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BNS की धारा 87 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 87 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 87 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 87? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 87 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ इस उद्देश्य से अपहरण, व्यपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाता है कि: उसे किसी से जबरन शादी करनी पड़े, या उसे अनुचित/गलत संबंध (यौन शोषण) करने के लिए मजबूर या बहकाया जाए, या ऐसा होने की पूरी संभावना जानते हुए ऐसा करता है अथवा इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति: किसी भी तरह से दबाव डालकर, डर दिखाकर, धमकी देकर, अपने अधिकार या पद का गलत इस्तेमाल करके, किसी महिला को कहीं जाने के लिए मजबूर करता है, ताकि उससे गलत संबंध कराया जा सके, तो वह धारा 87 के अन्तर्गत 10 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-366) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 87 का विवरण (Section 87 BNS)

BNS की धारा 87 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ इस उद्देश्य से अपहरण, व्यपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाता है कि: उसे किसी से जबरन शादी करनी पड़े, या उसे अनुचित/गलत संबंध (यौन शोषण) करने के लिए मजबूर या बहकाया जाए, या ऐसा होने की पूरी संभावना जानते हुए ऐसा करता है अथवा इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति: किसी भी तरह से दबाव डालकर, डर दिखाकर, धमकी देकर, अपने अधिकार या पद का गलत इस्तेमाल करके, किसी महिला को कहीं जाने के लिए मजबूर करता है, ताकि उससे गलत संबंध कराया जा सके, तो वह धारा 87 के अन्तर्गत 10 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 87 के अनुसार (BNS Section 87 in Hindi)

87. विवाह, आदि के करने को विवश करने के लिए किसी महिला का व्यपहरण करना, अपहरण करना या उत्प्रेरित करना- जो कोई, किसी महिला का व्यपहरण या अपहरण उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी व्यक्ति से विवाह करने के लिए उस महिला को विवश करने के आशय से या वह विवश की जाएगी, यह सम्भाव्य जानते हुए या अनुचित सम्भोग करने के लिए उस महिला को विवश या विलुब्ध करने के लिए या वह महिला अनुचित सम्भोग करने के लिए विवश या विलुब्ध की जाएगी यह सम्भाव्य जानते हुए करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा; और जो कोई, किसी महिला को किसी अन्य व्यक्ति से अनुचित सम्भोग करने के लिए विवश या विलुब्ध करने के आशय से या वह विवश या विलुब्ध की जाएगी यह सम्भाव्य जानते हुए इस संहिता में यथापरिभाषित आपराधिक अभित्रास द्वारा या प्राधिकार के दुरुपयोग या विवश करने के अन्य साधन द्वारा उस महिला को किसी स्थान से जाने को उत्प्रेरित करता है, वह भी पूर्वोक्त प्रकार से दंडित किया जाएगा।

BNS की धारा 87 के अनुसार (BNS Section 87 in English)

87. Kidnapping, abducting or inducing woman to compel her marriage, etc.-Whoever kidnaps or abducts any woman with intent that she may be compelled, or knowing it to be likely that she will be compelled, to marry any person against her will, or in order that she may be forced or seduced to illicit intercourse, or knowing it to be likely that she will be forced or seduced to illicit intercourse, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine; and whoever, by means of criminal intimidation as defined in this Sanhita or of abuse of authority or any other method of compulsion, induces any woman to go from any place with intent that she may be, or knowing that it is likely that she will be, forced or seduced to illicit intercourse with another person shall also be punishable as aforesaid.

बीएनएस की धारा 87 एवंम् आईपीसी की धारा 366 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा लगभग समान हैं।
  • बीएनएस में भाषा अधिक स्पष्ट, समकालीन और पीड़िता-केंद्रित है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 366BNS Section 87भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 10 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी महिला को विवाह, आदि के लिये विवश करने के लिये उसे व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना।10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 87 (BNS 87) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 87 क्या है?

