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कंपनी अधिनियम की धारा 61| Companies Act Section 61

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-61 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 61 के अनुसार किसी लिमिटेड कंपनी को, जिसकी शेयर पूंजी है, यदि उसके अनुच्छेदों द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाता है तो वह अपने साधारण अधिवेशन में अपने ज्ञापन में निम्नलिखित के लिए परिवर्तन कर सकेगी, जिसे Companies Act Section-61 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 61 (Companies Act Section-61) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 61 Companies Act Section-61 के अनुसार किसी लिमिटेड कंपनी को, जिसकी शेयर पूंजी है, यदि उसके अनुच्छेदों द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाता है तो वह अपने साधारण अधिवेशन में अपने ज्ञापन में निम्नलिखित के लिए परिवर्तन कर सकेगी।

कंपनी अधिनियम की धारा 61 (Companies Act Section-61 in Hindi)

लिमिटेड कंपनी की अपनी शेयर पूंजी में परिवर्तन जरने की शक्ति-

(1) किसी लिमिटेड कंपनी को, जिसकी शेयर पूंजी है, यदि उसके अनुच्छेदों द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाता है तो वह अपने साधारण अधिवेशन में अपने ज्ञापन में निम्नलिखित के लिए परिवर्तन कर सकेगी।

(क) अपनी प्राधिकृत शेयर पूंजी में ऐसी रकम तक वृद्धि करने, जो वह समीचीन समझे;

(ख) अपनी सभी या किसी शेयर पूंजी को अपने विद्यमान शेयरों की अपेक्षा वृहत्तर रकम के शेयरों में समेकित और विभाजित करने के लिए:

परंतु ऐसा कोई समेकन और विभाजन, जिसके परिणामस्वरूप शेयर धारकों की मतदान प्रतिशतता में परिवर्तन होता है, तब तक प्रभावी नहीं होगा, जब तक विहित रीति में किए गए आवेदन पर अधिकरण द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है;

(ग) अपने सभी या किन्हीं समादत्त शेयरों को स्टाक में संपरिवर्तित करने और उस स्टाक को किसी अंकित मूल्य के पूर्णतः समादत्त शेयरों में पुनः संपरिवर्तित करने;

(घ) अपने शेयरों या उनमें से किसी का ज्ञापन द्वारा नियत रकम से कम रकम के शेयरों में उपविभाजन करने, तथापि, उपविभाजन में प्रत्येक कम किए गए शेयर पर संदत्त रकम और असंदत्त रकम, यदि कोई हो, के बीच का अनुपात, वही होगा, जो उस शेयर की दशा में था, जिससे कम किया गया शेयर व्युत्पन्न हुआ है;

(ङ) ऐसे शेयर रद्द करने, जो उस निमित्त संकल्प के पारित होने की तारीख को नहीं लिए गए थे या किसी व्यक्ति द्वारा लिए जाने के लिए सहमत किए गए थे और इस प्रकार रद्द शेयरों की रकम से अपनी शेयर पूंजी की रकम को कम करने।

(2) उपधारा (1) के अधीन शेयरों के रद्दकरण को शेयर पूंजी की कमी होना नहीं समझा जाएगा।

Companies Act Section-61 (Company Act Section-61 in English)

Power of limited company to alter its share capital

(1) A limited company having a share  capital may, if so authorised by its articles, alter its memorandum in its general meeting to— 

(a) increase its authorised share capital by such amount as it thinks expedient; 

(b) consolidate and divide all or any of its share capital into shares of a larger amount than its  existing shares: 

Provided that no consolidation and division which results in changes in the voting percentage of  shareholders shall take effect unless it is approved by the Tribunal on an application made in the  prescribed manner; 

(c) convert all or any of its fully paid-up shares into stock, and reconvert that stock into fully  paid-up shares of any denomination; 

(d) sub-divide its shares, or any of them, into shares of smaller amount than is fixed by the  memorandum, so, however, that in the sub-division the proportion between the amount paid and the  amount, if any, unpaid on each reduced share shall be the same as it was in the case of the share from  which the reduced share is derived; 

(e) cancel shares which, at the date of the passing of the resolution in that behalf, have not been taken or agreed to be taken by any person, and diminish the amount of its share capital by the amount of the shares so canceled. 

