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BNS की धारा 74 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 74 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 74 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 74? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 74 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी महिला की इज्ज़त (लज्जा) भंग करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि उसके काम से महिला की इज्ज़त पर असर पड़ेगा, उस पर हमला करता है या जबरदस्ती बल प्रयोग करता है, तो वह धारा 74 के अन्तर्गत कम से कम 1 वर्ष का कारावास जो 5 वर्ष तक का कारावास हो सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-354) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 74 का विवरण (Section 74 BNS)

BNS की धारा 74 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की इज्ज़त (लज्जा) भंग करने के इरादे से, या यह जानते हुए कि उसके काम से महिला की इज्ज़त पर असर पड़ेगा, उस पर हमला करता है या जबरदस्ती बल प्रयोग करता है, तो यह अपराध है, तो वह धारा 74 के अन्तर्गत कम से कम 1 वर्ष का कारावास जो 5 वर्ष तक का कारावास हो सकता है, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जायेगा। इरादा हो या यह पता हो कि इज्ज़त भंग होगी— दोनों ही हालत में सजा मिलेगी।

बीएनएस की धारा 74 के अनुसार (BNS Section 74 in Hindi)

74. महिला की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग- जो कोई, किसी महिला की लज्जा भंग करने के आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि उसके द्वारा यह उसकी लज्जा भंग करेगा, उस महिला पर हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है. वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी. किन्तु जी पांच वर्ष तक की हो सकेगी. और जर्माने का भी दायी होगा।

BNS की धारा 74 के अनुसार (BNS Section 74 in English)

74. Assault or use of criminal force to woman with intent to outrage her modesty. Whoever assaults or uses criminal force to any woman, intending to outrage or knowing it to be likely that he will there by outrage her modesty, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year but which may extend to five years, and shall also be liable to fine.

बीएनएस की धारा 74 एवंम् आईपीसी की धारा 354 मे अंतर

IPC धारा 354 में केवल इरादा प्रमुख था, जबकि BNS धारा 74 में इरादा या यह ज्ञान—दोनों को शामिल किया गया है। सजा लगभग समान है, लेकिन बीएनएस की भाषा ज़्यादा साफ और आधुनिक है और जो महिला की गरिमा और सुरक्षा को बेहतर कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 354BNS Section 74मुआवजा अनिवार्य (इरादा या यह ज्ञान कि लज्जा भंग होगी)

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • कम से कम 1 वर्ष का कारावास
  • अधिकतम् 5 वर्ष का कारावास
  • साथ ही जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
महिला की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग1 वर्ष का कारावास, जो 5 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 74 (BNS 74) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. BNS की धारा 74 क्या है?

यह धारा उस स्थिति से संबंधित है जब कोई व्यक्ति किसी महिला की इज्ज़त (लज्जा) भंग करने के इरादे से या यह जानते हुए कि ऐसा होगा, उस पर हमला या जबरदस्ती बल प्रयोग करता है

Q2. “हमला” और “आपराधिक बल” से क्या मतलब है?

हमला: डराने, मारने या चोट पहुँचाने की कोशिश। आपराधिक बल: बिना सहमति शारीरिक बल का प्रयोग।

Q3. क्या महिला को चोट लगना ज़रूरी है?

नहीं। केवल इरादा या जानकारी कि महिला की लज्जा भंग होगी, पर्याप्त है।

Q4. क्या यह अपराध जमानती है?

