरिक संबंध के लिए तैयार किया जाए
Q2. क्या यह अपराध बलात्कार माना जाता है?
नहीं। धारा 69 स्पष्ट करती है कि यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन फिर भी गंभीर अपराध है।
Q3. क्या महिला की सहमति होने पर भी अपराध बन सकता है?
हाँ। यदि सहमति धोखे या झूठे वादे के आधार पर ली गई हो, तो वह वैध सहमति नहीं मानी जाएगी।
Q4. इस धारा में शिकायत कौन कर सकता है?
इस अपराध की शिकायत पीड़ित महिला स्वयं या परिवार कर सकता है।
Q5.क्या यह अपराध जमानती है?
आमतौर पर इसे गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है। जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 68 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 68? साथ ही हम आपको BNS की धारा 68 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 68 में यदि कोई व्यक्ति अपने पद पर होते हुये, अधिकार या भरोसे के रिश्ते का गलत फायदा उठाकर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर करता है, बहकाता है या दबाव डालता है, और यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, तो वह दंड/जुर्माने दोनो से कम से कम 5 वर्ष या अधिक से अधिक 10 वर्ष तक के लिये कठोर कारावास से दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 68 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने दोनो से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376C) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 68 का विवरण (Section 68 BNS)
BNS की धारा 68 के अनुसार, यदि अगर कोई लोक सेवक (जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह, महिला या बाल संस्था) अपने पद मे होते हुये, अधिकार या भरोसे के रिश्ते (जैसे शिक्षक, कोच, धार्मिक गुरु, अभिभावक जैसी स्थिति वाला व्यक्ति) या अस्पताल का स्टाफ या प्रबंधन (डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, मैनेजमेंट आदि) गलत फायदा उठाकर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसे मजबूर करता है, बहकाता है या दबाव डालता है, और यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता तो वह धारा 68 के अन्तर्गत कम से कम 5 वर्ष का कठोर कारावास, जो 10 वर्ष तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा।
बीएनएस की धारा 68 के अनुसार (BNS Section 68 in Hindi)
68. प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन जो कोई- (क) प्राधिकार की किसी स्थिति या वैश्वासिक सम्बन्ध रखते हुए। या (ख) लोक सेवक होते हुए, या (ग) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान का या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबन्धक होते हुए या (घ) अस्पताल के प्रबन्धतन्त्र या किसी अस्पताल का कर्मचारिवृंद होते हुए, ऐसी किसी महिला की, जो उसकी अभिरक्षा में है या उसके भारसाधन के अधीन है या परिसर में उपस्थित है, अपने साथ मैथुन करने हेतु, जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, उत्प्रेरित या विसुब्ध करने के लिए ऐसी स्थिति या वैश्वासिक सम्बन्ध का दुरुपयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास में, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा। स्पष्टीकरण 1- इस धारा में "मैथुन" से धारा 63 के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई भी कृत्य अभिप्रेत होगा। स्पष्टीकरण 2- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 63 का स्पष्टीकरण 1 भी लागू होगा। स्पष्टीकरण 3- किसी कारागार, प्रतिप्रेषण-गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के सम्बन्ध में "अधीक्षक" के अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति है, जो ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषण-गृह, स्थान या संस्था में ऐसा कोई पद धारण करता है, जिसके आधार पर वह उसके अंतःवासियों पर किसी प्राधिकार या नियन्त्रण का प्रयोग कर सकता है। स्पष्टीकरण 4- "अस्पताल" और "महिलाओं या शिशुओं की संस्था" पदों का क्रमशः वही अर्थ होगा, जो धारा 64 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के खंड (ख) और खंड (घ) में उनका है।
BNS की धारा 68 के अनुसार (BNS Section 68 in English)
68. Sexual intercourse by a person in authority.- Whoever, being- (a) in a position of authority or in a fiduciary relationship; or (b) a public servant; or (c) superintendent or manager of a jail, remand home or other place of custody established by or under any law for the time being in force, or a women's or children's institution; or (d) on the management of a hospital or being on the staff of a hospital, abuses such position or fiduciary relationship to induce or seduce any woman either in his custody or under his charge or present in the premises to have sexual intercourse with him, such sexual intercourse not amounting to the offence of rape, shall be punished with rigorous imprisonment of either description for a term which shall not be less than five years, but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine. Explanation 1.- In this section, "sexual intercourse" shall mean any of the acts mentioned in clauses (a) to (d) of Section 63. Explanation 2.- For the purposes of this section, Explanation 1 to Section shall also be applicable. Explanation 3.- "Superintendent", in relation to a jail, remand home of other place of custody or a women's or children's institution, includes a pen virtue of which such person can exercise any authority or control over holding any other office in such jail, remand home, place or institutionby inmates. Explanation 4.- The expressions "hospital" and "women's or child institution" shall respectively have the same meaning as in Clauses (b) and (d) of the Explanation to sub-section (2) of Section 64.
