Home Blog Page 211

सीआरपीसी की धारा 166B | भारत के बाहर के किसी देश या स्थान से भारत में अन्वेषण के लिए किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र | CrPC Section- 166B in hindi| Letter of request from a country or place outside India to a Court or an authority for investigation in India.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 166B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 166B कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 166B का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 166B के अन्तर्गत यदि कोई पुलिस अधिकारी या भारसाधक अधिकारी अथवा न्यायालय व्दारा किसी मामले जांच हेतु, भारत के बाहर किसी देश या स्थान मे जांच करने के लिये किसी न्यायालय अथवा सक्षम अधिकारी को अनुरोध पत्र के आदेश भेज कर जांच करा सकते है। यह धारा 166B ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा भारत के बाहर के किसी देश या स्थान से भारत में अन्वेषण के लिए किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र जारी करने की प्रकिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 166B के अनुसार

भारत के बाहर के किसी देश या स्थान से भारत में अन्वेषण के लिए किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र-

(1) भारत के बाहर के किसी देश या स्थान के ऐसे न्यायालय या प्राधिकारी से, जो उस देश या स्थान में अन्वेषणाधीन किसी अपराध के सम्बन्ध में किसी व्यक्ति की परीक्षा करने के लिए या किसी दस्तावेज या चीज को पेश कराने के लिए उस देश या स्थान में ऐसा पत्र भेजने के लिए सक्षम है, अनुरोध-पत्र की प्राप्ति पर, केन्द्रीय सरकार यदि वह उचित समझे तो,-
(i) उसे मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या ऐसे महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसे वह इस निमित्त नियुक्त करे, अग्रेषित कर सकेगी जो तब उस व्यक्ति को अपने समक्ष समन करेगा तथा उसके कथन को अभिलिखित करेगा या दस्तावेज या चीज को पेश करवाएगा; या
(ii) उस पत्र को अन्वेषण के लिए किसी पुलिस अधिकारी को भेज सकेगा जो तब उसी रीति में अपराध का अन्वेषण करेगा,
मानो वह अपराध भारत के भीतर किया गया हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन लिए गए या संगृहीत सभी साक्ष्य, उसकी अधिप्रमाणित प्रतिलिपियां या इस प्रकार संगृहीत चीज, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी द्वारा उस न्यायालय या प्राधिकारी को, जिसने अनुरोध-पत्र भेजा था, पारेषित करने के लिए केन्द्रीय सरकार को ऐसी रीति में, जिसे केन्द्रीय सरकार उचित समझे, अग्रेषित करेगा।

Letter of request from a country or place outside India to a Court or an authority for investigation in India-
(1) Upon receipt of a letter of request from a Court or an authority in a country or place outside India competent to issue such letter in that country or place for the examination of any person or production of any document or thing in relation to an offence under investigation in that country or place, the Central Government may, if it thinks fit,-
(i) forward the same to the Chief Metropolitan Magistrate or Chief Judicial Magistrate or such Metropolitan Magistrate or Judicial Magistrate as he may appoint in this behalf, who shall thereupon summon the person before him and record his statement or cause the document or thing to be produced; or
(ii) send the letter to any police officer for investigation, who shall thereupon investigate into the offence in the same manner,
as if the offence had been committed within India.
(2) All the evidence taken or collected under sub-section (1), or authenticated copies thereof or the thing so collected, shall be forwarded by the Magistrate or police officer, as the case may be, to the Central Government for transmission to the Court or the authority issuing the letter of request, in such manner as the Central Government may deem fit.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 166B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 166A | भारत के बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र | CrPC Section- 166A in hindi| Letter of request to competent authority for investigation in a country or place outside India.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 166A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 166A कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 166A का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 166A के अन्तर्गत यदि कोई पुलिस अधिकारी या भारसाधक अधिकारी, किसी मामले की जांच हेतु, भारत के बाहर किसी देश या स्थान मे जांच करने के लिये सक्षम अधिकारी को अनुरोध पत्र के आदेश जारी कर सकते है। यह धारा 166A ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी द्वारा भारत के बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण (जांच) के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र जारी करने की प्रकिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 166A के अनुसार

