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कंपनी अधिनियम की धारा 85| Companies Act Section 85

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-85 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 85 के अनुसार प्रत्येक कंपनी अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में ऐसे प्ररूप में या ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, भारों का एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें प्रत्येक मामले में ऐसी विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उपदर्शित करते हुए, सभी भारों और कंपनी की या उसके उपक्रमों की किसी संपत्ति या आस्तियों को प्रभावित करने वाले प्लवमान भारों को सम्मिलित किया जाएगा, जिसे Companies Act Section-85 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 85 (Companies Act Section-85) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 85 Companies Act Section-85 के अनुसार प्रत्येक कंपनी अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में ऐसे प्ररूप में या ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, भारों का एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें प्रत्येक मामले में ऐसी विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उपदर्शित करते हुए, सभी भारों और कंपनी की या उसके उपक्रमों की किसी संपत्ति या आस्तियों को प्रभावित करने वाले प्लवमान भारों को सम्मिलित किया जाएगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 85 (Companies Act Section-85 in Hindi)

कंपनी के भारों का रजिस्टर

(1) प्रत्येक कंपनी अपने रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में ऐसे प्ररूप में या ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, भारों का एक रजिस्टर रखेगी, जिसमें प्रत्येक मामले में ऐसी विशिष्टियों को, जो विहित की जाएं, उपदर्शित करते हुए, सभी भारों और कंपनी की या उसके उपक्रमों की किसी संपत्ति या आस्तियों को प्रभावित करने वाले प्लवमान भारों को सम्मिलित किया जाएगा:

परन्तु भार सृजित करने वाली लिखत की एक प्रति, भारों के रजिस्टर के साथ कंपनी के रजिस्ट्रीकृत कार्यालय में भी रखी जाएगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन रखा गया भारों का रजिस्टर और भारों की लिखत- (क) किसी सदस्य या लेनदार द्वारा फीस का कोई संदाय किए बिना; या जाए,

(ख) किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किन्हीं ऐसी फीसों के संदाय पर, जो विहित की कामकाज के घंटों के दौरान ऐसें युक्तियुक्त निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, जो कंपनी अपने अनुच्छेदों के अनुसार, अधिरोपित करे, निरीक्षण के लिए खुला रहेगा।

Companies Act Section-85 (Company Act Section-85 in English)

Company‘s register of charges

(1) Every company shall keep at its registered office a register of charges in such form and in such manner as may be prescribed, which shall include therein all charges and floating charges affecting any property or assets of the company or any of its undertakings, indicating in each case such particulars as may be prescribed: Provided that a copy of the instrument creating the charge shall also be kept at the registered office of the company along with the register of charges.
(2) The register of charges and instrument of charges, kept under sub-section (1) shall be open for inspection during business hours-
(a) by any member or creditor without any payment of fees; or
(b) by any other person on payment of such fees as may be prescribed, subject to such reasonable restrictions as the company may, by its articles, impose.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 85 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 84| Companies Act Section 84

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-84 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 84 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति, किसी भार के अधीन रहते हुए, किसी कंपनी की संपत्ति के रिसीवर की या उस सम्पति का प्रबन्ध करने के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए आदेश अभिप्राप्त करता है या यदि कोई व्यक्ति किसी लिखत में अन्तर्विष्ट किसी शक्ति के अधीन ऐसा रिसीवर या व्यक्ति नियुक्त करता है तो वह आदेश पारित करने या नियुक्ति करने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर कंपनी और रजिस्ट्रार को, आदेश या लिखत की प्रति सहित, ऐसी नियुक्ति की सूचना देगा, जिसे Companies Act Section-84 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 84 (Companies Act Section-84) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 84 Companies Act Section-84 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति, किसी भार के अधीन रहते हुए, किसी कंपनी की संपत्ति के रिसीवर की या उस सम्पति का प्रबन्ध करने के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए आदेश अभिप्राप्त करता है या यदि कोई व्यक्ति किसी लिखत में अन्तर्विष्ट किसी शक्ति के अधीन ऐसा रिसीवर या व्यक्ति नियुक्त करता है तो वह आदेश पारित करने या नियुक्ति करने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर कंपनी और रजिस्ट्रार को, आदेश या लिखत की प्रति सहित, ऐसी नियुक्ति की सूचना देगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 84 (Companies Act Section-84 in Hindi)

