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आईपीसी की धारा 174A | 1974 के अधिनियम 2 की धारा 82 के अधीन किसी उद्घोषणा के उत्तर में गैर हाजिरी | IPC Section- 174A in hindi | Non-appearance in response to a proclamation under Section 82 of Act 2 of 1974.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 174A के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 174A? साथ ही हम आपको IPC की धारा 174A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 174A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 174A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई जो कोई दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर होने में असफल रहेगा, इसी तरह से यदि धारा 82 की उपधारा (4) के अधीन कोई ऐसी घोषणा की गई है जिसमें उसे उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है, तो वह व्यक्ति धारा 174A के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 174A के अनुसार-

1974 के अधिनियम 2 की धारा 82 के अधीन किसी उद्घोषणा के उत्तर में गैर हाजिरी-

जो कोई दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर होने में असफल रहेगा, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा और जहाँ उस धारा की उपधारा (4) के अधीन कोई ऐसी घोषणा की गई है जिसमें उसे उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है, वहां वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

Non-appearance in response to a proclamation under Section 82 of Act 2 of 1974-
Whoever fails to appear at the specified place and the specified time as required by a proclamation published under sub-section (1) of Section 82 of the Code of Criminal Procedure, 1973 shall be punished with imprisonment for a term which may extend to three years or with fine or with both, and where a declaration has been made under sub-section (4) of that section pronouncing him as a proclaimed offender, he shall be punished with imprisonment for a term which may extend to seven years and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

इस संहिता की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर न होना।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
किसी ऐसे मामले में जहां इस संहिता की धारा 82 की उपधारा (4) के अधीन ऐसी घोषणा की गई हो, जिसमे किसी व्यक्ति को उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह एक गैर-जमानतीय, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 174A के अंतर्गत जो कोई दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर होने में असफल रहेगा, तो तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से यदि धारा 82 की उपधारा (4) के अधीन कोई ऐसी घोषणा की गई है जिसमें उसे उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है तो वह व्यक्ति सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 174A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध गैर-जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
इस संहिता की धारा 82 की उपधारा (1) के अधीन प्रकाशित किसी उद्घोषणा की अपेक्षानुसार विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर हाजिर न होना।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट
किसी ऐसे मामले में जहां इस संहिता की धारा 82 की उपधारा (4) के अधीन ऐसी घोषणा की गई हो, जिसमे किसी व्यक्ति को उद्घोषित अपराधी के रूप में घोषित किया गया है।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 174A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 175 | [दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख] पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पेश करने का लोप | IPC Section- 175 in hindi | Omission to produce [document or electronic record] to public servant by person legally bound to produce it.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 175 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 175? साथ ही हम आपको IPC की धारा 175 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 175 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 175 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पेश करने का लोप करेगा तो वह व्यक्ति धारा 175 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 175 के अनुसार-

[दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख] पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख पेश करने का लोप-

जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक-सेवक के नाते किसी [दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख] को पेश करने या परिदत्त करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उसको इस प्रकार पेश करने या परिदत्त करने का साशय लोप करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि वह [दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख] किसी न्यायालय में पेश या परिदत्त की जानी हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
दृष्टान्त
क, जो एक जिला न्यायालय के समक्ष दस्तावेज पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध है, उसको पेश करने का साशय लोप करता है। क, ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है।

Omission to produce [document or electronic record] to public servant by person legally bound to produce it-
Whoever, being legally bound to produce or deliver up any [document or electronic record] to any public servant, as such,
intentionally omits so to produce or deliver up the same, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both;
or, if the [document or electronic record] is to be produced or delivered up to a Court of Justice, with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.
Illustration
A, being legally bound to produce a document before a District Court, intentionally omits to produce the same. A has committed the offence defined in this section.