यह धारा उस अपराध से संबंधित है जिसमें किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध इस उद्देश्य से अपहरण, व्यपहरण या बहकाया जाता है कि: उससे जबरन विवाह कराया जाए, या उससे अनुचित/गलत संबंध कराया जाए।

Q2. क्या महिला की सहमति होना जरूरी है?

हाँ। यदि महिला की स्वतंत्र सहमति नहीं है और उसे मजबूर किया गया है, तो यह अपराध बनता है।

Q3. इस अपराध में सजा क्या है?

दोष सिद्ध होने पर:10 वर्ष तक की जेल, और जुर्माना लगाया जा सकता है।

Q4. क्या यह अपराध जमानती है?

आमतौर पर यह गैर-जमानती माना जाता है। जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है।

Q5. क्या महिला की उम्र मायने रखती है?

यह धारा किसी भी उम्र की महिला पर लागू होती है। नाबालिग होने पर अन्य कठोर धाराएँ भी लग सकती हैं।

BNS की धारा 86 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 86 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 86 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 86? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 86 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 86 के अनुसार “क्रूरता” का मतलब ऐसे व्यवहार से है, जिससे किसी महिला को गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुँचे या उस पर गलत दबाव डाला जाए, यह धारा क्रूरता को परिभाषित करती है। इसके अलावा इस धारा 86 को बीएनएस नये कानून के तहत नया जोड़ा गया है।

बीएनएस की धारा 86 का विवरण (Section 86 BNS)

BNS की धारा 86 के अनुसार, यदि “क्रूरता” का मतलब ऐसे व्यवहार से है, जिससे किसी महिला को गंभीर शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुँचे या उस पर गलत दबाव डाला जाए, यह धारा क्रूरता को परिभाषित करती है।

बीएनएस की धारा 86 के अनुसार (BNS Section 86 in Hindi)

86. क्रूरता की परिभाषा - धारा 85 के प्रयोजनों के लिए, "क्रूरता" से अभिप्रेत है-
(क) जानबूझकर किया गया कोई आचरण, जो ऐसी प्रकृति का है, जिससे महिला को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने की या उस महिला के जीवन, अंग या स्वास्थ्य की (चाहे मानसिक हो या शारीरिक) गम्भीर क्षति या खतरा कारित करने की सम्भावना है; या
(ख) किसी महिला को तंग करना, जहां उसे या उससे संबंधित किसी व्यक्ति को किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी विधिविरुद्ध मांग को पूरा करने के लिए प्रपीड़ित करने की दृष्टि से या उसके द्वारा या उससे संबंधित किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी मांग पूरा करने में असफल रहने के कारण, इस प्रकार तंग किया जा रहा है।

BNS की धारा 86 के अनुसार (BNS Section 86 in English)

86. Cruelty defined.-For the purposes of Section 85, "cruelty" means-
(a) any wilful conduct which is of such a nature as is likely to drive the woman to commit suicide or to cause grave injury or danger to life, limb or health (whether mental or physical) of the woman; or
(b) harassment of the woman where such harassment is with a view to coercing her or any person related to her to meet any unlawful demand for any property or valuable security or is on account of failure by her or any person related to her to meet such demand.

(क) जानबूझकर किया गया गंभीर दुर्व्यवहार-

अगर महिला के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए जो:

  • उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दे, या
  • उसके जीवन, शरीर या मानसिक/शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाने वाला हो,

तो इसे क्रूरता माना जाएगा।

(ख) दहेज या संपत्ति के लिए परेशान करना

अगर किसी महिला को:

  • दहेज, पैसे, जमीन, गाड़ी या किसी कीमती चीज की गैरकानूनी मांग पूरी कराने के लिए परेशान किया जाए, या
  • ऐसी मांग पूरी न होने पर उसे या उसके परिवार को सताया या तंग किया जाए,

तो यह भी क्रूरता के अंतर्गत आएगा।

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 86 (BNS 86) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 86 क्या बताती है?

यह धारा बताती है कि धारा 85 के लिए “क्रूरता” किसे कहा जाएगा। यानी किन-किन प्रकार के व्यवहार को कानून क्रूरता मानता है।

Q2. क्रूरता को कितने भागों में बाँटा गया है?