(2) The cancellation of shares under sub-section (1) shall not be deemed to be a reduction of share  capital.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 61 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 60| Companies Act Section 60

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-60 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 60 के अनुसार जहां किसी कंपनी की किसी सूचना, विज्ञापन या अन्य शासकीय प्रकाशन या किसी कारबार पत्र, बिल शीर्ष या कागजपत्र में कंपनी की प्राधिकृत पूंजी की रकम का कथन अन्तर्विष्ट है, वहां ऐसी सूचना, विज्ञापन या अन्य शासकीय प्रकाशन या ऐसे पत्र, बिल शीर्ष या कागजपत्र में उस पूंजी की रकम का, जो अभिदत्त की गई है और समादत्त रकम का समान रूप से प्रमुख स्थिति और समान रूप से सहजदृश्य रूप में एक कथन भी अंतर्विष्ट होगा, जिसे Companies Act Section-60 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 60 (Companies Act Section-60) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 60 Companies Act Section-60 के अनुसार जहां किसी कंपनी की किसी सूचना, विज्ञापन या अन्य शासकीय प्रकाशन या किसी कारबार पत्र, बिल शीर्ष या कागजपत्र में कंपनी की प्राधिकृत पूंजी की रकम का कथन अन्तर्विष्ट है, वहां ऐसी सूचना, विज्ञापन या अन्य शासकीय प्रकाशन या ऐसे पत्र, बिल शीर्ष या कागजपत्र में उस पूंजी की रकम का, जो अभिदत्त की गई है और समादत्त रकम का समान रूप से प्रमुख स्थिति और समान रूप से सहजदृश्य रूप में एक कथन भी अंतर्विष्ट होगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 60 (Companies Act Section-60 in Hindi)

प्राधिकृत अभिदत्त तथा समादत्त पूंजी का प्रकाशन-

(1) जहां किसी कंपनी की किसी सूचना, विज्ञापन या अन्य शासकीय प्रकाशन या किसी कारबार पत्र, बिल शीर्ष या कागजपत्र में कंपनी की प्राधिकृत पूंजी की रकम का कथन अन्तर्विष्ट है, वहां ऐसी सूचना, विज्ञापन या अन्य शासकीय प्रकाशन या ऐसे पत्र, बिल शीर्ष या कागजपत्र में उस पूंजी की रकम का, जो अभिदत्त की गई है और समादत्त रकम का समान रूप से प्रमुख स्थिति और समान रूप से सहजदृश्य रूप में एक कथन भी अंतर्विष्ट होगा।

(2) यदि उपधारा (1) की अपेक्षाओं का अनुपालन करने में कोई व्यतिक्रम किया जाता है, तो कंपनी दस हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, प्रत्येक व्यतिक्रम के लिए, पांच हजार रुपए की शास्ति के लिए दायी होगा।

Companies Act Section-60 (Company Act Section-60 in English)

Publication of authorised, subscribed and paid-up capital

(1) Where any notice,  advertisement, or other official publication, or any business letter, billhead or letter paper of a company contains a statement of the amount of the authorized capital of the company, such notice, advertisement or other official publication, or such letter, billhead or letter paper shall also contain a statement, in an equally prominent position and in equally conspicuous characters, of the amount of the capital which has been subscribed and the amount paid-up. 

(2) If any default is made in complying with the requirements of sub-section (1), the company shall be liable to pay a penalty of ten thousand rupees and every officer of the company who is in default shall be liable to pay a penalty of five thousand rupees, for each default. 

