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BNS की धारा 93 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 93 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 93 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 93? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 93 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 93 के अनुसार यदि किसी बच्चे के माता-पिता या वह व्यक्ति जो उस बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी रखता है, 12 साल से कम उम्र के बच्चे को जानबूझकर अकेला, असुरक्षित हालत में किसी भी जगह छोड़ देता हैतो वह धारा 93 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास और जुर्माना से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-317) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 93 का विवरण (Section 93 BNS)

BNS की धारा 93 के अनुसार, यदि यदि किसी बच्चे के माता-पिता या वह व्यक्ति जो उस बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी रखता है, 12 साल से कम उम्र के बच्चे को जानबूझकर अकेला, असुरक्षित हालत में किसी भी जगह छोड़ देता है, तो वह धारा 93 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

बीएनएस की धारा 93 के अनुसार (BNS Section 93 in Hindi)

93. शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु को अरक्षित डाल देना और परित्याग करना - जो कोई, बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का पिता या माता होते हुए, या ऐसे शिशु की देखरेख का भार रखते हुए, ऐसे शिशु का पूर्णतः परित्याग करने के आशय से उस शिशु को किसी स्थान में अरक्षित डाल देगा या छोड़ देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण- यदि शिशु अरक्षित डाल दिए जाने के परिणामस्वरूप मर जाए, तो, यथास्थिति, हत्या या आपराधिक मानव वध के लिए अपराधी का विचारण निवारित करना इस धारा से आशयित नहीं है।

BNS की धारा 93 के अनुसार (BNS Section 93 in English)

93. Exposure and abandonment of child under twelve years of age, by parent or person having care of it. - Whoever being the father or mother of a child under the age of twelve years, or having the care of such child, shall expose or leave such child in any place with the intention of wholly abandoning such child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.
Explanation- This section is not intended to prevent the trial of the offender for murder or culpable homicide, as the case may be, if the child die in consequence of the exposure.

बीएनएस की धारा 93 एवंम् आईपीसी की धारा 317 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा दोनों लगभग समान हैं।
  • बीएनएस में भाषा अधिक स्पष्ट
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 317BNS Section 93भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 7 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना
  • या दोनों

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति व्दारा बारह वर्ष से कम आयु के बालक का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग।7 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनों।संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 93 (BNS 93) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 93 क्या है?

12 वर्ष से कम आयु के बच्चे को उसके माता-पिता या देखभाल करने वाला व्यक्ति जानबूझकर असुरक्षित स्थान पर छोड़ देता है।

Q2. आईपीसी की धारा 317 किससे संबंधित है?

आईपीसी की धारा 317 भी छोटे बच्चे को परित्याग करने के अपराध से जुड़ी हुई है और इसका उद्देश्य बच्चे की सुरक्षा करना है।

Q3. इन धाराओं के अंतर्गत अपराध कौन कर सकता है?

बच्चे के पिता, माता या वह व्यक्ति जो उसकी देखभाल की जिम्मेदारी रखता है।

Q4. बच्चे की उम्र कितनी होनी चाहिए?

बच्चा 12 वर्ष से कम आयु का होना चाहिए।

Q5. इस अपराध में सजा क्या है?

दोषी को 7 वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

Q6. क्या केवल बच्चे को छोड़ना ही अपराध है?

हाँ, यदि बच्चे को पूरी तरह छोड़ने के इरादे से असुरक्षित हालत में छोड़ा गया हो, तो यह अपराध है।

BNS की धारा 92 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 92 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 92 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 92? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 92 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 92 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा खतरनाक या गलत काम करता है, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide) माना जाता, और उस काम के कारण गर्भ में पल रहे जीवित बच्चे (अजात शिशु) की मृत्यु हो जाती है, तो वह धारा 92 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास और जुर्माना से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-316) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 92 का विवरण (Section 92 BNS)

BNS की धारा 92 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कोई ऐसा खतरनाक या गलत काम करता है, जिससे किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide) माना जाता, और उस काम के कारण गर्भ में पल रहे जीवित बच्चे (अजात शिशु) की मृत्यु हो जाती है, तो वह धारा 92 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

बीएनएस की धारा 92 के अनुसार (BNS Section 92 in Hindi)