आमतौर पर इसे गंभीर अपराध माना जाता है। जमानत अदालत के विवेक पर निर्भर करती है।

Q5. इस धारा का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य महिलाओं की गरिमा, सम्मान और शारीरिक सुरक्षा को कानूनी संरक्षण देना है।

BNS की धारा 73 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 73 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 73 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 73? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 73 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 73 में यदि कोई यौन अपराध से जुड़े मामले (धारा 72 में बताए गए अपराधों) की न्यायालय में चल रही कार्यवाही के बारे में कोई व्यक्ति अदालत की पहले से अनुमति लिए बिना उसे छापता या प्रकाशित करता है, अर्थात् चल रहे केस की जानकारी बिना कोर्ट की इजाज़त के सार्वजनिक करता है, तो वह धारा 73 के अन्तर्गत 2 वर्ष का कारावास साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। नये कानून के तहत BNS की धारा 73 को नया जोड़ा गया है।

बीएनएस की धारा 73 का विवरण (Section 73 BNS)

BNS की धारा 73 के अनुसार, यदि किसी यौन अपराध से जुड़े मामले (धारा 72 में बताए गए अपराधों) की न्यायालय में चल रही कार्यवाही के बारे में कोई व्यक्ति अदालत की पहले से अनुमति लिए बिना उसे छापता या प्रकाशित करता है, तो यह अपराध है, तो वह धारा 73 के अन्तर्गत 2 वर्ष का कारावास साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जायेगा। यह केवल उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले को छापना या प्रकाशित करना अपराध की श्रेणी मे नही आयेगा।

बीएनएस की धारा 73 के अनुसार (BNS Section 73 in Hindi)

73. अनुमति के बिना न्यायालय की कार्यवाहियों से संबंधित किसी मामले का मुद्रण या प्रकाशन करना- जो कोई धारा 72 में निर्दिष्ट किसी अपराध की बाबत किसी न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही के सम्बन्ध में, कोई बात उस न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना मुद्रित या प्रकाशित करता है तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण- किसी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत अपराध की कोटि में नहीं आता है।

BNS की धारा 73 के अनुसार (BNS Section 73 in English)

73. Printing or publishing any matter relating to Court proceedings without permission. Whoever prints or publishes any matter in relation to any proceeding before a Court with respect to an offence referred to in Section 72 without the previous permission of such Court shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years and shall also be liable to fine.
Explanation.- The printing or publication of the judgment of any High Court or the Supreme Court does not amount to an offence within the meaning of this section.

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 2 वर्ष का कारावास
  • साथ ही जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
न्यायालय की पूर्व अनुज्ञा के बिना किसी कार्यवाही का मुद्रण या प्रकाशन करना2 वर्ष का कारावास और जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 73 (BNS 73) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. क्या अपराध नहीं है?

उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले को छापना या प्रकाशित करना अपराध नहीं माना जाएगा।

Q2. BNS की धारा 73 क्या है?

यह धारा उन मामलों से जुड़ी है जहाँ यौन अपराधों से संबंधित न्यायालयी कार्यवाही की जानकारी बिना अदालत की अनुमति छापी या प्रकाशित की जाती है।

Q3. क्या बिना कोर्ट की अनुमति कोई जानकारी प्रकाशित की जा सकती है?

नहीं। न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना कार्यवाही से जुड़ी कोई भी बात प्रकाशित करना अपराध है।

Q4. क्या मीडिया पर भी यह धारा लागू हो सकती है?

हाँ। अख़बार, टीवी, वेबसाइट, सोशल मीडिया—सभी पर यह धारा लागू हो सकती है।

Q5. इस धारा का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य: पीड़िता की गोपनीयता की रक्षा, मुकदमे की निष्पक्षता बनाए रखना, और मीडिया ट्रायल को रोकना है।

Q6. क्या यह अपराध जमानती है?

आमतौर पर इसे गंभीर अपराध माना जाता है। जमानत अदालत के विवेक पर निर्भर करती है।

BNS की धारा 72 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 72 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 72 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 72? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 72 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 72 में किसी महिला के साथ गंभीर यौन अपराध (धारा 64 से 71 तक) हुआ है या होने का आरोप है, तो उस पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन अपराध है, जो भी कोई व्यक्ति ऐसा करेगा, तो वह धारा 72 के अन्तर्गत 2 वर्ष का कारावास साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-228A) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 72 का विवरण (Section 72 BNS)