क्रूरता को दो भागों में बाँटा गया है:
1) गंभीर शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न
2) दहेज या संपत्ति की अवैध मांग के लिए उत्पीड़न

Q3. आत्महत्या के लिए मजबूर करना क्या क्रूरता है?

हाँ। यदि जानबूझकर ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो, तो वह क्रूरता मानी जाएगी।

Q4. मानसिक प्रताड़ना भी क्रूरता मानी जाएगी?

हाँ। महिला के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी जानबूझकर किया गया आचरण क्रूरता है।

Q5. शारीरिक चोट पहुँचाना ही क्रूरता है या और भी शामिल हैं?

केवल शारीरिक चोट ही नहीं, बल्कि: लगातार अपमान, धमकी, डराना एवंम् मानसिक दबाव भी क्रूरता में शामिल हैं।

BNS की धारा 85 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 85 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 85 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 85? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के अनुसार यदि किसी महिला का पति या पति का कोई रिश्तेदार उस महिला के साथ क्रूर व्यवहार करता है—जैसे उसे शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, दहेज के लिए परेशान करना, मारपीट करना, अपमानित करना या जानबूझकर उसे कष्ट देना, तो वह धारा 85 के अन्तर्गत 3 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-498A) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 85 का विवरण (Section 85 BNS)

BNS की धारा 85 के अनुसार, यदि किसी महिला का पति या पति का कोई रिश्तेदार उस महिला के साथ क्रूर व्यवहार करता है—जैसे उसे शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, दहेज के लिए परेशान करना, मारपीट करना, अपमानित करना या जानबूझकर उसे कष्ट देना, तो वह धारा 85 के अन्तर्गत 3 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 85 के अनुसार (BNS Section 85 in Hindi)

85. किसी महिला के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना- जो कोई, किसी महिला का पति या पति का नातेदार होते हुए, ऐसी महिला के प्रति क्रूरता करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 85 के अनुसार (BNS Section 85 in English)

85. Husband or relative of husband of a woman subjecting her to cruelty.-Whoever, being the husband or the relative of the husband of a woman, subjects such woman to cruelty shall be punished with imprisonment for a term which may extend to three years and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 85 एवंम् आईपीसी की धारा 498A मे अंतर

  • बीएनएस की धारा 85, वस्तुतः आईपीसी की धारा 498A का आधुनिक रूप है।
  • अपराध और सजा लगभग समान हैं, लेकिन बीएनएस में भाषा अधिक स्पष्ट और न्याय-केंद्रित है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 498ABNS Section 85भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 3 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी विवाहित महिला के प्रति क्रूरता करने के लिये दण्ड3 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 85 (BNS 85) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 85 क्या है?

धारा 85 उस अपराध से संबंधित है, जिसमें किसी महिला का पति या पति का कोई रिश्तेदार उसके साथ क्रूरता करता है। ऐसा करना कानूनन अपराध है।

Q2. क्रूरता (Cruelty) से क्या तात्पर्य है?

क्रूरता में शामिल हैं:
शारीरिक मारपीट
मानसिक प्रताड़ना
दहेज के लिए दबाव या धमकी
अपमान, गाली-गलौज
जानबूझकर मानसिक तनाव देना

Q3. इस धारा के तहत आरोपी कौन हो सकता है?

महिला का पति, पति के माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदार यदि उन्होंने प्रताड़ना की हो।

Q4. इस अपराध में सजा क्या है?

दोष सिद्ध होने पर: 3 वर्ष तक की जेल, और जुर्माना

Q5. क्या यह अपराध संज्ञेय (Cognizable) है?