92. ऐसे कार्य द्वारा जो आपराधिक मानव वध की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात मृत्यु कारित करना- जो कोई ऐसा कोई कार्य ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उसके द्वारा मृत्यु कारित कर देता, तो वह आपराधिक मानव वध का दोषी होता और ऐसे कार्य द्वारा किसी सजीव अजात की मृत्यु कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष सकेगी दंडित किया जाएगा, और जुर्माने का भी दायी होगा।
दृष्टान्त
क, यह सम्भाव्य जानते हुए कि वह गर्भवती महिला की मृत्यु कारित कर दे, ऐसा कार्य करता है, जो उस महिला को मृत्यु कारित हो जाती. तो वह आपराधिक मानव वध की कोटि में आता। उस महिला की क्षति होती है, किन्तु उसकी मृत्यु नहीं होती, किन्तु उसके द्वारा उस अजात सजीव शिशु की मृत्यु हो जाती है, जो उसके गर्भ में है। क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है।

BNS की धारा 92 के अनुसार (BNS Section 92 in English)

92. Causing death of quick unborn child by act amounting to culpable homicide. Whoever does any act under such circumstances, that if he thereby caused death he would be guilty of culpable homicide, and does by such act cause the death of a quick unborn child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Illustration
A, knowing that he is likely to cause the death of a pregnant woman, does an act which, if it caused the death of the woman, would amount to culpable homicide. The woman is injured, but does not die; but the death of an unbom quick child with which she is pregnant is thereby caused. A is guilty of the offence defined in this section.

बीएनएस की धारा 92 एवंम् आईपीसी की धारा 316 मे अंतर

  • दोनों धाराएँ उस स्थिति पर लागू होती हैं जब कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है जिससे गर्भ में जीवित शिशु की मृत्यु हो जाती है
  • यदि यह कार्य माँ की जान बचाने के लिए ईमानदारी से किया गया हो
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 316BNS Section 92भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 10 वर्ष के लिये कारावास
  • और जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
ऐसे कार्य व्दारा, जो आपराधिक मानव वध की कोटि मे आता है, किसी सजीव अजात् बालक की मृत्यु कारित करना।10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना ।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 92 (BNS 92) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 92 क्या है?

यह धारा उस स्थिति पर लागू होती है जब कोई व्यक्ति ऐसा खतरनाक या आपराधिक कार्य करता है, जिससे गर्भ में जीवित बच्चे (अजात शिशु) की मृत्यु हो जाती है, और यदि वही कार्य किसी व्यक्ति की मृत्यु कर देता, तो वह आपराधिक मानव वध माना जाता।

Q2. इस धारा में किस प्रकार का अपराध शामिल है?

यह अपराध गंभीर प्रकृति का अपराध है, क्योंकि इसमें गर्भस्थ जीवित शिशु की मृत्यु होती है।

Q3. क्या महिला की मृत्यु होना आवश्यक है?

नहीं। यदि महिला जीवित रहती है, लेकिन गर्भ में पल रहे सजीव अजात शिशु की मृत्यु हो जाती है, तब भी यह धारा लागू होती है।

Q4. क्या गर्भवती महिला की सहमति से किया गया कार्य अपराध नहीं होगा?

नहीं। महिला की सहमति होने पर भी, यदि किया गया कार्य इस धारा की शर्तों में आता है, तो वह अपराध ही माना जाएगा

Q5. क्या कोई अपवाद (Exception) भी है?

हाँ। यदि ऐसा कार्य माँ का जीवन बचाने के लिए सद्भावपूर्वक किया गया हो, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।

Q6. इस धारा का उद्देश्य क्या है?

इस धारा का उद्देश्य गर्भ में पल रहे जीवित बच्चे के जीवन की रक्षा करना और ऐसे गंभीर कृत्यों को दंडित करना है।

BNS की धारा 91 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 91 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 91 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 91? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 91 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 91 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी शिशु के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिसका उद्देश्य यह हो कि: शिशु जिंदा पैदा न हो, या शिशु के जन्म के बाद उसकी मृत्यु हो जाए, और उस काम के कारण सच में शिशु का जिंदा जन्म रुक जाता है, या जन्म के बाद शिशु मर जाता है, तो वह धारा 91 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास या जुर्माना या दोनो से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-315) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 91 का विवरण (Section 91 BNS)

BNS की धारा 91 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी शिशु के जन्म से पहले ऐसा काम करता है जिसका उद्देश्य यह हो कि: शिशु जिंदा पैदा न हो, या शिशु के जन्म के बाद उसकी मृत्यु हो जाए, और उस काम के कारण सच में शिशु का जिंदा जन्म रुक जाता है, या जन्म के बाद शिशु मर जाता है, तो वह धारा 91 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास या जुर्माने से या दोनो से दंडित किया जा सकता है।

बीएनएस की धारा 91 के अनुसार (BNS Section 91 in Hindi)

91. शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय में किया गया कार्य - जो कोई, किसी शिशु के जन्म से पूर्व कोई कार्य इस आशय से करता है कि उस शिशु का पैदा होना उसके द्वारा रोका जाए या जन्म के पश्चात् उसके द्वारा उसकी मृत्यु कारित हो जाए, और ऐसे कार्य शिशु का जीवित पैदा होना रोकता है, या उसके जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित कर देता है, यदि वह कार्य माता के जीवन को बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक नहीं किया गया है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया।

BNS की धारा 91 के अनुसार (BNS Section 91 in English)

91. Act done with intent to prevent child being born alive or to cause it to die after birth.-Whoever before the birth of any child does any act with the intention of thereby preventing that child from being born alive or causing it to die after its birth, and does by such act prevent that child from being born alive, or causes it to die after its birth, shall, if such act be not caused in good faith for the purpose of saving the life of the mother, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, or with fine, or with both.

कब अपराध नहीं माना जाएगा?

  • यदि ऐसा कार्य माता की जान बचाने के लिए,
  • ईमानदारी (सद्भाव) से किया गया हो, तो यह अपराध नहीं होगा।

बीएनएस की धारा 91 एवंम् आईपीसी की धारा 315 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा लगभग समान हैं।
  • अंतर मुख्यतः भाषा, संरचना और प्रस्तुति का है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 315BNS Section 91भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 10 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना
  • या दोनों

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
बालक का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय मे किया गया कार्य।10 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनों।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 91 (BNS 91) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 91 क्या है?

यह धारा उस अपराध से संबंधित है जिसमें किसी शिशु के जीवित जन्म को रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु कराने के उद्देश्य से कोई कार्य किया जाता है।

Q2. इस धारा में अपराध कब बनता है?

जब: ऐसा कार्य जानबूझकर किया जाए, उद्देश्य शिशु का जिंदा पैदा होना रोकना या जन्म के बाद मार देना हो, और वह कार्य माँ की जान बचाने के लिए ईमानदारी से न किया गया हो

Q3. क्या माँ की जान बचाने के लिए किया गया कार्य अपराध है?

नहीं। यदि कार्य माता के जीवन की रक्षा के लिए सद्भावपूर्वक (Good Faith) किया गया है, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।

Q4. इस धारा के तहत सजा क्या है?

दोष सिद्ध होने पर: 10 वर्ष तक की जेल, या जुर्माना, या जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

Q5. क्या यह अपराध जमानती है?

यह गैर-जमानती माना जाता है। जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करता है।

BNS की धारा 90 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 90 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 90 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 90? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 90 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 90 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी गर्भवती महिला का गर्भपात कराने के इरादे से कोई ऐसा काम करता है और उस काम के कारण महिला की मृत्यु हो जाती है, तो वह धारा 90 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास या आजीवन कारावास, साथ ही जुर्माना से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-314) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 90 का विवरण (Section 90 BNS)

BNS की धारा 90 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति गर्भपात कराने के इरादे से किया गया कोई भी काम जिससे महिला की मौत का कारण बनता है, तो चाहे सहमति हो या न हो, तो वह धारा 90 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास या आजीवन कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 90 के अनुसार (BNS Section 90 in Hindi)

90. गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्य द्वारा कारित मृत्यु- (1) जो कोई, गर्ववती महिला का गर्भपात कारित करने के आशय से कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे उस महिला की मृत्यु सारित हो जाती है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
(2) वहाँ उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्य उस महिला की सम्मति के बिना किया जाता है, तो वह बायीवन कारावास से, या उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट दण्ड से, दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण- इस अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी जानता हो कि उस कार्य से मृत्यु सारित करना सम्भाव्य है।

BNS की धारा 90 के अनुसार (BNS Section 90 in English)

90. Death Caused by act done with intent to cause miscarriage.- (1) Whoever, with intent to cause the miscarriage of a woman with child, does any act which causes the death of such woman, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
(2) Where the act referred to in sub-section (1) is done without the consent of the woman, shall be punishable either with imprisonment for life, or with the punishment specified in said sub-section.
Explanation- It is not essential to this offence that the offender should know that the act is likely to cause death.

