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भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 96 | उस भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक को लागू हो सकती है | Indian Evidence Act Section- 96 in hindi| Evidence as to application of language which can apply to one only of several persons.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 96 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 96, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 96 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 96 के अन्तर्गत जब तथ्य ऐसे हैं कि प्रयुक्त भाषा कई व्यक्तियों या चीजों में से किसी एक को लागू होने के लिए अभिप्रेत हो सकती थी तथा एक से अधिक को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं हो सकती थी, तब उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा जो यह दर्शित करते हैं कि उन व्यक्तियों या चीजों में से किसको लागू होने के लिए वह आशयित थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 96 के अनुसार

उस भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक को लागू हो सकती है—

जबकि तथ्य ऐसे हैं कि प्रयुक्त भाषा कई व्यक्तियों या चीजों में से किसी एक को लागू होने के लिए अभिप्रेत हो सकती थी तथा एक से अधिक को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं हो सकती थी, तब उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा जो यह दर्शित करते हैं कि उन व्यक्तियों या चीजों में से किसको लागू होने के लिए वह आशयित थी।

Evidence as to application of language which can apply to one only of several persons-
When the facts are such that the language used might have been meant to apply to any one, and could not have been meant to apply to more than one, of several persons or things, evidence may be given of facts which show which of those persons or things it was intended to apply to.

दृष्टान्त
(क) क 1,000 रुपये में “मेरा सफेद घोड़ा” ख को बेचने का करार करता है। क के पास दो सफेद घोड़े हैं। उन तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा जो यह दर्शित करते हों कि उनमें से कौन-सा घोड़ा अभिप्रेत था।
(ख) ख के साथ क हैदराबाद जाने के लिए करार करता है। यह दर्शित करने वाले तथ्यों का साक्ष्य दिया जा सकेगा कि दक्षिण का हैदराबाद अभिप्रेत था या सिन्ध का हैदराबाद।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 96 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 95 | विद्यमान तथ्यों के संदर्भ में अर्थहीन दस्तावेज के बारे में साक्ष्य | Indian Evidence Act Section- 95 in hindi| Evidence as to document unmeaning in reference to existing facts.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 95 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 95, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 95 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 95 के अन्तर्गत जब दस्तावेज में प्रयुक्त में भाषा स्वयं स्पष्ट हो, किन्तु विद्यमान तथ्यों के सन्दर्भ में अर्थहीन हो, तो यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा कि वह एक विशिष्ट भाव में प्रयुक्त की गई थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 95 के अनुसार

विद्यमान तथ्यों के संदर्भ में अर्थहीन दस्तावेज के बारे में साक्ष्य-

जबकि दस्तावेज में प्रयुक्त में भाषा स्वयं स्पष्ट हो, किन्तु विद्यमान तथ्यों के सन्दर्भ में अर्थहीन हो, तो यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा कि वह एक विशिष्ट भाव में प्रयुक्त की गई थी।

Evidence as to document unmeaning in reference to existing facts-
When language used in a document is plain in itself, but is unmeaning in reference to existing facts, evidence may be given to show that it was used in a peculiar sense.

दृष्टान्त
ख को क “मेरा कलकत्ते का गृह” विलेख द्वारा बेचता है।
क का कलकत्ते में कोई गृह नहीं था, किन्तु यह प्रतीत होता है कि उसका हावड़ा में एक गृह था, जो विलेख के निष्पादन के समय से ख के कब्जे में था।
इन तथ्यों को यह दर्शित करने के लिए साबित किया जा सकेगा कि विलेख का सम्बन्ध हावड़ा के गृह से था।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 95 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 94 | विद्यमान तथ्यों को दस्तावेज के लागू होने के विरुद्ध साक्ष्य का अपवर्जन | Indian Evidence Act Section- 94 in hindi | Exclusion of evidence against application of document to existing facts.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 94 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 94, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 94 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 94 के अन्तर्गत जब दस्तावेज प्रयुक्त भाषा स्वयं स्पष्ट हो और जब कि वह विद्यमान तथ्यों को ठीक-ठीक लागू होती हो, तब यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा कि वह ऐसे तथ्यों को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं थी।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 94 के अनुसार

विद्यमान तथ्यों को दस्तावेज के लागू होने के विरुद्ध साक्ष्य का अपवर्जन-

जबकि दस्तावेज प्रयुक्त भाषा स्वयं स्पष्ट हो और जब कि वह विद्यमान तथ्यों को ठीक-ठीक लागू होती हो, तब यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा कि वह ऐसे तथ्यों को लागू होने के लिए अभिप्रेत नहीं थी।

Exclusion of evidence against application of document to existing facts-
When language used in a document is plain in itself, and when it applies accurately to existing facts, evidence may not be given to show that it was not meant to apply to such facts.

