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आईपीसी की धारा 456 | रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन के लिये दण्ड | IPC Section- 456 in hindi| Punishment for lurking house-trespass or house-breaking by night.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 456 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 456 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 456 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 456 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, तो वह धारा 456 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 456 के अनुसार

रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन के लिये दण्ड –

जो कोई रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Punishment for lurking house-trespass or house-breaking by night-
Whoever commits lurking house-trespass by night, or house-breaking by night, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also liable to fine.

लागू अपराध

रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 456 के अंतर्गत जो कोई रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 456 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन।तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 456 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 455 | उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन | IPC Section- 455 in hindi| Lurking house-trespass or house-breaking after preparation for hurt, assault or wrongful restraint.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 455 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 455 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 455 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 455 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन करेगा, तो वह धारा 455 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 455 के अनुसार

उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन-

जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Lurking house-trespass or house-breaking after preparation for hurt, assault or wrongful restraint-
Whoever commits lurking house-trespass, or house breaking, having made preparation for causing hurt to any person, or for assaulting any person, or for wrongfully restraining any person, or for putting any person in fear of hurt or of assault or of wrongful restraint shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

उपहति, कारित करने, हमला आदि की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन।
सजा- दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 455 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 455 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उपहति, कारित करने, हमला आदि की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह भेदन।दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 455 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 454 | कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन | IPC Section- 454 in hindi| Lurking house-trespass or house-breaking in order to commit offence punishable with imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 454 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 454 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 454 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 454 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गृह-अतिचार करेगा, तो वह धारा 454 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 454 के अनुसार

कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन—

जो कोई कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिये प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी।

Lurking house-trespass or house-breaking in order to commit offence punishable with imprisonment-
Whoever commits lurking house-trespass or house-breaking in order to the committing of any offence punishable with imprisonment, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine; and if the offence intended to be committed is theft, the term of the imprisonment may be extended to ten years.

लागू अपराध

कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यदि वह अपराध चोरी है।
सजा- दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 454 के अंतर्गत जो कोई कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिये प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। यदि वह अपराध चोरी है, तो कारावास की अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 454 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन।तीन वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि वह अपराध चोरी है।दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 454 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 453 | प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह-भेदन के लिये दण्ड | IPC Section- 453 in hindi| Punishment for lurking house-trespass or house-breaking.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 453 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 453 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 453 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 453 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह भेदन करेगा, तो वह धारा 453 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 453 के अनुसार

प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह-भेदन के लिये दण्ड-

जो कोई प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Punishment for lurking house-trespass or house-breaking-
Whoever commits lurking house-trespass or house-breaking, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह-भेदन।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 453 के अंतर्गत जो कोई प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह भेदन करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 453 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
प्रच्छन्न गृह अतिचार या गृह-भेदन।दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 453 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 452 | उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार | IPC Section- 452 in hindi| House-trespass after preparation for hurt, assault or wrongful restraint.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 452 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 452 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 452 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 452 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गृह-अतिचार करेगा, तो वह धारा 452 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 452 के अनुसार

उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार-

जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गृह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

House-trespass after preparation for hurt, assault or wrongful restraint-
Whoever commits house-trespass, having made preparation for causing hurt to any person or for assaulting any person, or for wrongfully restraining any person, or for putting any person in fear of hurt, or of assault, or of wrongful restraint, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

उपहति कारित करने, हमला करने आदि की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 452 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की, या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके गृह-अतिचार करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 452 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उपहति कारित करने, हमला करने आदि की तैयारी के पश्चात् गृह-अतिचार।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 452 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 451 | कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिये गृह-अतिचार | IPC Section- 451 in hindi| House-trespass in order to commit offence punishable with imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 451 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 451 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 451 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 451 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिये गृह-अतिचार करेगा, तो वह धारा 451 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 451 के अनुसार

कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिये गृह-अतिचार—

जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिये गृह-अतिचार करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी।

House-trespass in order to commit offence punishable with imprisonment-
Whoever commits house-trespass in order to the committing of any offence punishable with imprisonment, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, and shall also be liable to fine; and if the offence intended to be committed is theft, the term of the imprisonment may be extended to seven years.

लागू अपराध

कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिये गृह-अतिचार।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
यदि वह अपराध चोरी है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 451 के अंतर्गत जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिये गृह-अतिचार करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 451 अंतर्गत जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिये गृह-अतिचार करेगा, यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है इसलिए जमानत आसानी से मिल सकेगी, यदि अपराध चोरी का है, तो यह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिये गृह-अतिचार।दो वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि वह अपराध चोरी है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 451 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।