BNS की धारा 72 के अनुसार, यदि कोई यौन अपराधों (धारा 64 से 71 तक) की पीड़िता की पहचान (नाम, पता, फोटो या कोई भी जानकारी जिससे पहचान हो सके) को छापना या प्रकाशित करता है तो यह अपराध है, पीड़िता की पहचान सार्वजनिक तभी किया जा सकता है, जब पुलिस अधिकारी जांच के लिए करे, पीड़िता खुद या उसकी लिखित अनुमति दे या पीड़िता की मृत्यु या नाबालिग/मानसिक रूप से अक्षम होने पर, निकट रिश्तेदार की लिखित अनुमति से दे तभी प्रकाशित किया जा सकेगा, अन्यथा वह धारा 72 के अन्तर्गत 2 वर्ष कारावास साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जायेगा।

बीएनएस की धारा 72 के अनुसार (BNS Section 72 in Hindi)

72. कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण- (1) जो कोई, किसी नाम या अन्य बात की, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है. जिसके विरुद्ध धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 या धारा 68 या धारा 69 या धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया पाया गया है, मुद्रित या प्रकाशित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा।
(2) उपधारा (1) की किसी भी बात का विस्तार, किसी नाम या अन्य बात के मुद्रण या प्रकाशन पर, यदि उससे पीड़ित व्यक्ति की पहचान हो सकती है, तब नहीं होता है जब ऐसा मुद्रण या प्रकाशन-
(क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के या ऐसे अपराध का अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के, जो ऐसे अन्वेषण के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक कार्य करता है, द्वारा या उसके लिखित आदेश के अधीन किया जाता है; या
(ख) पीड़ित व्यक्ति द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है; या
(ग) जहाँ पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है या वह शिशु या विकृत चित्त है वहाँ, पीड़ित व्यक्ति के निकट सम्बन्धी द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से, किया जाता है :
परन्तु निकट सम्बन्धी द्वारा कोई भी ऐसा प्राधिकार, किसी मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन के अध्यक्ष या सचिव, चाहे उसका जो भी नाम हो, से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन" से केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में मान्यताप्राप्त कोई समाज कल्याण संस्था या संगठन अभिप्रेत है।

BNS की धारा 72 के अनुसार (BNS Section 72 in English)

72. Disclosure of identity of victim of certain offences, etc.-(1) Whoever prints or publishes the name or any matter which may make known the identity of any person against whom an offence under Section 64 or Section 65 or Section 66 or Section 67 or Section 68 or Section 69 or Section 70 or Section 71 is alleged or found to have been committed (hereafter in this section referred to as the victim) shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years and shall also be liable to fine.
(2) Nothing in sub-section (1) extends to any printing or publication of the name or any matter which may make known the identity of the victim if such printing or publication is-
(a) by or under the order in writing of the officer-in-charge of the police station or the police officer making the investigation into such offence acting in good faith for the purposes of such investigation; or
(b) by or with the authorisation in writing of, the victim; or
(c) where the victim is dead or child or of unsound mind, by, or with the authorisation in writing of, the next of kin of the victim:
Provided that no such authorisation shall be given by the next of kin to anybody other than the chairman or the secretary, by whatever name called, of any recognised welfare institution or organisation.
Explanation.- For the purposes of this sub-section, "recognised welfare institution or organisation" means a social welfare institution or organisation recognised in this behalf by the Central Government or State Government.

बीएनएस की धारा 72 एवंम् आईपीसी की धारा 228A मे अंतर

आईपीसी 228A केवल बलात्कार मामलों तक सीमित थी, जबकि बीएनएस धारा 72 कई गंभीर यौन अपराधों को कवर करती है। नये कानून बीएनएस की धारा 72 संक्षेप मे यह बताता है कि किन परिस्थिति में कौन अनुमति दे सकता है और किसे दी जा सकती है, साथ ही मुआवजा भी अनिवार्य किया गया है।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 228ABNS Section 72मुआवजा अनिवार्य कई अन्य गंभीर यौन अपराधों को कवर करती है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • 2 वर्ष का कारावास
  • साथ ही जुर्माना

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कतिपय अपराधों, आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण2 वर्ष का कारावास और जुर्मानासंज्ञेयजमानतीयकोई भी मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 72 (BNS 72) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. बीएनएस की धारा 72 क्या है?

