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बीमा क्या है और कितने प्रकार के होते है? (What is insurance and how many types are there?) |बीमा अधिनियम भी जानेंगे। (Will also know the Insurance Act.)

बीमा (Insurance) उस साधन को कहते है, जहां किसी हानि या नुकसान को किसी दूसरे व्यक्ति पर व्यय किया जाना सुनिश्चित कर हम उस दूसरे व्यक्ति को कुछ शुल्क (प्रीमियम के रूप मे) देकर यह भार उस पर डाल सकते है, जिसे ही बीमा कहते है।

बीमा की परिभाषा और अर्थ (Definition and Meaning of Insurance)

साधारण भाषा मे बीमा का अर्थ (Meaning of insurance in simple language) यह है- आने वाले खतरे से सुरक्षा करना यानि अपनी और प्रॉपर्टी की सुरक्षा करने का ऑपशन होता है, जिसे ही बीमा कहते है। बीमा (Insurance) एक लीगल एग्रीमेंट होता है, जो दोनों पक्षो (जैसे बीमा कराने वाला एवंम् बीमा करने वाली कम्पनी) के मध्य के निश्चित राशि (प्रीमीयम अदा करके) किसी जोखिम से मुक्ति पा सकते है, अर्थात् बीमा कराने वाले व्यक्ति को अगर किसी भी प्रकार से भविष्य मे होेने वाले नुकसान की भरपाई बीमा कम्पनी भरेगी।

बीमा एक तरह से एक अनुबन्ध पत्र है, बीमाकृत एवंम् बीमाकर्ता के बीच एक अनुबन्ध होता है, जिसे ही हम बीमा (Insurance) कहते है। बीमाकर्ता (insurer), बीमाकृत (Insured) से एक निश्चित रकम (प्रीमियम) के बदले किसी निश्चित घटना के घटित होने (जैसे कि एक निश्चित आयु की समाप्ति या मृत्यु की स्थिति में) एक निश्चित रकम देता है या फिर बीमाकृत की जोखिम से होने वाले वास्तविक हानि की क्षतिपूर्ति करता है।

बीमाकर्ता (Insurer)

बीमाकर्ता (Insurer) उस व्यक्ति, कम्पनी अथवा सांस्था को कहते है, जो कोई भविष्य निश्चित अवधि मे होने वाले जोखिम को स्वीकार करता है, और उस जोखिम का वित्तीय निस्तारण एक निश्चित अवधि मे करता है। बीमाकर्ता को ‘बीमा कंपनी’ भी कहा जाता है।

बीमाकर्ता एक बीमा एग्रीमेंट में वह पक्ष है जो मुआवजे का भुगतान करने का वादा करती है । बीमाकर्ता एक इकाई है, आमतौर पर एक बीमा कंपनी है, जो बीमित जोखिम को कम करती है। इसके विपरीत, बीमित एक व्यक्ति या संगठन है जिसका जीवन, स्वास्थ्य या संपत्ति बीमा पॉलिसी द्वारा कवर की जाती है।

बीमाकृत (Insured)

बीमाकृत (Insured) उस व्यक्ति, कम्पनी या सांस्था को कहते है, जिसने भविष्य होने वाली आपदा से बचने के लिये अपनी लाइफ, अपना घर एवंम् अपनी कम्पनी को जोखिम होने की स्थिति से बचने के लिये बीमा लिया हुआ है, जिसे ही बीमाकृत व्यक्ति (Insured Person) या बीमाकृत (Insured) कहते है।

बीमाकृत एक बीमा एग्रीमेंट मे वह पक्ष होता है, जो मुआवजा पाने का हकदार होता है, बीमाकृत व्यक्ति जिसके साथ एक निश्चित अवधि मे उसके या उसके परिवार अथवा सम्पत्ति मे किसी भी प्रकार से कोई हानि हो जाती है, तो बीमा उस व्यक्ति को एक राशि प्रदान कर वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

बीमा कितने प्रकार के होते हैं? (How many types of insurance are there?)

