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आईपीसी की धारा 171H | निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन | IPC Section- 171H in hindi | False statement in connection with an election.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171H के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171H ? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171H के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171H का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171H के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई निर्वाचन मे प्रचार हेतु किसी सभा में या किसी विज्ञापन, परिपत्र या प्रकाशन पर या किसी भी अन्य ढंग से व्यय करेगा या करना प्राधिकृत करेगा तो वह व्यक्ति धारा 171H के अंतर्गत निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय करने के अपराध का दोषी होगा, जिसके लिये वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 171H के अनुसार-

निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय-

जो कोई किसी अभ्यर्थी के साधारण या विशेष लिखित प्राधिकार के बिना ऐसे अभ्यर्थी का निर्वाचन अग्रसर करने या निर्वाचन करा देने के लिए कोई सार्वजनिक सभा करने में या किसी विज्ञापन, परिपत्र या प्रकाशन पर या किसी भी अन्य ढंग से व्यय करेगा या करना प्राधिकृत करेगा, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा;
परन्तु यदि कोई व्यक्ति, जिसने प्राधिकार के बिना कोई ऐसे व्यय किये हों, जो कुल मिलाकर दस रुपए से अधिक न हो, उस तारीख से जिस तारीख को ऐसे व्यय किए गए हों, दस दिन के भीतर उस अभ्यर्थी का लिखित अनुमोदन अभिप्राप्त कर ले, तो यह समझा जाएगा कि उसने ऐसे व्यय उस अभ्यर्थी के प्राधिकार से किए हैं।

Illegal payments in connection with an election-
Whoever without the general or special authority in writing of a candidate incurs or authorises expenses on account of the holding of any public meeting or upon any advertisement, circular or publication, or in any other way whatsoever for the purpose of promoting or procuring the election of such candidate, shall be punished with fine which may extend to five hundred rupees:
Provided that if any person having incurred any such expenses not exceeding the  amount of ten rupees without authority obtains within ten days from the date on which such expenses were incurred the approval in writing of the candidate, he shall be deemed to have incurred such expenses with the authority of the candidate.

लागू अपराध

निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय।
सजा- पांच सौ रूपये का जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171H के अंतर्गत जो कोई जो कोई किसी निर्वाचन के सिलसिले में अवैध रूप से पैसो का अदान-प्रदान करता है जैसे किसी विज्ञापन, परिपत्र या प्रकाशन पर या किसी भी अन्य ढंग से व्यय करेगा या करना प्राधिकृत करेगा, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171H के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय।पांच सौ रूपये का जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171H की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171E | रिश्वत के लिए दण्ड | IPC Section- 171E in hindi | Punishment for bribery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171E के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171E? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171E के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171E का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171E के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति किसी अन्य को रिश्वत देता है अथवा रिश्वत लेता है, रिश्वत का अपराध करेगा तो वह व्यक्ति धारा 171E के अंतर्गत रिश्वत लेने अथवा देने के अपराध का दोषी होगा, जिसके लिए वह दंड एवंम् जुर्माना दोनो का भागीदार होगा।

आईपीसी की धारा 171E के अनुसार-

रिश्वत के लिए दण्ड-

जो कोई रिश्वत का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा :
परन्तु सत्कार के रूप में रिश्वत केवल जुर्माने से ही दण्डित की जाएगी।
स्पष्टीकरण—“सत्कार” से रिश्वत का वह रूप अभिप्रेत है जो परितोषण, खाद्य, पेय, मनोरंजन या रसद के रूप में है।

Punishment for bribery-
Whoever commits the offence of bribery shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both :
Provided that bribery by treating shall be punished with fine only.
Explanation- “Treating” means that form of bribery where the gratification consists in food, drink, entertainment, or provision.