हाँ, यह संज्ञेय अपराध है। पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है।

BNS की धारा 84 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 84 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 84 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 84? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 84 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 84 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि कोई महिला किसी और पुरुष की पत्नी है, उसे गलत नीयत से बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाता है, या कहीं छिपा देता है, या उसकी मर्जी के बिना उसे रोककर रखता है, ताकि वह किसी व्यक्ति के साथ गलत संबंध बनाए, तो वह 2 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-498) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 84 का विवरण (Section 84 BNS)

BNS की धारा 84 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि कोई महिला किसी और पुरुष की पत्नी है, उसे गलत नीयत से बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाता है, या कहीं छिपा देता है, या उसकी मर्जी के बिना उसे रोककर रखता है, ताकि वह किसी व्यक्ति के साथ गलत संबंध बनाए, तो वह धारा 84 के अन्तर्गत 2 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 84 के अनुसार (BNS Section 84 in Hindi)

84. विवाहित महिला को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या निरुद्ध रखना - जो कोई, किसी महिला को, जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी है, और जिसका अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है, इस आशय से ले जाता है, या फुसलाकर ले जाता है कि वह किसी व्यक्ति के साथ अनुचित सम्भोग करे या इस आशय से ऐसी किसी महिला को छिपाता है या निरुद्ध करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।

BNS की धारा 84 के अनुसार (BNS Section 84 in English)

84. Enticing or taking away or detaining with criminal intent a married woman. Whoever takes or entices away any woman who is and whom he knows or has reason to believe to be the wife of any other man, with intent that she may have illicit intercourse with any person, or conceals or detains with that intent any such woman, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

बीएनएस की धारा 84 एवंम् आईपीसी की धारा 498 मे अंतर

  • आईपीसी की धारा 498 पुराना कानून था,
  • जिसे अब बीएनएस की धारा 84 ने प्रतिस्थापित कर दिया है।
  • सजा लगभग समान है, लेकिन बीएनएस की भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 498BNS Section 84भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 2 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना
  • या दोनो

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विवाहित महिला को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना या निरूद्ध रखना।2 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनोगैर-संज्ञेयजमानतीयकोई मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 84 (BNS 84) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. धारा 84 किस बारे में है?

यह धारा उस अपराध से संबंधित है, जिसमें कोई व्यक्ति किसी विवाहित महिला को गलत नीयत से बहकाकर ले जाए, छिपाए या रोककर रखे।

Q2. क्या महिला की सहमति होने पर भी अपराध बनता है?

हाँ, यदि पुरुष का आपराधिक या गलत उद्देश्य है, तो महिला की सहमति होने पर भी अपराध माना जा सकता है।

Q3. इस धारा में किसे सजा होती है?

सिर्फ उस व्यक्ति को जो महिला को बहकाता है, ले जाता है या छिपाता है।

Q4. क्या पति पर यह धारा लग सकती है?

नहीं, यह धारा पति पर लागू नहीं होती, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति पर लागू होती है।

Q5. क्या यह समझौता योग्य (Compoundable) अपराध है?

हाँ, परिस्थितियों के अनुसार यह समझौता योग्य हो सकता है, लेकिन अदालत की अनुमति आवश्यक होती है।

BNS की धारा 83 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 83 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 83 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 83? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 83 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 83 के अनुसार यदि कोई कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे या बेईमानी से विवाह की रस्में/कर्म पूरा कर लेता है, यह जानते हुए कि उससे कोई कानूनी (विधिपूर्ण) विवाह नहीं हो रहा है, तो वह 7 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-496) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 83 का विवरण (Section 83 BNS)

BNS की धारा 83 के अनुसार, यदि कोई कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे या बेईमानी से विवाह की रस्में/कर्म पूरा कर लेता है, यह जानते हुए कि उससे कोई कानूनी (विधिपूर्ण) विवाह नहीं हो रहा है, तो वह धारा 83 के अन्तर्गत 7 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 83 के अनुसार (BNS Section 83 in Hindi)

83. विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना- जो कोई, बेईमानी से या कपटपूर्वक आशय से विवाहित होने का कर्म यह जानते हुए पूरा करता है कि उसके द्वारा वह विधिपूर्वक विवाहित नहीं हुआ है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 83 के अनुसार (BNS Section 83 in English)