बीएनएस की धारा 90 एवंम् आईपीसी की धारा 314 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा लगभग समान हैं।
  • अंतर मुख्यतः भाषा, संरचना और प्रस्तुति का है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 314BNS Section 90भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

(1) जब महिला की सहमति हो अगर गर्भपात कराने के उद्देश्य से किया गया कार्य महिला की सहमति से किया गया हो, लेकिन फिर भी उससे महिला की मौत हो जाती है, तो दोषी व्यक्ति को:

  • 10 वर्ष तक की जेल, और
  • जुर्माना हो सकता है।

(2) जब महिला की सहमति न हो अगर वही कार्य महिला की सहमति के बिना किया गया हो और उससे महिला की मृत्यु हो जाती है, तो दोषी व्यक्ति को:

  • आजीवन कारावास, या
  • 10 वर्ष तक की जेल, और
  • जुर्माना दिया जा सकता है

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
गर्भपात कारित करने के आशय से किये गये कार्य व्दारा कारित मृत्यु10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय
यदि वह कार्य महिला की सम्मति के बिना किया जाता है।आजीवन कारावास या यथा उपरोक्तसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 90 (BNS 90) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 90 क्या है?

यह धारा उस स्थिति से संबंधित है जब गर्भपात कराने के इरादे से किया गया कोई कार्य गर्भवती महिला की मृत्यु का कारण बन जाता है

Q2. क्या इसमें गर्भपात सफल होना जरूरी है?

नहीं। सिर्फ इतना पर्याप्त है कि गर्भपात कराने के उद्देश्य से किया गया कार्य महिला की मृत्यु का कारण बना हो।

Q3. महिला की सहमति होने पर क्या सजा है?

यदि कार्य महिला की सहमति से किया गया था और उससे मृत्यु हो गई, तो: 10 वर्ष तक की जेल, और जुर्माना लगाया जा सकता है।

Q4. महिला की सहमति न होने पर क्या सजा है?

यदि कार्य महिला की सहमति के बिना किया गया था और उससे मृत्यु हो गई, तो: आजीवन कारावास, या 10 वर्ष तक की जेल, और जुर्माना हो सकता है।

Q5. क्या डॉक्टर भी इस धारा के अंतर्गत दोषी हो सकता है?

हाँ। यदि डॉक्टर या कोई भी व्यक्ति कानून का पालन किए बिना गर्भपात कराने का प्रयास करता है और उससे महिला की मृत्यु हो जाती है, तो वह दोषी होगा।

BNS की धारा 89 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 89 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 89 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 89? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 89 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 89 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की सहमति के बिना उसका गर्भपात कराता है—चाहे वह महिला स्पन्दनगर्भा हो या न हो, तो वह धारा 89 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक के लिये कारावास या आजीवन कारावास, साथ ही जुर्माना से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-313) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 89 का विवरण (Section 89 BNS)

BNS की धारा 89 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की सहमति के बिना उसका गर्भपात कराता है—चाहे वह महिला स्पन्दनगर्भा हो या न हो, तो वह धारा 89 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास या आजीवन कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 89 के अनुसार (BNS Section 89 in Hindi)

89. महिला की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना- जो कोई, महिला की सम्मति के बिना, चाहे वह महिला स्पन्दनगर्भा हो या नहीं, धारा 88 के अधीन अपराध करता है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, जो जुर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 89 के अनुसार (BNS Section 89 in English)

89. Causing miscarriage without woman's consent.- Whoever commits the offence under Section 88 without the consent of the woman, whether the woman with imprisonment of either description for a term which may extend to ten is quick with child or not, shall be punished with imprisonment for life, or years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 89 एवंम् आईपीसी की धारा 313 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा लगभग समान हैं।
  • बीएनएस में भाषा अधिक स्पष्ट, समकालीन और पीड़िता-केंद्रित है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 312BNS Section 88भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 10 वर्ष के लिये कारावास या
  • आजीवन कारावास या दोनों
  • और जुर्माना भी

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
महिला की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना।आजीवन कारावास या 10 वर्ष के लिये कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 89 (BNS 89) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 89 क्या है?

यह धारा उस अपराध से संबंधित है जिसमें किसी महिला की सहमति के बिना उसका गर्भपात कराया जाता है, चाहे वह महिला स्पन्दनगर्भा हो या नहीं।

Q2. महिला की सहमति का क्या महत्व है?

महिला की स्वतंत्र और स्पष्ट सहमति अनिवार्य है, सहमति के बिना गर्भपात कराना गंभीर अपराध माना गया है।

Q3. इस धारा के तहत सजा क्या है?

दोष सिद्ध होने पर: आजीवन कारावास, या 10 वर्ष तक की जेल, और जुर्माना भी लगाया जाएगा।

Q4. क्या महिला स्पन्दनगर्भा न हो, तब भी यह अपराध है?

हाँ। गर्भ की अवस्था चाहे जो भी हो, सहमति के बिना गर्भपात कराना अपराध है

Q5. क्या डॉक्टर भी इस धारा के तहत दोषी हो सकता है?

