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आईपीसी की धारा 462 | उसी अपराध के लिये दण्ड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गयी है | IPC Section- 462 in hindi| Punishment for same offence when committed by person entrusted with custody.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 462 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 462 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 462 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 462 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई ऐसा बन्द पात्र, जिसमें सम्पत्ति हो, या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किये जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार न रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलेगा या उपबन्धित करेगा, तो वह धारा 462 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 462 के अनुसार

उसी अपराध के लिये दण्ड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गयी है-

जो कोई ऐसा बन्द पात्र, जिसमें सम्पत्ति हो, या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किये जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार न रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलेगा या उपबन्धित करेगा वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Punishment for same offence when committed by person entrusted with custody-
Whoever, being entrusted with any closed receptacle which contains or which he believes to contain property, without having authority to open the same, dishonestly, or with intent to commit mischief, breaks open or unfastens that receptacle, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

ऐसा बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है या समझी जाती है, न्यस्त किए जाने पर कपटपूर्वक खोलना।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 462 के अंतर्गत जो कोई ऐसा बन्द पात्र, जिसमें सम्पत्ति हो, या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, अपने पास न्यस्त किये जाने पर उसको खोलने का प्राधिकार न रखते हुए, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से, उस पात्र को तोड़कर खोलेगा या उपबन्धित करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 462 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसा बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है या समझी जाती है, न्यस्त किए जाने पर कपटपूर्वक खोलना।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 462 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 461 | ऐसे पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना | IPC Section- 461 in hindi| Dishonestly breaking open receptacle containing property.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 461 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 461 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 461 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 461 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी ऐसे बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति हो या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से तोड़कर खोलेगा, या उपबन्धित करेगा, तो वह धारा 461 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 461 के अनुसार

ऐसे पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना-

जो कोई किसी ऐसे बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति हो या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से तोड़कर खोलेगा, या उपबन्धित करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Dishonestly breaking open receptacle containing property-
Whoever dishonestly or with intent to commit mischief, breaks open or unfastens any closed receptacle which contains or which he believes to contain property, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

ऐसा बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है या समझी जाती है, बेईमानी से तोड़कर खोलना या उद्दबंधित करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 461 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति हो या जिसमें सम्पत्ति होने का उसे विश्वास हो, बेईमानी से या रिष्टि करने के आशय से तोड़कर खोलेगा, या उपबन्धित करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 461 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसा बन्द पात्र को, जिसमें सम्पत्ति है या समझी जाती है, बेईमानी से तोड़कर खोलना या उद्दबंधित करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 461 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 460 | रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन में संयुक्ततः सम्पृक्त समस्त व्यक्ति दण्डनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मृत्यु या घोर उपहति कारित की हो | IPC Section- 460 in hindi| All persons jointly concerned in lurkng house-trespass or house breaking by night punishable where death or grievous hurt caused by one of them.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 460 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 460 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 460 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 460 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करेगा या मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो वह धारा 460 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 460 के अनुसार

रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन में संयुक्ततः सम्पृक्त समस्त व्यक्ति दण्डनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मृत्यु या घोर उपहति कारित की हो-

यदि रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करेगा या मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो ऐसे रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करने में संयुक्तत: सम्पृक्त हर व्यक्ति, आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

All persons jointly concerned in lurkng house-trespass or house breaking by night punishable where death or grievous hurt caused by one of them-
If, at the time of the committing of lurking house-trespass by night or house breaking by night, any person guilty of such offence shall voluntarily cause or attempt to cause death or grievous hurt to any person, every person jointly concerned in committing such lurking house-trespass by night or house-breaking by night, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन में संयुक्ततः सम्पृक्त समस्त व्यक्ति दण्डनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मृत्यु या घोर उपहति।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 460 के अंतर्गत यदि रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करेगा या मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 460 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन में संयुक्ततः सम्पृक्त समस्त व्यक्ति दण्डनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मृत्यु या घोर उपहति।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 460 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 459 | प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो | IPC Section- 459 in hindi| Grievous hurt caused whilst committing lurking house-trespass or house breaking.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 459 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 459 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 459 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 459 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा या किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो वह धारा 459 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 459 के अनुसार

प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो-

जो कोई प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा या किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Grievous hurt caused whilst committing lurking house-trespass or house breaking-
Whoever, whilst committing lurking house-trespass or house-breaking causes grievous hurt to any person or attempts to cause death or grievous hurt to any person, shall be punished with imprisonment for life, or imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय घोर उपहति।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 459 के अंतर्गत जो कोई प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा या किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 459 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
प्रच्छन्न गृह-अतिचार या गृह-भेदन करते समय घोर उपहति।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 459 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 458 | उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन | IPC Section- 458 in hindi| Lurking house-trespass or house-breaking by night after preparation for hurt, assault, or wrongful restraint.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 458 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 458 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 458 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 458 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या रात्रौ गृह-भेदन करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, तो वह धारा 458 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 458 के अनुसार

उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन-

जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या रात्रौ गृह-भेदन करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Lurking house-trespass or house-breaking by night after preparation for hurt, assault, or wrongful restraint-
Whoever commits lurking house-trespass by night, or house-breaking by night, having made preparation for causing hurt to any person or for assaulting any person, or for wrongfully restraining any person, or for putting any person in fear of hurt, or of assault, or of wrongful restraint, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to fourteen years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

उपहति कारित करने, आदि की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन।
सजा- चौदह वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 458 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की, या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या रात्रौ गृह-भेदन करने की, अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के भय में डालने की तैयारी करके, रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 458 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उपहति कारित करने, आदि की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छन्न गृह अतिचार या रात्रौ गृह भेदन।चौदह वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 458 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 457 | कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिये रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन | IPC Section- 457 in hindi| Lurking house-trespass or house-breaking by night in order to commit offence punishable with imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 457 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 457 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 457 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 457 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, तो वह धारा 457 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 457 के अनुसार

कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिये रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन-

जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा, तथा यदि वह अपराध, जिसका किया जाना आशयित हो, चोरी हो, तो कारावास की अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी।

Lurking house-trespass or house-breaking by night in order to commit offence punishable with imprisonment-
Whoever commits lurking house-trespass by night, or house-breaking by night, in order to the committing of any offence punishable with imprisonment, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, and shall also be liable to fine, and, if the offence intended to be committed is theft, the term of the imprisonment may be extended to fourteen years.

लागू अपराध

कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिये रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन।
सजा- पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यदि वह अपराध चोरी है।
सजा- चौदह वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 457 के अंतर्गत जो कोई कारावास से दण्डनीय कोई अपराध करने के लिए रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। यदि वह अपराध चोरी का है, तो कारावास की अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 457 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिये रात्रौ प्रच्छन्न गृह-अतिचार या रात्रौ गृह भेदन।पांच वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि वह अपराध चोरी है।चौदह वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 457 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।