83. Marriage ceremony fraudulently gone through without lawful marriage. Whoever, dishonestly or with a fraudulent intention, goes through the ceremony of being married, knowing that he is not thereby lawfully married, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 83 एवंम् आईपीसी की धारा 496 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा दोनों में समान हैं।
  • बीएनएस की धारा 83, आईपीसी की धारा 496 का आधुनिक और पुनर्गठित रूप है।
  • मुख्य अंतर केवल कानून का नाम और भाषा का है, जिससे प्रावधान अधिक स्पष्ट हो गया है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 496BNS Section 83बेईमानी या धोखे का स्पष्ट आशय

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 7 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी व्यक्ति व्दारा यह जानते हुयेकि वह तद्व्दारा विधिपूर्वक विवाहित नही हुआ है, कपटपूर्वक आशय से विवाह का कर्म करना।7 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानागैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट।

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 83 (BNS 83) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 83 क्या है?

धारा 83 उस अपराध से संबंधित है, जिसमें कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे या बेईमानी से विवाह की रस्में पूरी करता है, जबकि उसे पता होता है कि उससे कोई विधिपूर्ण (कानूनी) विवाह नहीं हो रहा है

Q2. इस धारा के अंतर्गत अपराध कब बनता है?

अपराध तब बनता है जब— विवाह की रस्में/कर्म पूरे किए जाएं, व्यक्ति को यह जानकारी हो कि यह विवाह कानूनन मान्य नहीं है, और यह कार्य धोखे या बेईमानी के इरादे से किया गया हो।

Q3. क्या केवल विवाह का नाटक करना भी अपराध है?

हां। यदि विवाह का नाटक या रस्में धोखे से की गई हैं और सामने वाले को यह विश्वास दिलाया गया है कि वैध विवाह हो रहा है, तो यह धारा लागू होगी।

Q4. इस अपराध में सजा क्या है?

दोषी पाए जाने पर आरोपी को 7 वर्ष तक का कारावास और साथ में जुर्माना हो सकता है।

Q5. क्या इस धारा में न्यूनतम सजा तय है?

नहीं, इस धारा में न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है, केवल अधिकतम सजा का प्रावधान है।

Q6. क्या यह अपराध पुरुष और महिला दोनों द्वारा किया जा सकता है?

हां, यह अपराध किसी भी व्यक्ति (पुरुष या महिला) द्वारा किया जा सकता है।

BNS की धारा 82 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 82 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 82 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 82? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 82 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है, और कानून के अनुसार यह दूसरी शादी अमान्य (शून्य) है, तो वह धारा 82 के अन्तर्गत 7 वर्ष का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है। अथवा अगर कोई व्यक्ति—अपने पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर, किसी और से दूसरी शादी करता है, तो वह 10 वर्ष के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-494) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 82 का विवरण (Section 82 BNS)

BNS की धारा 82 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है, और कानून के अनुसार यह दूसरी शादी अमान्य (शून्य) है अथवा अगर कोई व्यक्ति—अपने पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर, किसी और से दूसरी शादी करता है, तो वह धारा 82 के अन्तर्गत 7 वर्ष से 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 82 के अनुसार (BNS Section 82 in Hindi)

82. पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना (1) जो कोई, पति या पत्नी के जीवित रहते हुए, किसी ऐसी दशा में विवाह करता है, जिसमें ऐसा विवाह इस कारण से शून्य है कि वह ऐसे पति या पत्नी के जीवनकाल में होता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
अपवाद- इस उपधारा का विस्तार किसी ऐसे व्यक्ति पर नहीं है, जिसका ऐसे पति या पत्नी के साथ विवाह सक्षम अधिकारिता के न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया गया है और न ही किसी ऐसे व्यक्ति पर है. जो पूर्व पति या पत्नी के जीवनकाल में विवाह कर लेता है, यदि ऐसा पति या पत्नी उस पश्चात्वर्ती विवाह के समय ऐसे व्यक्ति से सात वर्ष तक निरन्तर दूर रहा है, और उस समय के भीतर ऐसे व्यक्ति द्वारा यह नहीं सुना गया है कि वह जीवित है, परन्तु यह तब जब कि ऐसा पश्चात्वर्ती विवाह करने वाला व्यक्ति उस विवाह के होने से पूर्व उस व्यक्ति को, जिसके साथ ऐसा विवाह होता है, तथ्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी, जहाँ तक कि उनका ज्ञान उसको हो, से अवगत करा दे।
(2) जो कोई, अपने पूर्व विवाह के तथ्य को उस व्यक्ति से छिपाकर, उससे पश्चातवर्ती विवाह करता है, वह उपधारा (1) के अधीन अपराध करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 82 के अनुसार (BNS Section 82 in English)