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 60 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 59| Companies Act Section 59

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-59 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 59 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का नाम, पर्याप्त कारण के बिना, किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाता है या रजिस्टर में प्रविष्ट किए जाने के पश्चात् पर्याप्त कारण के बिना, उसमें से हटा दिया जाता है, या किसी व्यक्ति के सदस्य बनने या सदस्य न रहने के तथ्य की रजिस्टर में प्रविष्टि करने में व्यतिक्रम किया जाता है या उसमें अनावश्यक विलंब होता है तो व्यथित व्यक्ति या कंपनी का कोई सदस्य या कंपनी, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, अधिकरण को या भारत के बाहर निवास कर रहे विदेशी सदस्यों या डिबेंचर धारकों की बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किसी सक्षम न्यायालय को रजिस्टर के परिशोधन के लिए अपील कर सकेगा, जिसे Companies Act Section-59 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 59 (Companies Act Section-59) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 59 Companies Act Section-59 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का नाम, पर्याप्त कारण के बिना, किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाता है या रजिस्टर में प्रविष्ट किए जाने के पश्चात् पर्याप्त कारण के बिना, उसमें से हटा दिया जाता है, या किसी व्यक्ति के सदस्य बनने या सदस्य न रहने के तथ्य की रजिस्टर में प्रविष्टि करने में व्यतिक्रम किया जाता है या उसमें अनावश्यक विलंब होता है तो व्यथित व्यक्ति या कंपनी का कोई सदस्य या कंपनी, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, अधिकरण को या भारत के बाहर निवास कर रहे विदेशी सदस्यों या डिबेंचर धारकों की बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किसी सक्षम न्यायालय को रजिस्टर के परिशोधन के लिए अपील कर सकेगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 59 (Companies Act Section-59 in Hindi)

सदस्यों के रजिस्टर का सही करना-

 (1) यदि किसी व्यक्ति का नाम, पर्याप्त कारण के बिना, किसी कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाता है या रजिस्टर में प्रविष्ट किए जाने के पश्चात् पर्याप्त कारण के बिना, उसमें से हटा दिया जाता है, या किसी व्यक्ति के सदस्य बनने या सदस्य न रहने के तथ्य की रजिस्टर में प्रविष्टि करने में व्यतिक्रम किया जाता है या उसमें अनावश्यक विलंब होता है तो व्यथित व्यक्ति या कंपनी का कोई सदस्य या कंपनी, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, अधिकरण को या भारत के बाहर निवास कर रहे विदेशी सदस्यों या डिबेंचर धारकों की बाबत केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किसी सक्षम न्यायालय को रजिस्टर के परिशोधन के लिए अपील कर सकेगा।

(2) अधिकरण, उपधारा (1) के अधीन अपील के पक्षकारों को सने जाने के पश्चात, आदेश द्वारा, अपील को या तो खारिज कर सकेगा या यह निदेश दे सकेगा कि अंतरण या पारेषण कंपनी द्वारा आदेश की प्राप्ति के दस दिन के भीतर रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा या निक्षेपागार के अभिलेखों या रजिस्टर के सीधे परिशोधन का निदेश दे सकेगा और पश्चात्वर्ती मामले में कंपनी को व्यथित पक्षकार को हुई नुकसानी, यदि कोई हो, का संदाय करने के लिए निदेश दे सकेगा ।

(3) इस धारा के उपबंध प्रतिभूतियों के किसी धारक के, ऐसी प्रतिभूतियों को अंतरित करने के अधिकार को निर्बधित नहीं करेंगे और ऐसी प्रतिभूतियां अर्जित करने वाला कोई व्यक्ति तब तक मताधिकार के लिए हकदार होगा, जब तक मताधिकार को किसी आदेश द्वारा निलंबित न किया गया हो।

(4) जहां प्रतिभूतियों का अंतरण प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 या इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किन्हीं उपबंधों के उल्लंघन में किया गया है, वहां अधिकरण, निक्षेपागार कंपनी, निक्षेपागार भागीदार प्रतिभूतियों के धारक या प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा किए जाने वाले किसी आवेदन पर किसी कंपनी या निक्षेपागार को उल्लंघन को दूर करने और उससे संबंधित उसके रजिस्टर या अभिलेखों में परिशोधन का निदेश दे सकेगा ।

(5) यदि इस धारा के अधीन अधिकरण के किसी आदेश का अनुपालन करने में कोई व्यतिक्रम किया जाता है तो कंपनी ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपये से कम नहीं होगा किन्तु जो पांच लाख रुपये तक हो सकेगा, दण्डनीय होगी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा किंतु जो तीन लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा।

Companies Act Section-59 (Company Act Section-59 in English)

Rectification of register of members

(1) If the name of any person is, without sufficient  cause, entered in the register of members of a company, or after having been entered in the register, is,  without sufficient cause, omitted therefrom, or if a default is made, or unnecessary delay takes place in  entering in the register, the fact of any person having become or ceased to be a member, the person 

aggrieved, or any member of the company, or the company may appeal in such form as may be prescribed, to the Tribunal, or to a competent court outside India, specified by the Central Government by notification, in respect of foreign members or debenture holders residing outside India, for rectification of the register. 