लागू अपराध

रिश्वत के लिए दण्ड।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो या यदि सत्कार के रूप में ही ली गई है तो केवल जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171E के अंतर्गत जो कोई जो कोई रिश्वत का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा, परन्तु सत्कार के रूप में रिश्वत केवल जुर्माने से ही दण्डित की जाएगी।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171E के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
रिश्वत के लिए दण्ड।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या
दोनो या यदि सत्कार के रूप में ही ली गई है
तो केवल जुर्माना।
गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171E की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171D | निर्वाचनों में प्रतिरूपण | IPC Section- 171D in hindi | Personation at elections.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171D के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171D? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171D के अंतर्गत परिभाषा इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171D का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171D के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी निर्वाचन में किसी अन्य व्यक्ति के नाम से, चाहे वह जीवित हो या मृत, या किसी कल्पित नाम से, मत-पत्र के लिए आवेदन करता या मत देता है, या ऐसे निर्वाचन में एक बार मत दे चुकने के पश्चात् उसी निर्वाचन में अपने नाम से मत-पत्र के लिए आवेदन करता है तो यह धारा 171D निर्वाचन में प्रतिरूपण का अपराध को परिभाषित करता है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171D इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 171D के अनुसार-

निर्वाचनों में प्रतिरूपण-

जो कोई किसी निर्वाचन में किसी अन्य व्यक्ति के नाम से, चाहे वह जीवित हो या मृत, या किसी कल्पित नाम से, मत-पत्र के लिए आवेदन करता या मत देता है, या ऐसे निर्वाचन में एक बार मत दे चुकने के पश्चात् उसी निर्वाचन में अपने नाम से मत-पत्र के लिए आवेदन करता है, और जो कोई किसी व्यक्ति द्वारा किसी ऐसे प्रकार से मतदान दुष्प्रेरित करता है, उपाप्त करता है या उपाप्त करने का प्रयत्न करता है, वह निर्वाचन में प्रतिरूपण का अपराध करता है।
[परन्तु इस धारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जिसे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन मतदाता की ओर से, जहाँ तक वह ऐसे मतदाता की ओर से परोक्षी के रूप में मत देता है, परोक्षी के रूप में मत देने के लिए प्राधिकृत किया गया है।]

Personation at elections-
Whoever at an election applies for a voting paper or votes in the name of any other person, whether living or dead, or in a fictitious name, or who having voted once at such election applies at the same election for a voting paper in his own name, and whoever abets, procures or attempts to procure the voting by any person in any such way, commits the offence of personation at an election.
[Provided that nothing in this section shall apply to a person who has been authorised to vote as proxy for an elector under any law for the time being in force in so far as he votes as a proxy for such elector.]

धारा 171D के अनुसार निर्वाचन में प्रतिरूपण (Personation at elections) का तात्पर्य-

आईपीसी की धारा 171D के अनुसार निर्वाचन में प्रतिरूपण का तात्पर्य निर्वाचन के समय यदि कोई व्यक्ति, किसी अन्य व्यक्ति के नाम से, चाहे वह जीवित हो या मृत, या किसी कल्पित नाम से, मत-पत्र के लिए आवेदन करता या मत देता है, या ऐसे निर्वाचन में एक बार मत दे चुकने के पश्चात् उसी निर्वाचन में अपने नाम से मत-पत्र के लिए आवेदन करता है, तो ऐसा व्यक्ति वह निर्वाचन में प्रतिरूपण का अपराध करता है। यह धारा इसी संबंध को परिभाषित करती है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171D की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171C | निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना | IPC Section- 171C in hindi | Undue influence at elections.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171C के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171C? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171C के अंतर्गत परिभाषा इत्यादि की जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 171C का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171C के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। वैसे तो हम सभी जानते हैं चुनाव के समय जो व्यक्ति निर्वाचनों में किसी व्यक्ति को किसी अभ्यर्थी या मतदाता को, या किसी ऐसे व्यक्ति को जिससे अभ्यर्थी या मतदाता हितबद्ध है, किसी प्रकार की क्षति करने की धमकी देता है या विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करता है या करने का प्रयास करता है। ऐसे अभ्यर्थी या मतदाता के निर्वाचन अधिकार के निर्बाध प्रयोग में हस्तक्षेप करता है। तो यह धारा 171C निर्वाचन हस्ताक्षेप करने के प्रभाव को परिभाषित करती है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171C इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 171C के अनुसार-

निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना –

(1) जो कोई किसी निर्वाचन अधिकार के निर्वाध प्रयोग में स्वेच्छया हस्तक्षेप करता है या हस्तक्षेप करने का प्रयत्न करता है, वह निर्वाचन में असम्यक् असर डालने का अपराध करता है।
(2) उपधारा (1) के उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जो कोई-
(क) किसी अभ्यर्थी या मतदाता को, या किसी ऐसे व्यक्ति को जिससे अभ्यर्थी या मतदाता हितबद्ध है, किसी प्रकार की क्षति करने की धमकी देता है, अथवा
(ख) किसी अभ्यर्थी या मतदाता को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करता है या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करता है कि वह या कोई ऐसा व्यक्ति, जिससे वह हितबद्ध है, दैवी अप्रसाद या आध्यात्मिक परिनिन्दा का भाजन हो जाएगा या बना दिया जाएगा,
यह समझा जाएगा कि वह उपधारा (1) के अर्थ के अन्तर्गत ऐसे अभ्यर्थी या मतदाता के निर्वाचन अधिकार के निर्बाध प्रयोग में हस्तक्षेप करता है।
(3) लोक नीति की घोषणा या लोक कार्यवाही का वचन या किसी वैध अधिकार का प्रयोग मात्र, जो किसी निर्वाचन अधिकार में हस्तक्षेप करने के आशय के बिना है, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत हस्तक्षेप करना नहीं समझा जाएगा।

Undue influence at elections-
(1) Whoever voluntarily interferes or attempts to interfere with the free exercise of any electoral right commits the offence of undue influence at an election.(2) Without prejudice to the generality of the provisions of sub-section (1). whoever-(a) threatens any candidate or voter, or any person in whom a candidate or voter is interested, with injury of any kind, or
(b) induces or attempts to induce a candidate or voter to believe that he or
ary person in whom he is interested will become or will be rendered an object of Divine displeasure or of spiritual censure. shall be deemed to interfere with the free exercise of the electoral right of such candidate or voter, within the meaning of sub-section (1).
(3) A declaration of public policy or a promise of public action, or the mere exercise of a legal right without intent to interfere with an electoral right, shall not be
deemed to be interference within the meaning of this section.

धारा 171C के अनुसार निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना (Undue influence at elections) का तात्पर्य-

आईपीसी की धारा 171C के अनुसार रिश्वत का तात्पर्य  निर्वाचन के समय यदि कोई व्यक्ति किसी को, स्वेच्छया से हस्तक्षेप करता है या हस्तक्षेप करने का प्रयत्न करता है या किसी अभ्यर्थी या मतदाता को, या किसी ऐसे व्यक्ति को जिससे अभ्यर्थी (Candidate) या मतदाता (Voter) हितबद्ध है, किसी प्रकार की क्षति करने की धमकी देता है अथवा किसी भी प्रकार से निर्वाचन में किसी भी प्रकार से  क्षति पहुंचाने का प्रयास करता है तो ऐसा व्यक्ति वह निर्वाचन में असम्यक् असर डालने का अपराध करता है। यह धारा इसी संबंध को परिभाषित करती है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171C की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171B | रिश्वत | IPC Section- 171B in hindi | Bribery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171B? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171B के अंतर्गत परिभाषा इत्यादि की जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 171B का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। वैसे तो हम सभी जानते हैं चुनाव के समय जो व्यक्ति चुनाव में भाग लेने के उद्देश्य से नामांकन कराते है, यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति को इस उद्देश्य से परितोषण देता है कि वह उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को किसी निर्वाचन अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्प्रेरित करे या किसी व्यक्ति को इसलिए इनाम दे कि उसने ऐसे अधिकार का प्रयोग किया है, तो वह रिश्वत का अपराध करता है। यह धारा 171B निर्वाचन में भाग लेने वाले व्यक्ति द्वारा रिश्वत देने को परिभाषित करती है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171B इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 171B के अनुसार-

रिश्वत –

(1) जो कोई
(i) किसी व्यक्ति को इस उद्देश्य से परितोषण देता है कि वह उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को किसी निर्वाचन अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्प्रेरित करे या किसी व्यक्ति को इसलिए इनाम दे कि उसने ऐसे अधिकार का प्रयोग किया है, अथवा
(ii) स्वयं अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण ऐसे किसी अधिकार को प्रयोग में लाने के लिए या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे किसी अधिकार को प्रयोग में लाने के लिए उत्प्रेरित करने या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करने के लिए इनाम के रूप में प्रतिगृहीत करता है,वह रिश्वत का अपराध करता है।
परन्तु लोक नीति की घोषणा या लोक कार्यवाही का वचन इस धारा के अधीन अपराध न होगा।
(2) जो व्यक्ति परितोषण देने की प्रस्थापना करता है या देने को सहमत होता है या उपाप्त करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करता है, यह समझा जाएगा कि वह परितोषण देता है।
(3) जो व्यक्ति परितोषण अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करने को सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है, यह समझा जाएगा कि वह परितोषण प्रतिगृहीत करता है और जो व्यक्ति वह बात करने के लिए, जिसे करने का उसका आशय नहीं है, हेतुस्वरूप, या जो बात उसने नहीं की है, उसे करने के लिए इनाम के रूप में परितोषण प्रतिगृहीत करता है, यह समझा जाएगा कि उसने परितोषण को इनाम के रूप में प्रतिगृहीत किया है।

