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आईपीसी की धारा 171G | निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन | IPC Section- 171G in hindi | False statement in connection with an election.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171G के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171G? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171G के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171G का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171G के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई निर्वाचन के परिणाम पर प्रभाव डालने के आशय से किसी अभ्यर्थी के वैयक्तिक शील या आचरण के सम्बन्ध में तथ्य का कथन तात्पर्यित होने वाला कोई ऐसा कथन करेगा या प्रकाशित करेगा, जो मिथ्या है, और जिसका मिथ्या होना वह जानता या विश्वास करता है अथवा जिसके सत्य होने का वह विश्वास नहीं करता है तो वह व्यक्ति धारा 171G के अंतर्गत निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन प्रकाशित करने के अपराध का दोषी होता है, जिसके लिए वह जुर्माना का भागीदार होगा।

आईपीसी की धारा 171G के अनुसार-

निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन-

जो कोई निर्वाचन के परिणाम पर प्रभाव डालने के आशय से किसी अभ्यर्थी के वैयक्तिक शील या आचरण के सम्बन्ध में तथ्य का कथन तात्पर्यित होने वाला कोई ऐसा कथन करेगा या प्रकाशित करेगा, जो मिथ्या है, और जिसका मिथ्या होना वह जानता या विश्वास करता है अथवा जिसके सत्य होने का वह विश्वास नहीं करता है, वह जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

False statement in connection with an election-
Whoever with intent to affect the result of an election makes or publishes any statement purporting to be a statement of fact which is false and which he either knows or believes to be false or does not believe to be true, in relation to the personal character or conduct of any candidate, shall be punished with fine.

लागू अपराध

निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन।
सजा- जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171G के अंतर्गत जो कोई जो कोई किसी निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन को प्रकाशित करेगा, जो मिथ्या है, और जिसका मिथ्या होना वह जानता या विश्वास करता है अथवा जिसके सत्य होने का वह विश्वास नहीं करता है जिसके लिए वह जुर्माना का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171G अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराधो में जमानत आसानी से मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन।जुर्मानागैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171G की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171-I | निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय | IPC Section- 171-I in hindi | Illegal payments in connection with an election.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171-I के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171-I ? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171-I के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171-I का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171-I के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई प्रवृत्त विधि व्दारा बनाये गये व्यक्ति अगर निर्वाचन मे व्ययों का लेखा-जोखा रखने मे असफल रहता है तो वह व्यक्ति धारा 171-I के अंतर्गत निर्वाचन लेखा रखने में असफलता रहेगा तो वह व्यक्ति अपराध का दोषी होगा, जिसके लिये वह जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 171-I के अनुसार-

निर्वाचन लेखा रखने में असफलता-

जो कोई किसी तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा या विधि का बल रखने वाले किसी नियम द्वारा इसके लिए अपेक्षित होते हुए कि वह निर्वाचन में या निर्वाचन के सम्बन्ध में किए गए व्ययों का लेखा रखे, ऐसा लेखा रखने में असफल रहेगा, वह जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

Failure to keep election accounts-
Whoever being required by any law for the time being in force or any rule having the force of law to keep accounts of expenses incurred at or in connection with an election fails to keep such accounts shall be punished with fine which may extend to five hundred rupees.

लागू अपराध

निर्वाचन लेखा रखने में असफलता।
सजा- पांच सौ रूपये का जुर्माना।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171-I के अंतर्गत जो कोई प्रवृत्त विधि व्दारा बनाये गये व्यक्ति अगर निर्वाचन मे व्ययों का लेखा-जोखा रखने मे असफल रहता है, तो वह व्यक्ति जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171-I के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
निर्वाचन लेखा रखने में असफलता।पांच सौ रूपये का जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171-I की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 171F | निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड | IPC Section- 171F in hindi | Punishment for undue influence or personation at an election.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 171F के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 171F? साथ ही हम आपको IPC की धारा 171F के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 171F का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 171F के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति निर्वाचन (चुनाव) कार्य मे हस्तक्षेप करता है जिससे चुनाव कार्य प्रभावित होता है साथ ही यदि कोई भेष बदलकर किसी व्यक्ति के साथ आवेदन करता है या मत देता है जो कोई निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण का अपराध करेगा तो वह धारा 171F के अपराध का दोषी होगा, जिसके लिए वह दंड एवंम् जुर्माना दोनो का भागीदार होगा।

आईपीसी की धारा 171F के अनुसार-

निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड-

जो कोई किसी निर्वाचन में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Punishment for undue influence or personation at an election-
Whoever commits the offence of undue influence or personation at an election shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
निर्वाचन में प्रतिरूपण।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नही है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171F के अंतर्गत जो कोई जो कोई किसी निर्वाचन में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण का अपराध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 171F के अंतर्गत अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट
निर्वाचन में प्रतिरूपण।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 171F की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 172 | समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना | IPC Section- 172 in hindi | Absconding to avoid service of summons or other proceeding.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 172 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 172? साथ ही हम आपको IPC की धारा 172 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 172 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 172 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई न्यायालय अथवा लोक सेवक द्वारा  निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील से बचने के लिए फरार हो जाता है, साथ ही जब न्यायालय द्वारा दोषी व्यक्ति को हाजिर होने के लिए या दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के हो, यदि वह व्यक्ति निश्चित तिथि को उपस्थित न होकर फरार हो जाता है तो वह व्यक्ति धारा 172 के अंतर्गत दोषी होगा, जिसके लिये वह दंड या जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 172 के अनुसार-

समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना-

जो कोई किसी ऐसे लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील से बचने के लिए फरार हो जाएगा, जो ऐसे लोक सेवक के नाते ऐसे समन, सूचना या आदेश को निकालने के लिए वैध रूप से सक्षम हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि समन या सूचना या आदेश [किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए या दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए हो,] तो वह सादा कारावास से, जिसको अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Absconding to avoid service of summons or other proceeding-
Whoever absconds in order to avoid being served with a summons, notice or order proceeding from any public servant legally competent, as such public servant, to issue such summons, notice or order, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both.
or, if the summons or notice or order is to attend in person or by agent, or [to produce a document or an electronic record in a Court of Justice]. with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees or with both.

लागू अपराध

लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन की तामील से या की गई अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना।
सजा- एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।
यदि वह समन या सूचना न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करती है।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 172 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील से बचने के लिए फरार हो जाता है तो वह व्यक्ति एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी  तरह से यदि किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए या दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए हो, अगर वह व्यक्ति निश्चित तिथि पर हाजिर नहीं होता है तो वह व्यक्ति छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 172 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन की तामील से या की गई अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना।एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट
यदि वह समन या सूचना न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करती है।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 172 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 173 | समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना | IPC Section- 173 in hindi | Preventing service of summons or other proceeding or preventing publication thereof.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 173 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 173? साथ ही हम आपको IPC की धारा 173 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 173 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 173 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई समन की तमीली या अन्य कार्यवाही को रोकेगा या उसके प्रकाशन को रोकेगा अथवा किसी ऐसे समन, सूचना या आदेश को किसी ऐसे स्थान से, जहाँ कि वह विधिपूर्वक लगाया हुआ है, रोकता है या रोकने का प्रयास करता है तो वह व्यक्ति धारा 173 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 173 के अनुसार-

समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना-

जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा जो लोक सेवक उस नाते कोई समन, सूचना या आदेश निकालने के लिए वैध रूप से सक्षम हो निकाले गए समन, सूचना या आदेश की तामील अपने पर या किसी अन्य व्यक्ति पर होना किसी प्रकार साशय निवारित करेगा,अथवा
किसी ऐसे समन, सूचना या आदेश का किसी ऐसे स्थान में विधिपूर्वक लगाया जाना साशय निवारित करेगा,अथवा
किसी ऐसे समन, सूचना या आदेश को किसी ऐसे स्थान से, जहाँ कि वह विधिपूर्वक लगाया हुआ है, साशय हटाएगा,अथवा
किसी ऐसे लोक सेवक के प्राधिकाराधीन की जाने वाली किसी उद्घोषणा का विधिपूर्वक किया जाना साशय निवारित करेगा, जो ऐसे लोक सेवक के नाते ऐसी उद्घोषणा का किया जाना निर्दिष्ट करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,अथवा
यदि समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा 2[किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए या दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए हो,] तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Preventing service of summons or other proceeding or preventing publication thereof-
Whoever in any manner intentionally prevents the serving on himself, or on any other person, of any summons, notice or order proceeding from any public servant legally competent, as such public servant, to issue such summons, notice or order,or
intentionally prevents the lawful affixing to any place of any such summons. notice or order,or
intentionally removes any such summons, notice or order from any place to which it is lawfully affixed,or intentionally prevents the lawful making of any proclamation, under the authority of any public servant legally competent, as such public servant, to direct such proclamation to be made, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both.
or, if the summons, notice, order or proclamation is to attend in person or by
agent, or [to produce a document or electronic record in a Court of Justice], with
simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which
may extend to one thousand rupees, or with both.