बीमा (Insurance) के मुख्यताः तीन प्रकार से होते है, लेकिन धीरे-धीरे भारत मे बहुत से नये बीमा भी शामिल हो रहे है, जिन्हे इस लेख मे अन्य बीमा मे शामिल किया गया है, जो निम्नप्रकार है-

  1. जीवन बीमा (Life Insurance)
  2. दुर्घटना बीमा (Accident Insurance)
  3. सामान्य बीमा (General Insurance)
    • स्वास्थ बीमा (Health Insurance)
    • मोटर वाहन बीमा (Motor Vehicle Insurance)
    • अग्नि बीमा (Fire Insurance)
    • गृह बीमा (Home Insurance)
    • यात्रा बीमा (Travel Insurance)
    • फसल बीमा (Crop Insurance)

1. जीवन बीमा (Life Insurance)

जीवन बीमा (Life Insurance) भारत मे प्रत्येक व्यक्ति को लेना आवश्यक होता है, क्योकि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन जोखिम भरा हुआ है, साथ ही जीवन बीमा लेने पर व्यक्ति के परिवार जनों पर भविष्य मे पड़ने वाली आर्थिक मार पर सहायता मिलती है, इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति अपने एवंम् अपने परिवार के लिये जीवन बीमा एक निश्चित अवधि एवंम् निश्चित राशि के लिये बीमा कम्पनी को कुछ राशि (प्रीमियम) देने के पश्चात् जीवन बीमा कवर होता है, यह बीमा एक निश्चित आयु अथवा किसी व्यक्ति आकस्मिक मृत्यु हो जाने पर बीमित व्यक्ति के परिवार जन को भविष्य मे होने वाली आर्थिक मार पर भी सहायता करता है।

2. दुर्घटना बीमा (Accident Insurance)

दुर्घटना बीमा (Accident Insurance) भी आज के दौर मे प्रत्येक व्यक्ति को लेना आवश्यक है, क्योकि जो व्यक्ति अपनी और अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिन्तित है, कि आज वह है और अगर कल को अगर दुर्घटना हो जाती है, और जान चली जाती या अपंग हो जाता है, तो परिवार जन का क्या होगा, कैसे आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाये। यह बीमा बीमित व्यक्ति को भविष्य मे होने वाली आकस्मिक दुर्घटना होने पर सुरक्षा प्रदान करती है, यह बीमा जीवन बीमा से कम मूल्य पर होता है यह एक निश्चित राशि जीवन बीमा से बहुत कम (प्रीमियम) देकर जीवन भर देते हुये यह बीमा ले सकते है, जो बीमित व्यक्ति के परिवार जनो को होेने वाली भविष्य दुर्घटना मे आर्थिक सहायता प्रदान करेगीं।

3. सामान्य बीमा (General Insurance)

सामान्य बीमा (General Insurance) भी कई प्रकार से भविष्य मे पड़ने वाली आर्थिक मार से बचाता है। इसके अलावा कई बार कोई व्यक्ति अपने भविष्य के लिये घर, व्यापार, खेती के लिये काफी मात्रा मे धन व्यय करता है, लेकिन किसी प्राकृतिक जैसी समस्याओं के चलते नुकसान हो जाता है, तो ऐसे जोखिम को सुरक्षित करने के लिये बीमा का सहारा लिया जा सकता है, जिसमे कोई भी अपनी चल सम्पत्ति (वाहन), अचल सम्पत्ति (घर/दुकान), स्वास्थ, आग लग जाना, यात्रा के दौरान होने वाली आपदा और किसानों के लिये फसल नुकसान जैसी होने प्राकृतिक आपदाओ के लिये भी यह बीमा लिया जा सकता है, जो आपके आने वाले भविष्य के लिये लाभदायी होगा।

3.1 स्वास्थ बीमा (Health Insurance)

यह बीमा कोई व्यक्ति अपने या अपने परिवार के लिये भविष्य मे आने वाले बीमारियों से लड़ने के लिये आर्थिक मार से सुरक्षा देते है, आजकल सभी जानते है कि भारत देश मे चिकित्सा क्षेत्र मे बहुत सारा धन व्यय होता है, यदि किसी माध्यम वर्गीय परिवार मे कोई बीमारी से गृसित हो जाता है, तो बहुत सारा धन केवल चिकित्सा मे ही व्यय हो जाता है, माध्यम वर्गीय परिवार यह व्यय उठाने मे सक्षम नही होते है, इसलिये यह स्वास्थ बीमा (Health Insurance) भी बहुत जरूरी है।

3.2 मोटर वाहन बीमा (Motor Vehicle Insurance)

