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सीआरपीसी की धारा 420 | वारंट किसको सौंपा जाएगा | CrPC Section- 420 in hindi| Warrant with whom to be lodged.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 420 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 420 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 420 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 420 के अन्तर्गत किसी मामले मे कोई अभियुक्त बन्दी जेल में परिरुद्ध किया जाना है, तब वारंट जेलर को सौंपा जाएगा।

सीआरपीसी की धारा 420 के अनुसार

वारंट किसको सौंपा जाएगा-

जब बन्दी जेल में परिरुद्ध किया जाना है, तब वारंट जेलर को सौंपा जाएगा।

Warrant with whom to be lodged-
00When the prisoner is to be confined in jail, the warrant shall be lodged with the jailor.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 420 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 419 | निष्पादन के लिए वारंट का निदेशन | CrPC Section- 419 in hindi| Direction of warrant for execution.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 419 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 419 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 419 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 419 के अन्तर्गत कारावास के दंडादेश के निष्पादन के लिए प्रत्येक वारंट उस जेल या अन्य स्थान के भारसाधक अधिकारी को निदिष्ट होगा, जिसमें बंदी परिरुद्ध है या परिरुद्ध किया जाना है।

सीआरपीसी की धारा 419 के अनुसार

निष्पादन के लिए वारंट का निदेशन-

कारावास के दंडादेश के निष्पादन के लिए प्रत्येक वारंट उस जेल या अन्य स्थान के भारसाधक अधिकारी को निदिष्ट होगा, जिसमें बंदी परिरुद्ध है या परिरुद्ध किया जाना है।

Direction of warrant for execution-
Every warrant for the execution of a sentence of imprisonment shall be directed to the officer in charge of the jail or other place in which the prisoner is, or is to be, confined.

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सीआरपीसी की धारा 418 | कारावास के दंडादेश का निष्पादन | CrPC Section- 418 in hindi| Execution of sentence of imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 418 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 418 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 418 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 418 के अन्तर्गत जहां उन मामलों से, जिनके लिए धारा 413 द्वारा उपबन्ध किया गया है, भिन्न मामलों में अभियुक्त आजीवन कारावास या किसी अवधि के कारावास के लिए दण्डादिष्ट किया गया है, वहां दण्डादेश देने वाला न्यायालय उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध है या उसे परिरुद्ध किया जाना है तत्काल वारंट भेजेगा और यदि अभियुक्त पहले से ही उस जेल या अन्य स्थान में परिरुद्ध नहीं है तो वारंट के साथ उसे ऐसी जेल या अन्य स्थान को भिजवाएगा।

सीआरपीसी की धारा 418 के अनुसार

कारावास के दंडादेश का निष्पादन-

(1) जहां उन मामलों से, जिनके लिए धारा 413 द्वारा उपबन्ध किया गया है, भिन्न मामलों में अभियुक्त आजीवन कारावास या किसी अवधि के कारावास के लिए दण्डादिष्ट किया गया है, वहां दण्डादेश देने वाला न्यायालय उस जेल या अन्य स्थान को, जिसमें वह परिरुद्ध है या उसे परिरुद्ध किया जाना है तत्काल वारंट भेजेगा और यदि अभियुक्त पहले से ही उस जेल या अन्य स्थान में परिरुद्ध नहीं है तो वारंट के साथ उसे ऐसी जेल या अन्य स्थान को भिजवाएगा :
परन्तु जहां अभियुक्त को न्यायालय के उठने तक के लिए कारावास का दंडादेश दिया गया है, वहां वारंट तैयार करना या वारंट जेल को भेजना आवश्यक न होगा और अभियुक्त को ऐसे स्थान में, जो न्यायालय निदिष्ट करे, परिरुद्ध किया जा सकता है।
(2) जहां अभियुक्त न्यायालय में उस समय उपस्थित नहीं है जब उसे ऐसे कारावास का दंडादेश दिया गया है जैसा उपधारा (1) में उल्लिखित है, वहां न्यायालय उसे जेल या ऐसे अन्य स्थान में, जहां उसे परिरुद्ध किया जाना है, भेजने के प्रयोजन से उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करेगा; और ऐसे मामले में दंडादेश उसकी गिरफ्तारी की तारीख से प्रारम्भ होगा।