यह धारा गंभीर यौन अपराधों की पीड़िता की पहचान (नाम, फोटो, पता आदि) को सार्वजनिक करने से रोकती है।

Q2. आईपीसी की धारा 228A किससे संबंधित थी?

आईपीसी 228A मुख्य रूप से बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने पर रोक लगाती थी।

Q3. बीएनएस धारा 72 किन अपराधों पर लागू होती है?

यह धारा धारा 64 से 71 तक के सभी गंभीर यौन अपराधों पर लागू होती है।

Q4. “पहचान” में क्या-क्या शामिल है?

नाम, फोटो, वीडियो, पता, सोशल मीडिया पोस्ट या कोई भी जानकारी जिससे पीड़िता पहचानी जा सके

Q5. कब पहचान उजागर करना अपराध नहीं माना जाएगा?

जब पहचान: पुलिस द्वारा जांच के लिए, पीड़िता की लिखित अनुमति से, या विशेष स्थिति में निकट रिश्तेदार की लिखित अनुमति से प्रकाशित की जाए।

Q6. क्या कोई भी रिश्तेदार अनुमति दे सकता है?

नहीं। बीएनएस में स्पष्ट है कि अनुमति केवल निकट रिश्तेदार दे सकता है और वह भी मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था को।

BNS की धारा 71 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 71 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 71 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 71? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 71 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 71 में यदि कोई व्यक्ति पूर्व मे भी बलात्कार या उससे जुड़े गंभीर अपराधों (धारा 64, 65, 66 या 70) में दोषी ठहराया जा चुका है, फिर उन्ही धाराओ पर अपराध दोहराता है, तो वह धारा 71 के आजीवन कारावास या मृत्युदंड साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376E) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 71 का विवरण (Section 71 BNS)

BNS की धारा 71 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहले से ही बलात्कार या उससे जुड़े गंभीर अपराधों (धारा 64, 65, 66 या 70) में दोषी ठहराया जा चुका है, और बाद में वह फिर से इन्हीं धाराओं में से कोई अपराध को अंजाम देता है, तो वह धारा 71 के अन्तर्गत आजीवन कारावास या मृत्युदंड साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जायेगा।

बीएनएस की धारा 71 के अनुसार (BNS Section 71 in Hindi)

71. पुनरावृत्तिकर्ता अपराधियों के लिए दण्ड- जो कोई, धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 70 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए पूर्व में दोषसिद्ध किया गया है और तत्पश्चात् उक्त धाराओं में से किसी के अधीन दण्डनीय किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है, तो वह आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, या मृत्युदण्ड से, दंडित किया जाएगा।

BNS की धारा 71 के अनुसार (BNS Section 71 in English)

71. Punishment for repeat offenders.- Whoever has been previously convicted of an offence punishable under Section 64 or Section 65 or Section 77 or Section 70 and is subsequently convicted of an offence punishable under any of the said sections shall be punished with imprisonment for life which shall mean imprisonment for the remainder of that person's natural life, or with death.

बीएनएस की धारा 71 एवंम् आईपीसी की धारा 376E मे अंतर

आईपीसी की धारा 376E केवल बार-बार बलात्कार करने वालों पर लागू थी, जबकि बीएनएस की धारा 71 का दायरा व्यापक है और इसमें कई गंभीर यौन अपराध से सम्बन्धित कई अपराध और भी शामिल हैं।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376EBNS Section 71मुआवजा अनिवार्य

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • आजीवन कारावास
  • या मृत्यु दंड

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पुनरावृत्तिकर्ता अपराधीआजीवन कारावास या मृत्युदंडसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 71 (BNS 71) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. दोनों धाराओं में मुख्य अंतर क्या है?