(2) The Tribunal may, after hearing the parties to the appeal under sub-section (1) by order, either dismiss the appeal or direct that the transfer or transmission shall be registered by the company within a  period of ten days of the receipt of the order or direct rectification of the records of the depository or the register and in the latter case, direct the company to pay damages, if any, sustained by the party aggrieved. 

(3) The provisions of this section shall not restrict the right of a holder of securities, to transfer such securities and any person acquiring such securities shall be entitled to voting rights unless the voting rights have been suspended by an order of the Tribunal. 

(4) Where the transfer of securities is in contravention of any of the provisions of the Securities  Contracts (Regulation) Act, 1956 (42 of 1956), the Securities and Exchange Board of India Act, 1992 (15  of 1992) or this Act or any other law for the time being in force, the Tribunal may, on an application made by the depository, company, depository participant, the holder of the securities or the Securities and  Exchange Board, direct any company or a depository to set right the contravention and rectify its register or records concerned. 

(5) If any default is made in complying with the order of the Tribunal under this section, the company shall be punishable with a fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to five lakh rupees and every officer of the company who is in default shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to one year or with fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to three lakh rupees, or with both.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 59 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 58| Companies Act Section 58

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-58 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 58 के अनुसार यदि शेयरों द्वारा परिसीमित कोई प्राइवेट कंपनी चाहे अपने अनुच्छेदों के अधीन या अन्यथा कंपनी की किसी शक्ति के अनुसरण में विधि के प्रचालन द्वारा कंपनी में किसी सदस्य की किसी प्रतिभूति या हित के अंतरण या पारेषण को रजिस्टर करने से इन्कार करती है तो वह उस तारीख से एक मास के भीतर, जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या ऐसे पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, जिसे Companies Act Section-58 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 58 (Companies Act Section-58) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 58 Companies Act Section-58 के अनुसार यदि शेयरों द्वारा परिसीमित कोई प्राइवेट कंपनी चाहे अपने अनुच्छेदों के अधीन या अन्यथा कंपनी की किसी शक्ति के अनुसरण में विधि के प्रचालन द्वारा कंपनी में किसी सदस्य की किसी प्रतिभूति या हित के अंतरण या पारेषण को रजिस्टर करने से इन्कार करती है तो वह उस तारीख से एक मास के भीतर, जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या ऐसे पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी।

कंपनी अधिनियम की धारा 58 (Companies Act Section-58 in Hindi)

रजिस्ट्रीकरण से इंकार करना और इंकार किये जाने के विरुद्ध अपील-

(1) यदि शेयरों द्वारा परिसीमित कोई प्राइवेट कंपनी चाहे अपने अनुच्छेदों के अधीन या अन्यथा कंपनी की किसी शक्ति के अनुसरण में विधि के प्रचालन द्वारा कंपनी में किसी सदस्य की किसी प्रतिभूति या हित के अंतरण या पारेषण को रजिस्टर करने से इन्कार करती है तो वह उस तारीख से एक मास के भीतर, जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या ऐसे पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, ऐसे इंकार किए जाने के कारण देते हुए इंकार किए जाने की सूचना, यथास्थिति, अंतरक और अंतरिती या ऐसे पारेषण की सूचना देने वाले व्यक्ति को भेजेगी।

(2) उपधारा (1) पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, किसी पब्लिक कंपनी में किसी सदस्य की प्रतिभूतियां या अन्य हित स्वच्छंद रूप से अंतरणीय होंगे:

परंतु प्रतिभूतियों के अंतरण की बाबत एक या अधिक व्यक्तियों के बीच कोई संविदा या ठहराव, संविदा के रूप में प्रवर्तनीय होगा।