रिसीवर या प्रबंधक की नियुक्ति की प्रज्ञापना

(1) यदि कोई व्यक्ति, किसी भार के अधीन रहते हुए, किसी कंपनी की संपत्ति के रिसीवर की या उस सम्पति का प्रबन्ध करने के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए आदेश अभिप्राप्त करता है या यदि कोई व्यक्ति किसी लिखत में अन्तर्विष्ट किसी शक्ति के अधीन ऐसा रिसीवर या व्यक्ति नियुक्त करता है तो वह आदेश पारित करने या नियुक्ति करने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर कंपनी और रजिस्ट्रार को, आदेश या लिखत की प्रति सहित, ऐसी नियुक्ति की सूचना देगा और रजिस्ट्रार विहित फीसों का संदाय किए जाने पर, भारों के रजिस्टर में ऐसे रिसीवर, व्यक्ति या लिखत की विशिष्टियां रजिस्टर करेगा।

(2) उपधारा (1) के अधीन नियुक्त कोई व्यक्ति, ऐसी नियुक्ति से प्रविरत हो जाने पर, उस प्रभाव की सूचना, कंपनी और रजिस्ट्रार को देगा और रजिस्ट्रार ऐसी सूचना को रजिस्टर करेगा।

Companies Act Section-84 (Company Act Section-84 in English)

Intimation of appointment of receiver or manager

(1) If any person obtains an order for the appointment of a receiver of, or of a person to manage, the property, subject to a charge, of a company or if any person appoints such receiver or person under any power contained in any instrument, he shall,
within a period of thirty days from the date of the passing of the order or of the making of the appointment, give notice of such appointment to the company and the Registrar along with a copy of the order or instrument and the Registrar shall, on payment of the prescribed fees, register particulars of the receiver, person or instrument in the register of charges.
(2) Any person appointed under sub-section (1) shall, on ceasing to hold such appointment, give to the company and the Registrar a notice to that effect and the Registrar shall register such notice.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 84 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 83| Companies Act Section 83

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-83 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 83 के अनुसार रजिस्ट्रार, किसी रजिस्ट्रीकृत भार के संबंध में उसके समाधानप्रद रूप में यह साक्ष्य दिए जाने पर कि ऐसे ऋण का, जिसके लिए भार सृष्ट किया गया था, पूर्णतः या भागतः भुगतान कर दिया गया है या उसे चुका दिया गया है या भारग्रस्त संपत्ति या उपक्रम का भाग भार से निर्मुक्त कर दिया गया है, जिसे Companies Act Section-83 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 83 (Companies Act Section-83) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 83 Companies Act Section-83 के अनुसार रजिस्ट्रार, किसी रजिस्ट्रीकृत भार के संबंध में उसके समाधानप्रद रूप में यह साक्ष्य दिए जाने पर कि ऐसे ऋण का, जिसके लिए भार सृष्ट किया गया था, पूर्णतः या भागतः भुगतान कर दिया गया है या उसे चुका दिया गया है या भारग्रस्त संपत्ति या उपक्रम का भाग भार से निर्मुक्त कर दिया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 83 (Companies Act Section-83 in Hindi)

कंपनी से प्रज्ञापना के अभाव में चुकाए जाने और निर्मुक्ति विषयक प्रविष्टियां करने की रजिस्ट्रार की शक्ति

(1) रजिस्ट्रार, किसी रजिस्ट्रीकृत भार के संबंध में उसके समाधानप्रद रूप में यह साक्ष्य दिए जाने पर कि-

(क) ऐसे ऋण का, जिसके लिए भार सृष्ट किया गया था, पूर्णतः या भागतः भुगतान कर दिया गया है या उसे चुका दिया गया है; या

(ख) भारग्रस्त संपत्ति या उपक्रम का भाग भार से निर्मुक्त कर दिया गया है या कंपनी की संपत्ति या उपक्रम का भाग नहीं रह गया है,

भारों के रजिस्टर में, यथास्थिति, पूर्णतः या भागतः चुकाए जाने का या इस तथ्य का संपत्ति या उपक्रम का भाग भार से निर्मुक्त किया जा चुका है या वह कंपनी की संपत्ति या उपक्रम का भाग नहीं रह गया है, एक ज्ञापन इस तथ्य के होते हुए भी कि कंपनी से उसे उस तथ्य की कोई प्रज्ञापना प्राप्त नहीं हुई है, प्रविष्ट कर सकेगा ।

(2) रजिस्ट्रार धारा 81 की उपधारा (1) के अधीन रखे गए भारों के रजिस्टर में प्रविष्टि करने के तीस दिन के भीतर प्रभावित पक्षकारों को सूचित करेगा।

Companies Act Section-83 (Company Act Section-83 in English)