बीएनएस धारा 71 का दायरा अधिक व्यापक है, जबकि आईपीसी 376E केवल बलात्कार तक सीमित थी।

Q2. बीएनएस धारा 71 किन अपराधों पर लागू होती है?

यह धारा 64, 65, 66 और 70 के अंतर्गत आने वाले अपराधों की पुनरावृत्ति पर लागू होती है।

Q3. क्या पहली बार अपराध करने पर धारा 71 लगेगी?

नहीं। यह धारा केवल दूसरी बार या पुनरावृत्ति होने पर लागू होती है।

Q4. क्या यह अपराध जमानती है?

नहीं। यह एक अत्यंत गंभीर, गैर-जमानती अपराध है।

Q5. आईपीसी की धारा 376E किसके लिए थी?

यह धारा केवल बार-बार बलात्कार करने वाले अपराधियों के लिए थी, जिन्हें पहले बलात्कार में दोषी ठहराया जा चुका हो।

BNS की धारा 70 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 70 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 70 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 70? साथ ही हम आपको भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 70 में यदि किसी महिला के साथ एक से ज़्यादा लोग मिलकर, या किसी समूह का हिस्सा बनकर, या एक ही मकसद (सामान्य आशय) से महिला के साथ सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) करता है, तो वह धारा 70 के अन्तर्गत कम से कम 20 वर्ष तक का कठोर कारावास या आजीवन साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। इसके अलावा यह भारतीय दंड संहिता (IPC-376D, IPC-376DB and IPC-376DA) के स्थान पर लागू किया गया है।

बीएनएस की धारा 70 का विवरण (Section 70 BNS)

BNS की धारा 70 के अनुसार, एक से अधिक लोग या किसी समूह का हिस्सा व्दारा किसी महिला के साथ सामूहिक बलत्कार (Gang Rape) करता है, तो उस समूह का हर व्यक्ति दोषी माना जायेगा, तो वह धारा 70 के अन्तर्गत 20 वर्ष तक का कठोर कारावास या आजीवन कारावास या मृत्युदंड साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा।

बीएनएस की धारा 70 के अनुसार (BNS Section 70 in Hindi)

70. सामूहिक बलात्संग (1) जहां किसी महिला से, एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य करते हुए बलात्संग किया जाता है, वहां उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध किया है और वह ऐसी अवधि के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दायी होगा:
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा
(2) जहाँ, एक अठारह वर्ष से कम आयु की किसी महिला से एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा, एक समूह गठित करके या सामान्य आशय को अग्रसर करने में कार्य करते हुए, बलात्संग किया जाता है, वहाँ उन व्यक्तियों में से प्रत्येक के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने बलात्संग का अपराध किया है और वह आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत है, और जुर्माने से, या मृत्युदण्ड से, दण्डनीय होगा :
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़िता के चिकित्सीय व्ययों को पूरा करने के लिए और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़िता को किया जाएगा।

BNS की धारा 70 के अनुसार (BNS Section 70 in English)

70. Gang rape.- (1) Where a woman is raped by one or more perso constituting a group or acting in furtherance of a common intention, each of the persons shall be deemed to have committed the offence of rape and shall b punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be les the twenty years, but which may extend to imprisonment for life which shall mar imprisonment for the remainder of that person's natural life, and with fine:
Provided that such fine shall be just and reasonable to meet the medici expenses and rehabilitation of the victim:
Provided further that any fine imposed under this sub-section shall be puit to the victim.
(2) Where a woman under eighteen years of age is raped by one or min persons constituting a group or acting in furtherance of a common intention, end of those persons shall be deemed to have committed the offence of rape and shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonnes for the remainder of that person's natural life, and with fine, or with death.
Provided that such fine shall be just and reasonable to meet the medicol expenses and rehabilitation of the victim:
Provided further that any fine imposed under this sub-section shall be pai to the victim.