दृष्टान्त
ख को क‘‘रामपुर में 100 बीघे वाली मेरी सम्पदा” विलेख द्वारा बेचता है। क के पास रामपुर में 100 बीघे वाली एक सम्पदा है। इस तथ्य का साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा कि विक्रयार्थ अभिप्रेत सम्पदा किसी भिन्न स्थान पर स्थित और भिन्न माप की थी।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 94 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 93 | संदिग्धार्थ दस्तावेज को स्पष्ट करने या उसका संशोधन करने के साक्ष्य का अपवर्जन | Indian Evidence Act Section- 93 in hindi| Exclusion of evidence to explain or amend ambiguous document.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 93 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 93, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 93 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 93 के अन्तर्गत जब किसी दस्तावेज में प्रयुक्त भाषा देखते ही संदिग्धार्थ या त्रुटिपूर्ण है, तब उन तथ्यों का साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा, जो उनका अर्थ दर्शित या उसकी त्रुटियों की पूर्ति कर दे।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 93 के अनुसार

संदिग्धार्थ दस्तावेज को स्पष्ट करने या उसका संशोधन करने के साक्ष्य का अपवर्जन-

जबकि किसी दस्तावेज में प्रयुक्त भाषा देखते ही संदिग्धार्थ या त्रुटिपूर्ण है, तब उन तथ्यों का साक्ष्य नहीं दिया जा सकेगा, जो उनका अर्थ दर्शित या उसकी त्रुटियों की पूर्ति कर दे।

Exclusion of evidence to explain or amend ambiguous document-
When the language used in a document is, on its face, ambiguous or defective, evidence may not be given of facts which would show its meaning or supply its defects.

दृष्टान्त
(क) ख को क 1,000 रुपयों या 1,500 रुपयों में एक घोड़ा बेचने का लिखित करार करता है। यह दर्शित करने के लिए कि कौन-सा मूल्य दिया जाना था, साक्ष्य नहीं दिया जा सकता।
(ख) किसी विलेख में रिक्त स्थान है। उन तथ्यों का साक्ष्य नहीं दिया जा सकता जो यह दर्शित करते हों कि उनकी किस प्रकार पूर्ति अभिप्रेत थी।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 93 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 91 | दस्तावेजों के रूप में लेखबद्ध संविदाओं, अनुदानों तथा सम्पत्ति के अन्य व्ययनों के निबन्धनों का साक्ष्य | Indian Evidence Act Section- 91 in hindi| Evidence of terms of contracts, grants and other dispositions of property reduced to form of document.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 91 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 91, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 91 का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 91 के अन्तर्गत जबकि किसी संविदा के या अनुदान के या सम्पत्ति के किसी अन्य व्ययन के निबन्धन दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध कर लिये गये हों, तब, तथा उन सब दशाओं में, जिनमें विधि द्वारा अपेक्षित है कि कोई बात दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध की जाये, ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के अन्य व्ययन के निबन्धनों के या ऐसी बात के साबित किये जाने के लिए स्वयं उस दस्तावेज के सिवाय, या उन दशाओं में जिनमें एतस्मिन्पूर्व अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन द्वितीयिक साक्ष्य ग्राह्य है, उसकी अन्तर्वस्तु के द्वितीयिक साक्ष्य के सिवाय, कोई भी साक्ष्य नहीं दिया जाएगा।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 91 के अनुसार

दस्तावेजों के रूप में लेखबद्ध संविदाओं, अनुदानों तथा सम्पत्ति के अन्य व्ययनों के निबन्धनों का साक्ष्य–

जबकि किसी संविदा के या अनुदान के या सम्पत्ति के किसी अन्य व्ययन के निबन्धन दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध कर लिये गये हों, तब, तथा उन सब दशाओं में, जिनमें विधि द्वारा अपेक्षित है कि कोई बात दस्तावेज के रूप में लेखबद्ध की जाये, ऐसी संविदा, अनुदान या सम्पत्ति के अन्य व्ययन के निबन्धनों के या ऐसी बात के साबित किये जाने के लिए स्वयं उस दस्तावेज के सिवाय, या उन दशाओं में जिनमें एतस्मिन्पूर्व अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन द्वितीयिक साक्ष्य ग्राह्य है, उसकी अन्तर्वस्तु के द्वितीयिक साक्ष्य के सिवाय, कोई भी साक्ष्य नहीं दिया जाएगा।
Evidence of terms of contracts, grants and other dispositions of property reduced to form of document-
When the terms of a contract, or of a grant, or of any other disposition of property, have been reduced to the form of a document, and in all cases in which any matter is required by law to be reduced to the form of a document, no evidence shall be given in proof of the terms of such contract, grant or other disposition of property, or of such matter, except the document itself, or secondary evidence of its contents in cases in which secondary evidence is admissible under the provisions hereinbefore contained.

