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सीआरपीसी की धारा 433 | दंडादेश के लघुकरण की शक्ति | CrPC Section- 433 in hindi| Power to commute sentence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 433 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 433 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 433 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 433 के अन्तर्गत समुचित सरकार दण्डादिष्ट व्यक्ति की सम्मति के बिना मृत्यु दंडादेश का भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) द्वारा उपबन्धित किसी अन्य दण्ड के रूप में लघुकरण कर सकती है। आजीवन कारावास के दंडादेश का, चौदह वर्ष से अनधिक अवधि के कारावास में या जुर्माने के रूप में लघुकरण कर सकती है। कठिन कारावास के दंडादेश का किसी ऐसी अवधि के सादा कारावास में, जिसके लिए वह व्यक्ति दण्डादिष्ट किया जा सकता है, या जुर्माने के रूप में लघुकरण कर सकती है। सादा कारावास के दण्डादेश का जुर्माने के रूप में लघुकरण कर सकती है।


सीआरपीसी की धारा 433 के अनुसार

दंडादेश के लघुकरण की शक्ति-

समुचित सरकार दण्डादिष्ट व्यक्ति की सम्मति के बिना— (क) मृत्यु दंडादेश का भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) द्वारा उपबन्धित किसी अन्य दण्ड के रूप में लघुकरण कर सकती है ;
(ख) आजीवन कारावास के दंडादेश का, चौदह वर्ष से अनधिक अवधि के कारावास में या जुर्माने के रूप में लघुकरण कर सकती है ;
(ग) कठिन कारावास के दंडादेश का किसी ऐसी अवधि के सादा कारावास में, जिसके लिए वह व्यक्ति दण्डादिष्ट किया जा सकता है, या जुर्माने के रूप में लघुकरण कर सकती है ;
(घ) सादा कारावास के दण्डादेश का जुर्माने के रूप में लघुकरण कर सकती है।

Power to commute sentence-
The appropriate Government may, without the consent of the person sentenced, commute-
(a) a sentence of death, for any other punishment provided by the Indian Penal Code (45 of 1860);
(b) a sentence of imprisonment for life, for imprisonment for a term not exceeding fourteen years or for fine;
(c) a sentence of rigorous imprisonment for simple imprisonment for any term to which that person might have been sentenced, or for fine;
(d) a sentence of simple imprisonment, for fine.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 433 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 431 | जिस धन का संदाय करने का आदेश दिया गया है उसका जुर्माने के रूप में वसूल किया जा सकना | CrPC Section- 431 in hindi| Money ordered to be paid recoverable as a fine.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 431 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 431 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 431 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 431 के अन्तर्गत कोई धन (जो जुर्माने से भिन्न है) जो इस संहिता के अधीन दिए गए किसी आदेश के आधार पर संदेय है और जिसकी वसूली का ढंग अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित नहीं है, ऐसे वसूल किया जा सकता है मानो वह जुर्माना है :
परन्तु इस धारा के आधार पर, धारा 359 के अधीन किसी आदेश को लागू होने में धारा 421 का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा मानो धारा 421 की उपधारा (1) के परन्तुक में “धारा 357 के अधीन आदेश” शब्दों और अंकों के पश्चात्, “या खर्चों के संदाय के लिए धारा 359 के अधीन आदेश” शब्द और अंक अन्तःस्थापित कर दिए गए हैं।

सीआरपीसी की धारा 431 के अनुसार

जिस धन का संदाय करने का आदेश दिया गया है उसका जुर्माने के रूप में वसूल किया जा सकना–

कोई धन (जो जुर्माने से भिन्न है) जो इस संहिता के अधीन दिए गए किसी आदेश के आधार पर संदेय है और जिसकी वसूली का ढंग अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबन्धित नहीं है, ऐसे वसूल किया जा सकता है मानो वह जुर्माना है :
परन्तु इस धारा के आधार पर, धारा 359 के अधीन किसी आदेश को लागू होने में धारा 421 का अर्थ इस प्रकार लगाया जाएगा मानो धारा 421 की उपधारा (1) के परन्तुक में “धारा 357 के अधीन आदेश” शब्दों और अंकों के पश्चात्, “या खर्चों के संदाय के लिए धारा 359 के अधीन आदेश” शब्द और अंक अन्तःस्थापित कर दिए गए हैं।