(3) अंतरिती, सूचना की प्राप्ति से एक मास के भीतर या जहां कंपनी द्वारा कोई सूचना नहीं भेजी गई है, उस तारीख से चार मास के भीतर जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, इंकार किए जाने के विरुद्ध अधिकरण को अपील कर सकेगा ।

(4) यदि कोई पब्लिक कंपनी, पर्याप्त कारण के बिना, उस तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर जिसको, यथास्थिति, अंतरण की लिखत या पारेषण की सूचना कंपनी को परिदत्त की गई थी, प्रतिभूतियों का अंतरण रजिस्टर करने से इंकार करती है तो अंतरिती, यथास्थिति, ऐसे इंकार किए जाने के साठ दिन की अवधि के भीतर या जहां कंपनी से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है, वहां अंतरण की लिखत या पारेषण की सूचना के परिदान के नब्बे दिन के भीतर, अधिकरण को अपील कर सकेगा।

(5) अधिकरण, उपधारा (3) या उपधारा (4) के अधीन की गई किसी अपील के संबंध में कार्रवाई करते समय, पक्षकारों की सुनवाई करने के पश्चात्, या तो अपील को खारिज कर सकेगा या आदेश द्वारा,

(क) यह निदेश दे सकेगा कि अंतरण या पारेषण कंपनी द्वारा रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा और कंपनी, आदेश की प्राप्ति के दस दिन के भीतर उस आदेश का पालन करेगी; या

(ख) रजिस्टर का परिशोधन करने का निदेश देगा और कंपनी को यह भी निदेश देगा कि किसी व्यथित पक्षकार को हुई किसी नुकसानी, यदि कोई हो, का संदाय करे।

(6) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन अधिकरण के आदेश का उल्लंघन करेगा, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

Companies Act Section-58 (Company Act Section-58 in English)

Refusal of registration and appeal against refusal

(1) If a private company limited by shares  refuses, whether in pursuance of any power of the company under its articles or otherwise, to register the  transfer of, or the transmission by operation of the law of the right to, any securities or interest of a member  in the company, it shall within a period of thirty days from the date on which the instrument of transfer, or 

the intimation of such transmission, as the case may be, was delivered to the company, send notice of the refusal to the transferor and the transferee or to the person giving intimation of such transmission, as the case may be, giving reasons for such refusal. 

(2) Without prejudice to sub-section (1), the securities or other interest of any member in a public  company shall be freely transferable: 

Provided that any contract or arrangement between two or more persons in respect of the transfer of securities shall be enforceable as a contract. 

(3) The transferee may appeal to the Tribunal against the refusal within thirty days from the date of receipt of the notice or in case no notice has been sent by the company, within a period of sixty days from the date on which the instrument of transfer or the intimation of transmission, as the case may be, was delivered to the company. 

(4) If a public company without sufficient cause refuses to register the transfer of securities within a  period of thirty days from the date on which the instrument of transfer or the intimation of transmission,  as the case may be, is delivered to the company, the transferee may, within a period of sixty days of such refusal or where no intimation has been received from the company, within ninety days of the delivery of the instrument of transfer or intimation of transmission, appeal to the Tribunal. 

(5) The Tribunal, while dealing with an appeal made under sub-section (3) or sub-section (4), may,  after hearing the parties, either dismiss the appeal or by order-

(a) direct that the transfer or transmission shall be registered by the company and the company  shall comply with such order within a period of ten days of the receipt of the order; or 

(b) direct rectification of the register and also direct the company to pay damages, if any,  sustained by any party aggrieved. 