अपवाद
1-जबकि विधि द्वारा यह अपेक्षित है कि किसी लोक आफिसर की नियुक्ति लिखित रूप में हो, और जब यह दर्शित किया गया है कि किसी विशिष्ट व्यक्ति ने ऐसे आफिसर के नाते कार्य किया है, तब उस लेख का, जिसके द्वारा वह नियुक्त किया गया था, साबित किया जाना आवश्यक नहीं है।
2- जिन विलों का भारत में प्रोबेट मिला है, वे प्रोबेट द्वारा साबित की जा सकेंगी।
स्पष्टीकरण 1- यह धारा उन दशाओं को, जिनमें निर्दिष्ट संविदाएँ, अनुदान या सम्पत्ति के व्ययन एक ही दस्तावेज में अन्तर्विष्ट हैं तथा उन दशाओं को, जिनमें वे एक से अधिक दस्तावेजों में अन्तर्विष्ट हैं, समान रूप से लागू हैं।
स्पष्टीकरण 2- जहाँ कि एक से अधिक मूल हैं, वहाँ केवल एक मूल साबित करना आवश्यक है।
स्पष्टीकरण 3- इस धारा में निर्दिष्ट तथ्यों से भिन्न किसी तथ्य का किसी भी दस्तावेज में कथन, उसी तथ्य के बारे में मौखिक साक्ष्य की ग्राह्यता का प्रवारण नहीं करेगा।
दृष्टान्त
(क) यदि कोई संविदा कई पत्रों में अन्तर्विष्ट है, तो वे सभी पत्र, जिनमें वह अन्तर्विष्ट है, साबित करने होंगे।
(ख) यदि कोई संविदा किसी विनिमय-पत्र में अन्तर्विष्ट है, तो वह विनिमय-पत्र साबित करना होगा।
(ग) यदि विनिमय-पत्र तीन परतों में लिखित है, तो केवल एक को साबित करना आवश्यक है।
(घ) ख से कतिपय निबन्धनों पर कनील के परिदान के लिए लिखित संविदा करता है। संविदा इस तथ्य का वर्णन करती है कि खने क को किसी अन्य अवसर पर मौखिक रूप से संविदाकृत अन्य नील का मूल्य चुकाया था।
मौखिक साक्ष्य पेश किया जाता है कि अन्य नील के लिए कोई संदाय नहीं किया गया। यह साक्ष्य ग्राह्य है।
(ङ) खद्वारा दिए गए धन की रसीद ख को क देता है। संदाय करने का मौखिक साक्ष्य पेश किया जाता है। यह साक्ष्य ग्राह्य है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 91 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 90A | पाँच वर्षीय पुराने इलेक्ट्रानिक अभिलेख के बारे में उपधारणा | Indian Evidence Act Section- 90A in hindi| Presumption as to electronic records five years old.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 90A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 90A, साथ ही क्या बतलाती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 90A का विवरण

भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 90A के अन्तर्गत जहाँ कोई इलेक्ट्रानिक अभिलेख, जो पाँच वर्ष पुराना होना तात्पर्यित है या साबित किया गया है, किसी अभिरक्षा से पेश किया जाता है, जिसे न्यायालय विशिष्ट मामले में समुचित समझता है, वहाँ न्यायालय उपधारणा कर सकेगा कि इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर, जो किसी विशिष्ट व्यक्ति का इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर होना तात्पर्यित है, उसके द्वारा या इसके लिए उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार किया गया था।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 90A के अनुसार

पाँच वर्षीय पुराने इलेक्ट्रानिक अभिलेख के बारे में उपधारणा-

जहाँ कोई इलेक्ट्रानिक अभिलेख, जो पाँच वर्ष पुराना होना तात्पर्यित है या साबित किया गया है, किसी अभिरक्षा से पेश किया जाता है, जिसे न्यायालय विशिष्ट मामले में समुचित समझता है, वहाँ न्यायालय उपधारणा कर सकेगा कि इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर, जो किसी विशिष्ट व्यक्ति का इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर होना तात्पर्यित है, उसके द्वारा या इसके लिए उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार किया गया था।

Presumption as to electronic records five years old-
Where any electronic record, purporting or proved to be five years old, is produced from any custody which the Court in the particular case considers proper, the Court may presume that the Electronic signature which purports to be the Electronic signature of any particular person was so affixed by him or any person authorised by him in this behalf.

स्पष्टीकरण- इलेक्ट्रानिक अभिलेख को समुचित अभिरक्षा में होना कहा जाता है, यदि वे ऐसे स्थान में, जिसमें और ऐसे व्यक्ति की देखरेख के अधीन, जिसके पास वे स्वाभाविक रूप से हों किन्तु कोई अभिरक्षा अनुचित नहीं है यदि यह साबित किया जाता है कि उसका मूल वैध है या विशिष्ट मामले की परिस्थितियों ऐसी हैं, जो कि मूल को सम्भव बनाये।
यह स्पष्टीकरण धारा 81-क को भी लागू होती है।

हमारा प्रयास भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 90A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।