Money ordered to be paid recoverable as a fine-
Any money (other than a fine) payable by virtue of any order made under this Code, and the method of recovery of which is not otherwise expressly provided for, shall be recoverable as if it were a fine :
Provided that Section 421 shall, in its application to an order under Section 359, by virtue of this section, be construed as if in the proviso to sub-section (1) of Section 421, after the words and figures “under Section 357”, the words and figures “or an order for payment of costs under Section 359” had been inserted.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 431 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 430 | दंडादेश के निष्पादन पर वारंट का लौटाया जाना | CrPC Section- 430 in hindi| Return of warrant on execution of sentence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 430 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 430 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 430 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 430 के अन्तर्गत किसी मामले मे जब दंडादेश पूर्णतया निष्पादित किया जा चुका है तब उसका निष्पादन करने वाला अधिकारी वारंट को, वारंट स्व-हस्ताक्षर सहित पृष्ठांकन द्वारा उस रीति को, प्रमाणित करते हुए, जिससे दंडादेश का निष्पादन किया गया था, उस न्यायालय को, जिसने उसे जारी किया था, लौटा देगा।

सीआरपीसी की धारा 430 के अनुसार

दंडादेश के निष्पादन पर वारंट का लौटाया जाना-

जब दंडादेश पूर्णतया निष्पादित किया जा चुका है तब उसका निष्पादन करने वाला अधिकारी वारंट को, वारंट स्व-हस्ताक्षर सहित पृष्ठांकन द्वारा उस रीति को, प्रमाणित करते हुए, जिससे दंडादेश का निष्पादन किया गया था, उस न्यायालय को, जिसने उसे जारी किया था, लौटा देगा।

Return of warrant on execution of sentence-
When a sentence has been fully executed, the officer executing it shall return the warrant to the Court from which it is issued, with an endorsement under his hand certifying the manner in which the sentence has been executed.

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सीआरपीसी की धारा 429 | व्यावृत्ति | CrPC Section- 429 in hindi| Saving.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 429 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 429 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 429 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 429 के अन्तर्गत किसी मामले मे धारा 426 या धारा 427 की कोई बात किसी व्यक्ति को उस दण्ड के किसी भाग से क्षम्य करने वाली न समझी जाएगी जिसका वह अपनी पूर्व या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर भागी है और जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का अधिनिर्णय कारावास मुख्य दंडादेश के साथ उपाबद्ध है और दंडादेश भोगने वाले व्यक्ति को उसके निष्पादन के पश्चात् कारावास के अतिरिक्त मुख्य दंडादेश या अतिरिक्त मुख्य दंडादेश को भोगना है तब जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का अधिनिर्णय तब तक क्रियान्वित न किया जाएगा जब तक वह व्यक्ति अतिरिक्त दंडादेश या दंडादेशों को भुगत न चुका हो।


सीआरपीसी की धारा 429 के अनुसार

व्यावृत्ति–

(1) धारा 426 या धारा 427 की कोई बात किसी व्यक्ति को उस दण्ड के किसी भाग से क्षम्य करने वाली न समझी जाएगी जिसका वह अपनी पूर्व या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर भागी है।
(2) जब जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का अधिनिर्णय कारावास मुख्य दंडादेश के साथ उपाबद्ध है और दंडादेश भोगने वाले व्यक्ति को उसके निष्पादन के पश्चात् कारावास के अतिरिक्त मुख्य दंडादेश या अतिरिक्त मुख्य दंडादेश को भोगना है तब जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का अधिनिर्णय तब तक क्रियान्वित न किया जाएगा जब तक वह व्यक्ति अतिरिक्त दंडादेश या दंडादेशों को भुगत न चुका हो।

Saving-
(1) Nothing in Section 426 or Section 427 shall be held to excuse any person from any part of the punishment to which he is liable upon his former or subsequent conviction.
(2) When an award of imprisonment in default of payment of a fine is annexed to a substantive sentence of imprisonment and the person undergoing the sentence is after its execution to undergo a further substantive sentence or further substantive sentences of imprisonment, effect shall not be given to the award of imprisonment in default of payment of the fine until the person has undergone the further sentence or sentences.