किन-किन पर यह धारा लागू होती है?
यह धारा उन लोगों पर लागू होती है जो अपनी पावर या जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हैं, जैसे—
1.अधिकार या भरोसे की स्थिति में व्यक्ति –
(जैसे शिक्षक, कोच, धार्मिक गुरु, अभिभावक जैसी स्थिति वाला व्यक्ति)
2.लोक सेवक
(सरकारी अधिकारी/कर्मचारी)
3.जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह, महिला या बाल संस्था के
अधीक्षक
प्रबंधक
या ऐसा कोई व्यक्ति जिसके पास वहां रहने वालों पर नियंत्रण हो
4.अस्पताल का स्टाफ या प्रबंधन
(डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, मैनेजमेंट आदि)
अपराध कब माना जाएगा?
जब ऊपर बताए गए व्यक्ति—
अपनी पद-शक्ति या भरोसे का गलत इस्तेमाल करें, और
उस महिला से, जो उनकी निगरानी, देखरेख, नियंत्रण या परिसर में मौजूद हो,
शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालें, बहकाएँ या मजबूर करें।
बीएनएस की धारा 68 एवंम् आईपीसी की धारा 376C मे अंतर
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376C और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 68 दोनों धाराओं का उद्देश्य उन मामलों को दंडित करना है, जहाँ कोई व्यक्ति अपने पद, अधिकार या विश्वास के संबंध का दुरुपयोग कर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाता है, और यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। अब मुआवजा अनिवार्य है, और नये बीएनएस 68 में न केवल लोक सेवक, बल्कि कोई भी व्यक्ति जो अधिकार, प्रभुत्व या भरोसे की स्थिति में हो।
IPC के तहत धारा
BNS के तहत धारा
प्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376C
BNS Section 68
मुआवजा अनिवार्य
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
कम से कम 5 साल का कठोर कारावास,
ज़्यादा से ज़्यादा 10 साल तक की कठोर कारावास,
और इसके साथ जुर्माना भी लग सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
प्राधिकार, आदि मे किसी व्यक्ति व्दारा मैथुन
कम से कम 5 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो 10 वर्ष तक का कारावास हो सकेगा और जुर्माना
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 68(BNS 68) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. यह धारा किन लोगों पर लागू होती है?
यह धारा निम्न पर लागू होती है:लोक सेवक, शिक्षक, कोच, धार्मिक/संस्थागत पदाधिकारी, जेल, रिमांड होम, संरक्षण गृह के अधिकारी, महिला या बाल संस्था के अधीक्षक/प्रबंधक, अस्पताल के डॉक्टर, नर्स, स्टाफ या प्रबंधन कोई भी व्यक्ति जो अधिकार या भरोसे की स्थिति में हो।
Q2. महिला की कौन-सी स्थिति में यह धारा लागू होगी?
जब महिला:आरोपी की अभिरक्षा या देखरेख में हो, या आरोपी के नियंत्रण/भारसाधन में हो, या ऐसे परिसर में उपस्थित हो जहाँ आरोपी का अधिकार या नियंत्रण हो।
Q3. क्या यह अपराध बलात्कार माना जाता है?
नहीं। यह धारा उन मामलों के लिए है जो बलात्कार की कानूनी परिभाषा में नहीं आते, लेकिन फिर भी गंभीर यौन शोषण होते हैं।
Q4. क्या यह अपराध समझौते (Compromise) से समाप्त किया जा सकता है?