82. Marrying again during lifetime of husband or wife.-(1) Whoever having a husband or wife living, marries in any case in which such marriage is void by reason of its taking place during the life of such husband or wife, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Exception- This sub-section does not extend to any person whose marriage with such husband or wife has been declared void by a Court of competent jurisdiction, nor to any person who contracts a marriage during the life of a former husband or wife, if such husband or wife, at the time of the subsequent marriage, shall have been continually absent from such person for the space of seven years, and shall not have been heard of by such person as being alive within that time provided the person contracting such subsequent marriage shall, before such marriage takes place, inform the person with whom such marriage is contracted of the real state of facts so far as the same are within his or her knowledge.
(2) Whoever commits the offence under sub-section (1) having concealed from the person with whom the subsequent marriage is contracted, the fact of the former marriage, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 82 एवंम् आईपीसी की धारा 494 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा दोनों में समान हैं।
  • बीएनएस की धारा 82, आईपीसी की धारा 494 (और 495) का पुनर्गठित और आधुनिक रूप है।
  • बीएनएस में पहले विवाह को छिपाकर दूसरी शादी करने के अपराध को एक ही धारा में समाहित कर दिया गया है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 494BNS Section 82पहले विवाह को छिपाकर दूसरी शादी करने के अपराध को एक ही धारा में समाहित कर दिया गया है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करना-

  • 7 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

अगर कोई व्यक्ति अपने पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर, किसी और से दूसरी शादी करता है,-

  • 10 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पति या पत्नी के जीवनकाल मे पुनः विवाह करना7 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानागैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट।
उस व्यक्ति से, जिसके पश्चातवर्ती विवाह किया जाताहै, पूर्ववर्ती विवाह को छिपाकर वही अपराध10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानागैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट।

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 82 (BNS 82) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 82 क्या है?

धारा 82 उस अपराध से संबंधित है, जिसमें कोई व्यक्ति अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है, जबकि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई होती।

Q2. धारा 82 के अंतर्गत अपराध कब बनता है?

जब पहले पति या पत्नी जीवित हों, पहली शादी कानूनी रूप से वैध हो, और इसके बावजूद दूसरी शादी की जाए, तो यह अपराध माना जाता है।

Q3. इस अपराध में सजा क्या है?

सामान्य स्थिति में: 7 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना यदि पहले विवाह की सच्चाई छिपाकर दूसरी शादी की जाए: 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना

Q4. क्या हर दूसरी शादी अपराध मानी जाएगी?

नहीं। यदि पहली शादी को न्यायालय द्वारा शून्य (रद्द) घोषित कर दिया गया हो, तो दूसरी शादी अपराध नहीं होगी।

Q5. यदि पति या पत्नी लंबे समय से लापता हो, तो क्या दूसरी शादी की जा सकती है?

हां, यदि पति या पत्नी लगातार 7 वर्ष से लापता हों और इस अवधि में यह जानकारी न मिली हो कि वह जीवित हैं, तो दूसरी शादी की जा सकती है, बशर्ते कि दूसरी शादी से पहले नए जीवनसाथी को पूरी सच्चाई बता दी गई हो।

Q6. इस धारा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

विवाह संस्था की पवित्रता बनाए रखना, धोखाधड़ीपूर्ण विवाहों को रोकना और जीवनसाथी के अधिकारों की रक्षा करना।