भारत के बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोध-पत्र-

(1) इस संहिता में किसी बात के होते हुए भी, यदि किसी अपराध के अन्वेषण के अनुक्रम में अन्वेषण अधिकारी या अन्वेषण अधिकारी की पंक्ति से वरिष्ठ कोई अधिकारी यह आवेदन करता है कि भारत के बाहर किसी देश या स्थान में साक्ष्य उपलभ्य हो सकता है तो कोई दाण्डिक न्यायालय अनुरोध-पत्र भेजकर उस देश या स्थान के ऐसे न्यायालय या प्राधिकारी से, जो ऐसे अनुरोध-पत्र पर कार्रवाई करने के लिए सक्षम है, यह अनुरोध कर सकेगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की मौखिक परीक्षा करे, जिसके बारे में यह अनुमान है कि वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से अवगत है, और ऐसी परीक्षा के अनुक्रम किए गए उसके कथन को अभिलिखित करे और ऐसे व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति से उस मामले से सम्बन्धित ऐसे दस्तावेज या चीज को पेश करने की अपेक्षा करे जो उसके कब्जे में है और इस प्रकार लिए गए या संगृहीत सभी साक्ष्य या उसकी अधिप्रमाणित प्रतिलिपि या इस प्रकार संगृहीत चीज को ऐसा पत्र भेजने वाले न्यायालय को अग्रेषित करे।
(2) अनुरोध-पत्र ऐसी रीति से पारेषित किया जाएगा जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अभिलिखित प्रत्येक कथन या प्राप्त प्रत्येक दस्तावेज या चीज इस अध्याय के अधीन अन्वेषण के दौरान संगृहीत साक्ष्य समझा जाएगा।

Letter of request to competent authority for investigation in a country or place outside India-
(1) Notwithstanding anything contained in this Code, if, in the course of an investigation into an offence, an application is made by the investigating officer or any officer superior in rank to the investigating officer that evidence may be available in a country or place outside India, any Criminal Court may issue a letter of request to a Court or an authority in that country or place competent to deal with such request to examine orally any person supposed to be acquainted with the facts and circumstances of the case and to record his statement made in the course of such examination and also to require such person or any other person to produce any document or thing which may be in his possession pertaining to the case and to forward all the evidence so taken or collected or the authenticated copies thereof or the thing so collected to the Court issuing such letter.
(2) The letter of request shall be transmitted in such manner as the Central Government may specify in this behalf.
(3) Every statement recorded or document or thing received under sub-section (1) shall be deemed to be the evidence collected during the course of investigation under this Chapter.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 166A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 166 | पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी कब किसी अन्य अधिकारी से तलाशी-वारण्ट जारी करने की अपेक्षा कर सकता है | CrPC Section- 166 in hindi| When officer in charge of police station may require another to issue search-warrant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 166 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 166 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 166 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 166 के अन्तर्गत यदि कोई पुलिस अधिकारी या भारसाधक अधिकारी या जांच करने वाला पुलिस अधिकारी किसी मामले में ऐसे वर्तमान समय में उपस्थित नही है अथवा किसी अन्य कारणवश किसी अन्य पुलिस अधिकारी को तलाशी हेतु जांच के आदेश कर सकते है। यह धारा 166 ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी से तलाशी-वारण्ट जारी करने की प्रकिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 166 के अनुसार

पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी कब किसी अन्य अधिकारी से तलाशी-वारण्ट जारी करने की अपेक्षा कर सकता है-