नहीं। धारा 68 एक गंभीर, संज्ञेय और गैर-समझौतायोग्य अपराध है। समझौते से मामला समाप्त नहीं होता।
Q5. क्या इस धारा में सजा के साथ मुआवज़ा भी मिल सकता है?
हाँ। न्यायालय जुर्माने के अतिरिक्त पीड़िता को मुआवज़ा देने का आदेश भी दे सकता है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 67 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 67? साथ ही हम आपको BNS की धारा 67 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 67 में यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी से अलग रहने के दौरान उसकी सहमति के बिना दुष्कर्म (Rape) करता है और अपनी पत्नी से अलग रह रहा हो (चाहे अदालत के आदेश से या किसी और कारण से) तो वह दंड/जुर्माने दोनो से कम से कम 2 वर्ष या अधिक से अधिक 7 वर्ष वर्ष के लिये दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 67 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376B) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 67 का विवरण (Section 67 BNS)
BNS की धारा 67 के अनुसार, यदि अगर कोई पति, अपनी पत्नी से अलग रह रहा हो (चाहे अदालत के आदेश से या किसी और कारण से), और वह पत्नी की मर्ज़ी (सम्मति) के बिना उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो यह धारा 67 के अन्तर्गत कम से कम 2 वर्ष का कारावास, जो 7 वर्ष तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा। यह कानून अलग रह रही पत्नी की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।
बीएनएस की धारा 67 के अनुसार (BNS Section 67 in Hindi)
67. पृथक्करण के दौरान पति द्वारा अपनी पली के साथ मैथुन जो कोई, अपनी पत्नी के साथ, उसकी सम्मति के बिना मैथुन करेगा, जो पृथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या अन्यथा, उससे पृथक रह रही है, यह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की ही सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा। स्पष्टीकरण- इस भारा में, "मैथुन" से धारा 63 के खण्ड (क) से खण्ड (घ) में वर्णित कोई भी कृत्य अभिप्रेत है।
BNS की धारा 67 के अनुसार (BNS Section 67 in English)
67. Sexual intercourse by husband upon his wife during separation.-Whoever has sexual intercourse with his own wife, who is living separately, whether under a decree of separation or otherwise, without her consent, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than two years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine. Explanation- In this section, "sexual intercourse" shall mean any of the acts mentioned in clauses (a) to (d) of Section 63.
बीएनएस की धारा 67 एवंम् आईपीसी की धारा 376B मे अंतर
बीएनएस की धारा 67 IPC की धारा 376B के स्थान पर वर्तमान मे बीएनएस की धारा 67 लागू होती है। इसमे मुख्यतः मुआवजा अनिवार्य कर दिया गया है, पहले भी मुआवजा था, लेकिन सीमित और यह कानून पति-पत्नी अलग रह रहे पत्नी को अधिक सुरक्षा प्रदान करता है। पति–पत्नी का अलग-अलग रहना ज़रूरी शर्त है।
IPC के तहत धारा
BNS के तहत धारा
प्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376B
BNS Section 67
मुआवजा अनिवार्य (यह कानून अलग रह रही पत्नी की अधिक सुरक्षा प्रदान करता है।
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
कम से कम 2 साल की जेल,
ज़्यादा से ज़्यादा 7 साल तक की जेल,
और इसके साथ जुर्माना भी लग सकता है।
जमानत (Bail) का प्रावधान
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
पति व्दारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्करण के दौरान मैथुन
कम से कम 2 वर्ष के लिये कारावास, किन्तु जो 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
संज्ञेय
जमानतीय
सेशन न्यायालय
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 67(BNS 67) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. धारा 67 किस बारे में है?
यह धारा उस स्थिति से संबंधित है जब पति और पत्नी अलग-अलग रह रहे हों और पति पत्नी की बिना सहमति उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
Q2. “पृथक्करण” का क्या मतलब है?
पृथक्करण का मतलब है पति-पत्नी का अलग रहना। यह अलगाव:कोर्ट की डिक्री (Judicial Separation) से, या आपसी विवाद, घरेलू कारणों से भी हो सकता है।
Q3. क्या हर पति-पत्नी के बीच बिना सहमति संबंध इस धारा में आएगा?
नहीं। यह धारा तभी लागू होगी, जब पति-पत्नी अलग रह रहे हों, और पत्नी की सहमति न हो।
Q4. क्या पत्नी की सहमति होने पर अपराध बनेगा?