हाँ। यदि कोई डॉक्टर या व्यक्ति महिला की सहमति के बिना गर्भपात करता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा।

BNS की धारा 88 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 88 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 88 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 88? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 88 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 88 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी गर्भवती महिला का जानबूझकर गर्भपात कराता है और यह गर्भपात महिला की जान बचाने के लिए ईमानदारी (सद्भाव) से नहीं किया गया है अथवा अगर महिला स्पन्दनगर्भा है (यानी गर्भ में शिशु की धड़कन शुरू हो चुकी है) उस स्थिति मे कोई गर्भपात कराता है, तो वह धारा 88 के अन्तर्गत 3 वर्ष से 7 वर्ष तक के लिये कारावास, साथ ही जुर्माना से दंडित होगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-312) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 88 का विवरण (Section 88 BNS)

BNS की धारा 88 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी गर्भवती महिला का जानबूझकर गर्भपात कराता है और यह गर्भपात महिला की जान बचाने के लिए ईमानदारी (सद्भाव) से नहीं किया गया है अथवा अगर महिला स्पन्दनगर्भा है (यानी गर्भ में शिशु की धड़कन शुरू हो चुकी है) उस स्थिति मे कोई गर्भपात कराता है, तो वह धारा 88 के अन्तर्गत 7 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 88 के अनुसार (BNS Section 88 in Hindi)

88. गर्भपात कारित करना जो कोई, गर्भवती महिला का स्वेच्छया गर्भपात कारित करता है, यदि ऐसा गर्भपात उस महिला का जीवन बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक कारित न किया जाए तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा, और यदि वह महिला स्पन्दनगर्भा हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी। दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण- जो महिला स्वयं अपना गर्भपात कारित करती है, वह इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत आती हैं।

BNS की धारा 88 के अनुसार (BNS Section 88 in English)

88. Causing miscarriage. Whoever voluntarily causes a woman with child to miscarry, shall, if such miscarriage be not caused in good faith for the purpose of saving the life of the woman, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both; and, if the woman be quick with child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Explanation- A woman who causes herself to miscarry, is within the meaning of this section.

बीएनएस की धारा 88 एवंम् आईपीसी की धारा 312 मे अंतर

  • अपराध की प्रकृति और सजा लगभग समान हैं।
  • बीएनएस में भाषा अधिक स्पष्ट, समकालीन और पीड़िता-केंद्रित है।
IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 312BNS Section 88भाषा अधिक स्पष्ट, आधुनिक और न्याय-केंद्रित

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

सामान्य स्थिति में गर्भपात कारित करता है :

  • 3 वर्ष तक की जेल, या
  • जुर्माना, या
  • जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

अगर महिला स्पन्दनगर्भा है (यानी गर्भ में शिशु की धड़कन शुरू हो चुकी है), तो:

  • 7 वर्ष तक की जेल, और
  • जुर्माना भी लगाया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
गर्भपात कारित करना।3 वर्ष के लिये कारावास या जुर्माना या दोनो ।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट
यदि महिला स्पन्दनगर्भा हो।7 वर्ष के लिये कारावास और जुर्माना ।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 88 (BNS 88) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 88 क्या है?

किसी गर्भवती महिला का गर्भपात जानबूझकर कराया जाता है, और वह गर्भपात महिला की जान बचाने के उद्देश्य से ईमानदारी (सद्भावपूर्वक) नहीं किया गया हो

Q2. किन परिस्थितियों में गर्भपात अपराध नहीं माना जाएगा?

जब गर्भपात: महिला की जान बचाने के लिए, अच्छे इरादे (Good Faith) से, कानून द्वारा अनुमत प्रक्रिया के अनुसार किया गया हो।
ऐसी स्थिति में धारा 88 लागू नहीं होगी।

Q3. क्या महिला की सहमति होने पर भी अपराध बनता है?

हाँ। यदि गर्भपात महिला की जान बचाने के अलावा किसी अन्य कारण से कराया गया है, तो सहमति होने पर भी अपराध बन सकता है।

Q4. क्या महिला स्वयं गर्भपात कराए तो अपराध होगा?

हाँ। यदि महिला खुद अपना गर्भपात कराती है, तो भी वह इस धारा के अंतर्गत दोषी मानी जाएगी।

Q5. क्या डॉक्टर भी इस धारा के तहत दोषी हो सकता है?

हाँ। यदि डॉक्टर या कोई अन्य व्यक्ति: कानून का पालन किए बिना, या महिला की जान बचाने के उद्देश्य के बिना गर्भपात करता है, तो वह दोषी हो सकता है।