Bribery-

(1) Whoever
(i) gives a gratification to any person with the object of inducing him or any other person to exercise any electoral right or of rewarding any person for having exercised any such right; or
(ii) accepts either for himself or for any other person any gratification as a reward for exercising any such right or for inducing or attempting to induce any other person to exercise any such right.commits the offence of bribery.
Provided that a declaration of public policy or a promise of public action shall not be an offence under this section.
(2) A person who offers, or agrees to give, or offers or attempts to procure, a gratification shall be deemed to give a gratification.
(3) A person who obtains or agrees to accept or attempts to obtain a gratification shall be deemed to accept a gratification, and a person who accepts a gratification as a motive for doing what he does not intend to do, or as a reward for doing what he has not done, shall be deemed to have accepted the gratification as a reward.

धारा 171B के अनुसार रिश्वत (Bribery) का तात्पर्य

आईपीसी की धारा 171B के अनुसार रिश्वत का तात्पर्य  निर्वाचन अधिकार से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति इनाम या रिश्वत इस आशय से देता है कि वह उसके पक्ष में रहेगा या उसके ही पक्ष में कार्य करेगा । यह वह अधिकार समझकर प्रयोग में लाता है, तो ऐसा व्यक्ति रिश्वत देने के अपराध की श्रेणी में आएगा। यह धारा इसी संबंध को परिभाषित करती है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171B की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171A | “अभ्यर्थी” एवं “निर्वाचन अधिकार” परिभाषित | IPC Section- 171A in hindi | “Candidate” and “electoral right” defined.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171A? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171A के अंतर्गत परिभाषा इत्यादि की जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 171A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। वैसे तो हम सभी जानते हैं चुनाव के समय जो व्यक्ति चुनाव में भाग लेने के लिए नाम नामांकित कराता है, उसे हम हिंदी में अभ्यर्थी (Candidate) कहते हैं, अभ्यर्थी (Candidate) व्यक्ति जब किसी चुनाव में भाग लेता है, तो भी उसके अधिकार होते है जिसे हम निर्वाचन अधिकार (Electoral Right) कहते है। यह धारा 171A निर्वाचन में भाग लेने वाले व्यक्ति और उसके अधिकार को परिभाषित करती है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171A इसी विषय के बारे में बतलाती है।

आईपीसी की धारा 171A के अनुसार-

“अभ्यर्थी”, “निर्वाचन अधिकार” परिभाषित–

इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए-
(क) “अभ्यर्थी” से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में नामनिर्दिष्ट किया गया हो;
(ख) “निर्वाचन अधिकार” से किसी निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में खड़े होने या खड़े न होने या अभ्यर्थना से अपना नाम वापस लेने या मत देने या मत देने से विरत रहने का किसी व्यक्ति का अधिकार अभिप्रेत है।

“Candidate”, “electoral right” defined-
For the purposes of this Chapter-

(a) “candidate” means a person any election;
this who has been nominated as a candidate at any election.
(b) “electoral right” means the right of a person to stand, or not to stand as, or to withdraw from being, a candidate or to vote or refrain from voting at any election.

अभ्यर्थी (Candidate) किसे कहते है?

जब हमारे कही किसी भी नगर, क्षेत्र में चुनाव होते है, तब जो व्यक्ति उस चुनाव में भाग लेने के उद्देश्य से अपना नाम नामांकित कराता है, जिससे हम अभ्यर्थी (Candidate) कहते हैं।

निर्वाचन अधिकार किसे कहते है?

जो व्यक्ति उन चुनाव में अपने नाम को नामांकित कराता है, उसके अधिकार होते है किसी निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में खड़े होने या खड़े न होने या अभ्यर्थना से अपना नाम वापस लेने या मत देने या मत देने से विरत रहने का किसी व्यक्ति का अधिकार अभिप्रेत है। यह सभी अधिकार उस व्यक्ति पर लागू होते है, जो व्यक्ति निर्वाचन में भाग लेते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।