लागू अपराध

दस्तावेज पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति व्दारा लोक सेवक को ऐसी दस्तावेज पेश करने का लोप।
सजा- एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।
यदि उस दस्तावेज का न्यायालय मे पेश किया जाना या परिदत्त किया जाना अपेक्षित है।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और अध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 175 के अंतर्गत जो कोई दस्तावेज पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति व्दारा लोक सेवक को ऐसी दस्तावेज पेश करने का लोप रहेगा, तो एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से यदि उस दस्तावेज का न्यायालय मे पेश किया जाना या परिदत्त किया जाना अपेक्षित है तो वह व्यक्ति छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 175 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
दस्तावेज पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति व्दारा लोक सेवक को ऐसी दस्तावेज पेश करने का लोप।एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयअध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट
यदि उस दस्तावेज का न्यायालय मे पेश किया जाना या परिदत्त किया जाना अपेक्षित है।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयअध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 175 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 176 | सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप | IPC Section- 176 in hindi | Omission to give notice or information to public servant by person legally bound to give it.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 176 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 176? साथ ही हम आपको IPC की धारा 176 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 176 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 176 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप होगा तो वह व्यक्ति धारा 176 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 176 के अनुसार-

सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप-

जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर कोई सूचना देने या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, विधि द्वारा अपेक्षित प्रकार से और समय पर ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,अथवा,
यदि दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या इत्तिला किसी अपराध के किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,अथवा,
यदि दी जाने के लिए अपेक्षित सूचना या इत्तिला दण्ड प्रक्रिया संहिता, 18981 (1898 का 5) की धारा 565 की उपधारा (1) के अधीन दिए गए आदेश द्वारा अपेक्षित है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Omission to give notice or information to public servant by person legally bound to give it-
Whoever, being legally bound to give any notice or to furnish information on any subject to any public servant, as such, intentionally omits to give such notice or to furnish such information in the manner and at the time required by law, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to one month, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both;
or, if the notice or information required to be given respects the commission of an offence, or is required for the purpose of preventing the commission of an offence, or in order to the apprehension of an offender, with simple imprison-ment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both;
or, if the notice or information required to be given is required by an order passed under sub-section (1) of Section 565 of the Code of Criminal Procedure, 1898 (5 of 1898) with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.

लागू अपराध

सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप।
सजा- एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।
यदि आपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध के किये जाने आदि के विषय मे है।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 176 के अंतर्गत जो कोई सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप होगा, तो वह एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से यदि आपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध के किये जाने आदि के विषय मे है तो वह व्यक्ति छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 176 के अंतर्गत ऐसे अपराध कारित करने वाले व्यक्ति जमानत (Bail) कराना आवश्यक है, यह अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप।एक मास के लिए सादा कारावास या पांच सौ रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट
यदि आपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध के किये जाने आदि के विषय मे है।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 176 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 177 | मिथ्या इत्तिला देना | IPC Section- 177 in hindi | Furnishing false information.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 177 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 177? साथ ही हम आपको IPC की धारा 177 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 177 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 177 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई व्यक्ति सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को गलत सूचना या इत्तिला देता है तो वह व्यक्ति धारा 177 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 177 के अनुसार-

मिथ्या इत्तिला देना-

जो कोई किसी लोक सेवक को ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए उस विषय पर सच्ची इत्तिला के रूप में ऐसी इत्तिला देगा जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण उसके पास है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से,
अथवा, यदि वह इत्तिला, जिसे देने के लिए वह वैध रूप से आबद्ध हो, कोई अपराध किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
दृष्टान्त
(क) क, एक भू-धारक, यह जानते हुए कि उसकी भू-सम्पदा की सीमाओं के अन्दर एक हत्या की गयी है, उस जिले के मजिस्ट्रेट को जानबूझकर यह मिथ्या इत्तिला देता है कि मृत्यु सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटना से हुई है। क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।

Furnishing false information-
Whoever, being legally bound to furnish information on any subject to any public servant, as such, furnishes, as true. information on the subject which he knows or has reason to believe to be false, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both;
or, if the information which he is legally bound to give respects the commission of an offence, or is required for the purpose of preventing the commission of an offence, or in order to the apprehension of an offender, with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.
Illustrations
A, a landholder, knowing of the commission of a murder within the limits of his estate, wilfully misinforms the Magistrate of the district that the death has occurred by accident in consequence of the bite of a snake. A is guilty of the offence defined in this section.