मोटर वाहन बीमा (Motor Vehicle Insurance) वैसे तो हमारे भारत मे जिनके पास भी मोटर वाहन है, उनको मोटर वाहन बीमा कराना अनिवार्य है। इसमे वाहन चोरी हो जाने, एक्सीडेन्ट हो जाने, वाहन मे किसी प्रकार का नुकसान हो जाने वाली भरपाई को कवर करता है। इसके अलावा यदि किसी वाहन से किसी व्यक्ति को चोट लग जाने अथवा किसी मृत्यु हो जाने तक की भरपाई भी यह मोटर वाहन बीमा कवर करता है।

3.3 अग्नि बीमा (Fire Insurance)

अग्नि बीमा (Fire Insurance) वैसे तो यह बीमा आम तौर पर हर व्यक्ति लेता नही लेता है, जिसे अपनी फैक्ट्री या घर मे आग लगने के जोखिम से सुरक्षा रखने के लिये लिया जाता है। यह बीमा घर या फैक्ट्री जहां आग लगने का जोखिम उठाने के लिये होता है, जहां आग लगना हो सकता है, वह इस बीमा का लाभ ले सकता है और भविष्य मे होने वाली जोखिम से बचा जा सकता है।

3.4 गृह बीमा (Home Insurance)

गृह बीमा (Home Insurance) भी वैसे चलन मे काफी बढ़ गया है, क्योकि घर के निर्माण के लिये काफी लम्बा पैसा या काफी वक्त देने के बाद यदि घर को प्राकृतिक आपदा या किसी भी प्रकार से कोई तोड़ फोड़ होती है, तो यदि घर की बीमा होगा, तो ड़रने की जरूरत उतनी नही होगी। घर जैसे समस्या का जोखिम उठाने के लिये भी आप गृह बीमा (Home Insurance) करा सकते है, जिसके तहत भविष्य मे किसी भी प्रकार से घर मे होने वाली आपदा के लिये सुरक्षित होंगे।

3.5 यात्रा बीमा (Travel Insurance)

यात्रा बीमा (Travel Insurance) यह बीमा आमतौर पर यदि किसी यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार से अनहोनी होती है, तो यह बीमा व्यक्ति एवंम् व्यक्ति के परिजनों को अर्थिक मदद् कवर करता है, यह बीमा यात्रा दौरान हम सभी को आवश्य लेना चाहिये। इसके अलावा प्रत्येक व्यक्ति जो यात्रा कर रहा होता है, उसके परिवार को होने वाली अनहोनी से आर्थिक सुरक्षा मिलती है।

3.6 फसल बीमा (Crop Insurance)

फसल बीमा (Crop Insurance) प्रत्येक किसान को लेना चाहिये, क्योकि किसान अपनी फसल को उगाने के लिये अधिकांशतः लोन जैसे साधनो का ही उपयोग करता और कभी कभी प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति मे अपनी लागत पूंजी को बचाने के लिये अपनी फसल का बीमा करा सकता है, जिसके तहत वह व्यक्ति यदि किसी उसके साथ फसल को लेकर किसी भी प्रकार से आपदा होती है, तो आर्थिक मदद् मिलेगी। फसल बीमा प्राकृतिक आपदा अग्नि के कारण फसल नष्ट हो जाना या बारिश के कारण फसल नष्ट हो जाने जैसी तमाम कारणों को पूर्ण करती है और किसान को अर्थिक जोखिम मे मदद् करती है।

बीमा का मुख्य उद्देश्य क्या है? (What is the main purpose of insurance?)

बीमा का मुख्य उद्देश्य बीमाकृत और बीमाकृता के मध्य हुयी लीगल एग्रीमेंट को सही ढंग एवंम् सही तरीके एवंम् सही समय पर हुये बीमा का जोखिम उठाना आवश्यक होता है। बीमा आपको और आपके परिवार को विभिन्न जोखिमों से बचाता है जो अन्यथा आपको या आपके परिवार को वित्तीय संकट में डाल सकते हैं। बीमा पॉलिसियों का उपयोग ऋण के लिए संपार्श्विक के रूप में किया जा सकता है। जब गृह ऋण की बात आती है, तो बीमा कवरेज होने से ऋणदाता से ऋण प्राप्त करना आसान हो जाता है। यह भी बीमा कराने से लाभ होता है, इसके अलावा बीमित व्यक्ति अथवा बीमित सम्पत्ति का जोखिम उठाने के लिये ही बीमा को लिया जाता है।