Power of Registrar to make entries of satisfaction and release in absence of intimation from company

(1) The Registrar may, on evidence being given to his satisfaction with respect to any registered charge,—
(a) that the debt for which the charge was given has been paid or satisfied in whole or in part; or
(b) that part of the property or undertaking charged has been released from the charge or has ceased to form part of the company‘s property or undertaking, enter in the register of charges a memorandum of satisfaction in whole or in part, or of the fact that part of the property or undertaking has been released from the charge or has ceased to form part of the company‘s property or undertaking, as the case may be, notwithstanding the fact that no intimation has been received by him from the company.
(2) The Registrar shall inform the affected parties within thirty days of making the entry in the register of charges kept under sub-section (1) of section 81.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 83 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 82| Companies Act Section 82

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-82 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 82 के अनुसार कंपनी, रजिस्ट्रार को, इस अध्याय के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भार का पूर्ण भुगतान किए जाने या चुकाए जाने की प्रज्ञापना ऐसे भुगतान या चुकाए जाने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर विहित प्ररूप में देगी और धारा 77 की उपधारा (1) के उपबंध, यथाशक्य, इस धारा के अधीन दी गई किसी प्रज्ञापना को लागू होंगे, जिसे Companies Act Section-82 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 82 (Companies Act Section-82) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 82 Companies Act Section-82 के अनुसार कंपनी, रजिस्ट्रार को, इस अध्याय के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भार का पूर्ण भुगतान किए जाने या चुकाए जाने की प्रज्ञापना ऐसे भुगतान या चुकाए जाने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर विहित प्ररूप में देगी और धारा 77 की उपधारा (1) के उपबंध, यथाशक्य, इस धारा के अधीन दी गई किसी प्रज्ञापना को लागू होंगे।

कंपनी अधिनियम की धारा 82 (Companies Act Section-82 in Hindi)

कंपनी द्वारा भार चुकाए जाने की रिपोर्ट का दिया जाना

(1) कंपनी, रजिस्ट्रार को, इस अध्याय के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी भार का पूर्ण भुगतान किए जाने या चुकाए जाने की प्रज्ञापना ऐसे भुगतान या चुकाए जाने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर विहित प्ररूप में देगी और धारा 77 की उपधारा (1) के उपबंध, यथाशक्य, इस धारा के अधीन दी गई किसी प्रज्ञापना को लागू होंगे।

(2) रजिस्ट्रार, उपधारा (1) के अधीन प्रज्ञापना की प्राप्ति पर भार के धारक को, उससे यह अपेक्षा करते हुए एक सूचना भिजवाएगा कि वह चौदह दिन से अनधिक उतने समय के भीतर जो ऐसी सूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, हेतुक दर्शित करे कि जिस पूर्ण भुगतान या चुकाए जाने की प्रज्ञापना रजिस्ट्रार को दी गई है वह क्यों न अभिलिखित की जाए और यदि ऐसे भार के धारक द्वारा कोई हेतुक दर्शित नहीं किया जाता है तो रजिस्ट्रार यह आदेश करेगा कि चुकाए जाने का ज्ञापन धारा 81 के अधीन उसके द्वारा रखे गए भारों के रजिस्टर में प्रविष्ट कर लिया जाए और कंपनी को यह सूचित करेगा कि उसने ऐसा कर दिया है :

परंतु इस उपधारा में निर्दिष्ट सूचना का भेजा जाना अपेक्षित नहीं होगा, यदि इस संबंध में रजिस्ट्रार को प्रज्ञापना विनिर्दिष्ट प्ररूप में है और भार के धारक द्वारा हस्ताक्षरित की जाती है।

(3) यदि कोई तुक दर्शित किया गया है तो रजिस्ट्रार भारों के रजिस्टर में इस प्रभाव का एक टिप्पण अभिलिखित करेगा और कंपनी को सूचित करेगा।

(4) इस धारा की किसी बात की बाबत यह नहीं समझा जाएगा कि कंपनी से प्रज्ञापना होने से अन्यथा वह भारों के रजिस्टर में कोई प्रविष्टि धारा 83 के अधीन करने की रजिस्ट्रार की शक्तियों पर प्रभाव डालती है।

Companies Act Section-82 (Company Act Section-82 in English)