लागू अपराध

लोक सेवक को जानते हुए मिथ्या सूचना या इत्तिला देना।
सजा- छह मास के लिए कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यदि आपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध किए जाने आदि के विषय मे हों।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।

यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 177 के अंतर्गत जो कोई सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को ऐसी गलत सूचना या इत्तिला देगा, तो वह छह मास के लिए कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। इसी तरह से यदि आपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध किये जाने आदि के विषय मे है तो वह व्यक्ति दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 177 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक को जानते हुए मिथ्या सूचना या इत्तिला देना।छह मास के लिए कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट
यदि आपेक्षित सूचना या इत्तिला अपराध किए जाने आदि के विषय मे हों।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 177 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 179 | प्रश्न करने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक का उत्तर देने से इन्कार करना | IPC Section- 179 in hindi | Refusing to answer public servant authorised to question.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 179 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 179? साथ ही हम आपको IPC की धारा 179 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 179 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 179 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी लोक-सेवक से किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, ऐसे लोक सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गये किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा तो वह व्यक्ति धारा 179 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 179 के अनुसार-

प्रश्न करने के लिए प्राधिकृत लोक सेवक का उत्तर देने से इन्कार करना—

जो कोई किसी लोक-सेवक से किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, ऐसे लोक सेवक की वैध शक्तियों के प्रयोग में उस लोक-सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गये किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Refusing to answer public servant authorised to question
Whoever, being legally bound to state the truth on any subject to any public servant, refuses to answer any question demanded of him touching that subject by such public servant in the exercise of the legal powers of such public servant, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.

लागू अपराध 

सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए प्रश्नों के उत्तर देने से इन्कार करना।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और अध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 179 के अंतर्गत जो कोई सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए भी लोक सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गये किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करेगा, तो वह छह मास के लिए सदा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 179 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए प्रश्नों के उत्तर देने से इन्कार करना।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयअध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 179 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 178 | शपथ या प्रतिज्ञान से इन्कार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक रूप से अपेक्षित किया जाए | IPC Section- 178 in hindi | Refusing oath or affirmation when duly required by public servant to make it.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 178 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 178? साथ ही हम आपको IPC की धारा 178 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 178 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 178 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा अपने आपको आबद्ध करने से इन्कार करेगा, जबकि उससे अपने को इस प्रकार आबद्ध करने की अपेक्षा ऐसे लोक सेवक द्वारा की जाए जो यह अपेक्षा करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो कि वह व्यक्ति इस प्रकार अपने को आबद्ध करे तो वह व्यक्ति धारा 178 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 178 के अनुसार

शपथ या प्रतिज्ञान से इन्कार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक रूप से अपेक्षित किया जाए-

जो कोई सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा अपने आपको आबद्ध करने से इन्कार करेगा, जबकि उससे अपने को इस प्रकार आबद्ध करने की अपेक्षा ऐसे लोक सेवक द्वारा की जाए जो यह अपेक्षा करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो कि वह व्यक्ति इस प्रकार अपने को आबद्ध करे, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Refusing oath or affirmation when duly required by public servant to make it-
Whoever refuses to bind himself by an oath or affirmation to state the truth, when required so to bind himself by a public servant legally competent to require that he shall so bind himself, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.

लागू अपराध

शपथ या प्रतिज्ञान से इन्कार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक रूप से अपेक्षित किया जाता है।
सजा- छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।
यह एक जमानतीय, गैर-संज्ञेय अपराध है और अध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 178 के अंतर्गत जो कोई सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा अपने आपको आबद्ध करने से इन्कार करेगा, जबकि उससे अपने को इस प्रकार आबद्ध करने की अपेक्षा ऐसे लोक सेवक द्वारा की जाए जो यह अपेक्षा करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो कि वह व्यक्ति इस प्रकार अपने को आबद्ध करे, तो वह छह मास के लिए सदा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 178 के अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध जमानतीय होने के कारण जमानत आसानी से मिल जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
शपथ या प्रतिज्ञान से इन्कार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक रूप से अपेक्षित किया जाता है।छह मास के लिए सादा कारावास या एक हजार रूपये का जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयअध्याय 26 के उपबन्धो के अधीन रहते हुये वह न्यायालय जिसमे अपराध किया गया है या अपराध न्यायालय मे नही किया गया है तो कोई भी मजिस्ट्रेट

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