(6) If a person contravenes the order of the Tribunal under this section, he shall be punishable with  imprisonment for a term which shall not be less than one year but which may extend to three years and  with fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to five lakh rupees.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 58 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 57| Companies Act Section 57

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-57 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 57 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रवंचना से किसी कंपनी में प्रतिभूतियों या हित या इस अधिनियम के अनुसरण में जारी किए गए किसी शेयर वारंट या कूपन के किसी स्वामी को प्रतिरूपित करेगा और उसके द्वारा कोई ऐसी प्रतिभूतियां या हित या शेयर वारंट या कोई कूपन अभिप्राप्त करेगा या अभिप्राप्त करने का प्रयास करेगा या ऐसे किसी स्वामी को शोध्य कोई धन प्राप्त करेगा या प्राप्त करने का प्रयास करेगा, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा, जिसे Companies Act Section-57 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 57 (Companies Act Section-57) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 57 Companies Act Section-57 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रवंचना से किसी कंपनी में प्रतिभूतियों या हित या इस अधिनियम के अनुसरण में जारी किए गए किसी शेयर वारंट या कूपन के किसी स्वामी को प्रतिरूपित करेगा और उसके द्वारा कोई ऐसी प्रतिभूतियां या हित या शेयर वारंट या कोई कूपन अभिप्राप्त करेगा या अभिप्राप्त करने का प्रयास करेगा या ऐसे किसी स्वामी को शोध्य कोई धन प्राप्त करेगा या प्राप्त करने का प्रयास करेगा, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

कंपनी अधिनियम की धारा 57 (Companies Act Section-57 in Hindi)

शेयर धारक के प्रतिरूपण के लिए दंड-

यदि कोई व्यक्ति प्रवंचना से किसी कंपनी में प्रतिभूतियों या हित या इस अधिनियम के अनुसरण में जारी किए गए किसी शेयर वारंट या कूपन के किसी स्वामी को प्रतिरूपित करेगा और उसके द्वारा कोई ऐसी प्रतिभूतियां या हित या शेयर वारंट या कोई कूपन अभिप्राप्त करेगा या अभिप्राप्त करने का प्रयास करेगा या ऐसे किसी स्वामी को शोध्य कोई धन प्राप्त करेगा या प्राप्त करने का प्रयास करेगा, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से, जो एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो एक लाख रुपए से कम का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

Companies Act Section-57 (Company Act Section-57 in English)

Punishment for personation of shareholder

If any person deceitfully personates as an owner of any security or interest in a company, or of any share warrant or coupon issued in pursuance of this  Act, and thereby obtains or attempts to obtain any such security or interest or any such share warrant or coupon, or receives or attempts to receive any money due to any such owner, he shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than one year but which may extend to three years and with fine which shall not be less than one lakh rupees but which may extend to five lakh rupees. 

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 57 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

कंपनी अधिनियम की धारा 56| Companies Act Section 56

कंपनी अधिनियम Companies Act (Companies Act Section-56 in Hindi) के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। कंपनी अधिनियम की धारा 56 के अनुसार कोई कंपनी उस दशा में, जहां कंपनी की कोई शेयर पूंजी नहीं है, ऐसे व्यक्तियों के बीच किसी अंतरण से भिन्न, जिन दोनों के नाम निक्षेपागार के अभिलेख में फायदाग्राही हित के धारक के रूप में दर्ज हैं, कंपनी की प्रतिभूतियों या कंपनी के किसी सदस्य के हित के अंतरण को तब तक रजिस्टर नहीं करेगी, जब तक अंतरण की समुचित लिखत को ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, सम्यक् रूप से स्टांपित, दिनांकित और अंतरणकर्ता या अंतरिती द्वारा या उसकी ओर से निष्पादित न किया गया हो तथा अंतरिती का नाम, पता और उपजीविका, यदि कोई हो, विनिर्दिष्ट करने वाली अंतरण की समुचित लिखत अंतरक या अंतरिती द्वारा निष्पादन की तारीख से साठ दिन के भीतर जो विहित की जाये, जिसे Companies Act Section-56 के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है।

कंपनी अधिनियम की धारा 56 (Companies Act Section-56) का विवरण

कंपनी अधिनियम की धारा 56 Companies Act Section-56 के अनुसार कोई कंपनी उस दशा में, जहां कंपनी की कोई शेयर पूंजी नहीं है, ऐसे व्यक्तियों के बीच किसी अंतरण से भिन्न, जिन दोनों के नाम निक्षेपागार के अभिलेख में फायदाग्राही हित के धारक के रूप में दर्ज हैं, कंपनी की प्रतिभूतियों या कंपनी के किसी सदस्य के हित के अंतरण को तब तक रजिस्टर नहीं करेगी, जब तक अंतरण की समुचित लिखत को ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, सम्यक् रूप से स्टांपित, दिनांकित और अंतरणकर्ता या अंतरिती द्वारा या उसकी ओर से निष्पादित न किया गया हो तथा अंतरिती का नाम, पता और उपजीविका, यदि कोई हो, विनिर्दिष्ट करने वाली अंतरण की समुचित लिखत अंतरक या अंतरिती द्वारा निष्पादन की तारीख से साठ दिन के भीतर जो विहित की जाये।

