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आईपीसी की धारा 482 | मिथ्या सम्पत्ति चिन्ह को उपयोग करने के लिये दण्ड | IPC Section- 482 in hindi| Punishment for using a false property mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 482 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 482 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 482 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 482 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी मिथ्या सम्पत्ति-चिन्ह का उपयोग करेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने कपट करने के आशय के बिना कार्य किया है, तो वह धारा 482 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 482 के अनुसार

मिथ्या सम्पत्ति चिन्ह को उपयोग करने के लिये दण्ड-

जो कोई किसी मिथ्या सम्पत्ति-चिन्ह का उपयोग करेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने कपट करने के आशय के बिना कार्य किया है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों, से दण्डित किया जाएगा।

Punishment for using a false property mark-
Whoever uses any false property mark shall, unless he proves that he acted without intent to defraud, be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

मिथ्या सम्पत्ति चिह्न का इस आशय से उपयोग करना कि किसी व्यक्ति को प्रवंचित करे या क्षति करे।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 482 के अंतर्गत जो कोई किसी मिथ्या सम्पत्ति-चिन्ह का उपयोग करेगा, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि उसने कपट करने के आशय के बिना कार्य किया है, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 482 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
मिथ्या सम्पत्ति चिह्न का इस आशय से उपयोग करना कि किसी व्यक्ति को प्रवंचित करे या क्षति करे।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 482 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 479 | सम्पत्ति चिन्ह | IPC Section- 479 in hindi | Property mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 479 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 479? साथ ही हम आपको IPC की धारा 479, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 479 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 479 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 479 सम्पत्ति चिन्ह (Property mark) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 479 के अनुसार

सम्पत्ति चिन्ह-

वह चिन्ह, जो यह द्योतन करने के लिये उपयोग में लाया जाता है कि जंगम सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति की है, सम्पत्ति-चिन्ह कहा जाता है।

Property mark-
A mark used for denoting that movable property belongs to a particular person is called a property mark.

सम्पत्ति चिन्ह क्या है?

साधारण भाषा में सम्पत्ति चिन्ह (Property mark), वह चिन्ह, उसकी पहचान और नाम को उपयोग में लाया जाता है जिससे किसी जंगम सम्पत्ति किसी विशिष्ट व्यक्ति की है इस पहचान को ही सम्पत्ति चिन्ह (Property mark) कहते है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 479 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 477A | लेखा का मिथ्याकरण | IPC Section- 477A in hindi| Falsification of accounts.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 477A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 477A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 477A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 477A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई लिपिक, आफिसर या सेवक होते हुये या लिपिक, आफिसर या सेवक के नाते नियोजित होते या कार्य करते हुये, किसी पुस्तक, इलेक्ट्रानिक अभिलेख, कागज, लेख, मूल्यवान् प्रतिभूति या लेखा को जानबूझकर और कपट करने के आशय से कोई मिथ्या प्रविष्टि करेगा या करने के लिये दुष्प्रेरण करेगा, तो वह धारा 477A के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 477A के अनुसार

लेखा का मिथ्याकरण-

जो कोई लिपिक, आफिसर या सेवक होते हुये या लिपिक, आफिसर या सेवक के नाते नियोजित होते या कार्य करते हुये, किसी पुस्तक, इलेक्ट्रानिक अभिलेख, कागज, लेख, मूल्यवान् प्रतिभूति या लेखा को, जो उसके नियोजक का हो या उसके नियोजक के कब्जे में हो या जिसे उसने नियोजक के लिये या उसकी ओर से प्राप्त किया हो, जानबूझकर और कपट करने के आशय से नष्ट, परिवर्तित, विकृत या मिथ्याकृत करेगा अथवा किसी ऐसी पुस्तक, इलेक्ट्रानिक अभिलेख, कागज, लेख, मूल्यवान् प्रतिभूति या लेखा में जानबूझकर और कपट करने के आशय से कोई मिथ्या प्रविष्टि करेगा या करने के लिये दुष्प्रेरण करेगा, या उसमें से या उसमें किसी तात्विक विशिष्टि का लोप या परिवर्तन करेगा या करने का दुष्प्रेरण करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण- इस धारा के अधीन किसी आरोप में, किसी विशिष्ट व्यक्ति का, जिससे कपट करना आशयित था, नाम बताए बिना या किसी विशिष्ट धनराशि का, जिसके विषय में कपट किया जाना आशयित था या किसी विशिष्ट दिन का, जिस दिन अपराध किया गया था, विनिर्देश किये बिना कपट करने के साधारण आशय का अभिकथन पर्याप्त होगा।

