Home Blog Page 177

सीआरपीसी की धारा 414 | उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्यु दंडादेश का निष्पादन | CrPC Section- 414 in hindi| Execution of sentence of death passed by High Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 414 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 414 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 414 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 414 के अन्तर्गत किसी मामले मे जब अपील में या पुनरीक्षण में उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश किया जाता है तब सेशन न्यायालय उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने पर वारंट जारी करके दंडादेश को क्रियान्वित कराएगा।

सीआरपीसी की धारा 414 के अनुसार

उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्यु दंडादेश का निष्पादन-

जब अपील में या पुनरीक्षण में उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश किया जाता है तब सेशन न्यायालय उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने पर वारंट जारी करके दंडादेश को क्रियान्वित कराएगा।

Execution of sentence of death passed by High Court-
When a sentence of death is passed by the High Court in appeal or in revision, the Court of Session shall, on receiving the order of the High Court, cause the sentence to be carried into effect by issuing a warrant.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 414 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 413 | धारा 368 के अधीन दिए गए आदेश का निष्पादन | CrPC Section- 413 in hindi| Execution of order passed under Section 368.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 413 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 413 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 413 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 413 के अन्तर्गत जब मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को प्रस्तुत किसी मामले में, सेशन न्यायालय को उस पर उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि का आदेश या अन्य आदेश प्राप्त होता है, तो वह वारंट जारी करके या अन्य ऐसे कदम उठाकर, जो आवश्यक हों, उस आदेश को क्रियान्वित कराएगा।

सीआरपीसी की धारा 413 के अनुसार

धारा 368 के अधीन दिए गए आदेश का निष्पादन-

जब मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को प्रस्तुत किसी मामले में, सेशन न्यायालय को उस पर उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि का आदेश या अन्य आदेश प्राप्त होता है, तो वह वारंट जारी करके या अन्य ऐसे कदम उठाकर, जो आवश्यक हों, उस आदेश को क्रियान्वित कराएगा।

Execution of order passed under Section 368-
When in a case submitted to the High Court for the confirmation of a sentence of death, the Court of Session receives the order of confirmation or other order of the High Court thereon, it shall cause such order to be carried into effect by issuing a warrant or taking such other steps as may be necessary.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 413 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 412 | कारणों का अभिलिखित किया जाना | CrPC Section- 412 in hindi| Reasons to be recorded.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 412 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 412 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 412 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 412 के अन्तर्गत जो कोई धारा 408, धारा 409, धारा 410 या धारा 411 के मामलों के अधीन आदेश करने वाला सेशन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट ऐसा आदेश करने के अपने कारणों को अभिलिखित करेगा।

सीआरपीसी की धारा 412 के अनुसार

कारणों का अभिलिखित किया जाना–

धारा 408, धारा 409, धारा 410 या धारा 411 के अधीन आदेश करने वाला सेशन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट ऐसा आदेश करने के अपने कारणों को अभिलिखित करेगा।

Reasons to be recorded-
A Sessions Judge or Magistrate making an order under Section 408, Section 409, Section 410 or Section 411 shall record his reasons for making it.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 412 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 410 | न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों का वापस लिया जाना | CrPC Section- 410 in hindi| Withdrawal of cases by Judicial Magistrates.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 410 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 410 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 410 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 410 के अन्तर्गत कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट से किसी मामले को वापस ले सकता है या किसी मामले को, जिसे उसने ऐसे मजिस्ट्रेट के हवाले किया है, वापस मंगा सकता है और मामले की जांच या विचारण स्वयं कर सकता है। या उसे जांच या विचारण के लिए किसी अन्य ऐसे मजिस्ट्रेट को निर्देशित कर सकता है जो उसकी जांच या विचारण करने के लिए सक्षम है। किसी मामले को, जो उसने धारा 192 की उपधारा (2) के अधीन किसी अन्य मजिस्ट्रेट के हवाले किया है, वापस मंगा सकता है और ऐसे मामले की जांच या विचारण स्वयं कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 410 के अनुसार

न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों का वापस लिया जाना—

(1) कोई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट से किसी मामले को वापस ले सकता है या किसी मामले को, जिसे उसने ऐसे मजिस्ट्रेट के हवाले किया है, वापस मंगा सकता है और मामले की जांच या विचारण स्वयं कर सकता है। या उसे जांच या विचारण के लिए किसी अन्य ऐसे मजिस्ट्रेट को निर्देशित कर सकता है जो उसकी जांच या विचारण करने के लिए सक्षम है।
(2) कोई न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी मामले को, जो उसने धारा 192 की उपधारा (2) के अधीन किसी अन्य मजिस्ट्रेट के हवाले किया है, वापस मंगा सकता है और ऐसे मामले की जांच या विचारण स्वयं कर सकता है।