Execution of sentence of imprisonment-

(1) Where the accused is sentenced to imprisonment for life or to imprisonment for a term in cases other than those provided for by Section 413, the Court passing the sentence shall forthwith forward a warrant to the jail or other place in which he is, or is to be, confined, and, unless the accused is already confined in such jail or other place, shall forward him to such jail or other place, with the warrant :
Provided that where the accused is sentenced to imprisonment till the rising of the Court, it shall not be necessary to prepare or forward a warrant to a jail, and the accused may be confined in such place as the Court may direct.
(2) Where the accused is not present in Court when he is sentenced to such imprisonment as is mentioned in sub-section (1), the Court shall issue a warrant for his arrest for the purpose of forwarding him to the jail or other place in which he is to be confined; and in such case, the sentence shall commence on the date of his arrest.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 418 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 417 | कारावास का स्थान नियत करने की शक्ति | CrPC Section- 417 in hindi| Power to appoint place of imprisonment.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 417 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 417 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 417 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 417 के अन्तर्गत तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा जैसा उपबंधित है उसके सिवाय राज्य सरकार निदेश दे सकती है कि किसी व्यक्ति को, जिसे इस संहिता के अधीन कारावासित किया जा सकता है या अभिरक्षा के लिए सुपुर्द किया जा सकता है, किस स्थान में परिरुद्ध किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति, जिसे इस संहिता के अधीन कारावासित किया जा सकता है या अभिरक्षा के लिए सुपुर्द किया जा सकता है, सिविल जेल में परिरुद्ध है तो कारावास या सुपुर्दगी के लिए आदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति के दांडिक जेल में भेजे जाने का निदेश दे सकता है।

सीआरपीसी की धारा 417 के अनुसार

कारावास का स्थान नियत करने की शक्ति–

(1) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा जैसा उपबंधित है उसके सिवाय राज्य सरकार निदेश दे सकती है कि किसी व्यक्ति को, जिसे इस संहिता के अधीन कारावासित किया जा सकता है या अभिरक्षा के लिए सुपुर्द किया जा सकता है, किस स्थान में परिरुद्ध किया जाएगा।
(2) यदि कोई व्यक्ति, जिसे इस संहिता के अधीन कारावासित किया जा सकता है या अभिरक्षा के लिए सुपुर्द किया जा सकता है, सिविल जेल में परिरुद्ध है तो कारावास या सुपुर्दगी के लिए आदेश देने वाला न्यायालय या मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति के दांडिक जेल में भेजे जाने का निदेश दे सकता है।
(3) जब उपधारा (2) के अधीन कोई व्यक्ति दांडिक जेल में भेजा जाता है तब वहां से छोड़ दिए जाने पर उसे उस दशा के सिवाय सिविल जेल को लौटाया जाएगा जब या तो
(क) दांडिक जेल में उसके भेजे जाने से तीन वर्ष बीत गए हैं; जिस दशा में वह, यथास्थिति, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 58 या प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5) की धारा 23 के अधीन सिविल जेल से छोड़ा गया समझा जाएगा, या
(ख) सिविल जेल में उसके कारावास का आदेश देने वाले न्यायालय द्वारा दांडिक जेल के भारसाधक अधिकारी को यह प्रमाणित करके भेज दिया गया है कि वह, यथास्थिति, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 58 या प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920 (1920 का 5) की धारा 23 के अधीन छोड़े जाने का हकदार है।

Power to appoint place of imprisonment–

(1) Except when otherwise provided by any law for the time being in force, the State Government may direct in what place any person liable to be imprisoned or committed to custody under this Code shall be confined.
(2) If any person liable to be imprisoned or committed to custody under this Code is in confinement in a civil jail, the Court or Magistrate ordering the imprisonment or committal may direct that the person be removed to a criminal jail.
(3) When a person is removed to a criminal jail under sub-section (2), he shall, on being released therefrom, be sent back to the civil jail, unless either
(a) three years have elapsed since he was removed to the criminal jail, in which case be shall be deemed to have been released from the civil jail under Section 58 of the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908), or Section 23 of the Provincial Insolvency Act, 1920 (5 of 1920), as the case may be; or
(b) the Court which ordered his imprisonment in the civil jail has certified to the officer in charge of the criminal jail that he is entitled to be released. under Section 58 of the Code of Civil Procedure, 1908, (5 of 1908), or under Section 23 of the Provincial Insolvency Act, 1920 (5 of 1920), as the case may be.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 417 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 416 | गर्भवती स्त्री को मृत्युदण्ड का मुल्तवी किया जाना | CrPC Section- 416 in hindi| Postponement of capital sentence on pregnant woman.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 416 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 416 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 416 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 416 के अन्तर्गत यदि वह स्त्री, जिसे मृत्यु दंडादेश दिया गया है, गर्भवती पाई जाती है तो उच्च न्यायालय दंडादेश का आजीवन कारावास के रूप में लघुकरण कर सकेगा।

