आईपीसी की धारा 404 | ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो मृत व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके कब्जे में थी | IPC Section- 404 in hindi| Dishonest misappropriation of property possessed by deceased person at the time of his death.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 404 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 404 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 404 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 404 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उस मृत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है, बेईमानी से दुर्विनियोजित करेगा या अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेगा, तो वह धारा 404 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 404 के अनुसार

ऐसी सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग जो मृत व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके कब्जे में थी-

जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उस मृत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है, बेईमानी से दुर्विनियोजित करेगा या अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा और यदि वह अपराधी, ऐसे व्यक्ति की मृत्यु के समय लिपिक या सेवक के रूप में उसके द्वारा नियोजित था, तो कारावास सात वर्ष तक का हो सकेगा।
दृष्टान्त
य के कब्जे में फर्नीचर और धन था। वह मर जाता है। उसका सेवक क, उस धन के किसी ऐसे व्यक्ति के कब्जे में आने से पूर्व, जो ऐसे कब्जे का हकदार है, बेईमानी से उसका दुर्विनियोग करता है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

Dishonest misappropriation of property possessed by deceased person at the time of his death-
Whoever dishonestly misappropriates or converts to his own use property, knowing that such property was in the possession of a deceased person at the time of that person’s decease, and has not since been in the possession of any person legally entitled to such possession, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine; and if the offender at the time of such person’s decease was employed by him as a clerk or servant, the imprisonment may extend to seven years.
Illustration
Z dies in possession of furniture and money. His servant A, before the money comes into the possession of any person entitled to such possession, dishonestly misappropriates it. A has committed the offence defined in this section.

लागू अपराध

किसी सम्पत्ति का, यह जानते हुए बेईमानी से दुर्विनियोग कि वह मृत व्यक्ति के कब्जे में उसकी मृत्यु के समय उसके थी और तब से वह उसके वैध रूप से हकदार व्यक्ति कब्जे में नहीं रही है।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यदि वह अपराध, मृत व्यक्ति द्वारा नियोजित लिपिक या सेवक के रूप में व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 404 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति को यह जानते हुये कि ऐसी सम्पत्ति किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उस मृत व्यक्ति के कब्जे में थी, और तब से किसी व्यक्ति के कब्जे में नहीं रही है, जो ऐसे कब्जे का वैध रूप से हकदार है, बेईमानी से दुर्विनियोजित करेगा या अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा और यदि वह अपराधी, ऐसे व्यक्ति की मृत्यु के समय लिपिक या सेवक के रूप में उसके द्वारा नियोजित था, तो कारावास सात वर्ष तक का हो सकेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 404 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी सम्पत्ति का, यह जानते हुए बेईमानी से दुर्विनियोग कि वह मृत व्यक्ति के कब्जे में उसकी मृत्यु के समय उसके थी और तब से वह उसके वैध रूप से हकदार व्यक्ति कब्जे में नहीं रही है।तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि वह अपराध, मृत व्यक्ति द्वारा नियोजित लिपिक या सेवक के रूप में व्यक्ति द्वारा किया जाता है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 404 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

Leave a Comment