धारा 70(1) – जब पीड़िता वयस्क महिला हो

अगर किसी वयस्क महिला (18 वर्ष या उससे अधिक) के साथ एक या अधिक व्यक्तियों ने मिलकर बलात्कार किया है, तो—

  • कम से कम 20 साल का कठोर कारावास
  • जो आजीवन कारावास तक हो सकता है
  • और इसके साथ जुर्माना भी लगेगा।

धारा 70(2) – जब पीड़िता 18 साल से कम उम्र की हो

अगर किसी नाबालिक लड़की (18 वर्ष से कम) के साथ एक या अधिक व्यक्तियों ने मिलकर बलात्कार किया है, तो—

  • आजीवन कारावास (पूरी ज़िंदगी जेल),
  • या मृत्युदंड,
  • और इसके साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।

जुर्माना अनिवार्य पीड़िता को दिया जाएगा, ताकि: इलाज का खर्च पूरा हो सके, और पीड़िता के पुनर्वास (नई ज़िंदगी शुरू करने) में मदद मिले।

बीएनएस की धारा 70 एवंम् आईपीसी की धारा 376D, 376DA, 376DB मे अंतर

बीएनएस धारा 70 सामूहिक बलात्कार को गंभीर अपराध मानती है, जिसमें सभी आरोपी दोषी होते हैं, कड़ी सजा, आजीवन कारावास या गम्भीर स्थिति पर मृत्युदंड तथा पीड़िता को जुर्माना दिया जाना अनिवार्य किया गया है। IPC section 376D, 376DA, 376DB आईपीसी में सामूहिक बलात्कार के लिए अलग-अलग धाराएँ थीं, जबकि बीएनएस धारा 70 ने सभी प्रावधानों को एक धारा में जोड़ दिया गया है और पीड़िता के इलाज व पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया है।

IPC के तहत धाराBNS के तहत धाराप्रमुख बदलाव (Major Changement)
IPC 376DBNS Section 70(1)मुआवजा अनिवार्य
IPC 376DABNS Section 70(2)मुआवजा अनिवार्य
IPC 376DBBNS Section 70(2)मुआवजा अनिवार्य

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • कम से कम 20 वर्ष तक का कठोर कारावास
  • आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
  • या मृत्यु दंड

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
70(1) सामूहिक बलात्संगकम से कम 20 वर्ष के लिये कठोर कारावास, किन्तु जो आजीवन कारावास और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय
70(2) अठारह वर्ष से कम आयु की स्त्री के साथ सामूहिक बलात्संगआजीवन कारावास या मृत्युदंड और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 70 (BNS 70) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. “सामूहिक बलात्कार” का क्या मतलब है?

जब: दो या उससे अधिक व्यक्ति मिलकर या समूह बनाकर एक ही उद्देश्य से किसी महिला के साथ बलात्कार करते हैं, तो इसे सामूहिक बलात्कार कहा जाता है।

Q2. क्या समूह के सभी लोग दोषी माने जाएंगे?

हाँ। भले ही किसी व्यक्ति की भूमिका कम हो, समूह का हर सदस्य बराबर दोषी माना जाएगा।

Q3. अगर पीड़िता नाबालिग (18 वर्ष से कम) हो तो?

इस स्थिति में सजा और भी सख्त है:आजीवन कारावास (पूरी जिंदगी जेल), या मृत्युदंड, और साथ में जुर्माना

Q4. क्या यह अपराध जमानती है?

नहीं। यह एक गंभीर, गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध है।

Q5. क्या सिर्फ प्रत्यक्ष रूप से अपराध करने वाला ही दोषी होगा?