नहीं। अगर पत्नी स्वेच्छा से सहमत है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
Q5. क्या यह धारा पत्नी की सुरक्षा के लिए बनाई गई है?
हाँ। इसका उद्देश्य अलग रह रही पत्नी की शारीरिक स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना है।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 66 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 66? साथ ही हम आपको BNS की धारा 66 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 66 में यदि कोई व्यक्ति किसी महिला से दुष्कर्म (Rape) करता है और ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति होती है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या वह स्थायी शारीरिक/मानसिक विकलांगता (Persistent Vegetative State सहित) की स्थिति में पहुँच जाती है, तो वह दंड/जुर्माने दोनो से या आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 66 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376A के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 66 का विवरण (Section 65 BNS)
BNS की धारा 66 के अनुसार, यदि कोई महिला के साथ बलात्संग (Rape) जैसे घृणित अपराध करता है ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति होती है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या वह स्थायी शारीरिक/मानसिक विकलांगता (Persistent Vegetative State सहित) की स्थिति में पहुँच जाती है, तो यह धारा 66 कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा, इसके अलावा आजीवन कारावास तक जुर्माने या मृत्युदंड तक हो सकती है।
बीएनएस की धारा 66 के अनुसार (BNS Section 66 in Hindi)
66. पीड़िता की मृत्यु या सतत् विकृतशील दशा कारित करने के लिए दण्ड जो कोई, धारा 64 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन दण्डनीय कोई अपराध करता है और ऐसे अपराध के दौरान ऐसी कोई क्षति पहुँचाता है, जिससे उस महिला की मृत्यु कारित हो जाती है या जिसके कारण उस स्त्री की दशा सतत् विकृतशील हो जाती है, तो वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी या मृत्युदण्ड से दंडित किया जाएगा।
(BNS) बीएनएस की धारा 66 के अनुसार (BNS Section 66 in English)
66. Punishment for causing death or resulting in persistent vegetative state of victim. Whoever, commits an offence punishable under sub-section (1) or sub-section (2) of Section 64 and in the course of such commission inflicts an injury which causes the death of the woman or causes the woman to be in a persistent vegetative state, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, or with death.
बीएनएस की धारा 66 एवंम् आईपीसी की धारा 376A मे अंतर
बीएनएस की धारा 66दुष्कर्म (बलात्कार) के परिणामस्वरूप पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी शारीरिक/मानसिक विकलांगता (Persistent Vegetative State सहित) की स्थिति में पहुँच जाती है। IPC की धारा 376(A) के स्थान पर वर्तमान मे बीएनएस की धारा 66 लागू होती है। इसमे मुख्यतः मुआवजा अनिवार्य कर दिया गया है, पहले भी मुआवजा था, लेकिन सीमित।
IPC के तहत धारा
BNS के तहत धारा
प्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376(A)
BNS Section 66
मुआवजा अनिवार्य
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
आजीवन कारावास (पूरे जीवनकाल तक), या
मृत्युदंड (Death Penalty)
जुर्माना (Fine):
अदालत द्वारा अनिवार्य रूप से जुर्माना लगाया जा सकता है
जुर्माने की राशि का उपयोग:पीड़िता के इलाज (Medical Treatment)
पुनर्वास (Rehabilitation)
मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को मुआवज़ा देने हेतु किया जाता है
जमानत (Bail) का प्रावधान
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
बलात्संग का अपराध करने और ऐसी क्षति पहुचाने वाले वाला व्यक्ति, जिससे महिला की मृत्यु या विकृतशील दशा हो जाती है
कम से कम 20 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्माना या मृत्युदंड
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 66(BNS 66) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. धारा 66 कब लागू होती है?
जब दुष्कर्म के कारण पीड़िता की मृत्यु हो जाए या स्थायी विकलांगता हो जाए।
Q2. इस धारा के अंतर्गत न्यूनतम सजा क्या है?
आजीवन कारावास, जिसका अर्थ है पूरे जीवनकाल तक कारावास।
Q3. अधिकतम सजा क्या दी जा सकती है?
मृत्युदंड (Death Penalty), जो अदालत अपराध की गंभीरता के आधार पर दे सकती है।
Q4. क्या जुर्माना लगाना अनिवार्य है?
हाँ। बीएनएस की धारा 66 में जुर्माना अनिवार्य रूप से लगाया जा सकता है, और इसका स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित है।
Q5. क्या पीड़िता की सहमति से सजा कम हो सकती है?
नहीं। ऐसे मामलों में सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 65? साथ ही हम आपको BNS की धारा 65 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 में यदि कोई व्यक्ति 16 वर्ष से कम आयु अथवा 12 वर्ष के कम आयु की किसी महिला से दुष्कर्म (Rape) करता है तो वह दंड/जुर्माने दंडित किया जायेगा, तो वह BNS की धारा 65 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376(3) एवंम् IPC-376AB ) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 65 का विवरण (Section 65 BNS)
BNS की धारा 65 के अनुसार, यदि कोई सोलह वर्ष से कम आयु की किसी महिला के साथ बलात्संग (Rape) जैसे घृणित अपराध का दोषी पाया जाता है, तो यह धारा 65(1) कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा, इसके अलावा बारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला के साथ बलात्संग (Rape) जैसे घृणित अपराध का दोषी पाया जाता है, तो यह धारा 65(2) कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास, जुर्माने या मृत्युदंड तक हो सकती है।
बीएनएस की धारा 65 के अनुसार (BNS Section 65 in Hindi)
65. कतिपय मामलों में बलात्संग के लिए दण्ड- (1) जो कोई, सोलह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा:
परन्तु ऐसा जुर्माना, पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और उसके पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।
(2) जो कोई, बारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से बलात्संग करता है, तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल का कारावास अभिप्रेत है, तक की हो सकेगी और जुर्माने से, या मृत्युदण्ड से दंडित किया जाएगा :
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और उसके पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।
(BNS) बीएनएस की धारा 65 के अनुसार (BNS Section 65 in English)
65. Punishment for rape in certain cases- (1) Whoever, commits rape on a woman under sixteen years of age shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, and shall also be liable to fine :
Provided that such fine shall be just and reasonable to meet the medical expenses and rehabilitation of the victim :
Provided further that any fine imposed under this sub-section shall be paid to the victim.
(2) Whoever, commits rape on a woman under twelve years of age shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, and with fine or with death:
Provided that such fine shall be just and reasonable to meet the medical expenses and rehabilitation of the victim:
Provided further that any fine imposed under this sub-section shall be paid to the victim
बीएनएस की धारा 65 एवंम् आईपीसी की धारा 376(3)/376AB मे अंतर
बीएनएस की धारा 65 16 वर्ष से कम आयु की महिला अथवा 12 वर्ष से कम आयु की महिला से बलात्संग जैसे गम्भीर अपराध पर सजा का प्रावधान करती है, IPC की धारा 376(3) एवंम् धारा 376AB के स्थान पर वर्तमान मे बीएनएस की धारा 65 लागू होती है। इसमे मुख्यतः मुआवजा अनिवार्य कर दिया गया है, और IPC की अलग-अलग धाराओं को एक ही में जोड़ दिया गया है।
IPC के तहत धारा
BNS के तहत धारा
प्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376(3): 16 वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिये दंड
BNS Section 65(1)
मुआवजा अनिवार्य
IPC 376AB: 12 वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिये दंड
BNS Section 65(2)
मुआवजा अनिवार्य
धारा 65(1) – 16 वर्ष से कम आयु की महिला से दुष्कर्म के लिये सजा
यदि कोई व्यक्ति दुष्कर्म का दोषी पाया जाता है, तो उसे:
कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास
जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
साथ में जुर्माना (Fine) भी लगाया जा सकता है।
(जुर्माना अनिवार्य) जुर्माने की राशि पीड़िता के पुनर्वास हेतु
जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवज़े के रूप में दी जा सकती है।
पीड़िता की सहमति (Consent) का कोई महत्व नहीं है
आरोपी की मंशा या परिस्थिति से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती
धारा 65(2) – 12 वर्ष से कम आयु की महिला से दुष्कर्म के लिये सजा
कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास
जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है या मृत्युदंड।
साथ में जुर्माना (Fine) भी लगाया जा सकता है।
(जुर्माना अनिवार्य) जुर्माने की राशि पीड़िता के पुनर्वास हेतु
जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवज़े के रूप में दी जा सकती है।
पीड़िता की सहमति (Consent) का कोई महत्व नहीं है
आरोपी की मंशा या परिस्थिति से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
कम से कम 20 वर्ष का कठोर कारावास
आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
आजीवन कारावास या मृत्यु दंड
जमानत (Bail) का प्रावधान
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
65(1) सोलह वर्ष से कम आयु की स्त्री के साथ बलात्संग करने वाला व्यक्ति
कम से कम 20 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्माना
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
65(2) बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री के साथ बलात्संग करने वाला व्यक्ति
कम से कम 20 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्माना या मृत्युदंड
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 65(BNS 65) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: क्या 16 वर्ष से कम आयु की लड़की की सहमति मान्य है?
