Home Blog Page 223

आईपीसी की धारा 487 | किसी ऐसे पात्र से ऊपर मिथ्या चिन्ह बनाना जिसमें माल रखा है | IPC Section- 487 in hindi| Making a false mark upon any receptacle containing goods.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 487 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 487 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 487 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 487 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी पेटी पैकेज या अन्य पात्र के ऊपर, जिसमें माल रखा हुआ हो, यह जानते हुए ऐसी रीति से कोई ऐसा मिथ्या चिन्ह बनायेगा कि उसमें ऐसा माल नहीं है जो उसमें है या यह कि ऐसे पात्र में रखा हुआ माल ऐसी प्रकृति या क्वालिटी का है जो उसकी वास्तविक प्रकृति या क्वालिटी से भिन्न है, तो वह धारा 487 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 487 के अनुसार

किसी ऐसे पात्र से ऊपर मिथ्या चिन्ह बनाना जिसमें माल रखा है-

जो कोई किसी पेटी पैकेज या अन्य पात्र के ऊपर, जिसमें माल रखा हुआ हो, ऐसी रीति से कोई ऐसा मिथ्या चिन्ह बनायेगा, जो इसलिए युक्तियुक्त रूप से प्रकल्पित है कि उससे किसी लोक-सेवक को या किसी अन्य व्यक्ति को यह विश्वास कारित हो जाए कि ऐसे पात्र में ऐसा माल है जो उसमें नहीं है, या यह कि उसमें ऐसा माल नहीं है जो उसमें है या यह कि ऐसे पात्र में रखा हुआ माल ऐसी प्रकृति या क्वालिटी का है जो उसकी वास्तविक प्रकृति या क्वालिटी से भिन्न है, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने वह कार्य कपट करने के आशय के बिना किया है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Making a false mark upon any receptacle containing goods-
Whoever makes any false mark upon any case, package or other receptacle containing goods, in a manner reasonably calculated to cause any public servant or any other person to believe that such receptacle contains, goods which it does not contain or that it does not contain goods which it does contain, or that the goods contained in such receptacle are of a nature or quality different from the real nature or quality thereof. shall, unless he proves that he acted without intent to defraud, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years. or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी पैकेज या पात्र पर, जिसमें माल रखा हुआ हो, इस आशय से मिथ्या चिह्न कपटपूर्वक बनाना कि यह विश्वास कारित हो जाए कि उसमें ऐसा माल है जो उसमें नहीं है, आदि।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 487 के अंतर्गत जो कोई किसी पेटी पैकेज या अन्य पात्र के ऊपर, जिसमें माल रखा हुआ हो, यह जानते हुए ऐसी रीति से कोई ऐसा मिथ्या चिन्ह बनायेगा कि उसमें ऐसा माल नहीं है जो उसमें है या यह कि ऐसे पात्र में रखा हुआ माल ऐसी प्रकृति या क्वालिटी का है जो उसकी वास्तविक प्रकृति या क्वालिटी से भिन्न है, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 487 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी पैकेज या पात्र पर, जिसमें माल रखा हुआ हो, इस आशय से मिथ्या चिह्न कपटपूर्वक बनाना कि यह विश्वास कारित हो जाए कि उसमें ऐसा माल है जो उसमें नहीं है, आदि।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 487 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 486 | कूटकृत सम्पत्ति चिन्ह से चिन्हित माल का विक्रय | IPC Section- 486 in hindi| Selling goods marked with a counterfeit property mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 486 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 486 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 486 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 486 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी माल या चीजों को, स्वयं उन पर या किसी ऐसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र पर, जिसमें ऐसा माल रखा हो, कोई कूटकृत सम्पत्ति-चिन्ह लगा हुआ या छपा हुआ होते हुए, बेचेगा या बेचने के लिए अभिदर्शित करेगा या अपने कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 486 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 486 के अनुसार

कूटकृत सम्पत्ति चिन्ह से चिन्हित माल का विक्रय-

जो कोई किसी माल या चीजों को, स्वयं उन पर या किसी ऐसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र पर, जिसमें ऐसा माल रखा हो, कोई कूटकृत सम्पत्ति-चिन्ह लगा हुआ या छपा हुआ होते हुए, बेचेगा या बेचने के लिए अभिदर्शित करेगा या अपने कब्जे में रखेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि-
(क) इस धारा के विरुद्ध अपराध न करने की सब युक्तियुक्त पूर्वावधानी बरतते हुए, चिन्ह के असलीपन के सम्बन्ध में सन्देह करने के लिए उसके पास कोई कारण अधिकथित अपराध करते समय नहीं था, तथा
(ख) अभियोजक द्वारा या उसकी ओर से मांग किये जाने पर, उसने उन व्यक्तियों के विषय में, जिनसे उसने ऐसा माल या चीजें अभिप्राप्त की थीं, वह सब जानकारी दे दी थी, जो उसकी शक्ति में थी, अथवा
(ग) अन्यथा उसने निर्दोषितापूर्वक कार्य किया था,

वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Selling goods marked with a counterfeit property mark-

Whoever sells, or exposes, or has in possession for sale, any goods or things with a counterfeit property mark affixed to or impressed upon the same or to or upon any case, package or other receptacle in which such goods are contained, shall, unless he proves-
(a) that, having taken all reasonable precautions against committing an offence against this section, he had at the time of the commission of the alleged offence no reason to suspect the genuineness of the mark, and
(b) that, on demand made by or on behalf of the prosecutor, he gave all the information in his power with respect to the person from whom he obtained such goods or things, or
(c) that otherwise he had acted innocently,

be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

कूटकृत सम्पत्ति चिह्न से चिह्नित माल का जानते हुए विक्रय।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 486 के अंतर्गत जो कोई किसी माल या चीजों को, स्वयं उन पर या किसी ऐसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र पर, जिसमें ऐसा माल रखा हो, कोई कूटकृत सम्पत्ति-चिन्ह लगा हुआ या छपा हुआ होते हुए, बेचेगा या बेचने के लिए अभिदर्शित करेगा या अपने कब्जे में रखेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 486 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कूटकृत सम्पत्ति चिह्न से चिह्नित माल का जानते हुए विक्रय।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 486 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 485 | सम्पत्ति-चिन्ह के कूटकरण के लिये कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा | IPC Section- 485 in hindi| Making or possession of any instrument for counterfeiting a property mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 485 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 485 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 485 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 485 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई सम्पत्ति-चिन्ह के कूटकरण के प्रयोजन से कोई डाई, पट्टी या अन्य उपकरण बनायेगा या अपने कब्जे में रखेगा अथवा यह द्योतन करने के प्रयोजन से कि कोई माल ऐसे व्यक्ति का है, जिसका वह नहीं है, किसी सम्पत्ति-चिन्ह को अपने कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 485 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 485 के अनुसार

सम्पत्ति-चिन्ह के कूटकरण के लिये कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा-

जो कोई सम्पत्ति-चिन्ह के कूटकरण के प्रयोजन से कोई डाई, पट्टी या अन्य उपकरण बनायेगा या अपने कब्जे में रखेगा अथवा यह द्योतन करने के प्रयोजन से कि कोई माल ऐसे व्यक्ति का है, जिसका वह नहीं है, किसी सम्पत्ति-चिन्ह को अपने कब्जे में रखेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Making or possession of any instrument for counterfeiting a property mark-
Whoever makes or has in his possession any die, plate or other instrument for the purpose of counterfeiting a property mark, or has in his possession a property mark for the purpose of denoting that any goods belong to a person to whom they do not belong, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी लोक या प्राइवेट सम्पत्ति चिह्न के कूटकरण के लिए कोई डाई, पट्टी या अन्य उपकरण कपटपूर्वक बनाना या अपने कब्जे में रखना ।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 485 के अंतर्गत जो कोई सम्पत्ति-चिन्ह के कूटकरण के प्रयोजन से कोई डाई, पट्टी या अन्य उपकरण बनायेगा या अपने कब्जे में रखेगा अथवा यह द्योतन करने के प्रयोजन से कि कोई माल ऐसे व्यक्ति का है, जिसका वह नहीं है, किसी सम्पत्ति-चिन्ह को अपने कब्जे में रखेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 485 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी लोक या प्राइवेट सम्पत्ति चिह्न के कूटकरण के लिए कोई डाई, पट्टी या अन्य उपकरण कपटपूर्वक बनाना या अपने कब्जे में रखना।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 485 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 484 | लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाये गये चिन्ह का कूटकरण | IPC Section- 484 in hindi| Counterfeiting a mark used by a public servant.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 484 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 484 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 484 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 484 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति-चिन्ह का, जो लोक-सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, या किसी ऐसे चिन्ह का जो लोक-सेवक द्वारा यह द्योतन करने के लिये उपयोग में लाएगा और कोई सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा या किसी विशिष्ट समय या स्थान पर विनिर्मित की गयी है या वह सम्पत्ति किसी विशिष्ट क्वालिटी की है या यह कि वह किसी छूट की हकदार है यह जानते हुए कूटकरण करेगा, तो वह धारा 484 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 484 के अनुसार

लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाये गये चिन्ह का कूटकरण-

जो कोई किसी सम्पत्ति-चिन्ह का, जो लोक-सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, या किसी ऐसे चिन्ह का जो लोक-सेवक द्वारा यह द्योतन करने के लिये उपयोग में लाया जाता हो कि कोई सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा या किसी विशिष्ट समय या स्थान पर विनिर्मित की गयी है, या यह कि वह सम्पत्ति किसी विशिष्ट क्वालिटी की है या किसी विशिष्ट कार्यालय में से पारित हो चुकी है, या यह कि वह किसी छूट की हकदार है, कूटकरण करेगा, या किसी ऐसे चिन्ह को उसे कूटकृत जानते हुए असली के रूप में उपयोग में लायेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Counterfeiting a mark used by a public servant-
Whoever counterfeits any property mark used by a public servant, or any mark used a public servant to denote that any property has been manufactured by a particular person or at a particular time or place, or that the property is of a particular quality or has passed through a particular office, or that it is entitled to any exemption, or uses as genuine any such mark knowing the same to be counterfeit, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का या किसी सम्पत्ति के विनिर्माण, क्वालिटी आदि का द्योतन करने वाले किसी चिह्न का, जो लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, कूटकरण।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 484 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति-चिन्ह का, जो लोक-सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, या किसी ऐसे चिन्ह का जो लोक-सेवक द्वारा यह द्योतन करने के लिये उपयोग में लाएगा और कोई सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा या किसी विशिष्ट समय या स्थान पर विनिर्मित की गयी है या वह सम्पत्ति किसी विशिष्ट क्वालिटी की है या यह कि वह किसी छूट की हकदार है यह जानते हुए कूटकरण करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 484 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का या किसी सम्पत्ति के विनिर्माण, क्वालिटी आदि का द्योतन करने वाले किसी चिह्न का, जो लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, कूटकरण।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 484 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 483 | अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाये गये सम्पत्ति-चिन्ह का कूटकरण | IPC Section- 483 in hindi| Counterfeiting a property mark used by another.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 483 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 483 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 483 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 483 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी सम्पत्ति चिन्ह का, जो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, कूटकरण करेगा, तो वह धारा 483 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 483 के अनुसार

अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाये गये सम्पत्ति-चिन्ह का कूटकरण-

जो कोई किसी सम्पत्ति चिन्ह का, जो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, कूटकरण करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Counterfeiting a property mark used by another-
Whoever counterfeits any property mark used by any other person shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का इस आशय से कूटकरण कि नुकसान या क्षति कारित हो।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 483 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति चिन्ह का, जो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाया जाता हो, कूटकरण करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 483 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का इस आशय से कूटकरण कि नुकसान या क्षति कारित हो।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 483 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 481 | मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना | IPC Section- 481 in hindi | Using a false property mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 481 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 481? साथ ही हम आपको IPC की धारा 481, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 481 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 481 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 481 मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना (Using a false property mark) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 481 के अनुसार

मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना-

जो कोई किसी जंगम सम्पत्ति या माल को या किसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र को, जिसमें जंगम सम्पत्ति या माल रखा है, ऐसी रीति से चिन्हित करता है, या किसी पेटी, पैकेज या अन्य पात्र को, जिस पर कोई चिन्ह है, ऐसी रीति से उपयोग में लाता है, जो इसलिए युक्तियुक्त रूप से प्रकल्पित है कि उससे यह विश्वास कारित हो जाये कि इस प्रकार चिन्हित सम्पत्ति या माल, या इस प्रकार चिन्हित किसी ऐसे पात्र में रखी हुई कोई सम्पत्ति या माल, ऐसे व्यक्ति का है जिसका वह नहीं है, वह मिथ्या सम्पत्ति चिन्ह का उपयोग करता है, यह कहा जाता है।

Using a false property mark-
Whoever marks any movable property or goods or any case, package or other receptacle containing movable property or goods, or uses any case, package or other receptacle having any mark thereon, in a manner reasonably calculated to cause it to be believed that the property or goods so marked, or any property or goods, contained in any such receptacle so marked, belong to a person to whom they do not belong, is said to use a false property mark.

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 481 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद