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सीआरपीसी की धारा 281 | अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख | CrPC Section- 281 in hindi| Record of examination of accused.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 281 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 281 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 281 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 281 के अन्तर्गत जब कभी अभियुक्त की परीक्षा किसी महानगर मजिस्ट्रेट व्दारा या महानगर मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय द्वारा की जाती है, तो वह मजिस्ट्रेट अभियुक्त की परीक्षा के सारांश का ज्ञापन न्यायालय की भाषा मे तैयार करेगा और ऐसे ज्ञापन पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा। अभिलेख, यदि साध्य हो तो, उस भाषा में होगा जिसमें अभियुक्त की परीक्षा की जाती है या यदि यह साध्य न हो तो न्यायालय की भाषा में होगा।

सीआरपीसी की धारा 281 के अनुसार

अभियुक्त की परीक्षा का अभिलेख-

(1) जब कभी अभियुक्त की परीक्षा किसी महानगर मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है तो वह मजिस्ट्रेट अभियुक्त की परीक्षा के सारांश का ज्ञापन न्यायालय की भाषा में तैयार करेगा और ऐसे ज्ञापन पर मजिस्ट्रेट हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।
(2) जब कभी अभियुक्त की परीक्षा महानगर मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय द्वारा की जाती है तब उससे पूछे गए प्रत्येक प्रश्न और उसके द्वारा दिए गए प्रत्येक उत्तर सहित ऐसी सब परीक्षा स्वयं पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा या जहां वह किसी शारीरिक या अन्य असमर्थता के कारण ऐसा करने में असमर्थ है, वहां उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा उसके निदेशन और अधीक्षण में पूरे तौर पर अभिलिखित की जाएगी।
(3) अभिलेख, यदि साध्य हो तो, उस भाषा में होगा जिसमें अभियुक्त की परीक्षा की जाती है या यदि यह साध्य न हो तो न्यायालय की भाषा में होगा।
(4) अभिलेख अभियुक्त को दिखा दिया जाएगा या उसे पढ़कर सुना दिया जाएगा या यदि वह उस भाषा को नहीं समझता है जिसमें वह लिखा गया है तो उसका भाषान्तर उसे उस भाषा में, जिसे वह समझता है, सुनाया जाएगा और वह अपने उत्तरों का स्पष्टीकरण करने या उनमें कोई बात जोड़ने के लिए स्वतंत्र होगा।
(5) तब उस पर अभियुक्त और मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश हस्ताक्षर करेंगे और मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश अपने हस्ताक्षर से प्रमाणित करेगा कि परीक्षा उसकी उपस्थिति में की गई थी और उसने उसे सुना था और अभिलेख में अभियुक्त द्वारा किए गए कथन का पूर्ण और सही वर्णन है।
(6) इस धारा की कोई बात संक्षिप्त विचारण के अनुक्रम में अभियुक्त की परीक्षा को लागू होने वाली न समझी जाएगी।

Record of examination of accused-
(1) Whenever the accused is examined by a Metropolitan Magistrate, the Magistrate shall make a memorandum of the substance of the examination of the accused in the language of the Court and such memorandum shall be signed by the Magistrate and shall form part of the record.
(2) Whenever the accused is examined by any Magistrate other than a Metropolitan Magistrate, or by a Court of Session, the whole of such examination, including every question put to him and every answer given by him, shall be recorded in full by the presiding Judge or Magistrate himself or where he is unable to do so owing to a physical or other incapacity, under his direction and superintendence by an officer of the Court appointed by him in this behalf.
(3) The record shall, if practicable, be in the language in which the accused is examined or, if that is not practicable, in the language of the Court.
(4) The record shall be shown or read to the accused, or, if he does not understand the language in which it is written, shall be interpreted to him in a language which he understands, and he shall be at liberty to explain or add to his answers.
(5) It shall thereafter be signed by the accused and by the Magistrate or presiding Judge, who shall certify under his own hand that the examination was taken in his presence and hearing and that the record contains a full and true account of the statement made by the accused.
(6) Nothing in this section shall be deemed to apply to the examination of an accused person in the course of a summary trial.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 281 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 280 | साक्षी की भावभंगी के बारे में टिप्पणियां | CrPC Section- 280 in hindi| Remarks respecting demeanour of witness.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 280 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 280 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 280 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 280 के अन्तर्गत जब पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट साक्षी का साक्ष्य अभिलिखित कर लेता है तब वह उस साक्षी की परीक्षा किए जाते समय उसकी भावभंगी के बारे में ऐसी टिप्पणियां भी अभिलिखित करेगा (यदि कोई हो), जो वह तात्विक समझता है।

सीआरपीसी की धारा 280 के अनुसार

साक्षी की भावभंगी के बारे में टिप्पणियां-

जब पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट साक्षी का साक्ष्य अभिलिखित कर लेता है तब वह उस साक्षी की परीक्षा किए जाते समय उसकी भावभंगी के बारे में ऐसी टिप्पणियां भी अभिलिखित करेगा (यदि कोई हो), जो वह तात्विक समझता है।

Remarks respecting demeanour of witness-
When a presiding Judge or Magistrate has recorded the evidence of a witness, he shall also record such remarks (if any) as he thinks material respecting the demeanour of such witness whilst under examination.

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सीआरपीसी की धारा 279 | अभियुक्त या उसके प्लीडर को साक्ष्य का भाषान्तर सुनाया जाना | CrPC Section- 279 in hindi| Interpretation of evidence to accused or his pleader.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 279 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 279 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 279 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 279 के अन्तर्गत जब अभियुक्त या उसके प्लीडर को कोई साक्ष्य ऐसी भाषा में दिया जाए जिसे अभियुक्त नहीं समझता है और वह न्यायालय में स्वयं उपस्थित है तब खुले न्यायालय में उसे उस भाषा में उसका भाषान्तर सुनाया जाएगा जिसे वह समझता है, अर्थात् जब कोई साक्ष्य जो किसी अन्य भाषा में है, न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है, यदि आवश्यक है, तो न्यायालय द्वारा अभियुक्त या उसके प्लीडर को उस भाषा में उसका भाषान्तर सुनाया जाएगा जिसे वह समझता है।

सीआरपीसी की धारा 279 के अनुसार

अभियुक्त या उसके प्लीडर को साक्ष्य का भाषान्तर सुनाया जाना-

(1) जब कभी कोई साक्ष्य ऐसी भाषा में दिया जाए जिसे अभियुक्त नहीं समझता है और वह न्यायालय में स्वयं उपस्थित है तब खुले न्यायालय में उसे उस भाषा में उसका भाषान्तर सुनाया जाएगा जिसे वह समझता है।
(2) यदि वह प्लीडर द्वारा हाजिर हो और साक्ष्य न्यायालय की भाषा भिन्न और प्लीडर द्वारा न समझी जाने वाली भाषा में दिया जाता है तो उसका भाषान्तर ऐसे प्लीडर को न्यायालय की भाषा में सुनाया जाएगा।
(3) जब दस्तावेजें यथारीति सबूत के प्रयोजन के लिए पेश की जाती हैं तब यह न्यायालय के स्वविवेक पर निर्भर करेगा कि वह उनमें से उतने का भाषान्तर सुनाए जितना आवश्यक प्रतीत हो।

Interpretation of evidence to accused or his pleader-
(1) Whenever any evidence is given in a language not understood by the accused, and he is present in Court in person, it shall be interpreted to him in open Court in a language understood by him.
(2) If he appears by pleader and the evidence is given in a language other than the language of the Court, and not understood by the pleader, it shall be interpreted to such pleader in that language.
(3) When documents are put for the purpose of formal proof, it shall be in the discretion of the Court to interpret as much thereof as appears necessary.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 279 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 278 | जब ऐसा साक्ष्य पूरा हो जाता है तब उसके सम्बन्ध में प्रक्रिया | CrPC Section- 278 in hindi| Procedure in regard to such evidence when completed.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 278 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 278 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 278 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 278 के अन्तर्गत जब प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य जो धारा 275 या धारा 276 के अधीन लिया जाए, पूरा होता जाता है, वैसे-वैसे वह, यदि अभियुक्त हाजिर हो तो उसकी, या यदि वह प्लीडर द्वारा हाजिर हो, तो उसके प्लीडर की उपस्थिति में साक्षी को पढ़कर सुनाया जाएगा और यदि आवश्यक हो तो शुद्ध किया जाएगा। यदि साक्षी साक्ष्य के किसी भाग की शुद्धता से उस समय इंकार करता है जब वह उसे पढ़कर सुनाया जाता है तो मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश साक्ष्य को शुद्ध करने के बजाय उस पर साक्षी द्वारा उस बाबत की गई आपत्ति का ज्ञापन लिख सकता है और उसमें ऐसी टिप्पणियां जोड़ देगा जैसी वह आवश्यक समझे। यदि साक्ष्य का अभिलेख उस भाषा से भिन्न भाषा में है जिसमें वह दिया गया है और साक्षी उस भाषा को नहीं समझता है तो उसे ऐसे अभिलेख का भाषान्तर उस भाषा में जिसमें वह दिया गया था अथवा उस भाषा में जिसे वह समझता हो, सुनाया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 278 के अनुसार

जब ऐसा साक्ष्य पूरा हो जाता है तब उसके सम्बन्ध में प्रक्रिया–

(1) जैसे-जैसे प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य जो धारा 275 या धारा 276 के अधीन लिया जाए, पूरा होता जाता है, वैसे-वैसे वह, यदि अभियुक्त हाजिर हो तो उसकी, या यदि वह प्लीडर द्वारा हाजिर हो, तो उसके प्लीडर की उपस्थिति में साक्षी को पढ़कर सुनाया जाएगा और यदि आवश्यक हो तो शुद्ध किया जाएगा।
(2) यदि साक्षी साक्ष्य के किसी भाग की शुद्धता से उस समय इंकार करता है जब वह उसे पढ़कर सुनाया जाता है तो मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश साक्ष्य को शुद्ध करने के बजाय उस पर साक्षी द्वारा उस बाबत की गई आपत्ति का ज्ञापन लिख सकता है और उसमें ऐसी टिप्पणियां जोड़ देगा जैसी वह आवश्यक समझे।
(3) यदि साक्ष्य का अभिलेख उस भाषा से भिन्न भाषा में है जिसमें वह दिया गया है और साक्षी उस भाषा को नहीं समझता है तो उसे ऐसे अभिलेख का भाषान्तर उस भाषा में जिसमें वह दिया गया था अथवा उस भाषा में जिसे वह समझता हो, सुनाया जाएगा।

Procedure in regard to such evidence when completed-
(1) As the evidence of each witness taken under Section 275 or Section 276 is completed, it shall be read over to him in the presence of the accused, if in attendance, or of his pleader, if he appears by pleader, and shall, if necessary, be corrected.
(2) If the witness denies the correctness of any part of the evidence when the same is read over to him, the Magistrate or presiding Judge may, instead of correcting the evidence, make a memorandum thereon of the objection made to it by the witness and shall add such remarks as he thinks necessary.
(3) If the record of the evidence is in a language different from that in which it has been given and the witness does not understand that language, the record shall be interpreted to him in the language in which it was given, or in a language which he understands.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 278 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 277 | साक्ष्य के अभिलेख की भाषा | CrPC Section- 277 in hindi| Language of record of evidence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 277 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 277 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 277 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 277 के अन्तर्गत प्रत्येक मामले में जहां साक्ष्य धारा 275 या धारा 276 के अधीन लिखा जाता है जब साक्षी न्यायालय की भाषा में साक्ष्य देता है तो उसे उसी भाषा में लिखा जाएगा। यदि वह किसी अन्य भाषा में साक्ष्य देता है तो उसे, यदि साक्ष्य हो तो, उसी भाषा में लिखा जा सकेगा और यदि ऐसा करना साक्ष्य न हो तो जैसे-जैसे साक्षी की परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे साक्ष्य का न्यायालय की भाषा में सही अनुवाद तैयार किया जाएगा, उस पर मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे

सीआरपीसी की धारा 277 के अनुसार

साक्ष्य के अभिलेख की भाषा-

प्रत्येक मामले में जहां साक्ष्य धारा 275 या धारा 276 के अधीन लिखा जाता है वहां-
(क) यदि साक्षी न्यायालय की भाषा में साक्ष्य देता है तो उसे उसी भाषा में लिखा जाएगा;
(ख) यदि वह किसी अन्य भाषा में साक्ष्य देता है तो उसे, यदि साक्ष्य हो तो, उसी भाषा में लिखा जा सकेगा और यदि ऐसा करना साक्ष्य न हो तो जैसे-जैसे साक्षी की परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे साक्ष्य का न्यायालय की भाषा में सही अनुवाद तैयार किया जाएगा, उस पर मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे और वह अभिलेख का भाग होगा;
(ग) उस दशा में जिसमें साक्ष्य खण्ड (ख) के अधीन न्यायालय की भाषा से भिन्न किसी भाषा में लिखा जाए, न्यायालय की भाषा में उसका सही अनुवाद यथासाध्य शीघ्र तैयार किया जाएगा, उस पर मजिस्ट्रेट या पीठासीन न्यायाधीश हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा : परन्तु जब खण्ड (ख) के अधीन साक्ष्य अंग्रेजी में लिखा जाता है और न्यायालय की भाषा में उसके अनुवाद की किसी पक्षकार द्वारा अपेक्षा नहीं की जाती है तो न्यायालय ऐसे अनुवाद से अभिमुक्ति दे सकता है।

Language of record of evidence-
In every case where evidence is taken down under Section 275 or Section 276-
(a) if the witness gives evidence in the language of the Court, it shall be taken down in that language;
(b) if he gives evidence in any other language, it may, if practicable, be taken down in that language, and if it is not practicable to do so, a true translation of the evidence in the language of the Court shall be prepared as the examination of the witness proceeds, signed by the Magistrate or presiding Judge, and shall form part of the record;
(c) where under clause (b) evidence is taken down in a language other than the language of the Court, a true translation thereof in the language of the Court shall be prepared as soon as practicable, signed by the Magistrate or presiding Judge, and shall form part of the record:
Provided that when under clause (b) evidence is taken down in English and a translation thereof in the language of the Court is not required by any of the parties. the Court may dispense with such translation.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 277 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 276 | सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख | CrPC Section- 276 in hindi| Record in trial before Court of Session.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 276 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 276 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 276 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 276 के अन्तर्गत सेशन न्यायालय के समक्ष सभी विचारणों में प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य, जैसे-जैसे उसकी परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे या तो स्वयं पीठासीन न्यायाधीश द्वारा लिखा जाएगा या खुले न्यायालय में उसके द्वारा बोल कर लिखवाया जाएगा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा उसके निदेशन और अधीक्षण में लिखा जाएगा। ऐसा साक्ष्य मामूली तौर पर वृत्तांत के रूप में लिखा जाएगा किन्तु पीठासीन न्यायाधीश स्वविवेकानुसार, ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्नोत्तर के रूप में लिख सकता है या लिखवा सकता है। ऐसे लिखे गए साक्ष्य पर पीठासीन न्यायाधीश हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

सीआरपीसी की धारा 276 के अनुसार

सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख-

(1) सेशन न्यायालय के समक्ष सब विचारणों में प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य, जैसे-जैसे उसकी परीक्षा होती जाती है, वैसे-वैसे या तो स्वयं पीठासीन न्यायाधीश द्वारा लिखा जाएगा या खुले न्यायालय में उसके द्वारा बोल कर लिखवाया जाएगा या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त न्यायालय के किसी अधिकारी द्वारा उसके निदेशन और अधीक्षण में लिखा जाएगा।
(2) ऐसा साक्ष्य मामूली तौर पर वृत्तांत के रूप में लिखा जाएगा किन्तु पीठासीन न्यायाधीश स्वविवेकानुसार, ऐसे साक्ष्य के किसी भाग को प्रश्नोत्तर के रूप में लिख सकता है या लिखवा सकता है।
(3) ऐसे लिखे गए साक्ष्य पर पीठासीन न्यायाधीश हस्ताक्षर करेगा और वह अभिलेख का भाग होगा।

Record in trial before Court of Session-
(1) In all trials before a Court of Session, the evidence of each witness shall, as his examination proceeds, be taken down in writing either by the presiding Judge himself or by his dictation in oper Court or, under his direction and superintendence, by an officer of the Coun appointed by him in this behalf.
(2) Such evidence shall ordinarily be taken down in the form of a narrative, but the presiding Judge may, in his discretion, take down, or cause to be taken down, any part of such evidence in the form of question and answer.
(3) The evidence so taken down shall be signed by the presiding Judge and shall form part of the record.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 276 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।