कंपनी अधिनियम की धारा 56 (Companies Act Section-56 in Hindi)

प्रतिभूतियों का स्थानांतरण और पारेषण

(1) कोई कंपनी उस दशा में, जहां कंपनी की कोई शेयर पूंजी नहीं है, ऐसे व्यक्तियों के बीच किसी अंतरण से भिन्न, जिन दोनों के नाम निक्षेपागार के अभिलेख में फायदाग्राही हित के धारक के रूप में दर्ज हैं, कंपनी की प्रतिभूतियों या कंपनी के किसी सदस्य के हित के अंतरण को तब तक रजिस्टर नहीं करेगी, जब तक अंतरण की समुचित लिखत को ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, सम्यक् रूप से स्टांपित, दिनांकित और अंतरणकर्ता या अंतरिती द्वारा या उसकी ओर से निष्पादित न किया गया हो तथा अंतरिती का नाम, पता और उपजीविका, यदि कोई हो, विनिर्दिष्ट करने वाली अंतरण की समुचित लिखत अंतरक या अंतरिती द्वारा निष्पादन की तारीख से साठ दिन के भीतर जो विहित की जाए, प्रतिभूतियों के संबंध में प्रमाणपत्र के साथ या यदि ऐसा कोई प्रमाणपत्र विद्यमान नहीं है तो प्रतिभूतियों के आबंटन पत्र के साथ कंपनी को परिदत्त नहीं किया गया हो :

परंतु जहां अंतरण की लिखत खो गई है या अंतरण की लिखत को विहित अवधि के भीतर परिदत्त नहीं किया गया है, वहां कंपनी उस अंतरण को, क्षतिपूर्ति विषयक ऐसे निबंधनों पर जो बोर्ड ठीक समझे, रजिस्ट्रीकृत कर सकेगी।

(2) उपधारा (1) की कोई बात किसी व्यक्ति से, जिसको ऐसे अधिकार पारेषित किए गए हैं, विधि के प्रवर्तन द्वारा प्रतिभूतियों के किसी अधिकार के पारेषण की किसी सूचना के प्राप्त होने पर कंपनी की रजिस्टर करने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी ।

(3) जहां कोई आवेदन अकेले अंतरक द्वारा किया गया है और भागतः संदत्त शेयरों से संबंधित है, वहां अंतरण को तब तक रजिस्ट्रीकृत नहीं किया जाएगा, जब तक कंपनी आवेदन की सूचना, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अंतरिती को नहीं दे देती है और अंतरिती सूचना की प्राप्ति के दो सप्ताह के भीतर अंतरण के संबंध में कोई आक्षेप नहीं करता है।

(4) प्रत्येक कंपनी, जब तक कि विधि के किसी उपबंध या न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के आदेश द्वारा प्रतिषिद्ध न हो,

(क) ज्ञापन के अभिदाताओं की दशा में, निगमन से दो मास की अवधि के भीतर;

(ख) अपने किन्हीं शेयरों के किसी आबंटन की दशा में, आबंटन की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर;

(ग) प्रतिभूतियों के अंतरण या पारेषण की दशा में, कंपनी द्वारा, यथास्थिति, उपधारा (1) के अधीन अंतरण की लिखत या उपधारा (2) के अधीन पारेषण की सूचना की प्राप्ति की तारीख से एक मास की अवधि के भीतर

(घ) डिबेंचर के किसी आबंटन की दशा में, आबंटन की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर . आबंटित, अंतरित या पारेषित सभी प्रतिभूतियों के प्रमाणपत्र परिदत्त करेगी :