सीआरपीसी की धारा 416 के अनुसार

गर्भवती स्त्री को मृत्युदण्ड का मुल्तवी किया जाना—

यदि वह स्त्री, जिसे मृत्यु दंडादेश दिया गया है, गर्भवती पाई जाती है तो उच्च न्यायालय दंडादेश का आजीवन कारावास के रूप में लघुकरण कर सकेगा।

Postponement of capital sentence on pregnant woman-
If a woman sentenced to death is found to be pregnant, the High Court shall commute the sentence to imprisonment for life.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 416 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

सीआरपीसी की धारा 415 | उच्चतम न्यायालय की अपील की दशा में मृत्यु दंडादेश के निष्पादन का मुल्तवी किया जाना | CrPC Section- 415 in hindi| Postponement of execution of sentence of death in case of appeal to Supreme Court.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 415 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 415 कब लागू होती है, यह भी इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 415 का विवरण

दण्ड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 415 के अन्तर्गत जहां किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है और उसके निर्णय के विरुद्ध कोई अपील संविधान के अनुच्छेद 134 के खण्ड (1) के उपखण्ड (क) या उपखण्ड (ख) के अधीन उच्चतम न्यायालय को होती है वहां उच्च न्यायालय दंडादेश का निष्पादन तब तक के लिए मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त नहीं हो जाती है। अथवा यदि उस अवधि के अन्दर कोई अपील की गई है तो जब तक उस अपील का निपटारा नहीं हो जाता है।

सीआरपीसी की धारा 415 के अनुसार

उच्चतम न्यायालय की अपील की दशा में मृत्यु दंडादेश के निष्पादन का मुल्तवी किया जाना-

(1) जहां किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है और उसके निर्णय के विरुद्ध कोई अपील संविधान के अनुच्छेद 134 के खण्ड (1) के उपखण्ड (क) या उपखण्ड (ख) के अधीन उच्चतम न्यायालय को होती है वहां उच्च न्यायालय दंडादेश का निष्पादन तब तक के लिए मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा जब तक ऐसी अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त नहीं हो जाती है। अथवा यदि उस अवधि के अन्दर कोई अपील की गई है तो जब तक उस अपील का निपटारा नहीं हो जाता है।
(2) जहां उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है या उसकी पुष्टि की गई है, और दंडादिष्ट व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 132 के अधीन या अनुच्छेद 134 के खण्ड (1) के उपखण्ड (ग) के अधीन प्रमाणपत्र दिए जाने के लिए उच्च न्यायालय से आवेदन करता है, तो उच्च न्यायालय दंडादेश का निष्पादन तब तक के लिए मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा जब तक उस आवेदन का उच्च न्यायालय द्वारा निपटारा नहीं हो जाता है या यदि ऐसे आवेदन पर कोई प्रमाणपत्र दिया गया है, तो जब तक उस प्रमाणपत्र पर उच्चतम न्यायालय को अपील करने के लिए अनुज्ञात अवधि समाप्त नहीं हो जाती है।
(3) जहां उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश दिया गया है या उसकी पुष्टि की गई है और उच्च न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि दण्डादिष्ट व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन अपोल के लिए विशेष इजाजत दिए जाने के लिए उच्चतम न्यायालय में अर्जी पेश करना चाहता है, वहां उच्च न्यायालय दंडादेश का निष्पादन इतनी अवधि तक के लिए जितनी वह ऐसी अर्जी पेश करने के लिए पर्याप्त समझे. मुल्तवी किए जाने का आदेश देगा।

Postponement of execution of sentence of death in case of appeal to Supreme Court-
(1) Where a person is sentenced to death by the High Court and an appeal from its judgment lies to the Supreme Court under sub-clause (a) of sub-clause (b) of clause (1) of Article 134 of the Constitution, the High Court shall order the execution of the sentence to be postponed until the period allowed for preferring such appeal as expired, or, if an appeal is preferred within that period, until such appeal is disposed of.
(2) Where a sentence of death is passed or confirmed by the High Court, and the person sentenced makes an application to the High Court for the grant of a certificate under Article 132 or under sub-clause (c) of clause (1) of Article 134 of the Constitution, the High Court shall order the execution of the sentence to be postponed until such application is disposed of by the High Court, or if a certificate is granted on such application, until the period allowed for preferring an appeal to the Supreme Court on such certificate has expired.
(3) Where a sentence of death is passed or confirmed by the High Court, and the High Court is satisfied that the person sentence intends to present a petition to the Supreme Court for the grant of special leave to appeal under Article 136 of the Constitution, the High Court shall order the execution of the sentence to be postponed for such period as it considers sufficient to enable him to present such petition.

हमारा प्रयास सीआरपीसी की धारा 415 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।