Withdrawal of cases by Judicial Magistrates-
(1) Any Chief Judicial Magistrate may withdraw any case from, or recall any case which he has made over to, any Magistrate subordinate to him, and may inquire into or try such case himself, or refer it for inquiry or trial to any other such Magistrate competent to inquire into or try the same.
(2) Any Judicial Magistrate may recall any case made over by him under sub section (2) of Section 192 to any other Magistrate and may inquire into or try such cases himself.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 410 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 409 | सेशन न्यायाधीशों द्वारा मामलों और अपीलों का वापस लिया जाना | CrPC Section- 409 in hindi| Withdrawal of cases and appeals by Sessions Judges.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 409 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 409 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 409 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 409 के अन्तर्गत सेशन न्यायाधीश अपने अधीनस्थ किसी सहायक सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से कोई मामला या अपील वापस ले सकता है या कोई मामला या अपील, जिसे उसने उसके हवाले किया हो, वापस मंगा सकता है। अपर सेशन न्यायाधीश के समक्ष मामले का विचारण या अपील की सुनवाई प्रारम्भ होने से पूर्व किसी समय सेशन न्यायाधीश किसी मामले या अपील को, जिसे उसने अपर सेशन न्यायाधीश के हवाले किया है, वापस मंगा सकता है।

सीआरपीसी की धारा 409 के अनुसार

सेशन न्यायाधीशों द्वारा मामलों और अपीलों का वापस लिया जाना—

(1) सेशन न्यायाधीश अपने अधीनस्थ किसी सहायक सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से कोई मामला या अपील वापस ले सकता है या कोई मामला या अपील, जिसे उसने उसके हवाले किया हो, वापस मंगा सकता है।
(2) अपर सेशन न्यायाधीश के समक्ष मामले का विचारण या अपील की सुनवाई प्रारम्भ होने से पूर्व किसी समय सेशन न्यायाधीश किसी मामले या अपील को, जिसे उसने अपर सेशन न्यायाधीश के हवाले किया है, वापस मंगा सकता है।
(3) जहां सेशन न्यायाधीश कोई मामला या अपील उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन वापस मंगाता है या वापस लेता है वहां वह, यथास्थिति, या तो उस मामले का अपने न्यायालय में विचारण कर सकता है या उस अपील को स्वयं सुन सकता है या उसे विचारण या सुनवाई के लिए इस संहिता के उपबंधों के अनुसार दूसरे न्यायालय के हवाले कर सकता है।

Withdrawal of cases and appeals by Sessions Judges-

(1) A Sessions Judge may withdraw any case or appeal from, or recall any case or appeal which he has made over to, any Assistant Sessions Judge or Chief Judicial Magistrate subordinate to him.
(2) At any time before the trial of the case or the hearing of the appeal has commenced before the Additional Sessions Judge, a Sessions Judge may recall any case or appeal which he has made over to any Additional Sessions Judge.
(3) Where a Sessions Judge withdraws or recalls a case or appeal under sub section (1) or sub-section (2), he may either try the case in his own Court or hear the appeal himself, or make it over in accordance with the provisions of this Code to another Court for trial or hearing, as the case may be.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 409 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 405 | उच्च न्यायालय के आदेश का प्रमाणित करके निचले न्यायालय को भेजा जाना | CrPC Section- 405 in hindi| High Court’s order to be certified to lower Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 405 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 405 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 405 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 405 के अन्तर्गत जब उच्च न्यायालय या सेशन न्यायाधीश द्वारा कोई मामला इस अध्याय के अधीन पुनरीक्षित किया जाता है तब वह धारा 388 द्वारा उपबन्धित रीति से अपना विनिश्चय या आदेश प्रमाणित करके उस न्यायालय को भेजेगा, जिसके द्वारा पुनरीक्षित निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश अभिलिखित किया गया या पारित किया गया था, और तब वह न्यायालय, जिसे विनिश्चय या आदेश ऐसे प्रमाणित करके भेजा गया है ऐसे आदेश करेगा, जो ऐसे प्रमाणित विनिश्चय के अनुरूप है और यदि आवश्यक हो तो अभिलेख में तदनुसार संशोधन कर दिया जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 405 के अनुसार

उच्च न्यायालय के आदेश का प्रमाणित करके निचले न्यायालय को भेजा जाना—

जब उच्च न्यायालय या सेशन न्यायाधीश द्वारा कोई मामला इस अध्याय के अधीन पुनरीक्षित किया जाता है तब वह धारा 388 द्वारा उपबन्धित रीति से अपना विनिश्चय या आदेश प्रमाणित करके उस न्यायालय को भेजेगा, जिसके द्वारा पुनरीक्षित निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश अभिलिखित किया गया या पारित किया गया था, और तब वह न्यायालय, जिसे विनिश्चय या आदेश ऐसे प्रमाणित करके भेजा गया है ऐसे आदेश करेगा, जो ऐसे प्रमाणित विनिश्चय के अनुरूप है और यदि आवश्यक हो तो अभिलेख में तदनुसार संशोधन कर दिया जाएगा।

High Court’s order to be certified to lower Court-
When a case is revised under this Chapter by the High Court or a Sessions Judge, it or he shall, in the manner provided by Section 388, certify its decision or order to the Court by which the finding, sentence or order revised was recorded or passed, and the Court to which the decision or order is so certified shall thereupon make such orders as are conformable to the decision so certified; and, if necessary, the record shall be amended in accordance therewith.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 405 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।