नहीं। कानूनन यह अपराध ही माना जाएगा।
Q2: क्या 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची की सहमति मान्य है?
बिल्कुल नहीं। कानून के अनुसार यह स्वतः अपराध है।
Q3: क्या ऐसे मामलों में समझौता किया जा सकता है?
नहीं। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।
Q4: क्या आरोपी को जमानत मिल सकती है?
सामान्यतः नहीं, क्योंकि अपराध अत्यंत गंभीर है।
Q5: इस अपराध के लिए क्या सजा है?
आजीवन कारावास, या मृत्युदंड (Death Penalty) साथ में जुर्माना, जो पीड़िता के इलाज व पुनर्वास हेतु दिया जाता है।
Q6: क्या इस मामले में समझौता किया जा सकता है?
नहीं। यह अपराध असमझौता योग्य (Non-Compoundable) है।
Q7: क्या ऐसे मामलों की सुनवाई जल्दी होती है?
हाँ। ऐसे मामलों में सामान्यतः फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रावधान है।
Q8: इस धारा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षा, दोषियों को कठोर दंड, और समाज में शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) सुनिश्चित करना।
नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 64? साथ ही हम आपको BNS की धारा 64 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 में दुष्कर्म (Rape) के लिये दंड/जुर्माने को परिभाषित करती है। यह धारा बताती है कि किन परिस्थितियों में किसी पुरुष द्वारा किसी स्त्री के साथ किया गया यौन कृत्य दुष्कर्म (Rape) करता है। यह धारा बलात्संग के लिए दंड (Punishment for Rape) को परिभाषित करती है, जो व्यक्ति बलात्संग जैसे घृणित अपराध को अंजाम देता हैं, तो वह BNS की धारा 64 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376) के स्थान पर लागू किया गया है।
Important Highlights
बीएनएस की धारा 64 का विवरण (Section 64 BNS)
BNS की धारा 64 के अनुसार, यदि कोई पुरूष किसी स्त्री के साथ बलात्संग (Rape) जैसे घृणित अपराध का दोषी पाया जाता है, तो यह धारा 64 कम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा।
बीएनएस की धारा 64 के अनुसार (BNS Section 64 in Hindi)
64. बलात्संग के लिए दण्ड- (1) जो कोई, उपधारा (2) में उपबंधित मामलों के सिवाय, बलात्संग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम को नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा। (2) जो कोई, - (क) पुलिस अधिकारी होते हुए- (i) उस पुलिस थाने की सीमाओं के भीतर, जिसमें ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त है, बलात्संग करता है; या (ii) किसी भी थाने के परिसर में बलात्संग करता है; या (ii) ऐसे पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में या ऐसे पुलिस अधिकारी के अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में, किसी महिला से बलात्संग करता है; या (ख) लोक सेवक होते हुए, ऐसे लोक सेवक की अभिरक्षा में या ऐसे लोक सेवक के अधीनस्थ किसी लोक सेवक की अभिरक्षा में की किसी महिला से बलात्संग करता है; या (ग) केन्द्रीय या किसी राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र में अभिनियोजित सशस्त्र बलों का सदस्य होते हुए, उस क्षेत्र में बलात्संग करता है; या (घ) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान के या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में होते हुए, ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषण गृह, स्थान या संस्था के किसी अंतःवासी से बलात्संग करता है; या (ङ) किसी अस्पताल के प्रबंधतंत्र या कर्मचारिवृंद में होते हुए, उस अस्पताल में किसी महिला से बलात्संग करता है; या (च) महिला का नातेदार, संरक्षक या उसका अध्यापक या उसके प्रति विश्वास या प्राधिकार की हैसियत में का कोई व्यक्ति होते हुए, उस महिला से बलात्संग करता है; या (छ) सांप्रदायिक या पंथीय हिंसा के दौरान बलात्संग करता है; या (ज) किसी महिला से यह जानते हुए कि वह गर्भवती है, बलात्संग करता है; या (झ) उस महिला से, जो सम्मति देने में असमर्थ है, बलात्संग करता है; या (ञ) किसी महिला पर नियंत्रण या प्रभाव रखने की स्थिति में होते हुए, उस महिला से बलात्संग करता है; या (ट) मानसिक या शारीरिक असमर्थता से ग्रसित किसी महिला से बलात्संग करता है; या (ठ) बलात्संग करते समय किसी महिला को गम्भीर शारीरिक अपहानि कारित करता है या अपंग बनाता है या विदूषित करता है, या उसके जीवन को संकटापन्न करता है; या (ड) उसी महिला से बार-बार बलात्संग करता है, तो वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुमनि का भी दायी होगा। स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए- (क) "सशस्त्र