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सीआरपीसी की धारा 275 | वारण्ट-मामलों में अभिलेख | CrPC Section- 275 in hindi| Record in warrant-cases.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 275 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 275 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 275 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 275 के अन्तर्गत वारंट मामलो में मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब वारंट-मामलों में जैसे-जैसे उसकी परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे या तो स्वयं मजिस्ट्रेट द्वारा लिखा जाएगा खुले न्यायालय में उसके द्वारा बोलकर लिखवाया जाएगा। इसके अलावा किसी साक्षी का साक्ष्य भी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के अधिवक्ता की उपस्थिति में आडियो-वीडियो इलेक्ट्रानिक साधनों द्वारा भी अभिलिखित की जा सकेगी।मजिस्ट्रेट स्वविवेकानुसार, ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्नोत्तर के रूप में लिख या लिखवा सकता है। ऐसे लिखे गए साक्ष्य पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

सीआरपीसी की धारा 275 के अनुसार

वारण्ट-मामलों में अभिलेख-

(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब वारण्ट-मामलों में प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य जैसे-जैसे उसकी परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे या तो स्वयं मजिस्ट्रेट द्वारा लिखा जाएगा खुले न्यायालय में उसके द्वारा बोलकर लिखवाया जाएगा या जहां वह किसी शारीरिक या अन्य असमर्थता के कारण ऐसा करने में असमर्थ वहां उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा उसके निदेशन और अधीक्षण में लिखा जाएगा।
[परन्तु यह कि इस उपधारा के अधीन किसी साक्षी का साक्ष्य भी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के अधिवक्ता की उपस्थिति में आडियो-वीडियो इलेक्ट्रानिक साधनों द्वारा भी अभिलिखित की जा सकेगी।]
(2) जहां मजिस्ट्रेट साक्ष्य लिखवाए वहां वह यह प्रमाण-पत्र अभिलखित करेगा कि साक्ष्य उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारणों से स्वयं उसके द्वारा नहीं लिखा जा सका।
(3) ऐसा साक्ष्य मामूली तौर पर वृतान्त के रूप में अभिलिखित किया जाएगा; किन्तु मजिस्ट्रेट स्वविवेकानुसार, ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्नोत्तर के रूप में लिख या लिखवा सकता है।
(4) ऐसे लिखे गए साक्ष्य पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

Record in warrant-cases-
(1) In all warrant-cases tried before a Magistrate, the evidence of each witness shall, as his examination proceeds, be taken down in writing either by the Magistrate himself or by his dictation in open Court or, where he is unable to do so owing to a physical or other incapacity, under his direction and superintendence, by an officer of the Court appointed by him in this behalf.
[Provided that evidence of a witness under this sub-section may also be recorded by audio-video electronic means in the presence of the advocate of the person accused of the offence.]
(2) Where the Magistrate causes the evidence to be taken down, he shall record a certificate that the evidence could not be taken down by himself for the reasons referred to in sub-section (1).
(3) Such evidence shall ordinarily be taken down in the form of a narrative; but the Magistrate may, in his discretion take down, or cause to be taken down, any part of such evidence in the form of question and answer.
(4) The evidence so taken down shall be signed by the Magistrate and shall form part of the record.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 275 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 274 | समन-मामलों और जांचों में अभिलेख | CrPC Section- 274 in hindi| Record in summons-cases and inquiries.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 274 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 274 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 274 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 274 के अन्तर्गत मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब समन-मामलों में, धारा 145 से धारा 148 तक की धाराओं के अधीन (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) सब जांचों में, और विचारण के अनुक्रम की कार्यवाहियों से भिन्न धारा 446 के अधीन सब कार्यवाहियों में, मजिस्ट्रेट जैसे-जैसे प्रत्येक साक्षी की परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे उसके साक्ष्य के सारांश का ज्ञापन न्यायालय की भाषा में तैयार करेगा, परन्तु यदि मजिस्ट्रेट ऐसा ज्ञापन स्वयं तैयार करने में असमर्थ है तो वह अपनी असमर्थता के कारणों को अभिलिखित करने के पश्चात् ऐसे ज्ञापन को खुले न्यायालय में स्वयं बोल कर लिखित रूप में तैयार कराएगा। ऐसे ज्ञापन पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