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सीआरपीसी की धारा 428 | अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना | CrPC Section- 428 in hindi| Period of detention undergone by the accused to be set off against the sentence of imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 428 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 428 के अन्तर्गत किसी मामले मे कोई अभियुक्त व्यक्ति दोषसिद्धि पर किसी अवधि के लिए कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम के लिए कारावास नहीं है वहां उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पहले उसके द्वारा भोगे गये, यदि कोई हो, निरोध की अवधि का, ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के विरुद्ध मुजरा किया जाएगा और ऐसी दोषसिद्धि पर उस व्यक्ति का कारावास में जाने का दायित्व उस अधिरोपित कारावास की अवधि के शेष भाग तक, यदि कोई हो, निर्बन्धित किया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 428 के अनुसार

अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि का कारावास के दंडादेश के विरुद्ध मुजरा किया जाना—

जहां अभियुक्त व्यक्ति दोषसिद्धि पर किसी अवधि के लिए कारावास से दण्डादिष्ट किया गया, [जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम के लिए कारावास नहीं है] वहां उसी मामले के अन्वेषण, जांच या विचारण के दौरान और ऐसी दोषसिद्धि की तारीख से पहले उसके द्वारा भोगे गये, यदि कोई हो, निरोध की अवधि का, ऐसी दोषसिद्धि पर उस पर अधिरोपित कारावास की अवधि के विरुद्ध मुजरा किया जाएगा और ऐसी दोषसिद्धि पर उस व्यक्ति का कारावास में जाने का दायित्व उस अधिरोपित कारावास की अवधि के शेष भाग तक, यदि कोई हो, निर्बन्धित किया जाएगा।
परन्तु धारा 433क में निर्दिष्ट मामलों में निरोध को ऐसी अवधि का उस धारा में निर्दिष्ट चौदह वर्ष की अवधि के विरुद्ध मुजरा किया जाएगा।

Period of detention undergone by the accused to be set off against the sentence of imprisonment-
Where an accused person has, on conviction, been sentenced to imprisonment for a term [not being imprisonment in default of payment of fine.] the period of detention, if any, undergone by him during the investigation, inquiry or trial of the same case and before the date of such conviction, shall be set off against the term of imprisonment imposed on him on such conviction, and the liability of such person to undergo imprisonment on such conviction shall be restricted to the remainder, if any, of the term of imprisonment imposed on him.
Provided that in cases referred to in Section 433-A, such period of detention shall be set off against the period of fourteen years referred to in that section.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 428 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 427 | ऐसे अपराधी को दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से दण्डादिष्ट है | CrPC Section- 427 in hindi| Sentence on offender already sentenced for another offence.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 427 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 427 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 427 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 427 के अन्तर्गत किसी मामले मे कारावास का दंडादेश पहले से ही भोगने वाले व्यक्ति को पश्चात्वर्ती-दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब जब तक न्यायालय यह निर्देश न दे कि पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा, ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर, जिसके लिए, वह पहले दंडादेश हुआ था, प्रारम्भ होगा।

सीआरपीसी की धारा 427 के अनुसार

ऐसे अपराधी को दंडादेश जो अन्य अपराध के लिए पहले से दण्डादिष्ट है-

(1) जब कारावास का दंडादेश पहले से ही भोगने वाले व्यक्ति को पश्चात्वर्ती-दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तब जब तक न्यायालय यह निर्देश न दे कि पश्चात्वर्ती दंडादेश ऐसे पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा, ऐसा कारावास या आजीवन कारावास उस कारावास की समाप्ति पर, जिसके लिए, वह पहले दंडादेश हुआ था, प्रारम्भ होगा :
परन्तु, जहां उस व्यक्ति को, जिसे प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम करने पर धारा 122 के अधीन आदेश द्वारा कारावास का दंडादेश दिया गया है ऐसा दंडादेश भोगने के दौरान ऐसे आदेश के दिए जाने के पूर्व किए गए अपराध के लिए कारावास का दंडादेश दिया जाता है, वहां पश्चात्कथित दंडादेश तुरंत प्रारम्भ हो जाएगा।
(2) जब किसी व्यक्ति को, जो आजीवन कारावास का दंडादेश पहले से ही भोग रहा है, पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि पर किसी अवधि के कारावास या आजीवन कारावास का दंडादेश दिया जाता है तथा पश्चात्वर्ती दंडादेश पूर्व दंडादेश के साथ-साथ भोगा जाएगा।

Sentence on offender already sentenced for another offence-
(1) When a person already undergoing a sentence of imprisonment is sentenced on a subsequent conviction to imprisonment or imprisonment for life, such imprisonment or imprisonment for life shall commence at the expiration of the imprisonment to which he has been previously sentenced, unless the Court directs that the subsequent sentence shall run concurrently with such previous sentence:
Provided that where a person who has been sentenced to imprisonment by an order under Section 122 in default of furnishing security is, whilst undergoing such sentence, sentenced to imprisonment for an offence committed prior to the making of such order, the latter sentence shall commence immediately.
(2) When a person already undergoing a sentence of imprisonment for life is sentenced on a subsequent conviction to imprisonment for a term or imprisonment for life, the subsequent sentence shall run concurrently with such previous sentence.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 427 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।