बीमा का उद्देश्य किसी बीमित व्यक्ति का संरक्षण एवंम् सुरक्षा, सामूहिक जोखिम, जोखिम आकलन एवंम् भुगतान की निश्चितता को सरल बनाने के साथ साथ भविष्य मे होने वाली आर्थिक हानि से बचने एवंम् बचाने के लिये एग्रीमेंट को जानना आवश्यक होगा। इसी एग्रीमेंट के आधार पर ही बीमित व्यक्ति या उसके परिवार को लाभ मिलेगा। इसके अलावा बीमित व्यक्ति को होने वाली समस्त जोखिम को कवर करना एवंम् बीमित व्यक्ति पर आने वाले संकट से बीमित व्यक्ति के परिवार की आर्थिक सहायता करना होता है।

बीमा कराने के बीमित व्यक्ति को आयकर मे छूट, ऋण लेने मे आसानी इसके अलावा बीमित व्यक्ति के परिवार जन भविष्य मे आने वाली अनेक संकटो से आर्थिक मदद् भी मिलेगी।

बीमा अधिनियम क्या है? (What is Insurance Act?)

बीमा अधिनियम (Insurance Act) बीमाकृता एवंम् बीमाकृत के मध्य लीगल एग्रीमेंट के माध्यम से कानूनी समझौता है जिसे बीमा कंपनी बीमाधारक को कवर की गई आकस्मिकता के कारण हुए किसी भी नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति करने की गारंटी देती है। वैसा बीमा एक व्यवसाय है, जो समाजिक सहायता के साथ साथ व्यवसायिक भी है, इस लिये बीमा अधिनियम 1938 बनाया गया जिसमे समय समय पर कई बदलाव भी किये गये है। यह अधिनियम बीमाकृता एवंम् बीमाधारक के मध्य हुयी बीमित विवाद का निस्तारण करने के लिये बनाया गया है बीमा अधिनियम मे 5 अध्याय और 123 धाराये है, जो निम्नलिखित है-

1- संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार और प्रारंभ (Short title, extent, and commencement.)

2- परिभाषाएं (Definitions)

2A- कुछ शब्दों और अभिव्यक्तियों की व्याख्या (Interpretation of certain words and expressions)

2B- बीमा नियंत्रक की नियुक्ति (Appointment of Controller of Insurance)

2C- कुछ व्यक्तियों द्वारा बीमा कारोबार के लेन-देन का निषेध (Prohibition of transaction of insurance business by certain persons)

2CA- इस अधिनियम के उपबन्धों विशेष आर्थिक जोन को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की शक्ति (Power of Central Government to apply provisions of this Act to Special Economic Zones)

2CB- भारत में संपत्तियों का प्राधिकरण की अनुज्ञा के सिवाय विदेशी बीमाकर्ताओं द्वारा बीमाकृत न किया जाना (Properties in India not to be insured with foreign insurers except with the permission of
Authority)

2D- बीमाकर्ता इस अधिनियम के अधीन होंगे जबकि देनदारियां असंतुष्ट रहती हैं (Insurers to be subject to this Act while liabilities remain unsatisfied)

2E- [विलोपित (Omitted)]

3- रजिस्ट्रीकरण (Registration)

3A- बीमाकर्ता द्वारा वार्षिक फीस का संदाय (Payment of annual fee by insurer)

3B- जीवन बीमा कारबार के निबन्धनों के ठीक होने का प्रमाणन (Certification of soundness of terms of life insurance business)

4- जीवन बीमा पालिसियों द्वारा प्रतिभूत वार्षिकियों और अन्य प्रसुविधाओं के लिए न्यूनतम सीमाएं (Minimum limits for annuities and other benefits secured by policies of life insurance)

5- बीमाकर्ता के नाम के बारे में निर्बन्धन (Restriction on name of insure)

6- पूंजी के संबंध में अपेक्षा (Requirements as to capital)

6A– पूंजी संघटन तथा मतदान अधिकारों और शेयरों के हिताधिकारी स्वामियों के रजिस्टर रखने से संबंधित अपेक्षाएं (Requirements as to capital structure and voting rights and maintenance of registers beneficial owners of shares)

6AA- [विलोपित (Omitted)]

6ख- पूंजी संघटन संबंधी अपेक्षाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उपबन्ध (Provision for securing compliance with requirements relating to capital structure)

6C [विलोपित (Omitted)]

7- [विलोपित (Omitted)]

8- [विलोपित (Omitted)]

9- [विलोपित (Omitted)]