(1) पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी या उपनिरीक्षक से अनिम्न पंक्ति का पुलिस अधिकारी, जो अन्वेषण कर रहा है, किसी दूसरे पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से, चाहे वह उस जिले में हो, या दूसरे जिले में हो, किसी स्थान में ऐसे मामले में तलाशी लिवाने की अपेक्षा कर सकता है जिसमें पूर्वकथित अधिकारी स्वयं अपने थाने की सीमाओं के अन्दर ऐसी तलाशी लिवा सकता है।
(2) ऐसा अधिकारी ऐसी अपेक्षा किए जाने पर धारा 165 के उपबन्धों के अनुसार कार्यवाही करेगा और यदि कोई चीज मिले तो उसे उस अधिकारी के पास भेजेगा जिसकी अपेक्षा पर तलाशी ली गई है।
(3) जब कभी यह विश्वास करने का कारण है कि दूसरे पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से उपधारा (1) के अधीन तलाशी लिवाने की अपेक्षा करने में जो विलम्ब होगा उसका परिणाम यह हो सकता है कि अपराध किए जाने का साक्ष्य छिपा दिया जाए या नष्ट कर दिया जाए, तब पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के लिए या उस अधिकारी के लिए, जो इस अध्याय के अधीन अन्वेषण कर रहा है, यह विधिपूर्ण होगा कि वह दूसरे पुलिस थाने की स्थानीय सीमाओं के अन्दर किसी स्थान की धारा 165 के उपबन्धों के अनुसार ऐसे तलाशी ले या लिवाए मानो ऐसा स्थान उसके अपने थाने की सीमाओं के अन्दर हो।
(4) कोई अधिकारी, जो उपधारा (3) के अधीन तलाशी संचालित कर रहा है, उस पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, जिसकी सीमाओं के अन्दर ऐसा स्थान है, तलाशी की सूचना तत्काल भेजेगा और ऐसी सूचना के साथ धारा 100 के अधीन तैयार की गई सूची की (यदि कोई हो) प्रतिलिपि भी भेजेगा और उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त निकटतम मजिस्ट्रेट को धारा 165 की उपधारा (1) और (3) में निर्दिष्ट अभिलेखों की प्रतिलिपियां भी भेजेगा।
(5) जिस स्थान की तलाशी ली गई है, उसके स्वामी या अधिभोगी को, आवेदन करने पर उस अभिलेख की, जो मजिस्ट्रेट को उपधारा (4) के अधीन भेजा जाए, प्रतिलिपि निःशुल्क दी जाएगी।

When officer in charge of police station may require another to issue search-warrant-
(1) An officer in charge of a police station or a police officer not being below the rank of sub-inspector making an investigation may require an officer in charge of another police station, whether in the same or a different district, to cause a search to be made in any place, in any case in which the former officer might cause such search to be made, within the limits of his own station.
(2) Such officer, on being so required, shall proceed according to the provisions of Section 165, and shall forward the thing found, if any, to the officer at whose request the search was made.
(3) Whenever there is reason to believe that the delay occasioned by requiring an officer in charge of another police station to cause a search to be made under sub section (1) might result in evidence of the commission of an offence being concealed or destroyed, it shall be lawful for an officer in charge of a police station or a police officer making any investigation under this Chapter to search, or cause to be searched, any place in the limits of another police station in accordance with the provisions of Section 165, as if such place were within the limits of his own police station.
(4) Any officer conducting a search under sub-section (3) shall forthwith send notice of the search to the officer in charge of the police station within the limits of which such place is situate, and shall also send with such notice a copy of the list (if any) prepared under Section 100, and shall also send to the nearest Magistrate empowered to take cognizance of the offence, copies of the records referred to in sub sections (1) and (3) of Section 165.
(5) The owner or occupier of the place searched shall, on application, be furnished free of cost with a copy of any record sent to the Magistrate under sub-section (4).

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 166 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 165 | पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी | CrPC Section- 165 in hindi| Search by police officer.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 165 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 165 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 165 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 165 के अन्तर्गत कोई पुलिस अधिकारी या भारसाधक अधिकारी या जांच करने वाला पुलिस अधिकारी जिसे यह प्रतीत होता हो, कि इस व्यक्ति के पास कोई ऐसी वस्तु है, जिसे कोई गैर कानूनी तरीके से ले जा रहा है या ले जायेगा। ऐसी स्थिति में पुलिस अधिकारी द्वारा अपनी सीमा के भीतर किसी भी व्यक्ति की तलाशी हेतु जांच आदेश कर सकता है। यह धारा 165 ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी अथवा जांच की प्रक्रिया को बतलाता है।