Register of charges to be kept by Registrar

(1) A company shall give intimation to the Registrar in the prescribed form, of the payment or satisfaction in full of any charge registered under this Chapter within a period of thirty days from the date of such payment or satisfaction and the provisions of sub-section (1) of section 77 shall, as far as may be, apply to an intimation given under this section.
(2) The Registrar shall, on receipt of intimation under sub-section (1), cause a notice to be sent to the holder of the charge calling upon him to show cause within such time not exceeding fourteen days, as may be specified in such notice, as to why payment or satisfaction in full should not be recorded as intimated to the Registrar, and if no cause is shown, by such holder of the charge, the Registrar shall order that a memorandum of satisfaction shall be entered in the register of charges kept by him under section 81 and shall inform the company that he has done so: Provided that the notice referred to in this sub-section shall not be required to be sent, in case the intimation to the Registrar in this regard is in the specified form and signed by the holder of charge.
(3) If any cause is shown, the Registrar shall record a note to that effect in the register of charges and shall inform the company.
(4) Nothing in this section shall be deemed to affect the powers of the Registrar to make an entry in the register of charges under section 83 or otherwise than on receipt of an intimation from the company.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 82 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 81| Companies Act Section 81

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-81 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 81 के अनुसार रजिस्ट्रार, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, प्रत्येक कंपनी के संबंध में इस अध्याय के अधीन रजिस्ट्रीकृत भारों की विशिष्टियों वाला एक रजिस्टर रखेगा, जिसे Companies Act Section-81 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 81 (Companies Act Section-81) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 81 Companies Act Section-81 के अनुसाररजिस्ट्रार, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, प्रत्येक कंपनी के संबंध में इस अध्याय के अधीन रजिस्ट्रीकृत भारों की विशिष्टियों वाला एक रजिस्टर रखेगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 81 (Companies Act Section-81 in Hindi)

रजिस्ट्रार द्वारा भारों का रजिस्टर रखा जाना

 (1) रजिस्ट्रार, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, प्रत्येक कंपनी के संबंध में इस अध्याय के अधीन रजिस्ट्रीकृत भारों की विशिष्टियों वाला एक रजिस्टर रखेगा।

(2) इस धारा के अनुसरण में रखा गया रजिस्टर किसी व्यक्ति द्वारा, ऐसी फीस का, जो प्रत्येक निरीक्षण के लिए विहित की जाए, संदाय किए जाने पर निरीक्षण करने के लिए खुला होगा।

Companies Act Section-81 (Company Act Section-81 in English)

Register of charges to be kept by Registrar

(1) The Registrar shall, in respect of every company, keep a register containing particulars of the charges registered under this Chapter in such form and in such manner as may be prescribed.
(2) A register kept in pursuance of this section shall be open to inspection by any person on payment of such fees as may be prescribed for each inspection.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 81 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 80| Companies Act Section 80

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-80 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 80 के अनुसार जहां किसी कंपनी की किसी संपत्ति या आस्तियों या उसके उपक्रमों में से किसी उपक्रम पर कोई भार धारा 77 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाता है, वहां ऐसी संपत्ति, आस्तियों, उपक्रमों या उसके भाग या उसमें किसी अंश या हित को अर्जित करने वाले किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसे ऐसे रजिस्ट्रीकरण की तारीख से भार की सूचना थी, जिसे Companies Act Section-80 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 80 (Companies Act Section-80) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 80 Companies Act Section-80 के अनुसार जहां किसी कंपनी की किसी संपत्ति या आस्तियों या उसके उपक्रमों में से किसी उपक्रम पर कोई भार धारा 77 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाता है, वहां ऐसी संपत्ति, आस्तियों, उपक्रमों या उसके भाग या उसमें किसी अंश या हित को अर्जित करने वाले किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसे ऐसे रजिस्ट्रीकरण की तारीख से भार की सूचना थी।

कंपनी अधिनियम की धारा 80 (Companies Act Section-80 in Hindi)

भार की सूचना की तारीख

जहां किसी कंपनी की किसी संपत्ति या आस्तियों या उसके उपक्रमों में से किसी उपक्रम पर कोई भार धारा 77 के अधीन रजिस्ट्रीकृत किया जाता है, वहां ऐसी संपत्ति, आस्तियों, उपक्रमों या उसके भाग या उसमें किसी अंश या हित को अर्जित करने वाले किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसे ऐसे रजिस्ट्रीकरण की तारीख से भार की सूचना थी।

Companies Act Section-80 (Company Act Section-80 in English)

Date of notice of charge

Where any charge on any property or assets of a company or any of its undertakings is registered under section 77, any person acquiring such property, assets, undertakings, or part thereof or any share or interest therein shall be deemed to have notice of the charge from the date of such registration.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 80 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स मे कमेंट करके पूछ सकते है।