. परंतु जहां प्रतिभूतियां किसी निक्षेपागार से संबद्ध हैं, वहां कंपनी ऐसी प्रतिभूतियों के आबंटन पर तुरंत निक्षेपागार को प्रतिभूतियों के आबंटन के ब्यौरे सूचित करेगी।

(5) किसी कंपनी में किसी मृतक व्यक्ति के विधिक प्रतिनिधि द्वारा किया गया किसी प्रतिभूति या अन्य हित का अंतरण, विधिक प्रतिनिधि के स्वयं उसका धारक न होने के बावजूद भी उसी प्रकार विधिमान्य होगा मानो वह अंतरण की लिखत के निष्पादन के समय उसका धारक रहा हो।

(6) जहां उपधारा (1) से उपधारा (5) के उपबंधों का अनुपालन करने में कोई व्यतिक्रम किया जाता है, वहां कंपनी ऐसे जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से अन्यून का नहीं होगा, किंतु जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगी और कंपनी का ऐसा प्रत्येक अधिकारी, जो व्यतिक्रमी है, जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से अन्यून का नहीं होगा, किंतु जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।

(7) निक्षेपागार अधिनियम, 1996 के अधीन किसी दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, जहां किसी निक्षेपागार या भागीदार ने किसी व्यक्ति को कपटवंचन करने के आशय से शेयरों का अंतरण किया है, वहां वह धारा 447 के अधीन दायी होगा।

Companies Act Section-56 (Company Act Section-56 in English)

Transfer and transmission of securities

(1) A company shall not register a transfer of  securities of the company, or the interest of a member in the company in the case of a company having no  share capital, other than the transfer between persons both of whose names are entered as holders of  beneficial interest in the records of a depository, unless a proper instrument of transfer, in such form as may be prescribed, duly stamped, dated and executed by or on behalf of the transferor and the transferee  and specifying the name, address, and occupation, if any, of the transferee has been delivered to the  company by the transferor or the transferee within a period of sixty days from the date of execution, along  with the certificate relating to the securities, or if no such certificate is in existence, along with the letter  of allotment of securities: 

Provided that where the instrument of transfer has been lost or the instrument of transfer has not been delivered within the prescribed period, the company may register the transfer on such terms as to indemnity as the Board may think fit. 

(2) Nothing in sub-section (1) shall prejudice the power of the company to register, on receipt of an intimation of transmission of any right to securities by operation of law from any person to whom such right has been transmitted. 

(3) Where an application is made by the transferor alone and relates to partly paid shares, the transfer shall not be registered, unless the company gives the notice of the application, in such manner as may be prescribed, to the transferee and the transferee gives no objection to the transfer within two weeks from the receipt of the notice. 

(4) Every company shall, unless prohibited by any provision of law or any order of Court, Tribunal or  other authority, deliver the certificates of all securities allotted, transferred or transmitted— 

(a) within a period of two months from the date of incorporation, in the case of subscribers to the  memorandum; 

(b) within a period of two months from the date of allotment, in the case of any allotment of any  of its shares; 

(c) within a period of one month from the date of receipt by the company of the instrument of  transfer under sub-section (1) or, as the case may be, of the intimation of transmission under sub-section (2), in the case of a transfer or transmission of securities; 

(d) within a period of six months from the date of allotment in the case of any allotment of  debenture: 

Provided that where the securities are dealt with in a depository, the company shall intimate the details of allotment of securities to the depository immediately on allotment of such securities. 

(5) The transfer of any security or other interest of a deceased person in a company made by his legal representative shall, even if the legal representative is not a holder thereof, be valid as if he had been the holder at the time of the execution of the instrument of transfer. 

(6) Where any default is made in complying with the provisions of sub-sections (1) to (5), the company shall be punishable with a fine which shall not be less than twenty-five thousand rupees but which may extend to five lakh rupees and every officer of the company who is in default shall be punishable with fine which shall not be less than ten thousand rupees but which may extend to one lakh rupees. 

(7) Without prejudice to any liability under the Depositories Act, 1996 (22 of 1996), where any depository or depository participant, with an intention to defraud a person, has transferred shares, it shall  be liable under section 447.

हमारा प्रयास कंपनी अधिनियम (Companies Act Section) की धारा 56 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।