सीआरपीसी की धारा 165 के अनुसार

पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी-

(1) जब कभी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी या अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के पास यह विश्वास करने के उचित आधार हैं कि किसी ऐसे अपराध के अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह प्राधिकृत है, आवश्यक कोई चीज उस पुलिस थाने की, जिसका वह भारसाधक है या जिससे वह संलग्न है, सीमाओं के अन्दर किसी स्थान में पाई जा सकती है और उसकी राय में ऐसी चीज अनुचित विलम्ब के बिना तलाशी से अन्यथा अभिप्राप्त नहीं की जा सकती, तब ऐसा अधिकारी अपने विश्वास के आधारों को लेखबद्ध करने, और यथासंभव उस चीज को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, ऐसे लेख में विनिर्दिष्ट करने के पश्चात् उस थाने की सीमाओं के अन्दर किसी स्थान में एसी चीज के लिए तलाशी ले सकता है या तलाशी लिवा सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि साध्य है तो, तलाशी स्वयं लेगा।
(3) यदि वह तलाशी स्वयं लेने में असमर्थ है और कोई अन्य ऐसा व्यक्ति, जो तलाशी लेने के लिए सक्षम है, उस समय उपस्थित नहीं है तो वह, ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात् अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से अपेक्षा कर सकता है कि वह तलाशी ले और ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को ऐसा लिखित आदेश देगा जिसमें उस स्थान को जिसकी तलाशी ली जानी है, और यथासंभव उस चीज़ को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, विनिर्दिष्ट किया जाएगा और तब ऐसा अधीनस्थ अधिकारी उस चीज के लिए तलाशी उस स्थान में ले सकेगा।
(4) तलाशी-वारण्टों के बारे में इस संहिता के उपबन्ध और तलाशियों के बारे में धारा 100 के साधारण उपबन्ध इस धारा के अधीन ली जाने वाली तलाशी को, जहां तक हो सके, लागू होंगे।
(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन बनाये गए किसी भी अभिलेख की प्रतियां तत्काल ऐसे निकटतम मजिस्ट्रेट के पास भेज दी जाएँगी जो उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त है और जिस स्थान की तलाशी ली गई है, उसके स्वामी या अधिभोगी को, उसके आवेदन पर, उसकी एक प्रतिलिपि मजिस्ट्रेट द्वारा निःशुल्क दी जाएगी।

Search by police officer-
(1) Whenever an officer in charge of a police station or a police officer making an investigation has reasonable grounds for believing that anything necessary for the purposes of an investigation into any offence which he is authorised to investigate may be found in any place within the limits of the police station of which he is in charge, or to which he is attached, and that such thing cannot in his opinion be otherwise obtained without undue delay, such officer may, after recording in writing the grounds of his belief and specifying in such writing, so far possible, the thing for which search is to be made, search, or cause search to be made, for such thing in any place within the limits of such station.
(2) A police officer proceeding under sub-section (1), shall, if practicable, conduct the search in person.
(3) If he is unable to conduct the search in person, and there is no other person competent to make the search present at the time, he may, after recording in writing his reasons for so doing, require any officer subordinate to him to make the search, and he shall deliver to such subordinate officer an order in writing, specifying the place to be searched, and so far as possible, the thing for which search is to be made; and such subordinate officer may thereupon search for such thing in such place.
(4) The provisions of this Code as to search-warrants and the general provisions as to searches contained in Section 100 shall, so far as may be, apply to a search made under this section.
(5) Copies of any record made under sub-section (1) or sub-section (3) shall forthwith be sent to the nearest Magistrate empowered to take cognizance of the offence, and the owner or occupier of the place searched shall, on application, be furnished, free of cost, with a copy of the same by the Magistrate.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 165 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 163 | कोई उत्प्रेरणा न दिया जाना | CrPC Section- 163 in hindi| No inducement to be offered.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 163 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 163 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 163 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 163 के अन्तर्गत कोई पुलिस अधिकारी या प्राधिकार वाला अन्य व्यक्ति भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 24 में यथा वर्णित कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन न तो देगा और न करेगा तथा न दिलवाएगा और न करवाएगा किन्तु कोई पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति इस अध्याय के अधीन किसी अन्वेषण के दौरान किसी व्यक्ति को कोई कथन करने से, जो वह अपनी स्वतंत्र इच्छा से करना चाहे, किसी चेतावनी द्वारा या अन्यथा निवारित न करेगा।