सीआरपीसी की धारा 274 के अनुसार

समन-मामलों और जांचों में अभिलेख-

(1) मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारित सब समन-मामलों में, धारा 145 से धारा 148 तक की धाराओं के अधीन (जिनके अन्तर्गत ये दोनों धाराएं भी हैं) सब जांचों में, और विचारण के अनुक्रम की कार्यवाहियों से भिन्न धारा 446 के अधीन सब कार्यवाहियों में, मजिस्ट्रेट जैसे-जैसे प्रत्येक साक्षी की परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे उसके साक्ष्य के सारांश का ज्ञापन न्यायालय की भाषा में तैयार करेगा ;
परन्तु यदि मजिस्ट्रेट ऐसा ज्ञापन स्वयं तैयार करने में असमर्थ है तो वह अपनी असमर्थता के कारणों को अभिलिखित करने के पश्चात् ऐसे ज्ञापन को खुले न्यायालय में स्वयं बोल कर लिखित रूप में तैयार कराएगा।
(2) ऐसे ज्ञापन पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

Record in summons-cases and inquiries-
(1) In all summons-cases tried before a Magistrate, in all inquiries under Sections 145 to 148 (both inclusive), and in all proceedings under Section 446 otherwise than in the course of a trial, the Magistrate shall, as the examination of each witness proceeds, make a memorandum of the substance of his evidence in the language of the Court;
Provided that if the Magistrate is unable to make such memorandum himself, he shall, after recording the reason of his inability, cause such memorandum to be made in writing or from his dictation in open Court.
(2) Such memorandum shall be signed by the Magistrate and shall form part of the record.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 274 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 273 | साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना | CrPC Section- 273 in hindi| Evidence to be taken in presence of accused.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 273 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 273 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 273 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 273 के अन्तर्गत इस अध्याय के अधीन विचारणों में इसके पश्चात् इसमें जैसा वर्णित है उसके सिवाय, इस संहिता में समन-मामलों के विचारण के लिए विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा। यदि तीन मास से अधिक की अवधि के लिए कारावास का कोई दण्डादेश इस अध्याय के अधीन किसी दोषसिद्धि के मामले में न दिया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 273 के अनुसार

साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना—

अभिव्यक्त रूप से जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, विचारण या अन्य कार्यवाही के अनुक्रम में लिया गया सब साक्ष्य अभियुक्त की उपस्थिति में या जब उसे वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्त कर दिया गया है तब उसके प्लीडर की उपस्थिति में लिया जाएगा।
परन्तु जहाँ अट्ठारह वर्ष से कम आयु की स्त्री का, जिससे बलात्संग या किसी अन्य लैंगिक अपराध के किये जाने का अभिकथन किया गया है, साक्ष्य अभिलिखित किया जाना है, वहाँ न्यायालय यह सुनिश्चित करने के लिये कि ऐसी स्त्री का सामना अभियुक्त से न हो, जबकि अभियुक्त की प्रतिपरीक्षा के अधिकार को भी उसी समय सुनिश्चित करते हुए, समुचित उपाय कर सकेगा।

Evidence to be taken in presence of accused-
Except as otherwise expressly provided, all evidence taken in the course of the trial or other proceeding shall be taken in the presence of the accused, or, when his personal attendance is dispensed with, in the presence of his pleader ;
Provided that where the evidence of a woman below the age of eighteen years who is alleged to have been subjected to rape or any other sexual offence, is to be recorded, the Court may take appropriate measures to ensure that such woman is not confronted by the accused while at the same time ensuring the right of cross examination of the accused.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 273 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 272 | न्यायालयों की भाषा | CrPC Section- 272 in hindi| Language of Courts.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 272 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 272 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 272 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 272 के अन्तर्गत राज्य सरकार यह अवधारित कर सकती है कि इस संहिता के प्रयोजनों के लिए राज्य के अन्दर उच्च न्यायालय से भिन्न प्रत्येक न्यायालय की कौन-सी भाषा होगी।