10- खातों और निधियों का पृथक्करण (Separation of accounts and funds)

11- लेखा और तुलनपत्र (Accounts and balance-sheet)

12- लेखापरीक्षा (Audit)

13-  बीमांकिक रिपोर्ट और संक्षिप्तियां (Actuarial report and abstract)

14- पालिसियों और दावों का अभिलेख (Record of policies and claims)

15- विवरणियों का दिया जाना (Submission of returns)

16- [विलोपित (Omitted)]

17- [विलोपित (Omitted)]

17A- [विलोपित (Omitted)]

18- रिपोर्टों का दिया जाना (Furnishing reports)

19- साधारण अधिवेशनों की कार्यवाही की संक्षिप्ति  (Abstract of proceedings of general meetings)

20- दस्तावेजों की अभिरक्षा और निरीक्षण तथा प्रतियों का दिया जाना (Custody and inspection of documents and supply of copies)

21- विवरणियों के सम्बन्ध में नियंत्रक की शक्तियां (Powers of Authority regarding returns)

22- पुनर्मूल्यांकन के लिए आदेश करने की नियंत्रक की शक्ति (Powers of Authority to order revaluation)

23- दस्तावेजों का साक्ष्य (Evidence of documents)

24- [विलोपित (Omitted)]

25- विवरणियों का कानूनी प्ररूपों में प्रकाशित किया जाना (Returns to be published in statutory forms)

26- रजिस्ट्रीकरण के आवेदन के साथ दी गई विशिष्टियों में परिवर्तनों का रिपोर्ट किया जाना  (Alterations in the particulars furnished with application for registration to be reported)

27- आस्तियों का विनिधान (Investment of Assets)

27A- विनिधानों के संबंध में अतिरिक्त उपबंध (Further Provisions regarding Investments)

27B- साधारण बीमा कारबार करने वाले बीमाकर्ता की आस्तियों के विनिधानों के संबंध में उपबंध (Provisions regarding investments of assets of insurer carrying general insurance business)

27C- कतिपय मामलों में बीमाकर्ता द्वारा विनिधान (Investment by insurer in certain cases)

27D- विनिधान की रीति और शर्तें (Terms and Conditions of Investment)

27E- भारत के बाहर निधियों के विनिधान के लिए प्रतिषेध (Prohibition on investment of funds outside India)

28- आस्तियों के विनिधान का विवरण और विवरणी (Statement and return of investment of assets)

29- उधारों का प्रतिषेध (Prohibition of loans)

30- धारा 27, धारा 27धारा 27धारा 27धारा 27 या धारा 29 के उल्लंघनों के कारण हुई हानि के लिए निदेशकोंआदि का दायित्व (Liability of directors, etc., for loss due to contravention of section 27, 27A, 27B, 27C, 27D or section 29)

31- बीमाकर्ता की आस्तियों को किस प्रकार रखा जाएगा (Assets of insurer how to be kept)

31A- प्रबंधकों आदि से सम्बन्धित उपबन्ध (Provisions related to managers etc. Provisions related to managers etc.)

32- [विलोपित (Omitted)]

32A- सम्मिलित अधिकारियों का प्रतिषेध तथा पूर्णकालिक अधिकारियों सम्बन्धी अपेक्षा (Prohibition of common officers and requirement as to whole-time officers)

32B- ग्रामीण और सामाजिक सेक्टर में बीमा कारबार (Insurance business in rural and social sectors)

32C- ग्रामीण या असंगठित सेक्टर और पिछड़े वर्गों के संबंध में बीमाकर्ता की बाध्यताएं (Obligations of insurer in respect of rural or unorganised sector and backward classes)

32D- मोटरयान के अन्य पक्षकार जोखिम में बीमा कारबार के संबंध में बीमाकर्ता की बाध्यता (Obligation of insurer in respect of insurance business in third party risks of motor vehicles)

33- प्राधिकरण द्वारा अन्वेषण और निरीक्षण की शक्ति (Power of investigation and inspection by Authority)

33A- कर्मचारिवृन्द नियुक्त करने की शक्ति (Power to appoint staff)

34- निदेश देने की नियन्त्रक की शक्ति (Power of the Authority to issue directions)

34A- प्रबन्ध निदेशकों आदि की नियुक्ति सम्बन्धी उपबन्धों के संशोधन के लिए नियंत्रक का पूर्वानुमोदन आवश्यक होना (Amendment of provisions relating to appointments of managing directors, etc., to be subject to previous approval of the Controller)