सीआरपीसी की धारा 163 के अनुसार

कोई उत्प्रेरणा न दिया जाना—

(1) कोई पुलिस अधिकारी या प्राधिकार वाला अन्य व्यक्ति भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 24 में यथा वर्णित कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन न तो देगा और न करेगा तथा न दिलवाएगा और न करवाएगा।
(2) किन्तु कोई पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति इस अध्याय के अधीन किसी अन्वेषण के दौरान किसी व्यक्ति को कोई कथन करने से, जो वह अपनी स्वतंत्र इच्छा से करना चाहे, किसी चेतावनी द्वारा या अन्यथा निवारित न करेगा :
परन्तु इस धारा की कोई बात धारा 164 की उपधारा (4) के उपबन्धों पर प्रधान न डालेगी।

No inducement to be offered-
(1) No police officer or other person in authority shall offer or make, or cause to be offered or made, any such inducement, threat or promise as is mentioned in Section 24 of the Indian Evidence Act, 1872 (1 of 1872).
(2) But no police officer or other person shall prevent, by any caution or otherwise, any person from making in the course of any investigation under this Chapter any statement which he may be disposed to make of his own free will :
Provided that nothing in this sub-section shall affect the provisions of sub-section (4) of Section 164.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 163 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 160 | साक्षियों की हाजिरी की अपेक्षा करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति | CrPC Section- 160 in hindi| Police officer’s power to require attendance of witnesses.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 160 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में धारा 160 के अन्तर्गत कोई पुलिस अधिकारी, जो इस अध्याय के अधीन अन्वेषण कर रहा है, अपने थाने की या किसी पास के थाने की सीमाओं के अन्दर विद्यमान किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसकी दी गई इत्तिला से या अन्यथा उस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित होना प्रतीत होता है, अपने समक्ष हाजिर होने की अपेक्षा लिखित आदेश द्वारा कर सकता है और वह व्यक्ति अपेक्षानुसार हाजिर होगा। परन्तु किसी पुरुष से [जो पन्द्रह वर्ष से कम आयु का है या पैंसठ वर्ष से अधिक आयु है का या किसी स्त्री से या शारीरिक या मानसिक रूप से निर्योग्य किसी व्यक्ति से] ऐसे स्थान से जिसमें ऐसा पुरुष या स्त्री निवास करती है, भिन्न किसी स्थान पर हाजिर होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।

सीआरपीसी की धारा 160 के अनुसार

साक्षियों की हाजिरी की अपेक्षा करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति–

(1) कोई पुलिस अधिकारी, जो इस अध्याय के अधीन अन्वेषण कर रहा है, अपने थाने की या किसी पास के थाने की सीमाओं के अन्दर विद्यमान किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसकी दी गई इत्तिला से या अन्यथा उस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित होना प्रतीत होता है, अपने समक्ष हाजिर होने की अपेक्षा लिखित आदेश द्वारा कर सकता है और वह व्यक्ति अपेक्षानुसार हाजिर होगा :
परन्तु किसी पुरुष से [जो पन्द्रह वर्ष से कम आयु का है या पैंसठ वर्ष से अधिक आयु है का या किसी स्त्री से या शारीरिक या मानसिक रूप से निर्योग्य किसी व्यक्ति से] ऐसे स्थान से जिसमें ऐसा पुरुष या स्त्री निवास करती है, भिन्न किसी स्थान पर हाजिर होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।
(2) अपने निवास स्थान से भिन्न किसी स्थान पर उपधारा (1) के अधीन हाजिर होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के उचित खर्चों का पुलिस अधिकारी द्वारा संदाय कराने के लिए राज्य सरकार इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्ध कर सकती है।

Police officer’s power to require attendance of witnesses-
(1) Any police officer making an investigation under this Chapter may, by order in writing, require the attendance before himself of any person being within the limits of his own or any adjoining station who, from the information given or otherwise, appears to be acquainted with the facts and circumstances of the case; and such person shall attend as so required:
Provided that no male person [under the age of fifteen years or above the age of sixty-five years or a woman or a mentally or physically disabled person] shall be required to attend at any place other than the place in which such male person or woman resides.
(2) The State Government may, by rules made in this behalf, provide for the payment by the police officer of the reasonable expenses of every person, attending under sub-section (1) at any place other than his residence.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 160 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।