नहीं। जो व्यक्ति:योजना में शामिल थे, मदद कर रहा थे, या अपराध के समय समूह का हिस्सा थे,वह सभी दोषी माने जाएगे।

BNS की धारा 69 क्या है? | Bhartiya Nyay Sanhita Section 69 in Hindi

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए BNS की धारा 69 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय न्याय संहिता की धारा 69? साथ ही हम आपको BNS की धारा 69 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, पूर्ण जानकारी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 में यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलकर/धोखा देकर किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह अपराध है, भले ही वह कृत्य बलात्कार की कानूनी परिभाषा में न आता हो, तो वह धारा 69 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी से दंडित किया जायेगा। यह BNS की धारा 69 को नया जोड़ा गया है।

बीएनएस की धारा 69 का विवरण (Section 69 BNS)

BNS की धारा 69 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलकर (जैसे शादी करने का वादा, जबकि शादी करने का इरादा ही न हो),या धोखा देकर नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन, प्रमोशन का लालच या अपनी पहचान छिपाकर शादी के लिए प्रेरित करना, इन सब के ज़रिये महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार करता है, भले ही वह कृत्य बलात्कार की कानूनी परिभाषा में न आता हो, तो वह धारा 69 के अन्तर्गत 10 वर्ष तक का कारावास, साथ ही जुर्माना (Fine) से भी दंडित किया जा सकेगा। यह नये कानून के तहत जोड़ा गया है।

बीएनएस की धारा 69 के अनुसार (BNS Section 69 in Hindi)

69. प्रवंचनापूर्ण साधनों, आदि का प्रयोग करके मैथुन- जो कोई, प्रवंचनापूर्ण साधनों द्वारा या किसी ऐसी अवधि महिला को विवाह करने का वचन देकर, उसे पूरा करने के किसी आशय के बिना, उसके साथ मैथुन करता है, ऐसा मैथुन बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के ऐसी के कारावास से जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण- "प्रवंचनापूर्ण साधनों" में नियोजन या प्रोन्नति, या पहचान छिपाकर विवाह करने के लिये उत्प्रेरण या उनका मिथ्या वचन सम्मिलित है।

BNS की धारा 69 के अनुसार (BNS Section 69 in English)

69. Sexual intercourse by employing deceitful means, etc.- Whoever, by deceitful means or by making promise to marry to a woman without any intention of fulfilling the same, has sexual intercourse with her, such soul intercourse not amounting to the offence of rape, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten yeun and shall also be liable to fine.
Explanation.- "deceitful means" shall include inducement for, or fe promise of employment or promotion, or marrying by suppressing identity.

यह अपराध कब बनता है?

जब कोई व्यक्ति—

  • झूठा वादा करके (जैसे शादी करने का वादा, जबकि शादी करने का इरादा ही न हो), या
  • धोखे के तरीके अपनाकर
  • नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन, प्रमोशन का लालच या
  • अपनी पहचान छिपाकर शादी के लिए प्रेरित करना।

इत्यादि उपायों का उपयोग करके किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, वह बीएनएस की धारा 69 के अन्तर्गत दंडित होगा।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

  • अधिकतम 10 साल तक
  • और इसके साथ जुर्माना भी लगाया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
प्रवंचनापूर्ण उपायों, आदि का उपयोग करके मैथुन करना।कारावास जो 10 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्मानासंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय

हमारा प्रयास बीएनएस की धारा 69 (BNS 69) की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. “प्रवंचनापूर्ण साधन” का क्या अर्थ है?

प्रवंचनापूर्ण साधन में शामिल हैं: शादी करने का झूठा वादा, नौकरी या प्रमोशन दिलाने का झूठा आश्वासन या अपनी पहचान छिपाकर शादी के लिए प्रेरित करना कोई भी ऐसा झूठ जिससे महिला को शारीरिक संबंध के लिए तैयार किया जाए

Q2. क्या यह अपराध बलात्कार माना जाता है?

नहीं। धारा 69 स्पष्ट करती है कि यह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन फिर भी गंभीर अपराध है।

Q3. क्या महिला की सहमति होने पर भी अपराध बन सकता है?

हाँ। यदि सहमति धोखे या झूठे वादे के आधार पर ली गई हो, तो वह वैध सहमति नहीं मानी जाएगी

Q4. इस धारा में शिकायत कौन कर सकता है?

इस अपराध की शिकायत पीड़ित महिला स्वयं या परिवार कर सकता है।

Q5.क्या यह अपराध जमानती है?

आमतौर पर इसे गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है। जमानत न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है।