34B- प्रबन्धकार व्यक्तियों को उनके पद से हटा देने की नियंत्रक की शक्ति (Power of Authority to remove managerial persons from office)

34C- अपर निदेशक नियुक्त करने की नियंत्रक की शक्ति (Power of Authority to appoint additional directors)

34D- धारा 34 और 34 का अन्य विधियों पर अध्यारोही होना (Sections 34B and 34C to override other laws)

34E- नियंत्रक की अपर शक्तियां (Additional powers of the controller)

34F- पुनर्बीमा करार आदि के बारे में निदेश देने की नियंत्रक की शक्ति (Power of Authority to issue directions regarding re-insurance treaties, etc)

34G- प्राधिकरण की विदेशी शाखाओं को बंद करने का आदेश देने की शक्ति (Power of Authority to order closure of foreign branches)

34H- तलाशी और अभिग्रहण (Search and seizure)

35- बीमा कारबार का समामेलन और अंतरण (Amalgamation and transfer of insurance business)

36- प्राधिकरण द्वारा समामेलन और अन्तरण की मंजूरी (Sanction of amalgamation and transfer by Controller)

37- समामेलन और अंतरण के पश्चात् अपेक्षित विवरण (Statements required after amalgamation and transfer)

37A- समामेलन की स्कीम तैयार करने की नियंत्रक की शक्ति (Power of Authority to prepare Scheme of Amalgamation)

38- बीमा पालिसियों का समनुदेश और अन्तरण (Assignment and transfer of insurance policies)

39- पालिसीधारी द्वारा नामनिर्देशन (Nomination by policy-holder)

40- बीमा कारबार उपाप्त करने के लिए कमीशन के रूप में या अन्यथा संदाय का प्रतिषेध (Prohibition of payment by way of commission or otherwise for procuring business)

40A- [विलोपित (Omitted)]

40B- जीवन बीमा कारबार में प्रबंध व्ययों की परिसीमा (Limitation of expenses of management in life insurance business)

40C- साधारणस्वास्थ्य बीमा और पुनर्बीमा कारबार में प्रबंध व्ययों की परिसीमा (Limitation of expenses of management in general insurance business)

41- रिबेट विषयक प्रतिषेध (Prohibition of rebates)

42- बीमा अभिकर्ताओं की नियुक्ति (Appointment of insurance agents)

42A- प्रधान अभिकर्ताविशेष अभिकर्ता के माध्यम से बीमा कारबार और बहुस्तरीय विपणन का प्रतिषेध (Prohibition of insurance business through principal agent, special agent and multilevel marketing)

42D- मध्यवर्ती या बीमा मध्यवर्ती को रजिस्ट्रीकरण जारी करना (Issue of registration to intermediary or insurance intermediary)

42E- मध्यवर्ती या बीमा मध्यस्थ को देय कमीशन, दलाली या शुल्क के लिए शर्त (Commission, brokerage or fee payable to intermediary or insurance intermediary)

43- बीमा अभिकर्ताओं का अभिलेख (Register of insurance agents)

44- [विलोपित (Omitted)]

44A- जानकारी मांगने की शक्ति (Power to call for information)

45- अशुद्ध कथन के आधार पर किसी पालिसी पर तीन वर्ष के पश्चात् आक्षेप  किया जाना (Policy not to be called in question on ground of mis-statement after two years)

46- भारत में निर्गमित पालिसियों को भारत में प्रवृत्त विधि का लागू होना (Application of the law in force in India to policies issued in India)

47- न्यायालय में धन का संदाय किया जाना (Payment of money into Court)

47A- [विलोपित (Omitted)]

48- [विलोपित (Omitted)]

48A- बीमा अभिकर्ता या मध्यवर्ती या बीमा मध्यवर्ती का बीमा कंपनी में निदेशक  होना (Insurance agent or intermediary or insurance intermediary not to be director in insurance company)

48B- निदेशकों के सम्बन्ध में अतिरिक्त उपबन्ध (Further provision regarding directors)

48C- [विलोपित (Omitted)]

49- लाभांशों और बोनसों पर निर्बन्धन (Restriction On dividends and bonuses)

50- पालिसी के व्यपगत होने पर उपलब्ध विकल्पों की बीमाकृत को सूचना (Notice of options available to the assured on the lapsing of a policy)

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