बल" से नौसेना, सेना और वायु सेना अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन गठित सशस्त्र बलों का, कोई सदस्य भी है, जिसमें ऐसे अर्धसैनिक बल और कोई सहायक बल भी सम्मिलित हैं, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के नियंत्रणाधीन हैं; (ख) "अस्पताल" से अस्पताल का अहाता अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत किसी ऐसी संस्था का अहाता भी है, जो स्वास्थ्य लाभ कर रहे व्यक्तियों को या चिकित्सीय देखरेख या पुनर्वास की अपेक्षा रखने वाले व्यक्तियों के प्रवेश और उपचार करने के लिए है; (ग) "पुलिस अधिकारी" का बही अर्थ होगा जो पुलिस अधिनियम, 1861 (1861 का 5) के अधीन "पुलिस" पद में उसका है; (घ) "महिलाओं या शिशुओं की संस्था" से ऐसी संस्था अभिप्रेत है चाहे वह अनाथालय या उपेक्षित महिलाओं या शिशुओं के लिए घर या विधवा आश्रम या किसी अन्य नाम से ज्ञात कोई संस्था हो. जो महिलाओं और शिशुओं को ग्रहण करने और उनकी देखभाल करने के लिए स्थापित और अनुरक्षित है।
(BNS) बीएनएस की धारा 64 के अनुसार (BNS Section 64 in English)
64. Punishment for rape- (1) Whoever, except in the cases provided for in either description for a term which shall not be less than ten years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine. (2) Whoever,- (a) being a police officer, commits rape,- (i) within the limits of the police station to which such police officer is appointed; or (ii) in the premises of any station house; or (iii) on a woman in such police officer's custody or in the custody of a police officer subordinate to such police officer; or (b) being a public servant, commits rape on a woman in such public such public servant; or servant's custody or in the custody of a public servant subordinate to (c) being a member of the armed forces deployed in an area by the Central Government or a State Government commits rape in such area; or (d) being on the management or on the staff of a jail, remand home or other place of custody established by or under any law for the time being in force or of a women's or children's institution, commits rape on any inmate of such jail, remand home, place or institution; or (e) being on the management or on the staff of a hospital, commits rape on a woman in that hospital; or (f) being a relative, guardian or teacher of, or a person in a position of trust or authority towards the woman, commits rape on such woman; or (g) commits rape during communal or sectarian violence; or (h) commits rape on a woman knowing her to be pregnant; or (i) commits rape, on a woman incapable of giving consent; or (j) being in a position of control or dominance over a woman, commits rape on such woman; or (k) commits rape on a woman suffering from mental or physical disability; or (l) while committing rape causes grievous bodily harm or maims or disfigures or endangers the life of a woman; or (m) commits rape repeatedly on the same woman, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, and shall also be liable to fine. Explanation- For the purposes of this sub-section,- (a) "armed forces" means the naval, army and air forces and includes any member of the Armed Forces constituted under any law for the time being in force, including the paramilitary forces and any auxiliary forces that are under the control of the Central Government or the State Government; (b) "hospital" means the precincts of the hospital and includes the precincts of any institution for the reception and treatment of persons during convalescence or of persons requiring medical attention or rehabilitation; (c) "police officer" shall have the same meaning as assigned to the expression "police" under the Police Act, 1861 (5 of 1861); (d) "women's or children's institution" means an institution, whether called an orphanage or a home for neglected women or children or a widow's home or an institution called by any other name, which is established and maintained for the reception and care of women or children.