लागू अपराध

यदि वह समन या सूचना की तामील या लगाया जाना निवारित करना या उसके लगाए जाने के पश्चात् उसे हटाना या उद्घोषणा को निवारित करना।
सजा- एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।
यदि समन आदि न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करती है।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 173 के अंतर्गत जो कोई समन की तमीली या अन्य कार्यवाही को रोकेगा या उसके प्रकाशन को रोकेगा, तो वह एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से यदि किसी न्यायालय में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए या दस्तावेज अथवा इलेक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए हो और वह व्यक्ति व्यक्ति उपस्थित नही हुआ है तो वह व्यक्ति छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 173 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
यदि वह समन या सूचना की तामील या लगाया जाना निवारित करना या उसके लगाए जाने के पश्चात् उसे हटाना या उद्घोषणा को निवारित करना।एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट
यदि समन आदि न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करती है।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनोगैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 173 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 174 | लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना | IPC Section- 174 in hindi | Non-attendance in obedience to an order from public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 174 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 174? साथ ही हम आपको IPC की धारा 174 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 174 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 174 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन की तमीली या अन्य कार्यवाही उस आदेश के अनुपालन में, गैर-हाजिर रहता है तो वह व्यक्ति धारा 174 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 174 के अनुसार-

लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना-

जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन में, जिसे ऐसे लोक सेवक के नाते निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो, किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए.उस स्थान या समय पर हाजिर होने का साशय लोप करेगा, या उस स्थान से, जहाँ हाजिर होने के लिए वह आबद्ध है, उस समय से पूर्व चला जाएगा, जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
दृष्टान्त
(क) क कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए सपीना के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है। कने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।
(ख) क जिला न्यायधीश द्वारा निकाले गए समन के पालन में उस जिला न्यायाधीश के समक्ष साक्षी के रूप में उपसंजात होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपसंजात होने में साशय लोप करता है। क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

Non-attendance in obedience to an order from public servant-
Whoever, being legally bound to attend in person or by an agent at a certain place and time in obedience to a summons, notice, order or proclamation proceeding from any
public servant legally competent, as such public servant, to issue the same,intentionally omits to attend at that place or time, or departs from the place where he is bound to attend before the time at which it is lawful for him to depart, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both;
or, if the summons, notice, order or proclamation is to attend in person or by agent in a Court of Justice, with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.
Illustrations
(a) A, being legally bound to appear before the High Court at Calcutta, in obedience to a subpoena issuing from that Court, intentionally omits to appear. A has committed the offence defined in this section.
(b) A, being legally bound to appear before a District Judge, as a witness, in obedience to a summons issued by that District Judge, intentionally omits to appear. A has committed the offence defined in this section.

लागू अपराध

किसी स्थान में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने का वैध आदेश न मानना या वहां से प्राधिकार के बिना चला जाना।
सजा- एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।
यदि आदेश न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करता है।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 174 के अंतर्गत जो कोई किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए समन की तमीली या अन्य कार्यवाही या आदेश के अनुपालन में जो कोई गैर-हाजिर रहेगा, तो एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से यदि आदेश न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करता है, और वह व्यक्ति गैर-हाजिर रहता है तो वह व्यक्ति छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 174 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी स्थान में स्वयं या अभिकर्ता द्वारा हाजिर होने का वैध आदेश न मानना या वहां से प्राधिकार के बिना चला जाना।एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट
यदि आदेश न्यायालय में वैयक्तिक हाजिरी आदि अपेक्षित करता है।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 174 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।