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किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 | Juvenile Justice Act Section 44

किशोर न्याय अधिनियम JJ Act (Juvenile Justice Act Section-44) in Hindi के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 के अनुसार देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण देखरेख में, जिसके अंतर्गत समिति के आदेशों के माध्यम से उनकी देखरेख और संरक्षण के लिए सामूहिक पोषण देखरेख भी है, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करके जो इस संबंध में विहित की जाए, किसी ऐसे कुटुंब में, जिसके अंतर्गत बालक के जैव या दत्तक माता-पिता नहीं हैं या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त होने के रूप में मान्यताप्राप्त किसी असंबद्ध कुटुंब में, अल्पावधि या बढ़ाई अवधि के लिए रखा जा सकेगा, जिसे JJ Act Section-44 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 (Juvenile Justice Act Section-44) का विवरण

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 JJ Act Section-44 के तहत किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण देखरेख में, जिसके अंतर्गत समिति के आदेशों के माध्यम से उनकी देखरेख और संरक्षण के लिए सामूहिक पोषण देखरेख भी है, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करके जो इस संबंध में विहित की जाए, किसी ऐसे कुटुंब में, जिसके अंतर्गत बालक के जैव या दत्तक माता-पिता नहीं हैं या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त होने के रूप में मान्यताप्राप्त किसी असंबद्ध कुटुंब में, अल्पावधि या बढ़ाई अवधि के लिए रखा जा सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 44 (JJ Act Section-44 in Hindi)

पोषण देखरेख

(1) देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण देखरेख में, जिसके अंतर्गत समिति के आदेशों के माध्यम से उनकी देखरेख और संरक्षण के लिए सामूहिक पोषण देखरेख भी है, ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करके जो इस संबंध में विहित की जाए, किसी ऐसे कुटुंब में, जिसके अंतर्गत बालक के जैव या दत्तक माता-पिता नहीं हैं या राज्य सरकार द्वारा इस प्रयोजन के लिए उपयुक्त होने के रूप में मान्यताप्राप्त किसी असंबद्ध कुटुंब में, अल्पावधि या बढ़ाई अवधि के लिए रखा जा सकेगा।
(2) पोषक कुटुंब का चयन, कुटुंब की योग्यता, आशय, क्षमता और बालक की देखरेख करने के पूर्व अनुभव के आधार पर होगा । 
(3) सहोदरों को पोषक कुटुंबों में तब तक एक साथ रखने का प्रयास किया जाएगा, जब तक उन्हें एक साथ रखना उनके सर्वोत्तम हित में हो।
(4) राज्य सरकार, बालकों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करने के पश्चात्, जो विहित की जाए, जिला बाल संरक्षण एकक के माध्यम से ऐसी पोषण देखरेख के लिए बालकों की संख्या को ध्यान में रखकर मासिक वित्त पोषण प्रदान करेगी ।
(5) उन दशाओं में, जहां बालक इस कारण से पोषण देखरेख में रखे गए हैं कि उनके माता पिता बालक की देखरेख करने के लिए अयोग्य या असमर्थ हैं, बालक के माता-पिता नियमित अंतरालों पर पोषक कुटुंब में बालक से तब तक मिल सकेंगे जब तक समिति, उसके लिए लेखबध्द किए जाने वाले कारणों से यह अनुभव न करे कि ऐसे मिलना बालक के सर्वोत्तम हित में नहीं है; और समिति द्वारा एक बार माता-पिता को बालक की देखरेख करने के योग्य अवधारित करने पर अंततः बालक माता-पिता के घर वापस जा सकेगा ।
(6) पोषक कुटुंब, बालक को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होगा और वह बालक का ऐसी रीति में समग्र कल्याण सुनिश्चित करेगा जो विहित की जाए ।
(7) राज्य सरकार, ऐसी प्रक्रिया, मानदंड और रीति को, जिसमें बालक को पोषण देखरेख सेवाएं प्रदान की जाएंगी, परिभाषित करने के प्रयोजन के लिए नियम बना सकेगी ।
(8) समिति द्वारा बालक के कल्याण की जांच करने के लिए ऐसे रूप विधान में, जो विहित किया जाए, प्रत्येक मास पोषक कुटुंबों का निरीक्षण किया जाएगा और जब कभी किसी पोषक कुटुंब मैं बालक की देखरेख करने में कमी पाई जाती है तो बालक को उस पोषक कुटुंब से हटा दिया जाएगा और किसी दूसरे ऐसे पोषक कुटुंब में भेज दिया जाएगा जो समिति उचित समझे ।
(9) ऐसे किसी बालक को, जिसे समिति द्वारा दत्तक ग्रहण योग्य पाया जाता है, दीर्घकालीन पोषण देखरेख में नहीं दिया जाएगा।

Juvenile Justice Act Section-44 (JJ Act Section-44 in English)

Foster care

(1) The children in need of care and protection may be placed in foster care, including group foster care for their care and protection through orders of the Committee, after following the procedure as may be prescribed in this regard, in a family which does not include the childs biological or adoptive parents or in an unrelated family recognised as suitable for the purpose by the State Government, for a short or extended period of time.
(2) The selection of the foster family shall be based on familys ability, intent, capacity and prior experience of taking care of children.
(3) All efforts shall be made to keep siblings together in foster families, unless it is in their best interest not to be kept together.
(4) The State Government, after taking into account the number of children, shall provide monthly funding for such foster care through District Child Protection Unit after following the procedure, as may be prescribed, for inspection to ensure well being of the children.
(5) In cases where children have been placed in foster care for the reason that their parents have been found to be unfit or incapacitated by the Committee, the childs parents may visit the child in the foster family at regular intervals, unless the Committee feels that such visits are not in the best interest of the child, for reasons to be recorded therefor; and eventually, the child may return to the parents homes once the parents are determined by the Committee to be fit to take care of the child.
(6) The foster family shall be responsible for providing education, health and nutrition to the child and shall ensure the overall well being of the child in such manner, as may be prescribed.
(7) The State Government may make rules for the purpose of defining the procedure, criteria and the manner in which foster care services shall be provided for children.
(8) The inspection of foster families shall be conducted every month by the Committee in the form as may be prescribed to check the well-being of the child and whenever a foster family is found lacking in taking care of the child, the child shall be removed from that foster family and shifted to another foster family as the Committee may deem fit.
(9) No child regarded as adoptable by the Committee shall be given for long-term foster care.

हमारा प्रयास किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act Section) की धारा 44 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

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