सीआरपीसी की धारा 272 के अनुसार

न्यायालयों की भाषा-

राज्य सरकार यह अवधारित कर सकती है कि इस संहिता के प्रयोजनों के लिए राज्य के अन्दर उच्च न्यायालय से भिन्न प्रत्येक न्यायालय की कौन-सी भाषा होगी।

Language of Courts-
The State Government may determine what shall be, for purposes of this Code, the language of each Court within the State other than the High Court.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 272 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 271 | कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति | CrPC Section- 271 in hindi| Power to issue commission for examination of witness in prison.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 271 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 271 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 271 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 271 के अन्तर्गत कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध किसी व्यक्ति को साक्षी के रूप में परीक्षा के लिए धारा 284 के अधीन कमीशन जारी करने की न्यायालय की शक्ति पर इस अध्याय के उपबंधों का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा; और अध्याय 23 के भाग ख के उपबन्ध कारागार में ऐसे किसी व्यक्ति की कमीशन पर परीक्षा के सम्बन्ध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे किसी अन्य व्यक्ति की कमीशन पर परीक्षा के सम्बन्ध में लागू होते हैं।

सीआरपीसी की धारा 271 के अनुसार

कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति-

कारागार में परिरुद्ध या निरुद्ध किसी व्यक्ति को साक्षी के रूप में परीक्षा के लिए धारा 284 के अधीन कमीशन जारी करने की न्यायालय की शक्ति पर इस अध्याय के उपबंधों का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा; और अध्याय 23 के भाग ख के उपबन्ध कारागार में ऐसे किसी व्यक्ति की कमीशन पर परीक्षा के सम्बन्ध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे किसी अन्य व्यक्ति की कमीशन पर परीक्षा के सम्बन्ध में लागू होते हैं।

Power to issue commission for examination of witness in prison-
The provisions of this Chapter shall be without prejudice to the power of the Court to issue, under Section 284, a commission for the examination, as a witness, of any person confined or detained in a prison; and the provisions of Part B of Chapter XXIII shall apply in relation to the examination on commission of any such person in the prison as they apply in relation to the examination on commission of any other person.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 271 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 270 | बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना | CrPC Section- 270 in hindi| Prisoner to be brought to Court in custody.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 270 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 270 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 270 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 270 के अन्तर्गत धारा 269 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए और जहां आवश्यक है, वहां उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को ऐसे न्यायालय में, जिसमें उनकी हाजिरी अपेक्षित है, भिजवाएगा जिससे वह आदेश में उल्लिखित समय पर वहां उपस्थित हो सके, और उसे न्यायालय में या उसके पास अभिरक्षा में तब तक रखवाएगा जब तक उसकी परीक्षा न कर ली जाए या जब तक न्यायालय उसे उस कारागार को, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध था, वापस ले जाए जाने के लिए प्राधिकृत न करे।

सीआरपीसी की धारा 270 के अनुसार

बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना—

धारा 269 के उपबन्धों के अधीन रहते हुए, कारागार का भारसाधक अधिकारी, धारा 267 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए और जहां आवश्यक है, वहां उसकी उपधारा (2) के अधीन सम्यक् रूप से प्रतिहस्ताक्षरित आदेश के परिदान पर, आदेश में नामित व्यक्ति को ऐसे न्यायालय में, जिसमें उनकी हाजिरी अपेक्षित है, भिजवाएगा जिससे वह आदेश में उल्लिखित समय पर वहां उपस्थित हो सके, और उसे न्यायालय में या उसके पास अभिरक्षा में तब तक रखवाएगा जब तक उसकी परीक्षा न कर ली जाए या जब तक न्यायालय उसे उस कारागार को, जिसमें वह परिरुद्ध या निरुद्ध था, वापस ले जाए जाने के लिए प्राधिकृत न करे।

Prisoner to be brought to Court in custody-
Subject to the provisions of Section 269, the officer in charge of the prison shall, upon delivery of an order made under sub-section (1) of Section 267 and duly countersigned, where necessary, under sub-section (2) thereof, cause the person named in the order to be taken to the Court in which his attendance is required, so as to be present there at the time mentioned in the order, and shall cause him to be kept in custody in or near the Court until he has been examined or until the Court authorises him to be taken back to the prison in which he was confined or detained.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 270 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।