बीएनएस की धारा 64 एवंम् आईपीसी की धारा 376 मे अंतर
बीएनएस की धारा 64 बलात्संग जैसे गम्भीर अपराध पर सजा का प्रावधान करती है, जहां BNS में इसे बढ़ाकर 10 वर्ष कर दिया गया, जिसे अदालत भी कम नहीं कर सकती है, और अधिकतम् आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडित किया जायेगा।
आईपीसी की धारा (IPC Section 376)
बीएनएस की धारा (BNS Section 64)
प्रमुख बदलाव (Major Changement)
7 वर्ष
10 वर्ष
न्यूनतम् सजा
आजीवन कारावास
आजीवन / मृत्युदंड
अधिकतम् सजा
सीमित
अनिवार्य
पीडित मुआवजा
धारा 64(1) – सामान्य दुष्कर्म की सजा
यदि कोई व्यक्ति दुष्कर्म का दोषी पाया जाता है, तो उसे:
कम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास
जो आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
साथ में जुर्माना (Fine) भी लगाया जा सकता है।
जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवज़े के रूप में दी जा सकती है।
धारा 64(2) – गंभीर परिस्थितियों में दुष्कर्म
यदि दुष्कर्म निम्न परिस्थितियों में किया गया हो, तो सजा और अधिक कठोर होगी:
अपराधी यदि हो:
पुलिस अधिकारी
सरकारी कर्मचारी
जेल/रिमांड होम का अधिकारी
अस्पताल या सुधार गृह का कर्मचारी
शिक्षक / संरक्षक / विश्वास की स्थिति में व्यक्ति
या अपराध हुआ हो:
हिरासत (Custody) में
सामूहिक दुष्कर्म
नाबालिग या असहाय महिला के साथ
अधिकतम् आजीवन कारावास या मृत्यु दंड (कुछ विशेष मामलों में) साथ ही जुर्माना जो पीडिता को मुआवजे के रूप मे दी जायेगीं।
जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान
कम से कम 10 वर्ष का कठोर कारावास
आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
आजीवन कारावास या मृत्यु दंड (कुछ विशेष मामलों में)
जमानत (Bail) का प्रावधान
भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(BNS 64) अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है यह अपराध गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत इतनी आसानी से नही मिल सकता है।
अपराध
सजा
अपराध श्रेणी
जमानत
विचारणीय
बलात्संग
कम से कम 10 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्माना
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
64(2) – गंभीर परिस्थितियों में दुष्कर्म
कम से कम 10 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्माना
संज्ञेय
गैर-जमानतीय
सेशन न्यायालय
हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 64(BNS 64) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्या धारा 64 अपने आप लगती है?
नहीं, पहले धारा 63 के तहत अपराध सिद्ध होना आवश्यक है।
Q2. क्या जुर्माना देना जरूरी है?
हाँ, अधिकतर मामलों में जुर्माना अनिवार्य है।
Q3. हाँ, अधिकतर मामलों में जुर्माना अनिवार्य है।
हाँ, अधिकतर मामलों में जुर्माना अनिवार्य है।
Q4. क्या धारा 64 में जमानत मिल सकती है?
सामान्यतः नहीं। यह गंभीर और संज्ञेय अपराध है, जमानत केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों में उच्च न्यायालय द्वारा दी जा सकती है।
Q5. क्या धारा 64 में समझौता (Compromise) मान्य है?
नहीं। दुष्कर्म गैर-समझौतायोग्य (Non-Compoundable) अपराध है।
Q6. क्या झूठे आरोप पर भी धारा 64 लग सकती है?
नहीं। जब तक धारा 63 के तत्व सिद्ध न हों, धारा 64 लागू नहीं होगी। यदि आरोप झूठा सिद्ध हो जाए, तो शिकायतकर्ता पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है।