Falsification of accounts-
Whoever, being a clerk, officer or servant, or employed or acting in the capacity of a clerk, officer or servant, wilfully, and with intent to defraud, destroys, alters, mutilates or falsifies any book, electronic record, paper, writing], valuable security or account which belongs to or is in the possession of his employer, or has been received by him for or on behalf of his employer, or wilfully, and with intent to defraud, makes or abets the making of any false entry in. or omits or alters or abets the omission or alteration of any material particular from or in, any such book, electronic record paper, writing, valuable security or account, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.
Explanation- It shall be sufficient in any charge under this section to allege a general intent to defraud without naming any particular person intended to be defrauded or specifying any particular sum of money intended to be the subject of the fraud, or any particular day on which the offence was committed.

लागू अपराध

लेखा का मिथ्याकरण।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 477A के अंतर्गत जो कोई लिपिक, आफिसर या सेवक होते हुये या लिपिक, आफिसर या सेवक के नाते नियोजित होते या कार्य करते हुये, किसी पुस्तक, इलेक्ट्रानिक अभिलेख, कागज, लेख, मूल्यवान् प्रतिभूति या लेखा को जानबूझकर और कपट करने के आशय से कोई मिथ्या प्रविष्टि करेगा या करने के लिये दुष्प्रेरण करेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 477A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लेखा का मिथ्याकरण।सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 477A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 477 | विल, दत्तकग्रहण या प्राधिकार पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रद्द, नष्ट आदि करना | IPC Section- 477 in hindi| Fraudulent cancellation, destruction, etc., of will, authority to adopt, or valuable security.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 477 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 477 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 477 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 477 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से, या लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित करने के आशय से किसी ऐसी दस्तावेज को जो विल या पुत्र के दत्तकग्रहण करने का प्राधिकार-पत्र या कोई मूल्यवान् प्रतिभूति हो, या होना तात्पर्यित हो, रद्द, नष्ट या विरूपित करेगा या रद्द, नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करेगा, या छिपायेगा या छिपाने का प्रयत्न करेगा, या ऐसी दस्तावेज के विषय में रिष्टि करेगा, तो वह धारा 477 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 477 के अनुसार

विल, दत्तकग्रहण या प्राधिकार पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रद्द, नष्ट आदि करना-

जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से, या लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित करने के आशय से किसी ऐसी दस्तावेज को जो विल या पुत्र के दत्तकग्रहण करने का प्राधिकार-पत्र या कोई मूल्यवान् प्रतिभूति हो, या होना तात्पर्यित हो, रद्द, नष्ट या विरूपित करेगा या रद्द, नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करेगा, या छिपायेगा या छिपाने का प्रयत्न करेगा, या ऐसी दस्तावेज के विषय में रिष्टि करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Fraudulent cancellation, destruction, etc., of will, authority to adopt, or valuable security-
Whoever fraudulently or dishonestly, or with intent to cause damage or injury to the public or to any person, cancels, destroys or defaces, or attempt to cancel, destroy or deface, or secretes or attempts to secrete any document, which is or purports to be a will, or an authority to adopt a son, or any valuable security, or commits mischief in respect to such document, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

विल, आदि को कपटपूर्वक नष्ट या विरूपित करना या उसे नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करना, या छिपाना।
सजा- आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 477 के अंतर्गत जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से, या लोक को या किसी व्यक्ति को नुकसान या क्षति कारित करने के आशय से किसी ऐसी दस्तावेज को जो विल या पुत्र के दत्तकग्रहण करने का प्राधिकार-पत्र या कोई मूल्यवान् प्रतिभूति हो, या होना तात्पर्यित हो, रद्द, नष्ट या विरूपित करेगा या रद्द, नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करेगा, या छिपायेगा या छिपाने का प्रयत्न करेगा, या ऐसी दस्तावेज के विषय में रिष्टि करेगा, तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 477 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विल, आदि को कपटपूर्वक नष्ट या विरूपित करना या उसे नष्ट या विरूपित करने का प्रयत्न करना, या छिपाना।आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 477 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 476 | धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना | IPC Section- 476 in hindi| Counterfeiting device or mark used for authenticating documents other than those described in Section 467, or possessing counterfeit marked material.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 476 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 476 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 476 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 476 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 476 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 476 के अनुसार

धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना-

जो कोई किसी पदार्थ के ऊपर, या उसके उपादान में किसी ऐसी अभिलक्षणा या चिन्ह की, जिसे इस संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख के अधिप्रमाणीकरण के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाता हो, कूटकृति यह आशय रखते हुये बनाएगा कि वह ऐसी अभिलक्षणा या ऐसे चिन्ह को, ऐसे पदार्थ पर उस समय कूटरचित की जा रही या उसके पश्चात् कूटरचित की जाने वाली किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक अभिलेख को अधिप्रमाणीकृत का आभास प्रदान करने के प्रयोजन से उपयोग में लाया जाएगा या जो ऐसे आशय से कोई ऐसा पदार्थ अपने कब्जे में रखेगा जिस पर या जिसके उपादान में ऐसी अभिलक्षणा या ऐसे चिन्ह की कूटकृति बनाई गयी हो, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Counterfeiting device or mark used for authenticating documents other than those described in Section 467, or possessing counterfeit marked material-
Whoever counterfeits upon, or in the substance of, any material, any device or mark used for the purpose of authenticating any document or electronic record other than the document described in Section 467 of this Code, intending that such device or mark shall be used for the purpose of giving the appearance of authenticity to any document or electronic record then forged or thereafter to be forged on such material, or who with such intent, has in his possession any material upon or in the substance of which any such device or mark has been counterfeited, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिह्न युक्त पदार्थ को कब्जे में रखना।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 476 के अंतर्गत जो कोई धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखेगा, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 476 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिह्न युक्त पदार्थ को कब्जे में रखना।सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 476 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 475 | धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना | IPC Section- 475 in hindi| Counterfeiting device or mark used for authenticating documents described in Section 467, or possessing counterfeit marked material.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 475 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 475 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 475 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 475 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखेगा, तो वह धारा 475 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 475 के अनुसार

धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना-

जो कोई किसी पदार्थ के ऊपर, या उसके उपादान में, किसी ऐसी अभिलक्षणा या चिन्ह की, जिसे इस संहिता की धारा 467 में वर्णित किसी दस्तावेज के अधिप्रमाणीकरण के प्रयोजन के लिये उपयोग में लाया जाता हो, कूटकृति यह आशय रखते हुये बनायेगा कि ऐसी अभिलक्षणा या ऐसे चिन्ह की ऐसे पदार्थ पर उस समय कूटरचित की जा रही या उसके पश्चात् कूटरचित की जाने वाली किसी दस्तावेज को अधिप्रमाणीकृत का आभास प्रदान करने के प्रयोजन से उपयोग में लाया जायेगा या जो ऐसे आशय से कोई ऐसा पदार्थ अपने कब्जे में रखेगा, जिस पर या जिसके उपादान में ऐसी अभिलक्षणा को या ऐसे चिन्ह की कूटकृति बनायी गयी हो, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक को हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Counterfeiting device or mark used for authenticating documents described in Section 467, or possessing counterfeit marked material-
Whoever counterfeits upon, or in the substance of, any material, any device or mark used for the purpose of authenticating any document described in Section 467 of this Code, intending that such device or mark shall be used for the purpose of giving the appearance of authenticity to any document then forged or thereafter to be forged on such material, or who, with such intent, has in his possession any material upon or in the substance of which any such device or mark has been counterfeited, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिह्न युक्त पदार्थ को कब्जे में रखना।
सजा- आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 475 के अंतर्गत जो कोई धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिये उपयोग में लायी जाने वाली अभिलक्षणा या चिन्ह की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिन्हयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखेगा, तो वह आजीवन कारावास से या दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 475 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकृति बनाना या कूटकृत चिह्न युक्त पदार्थ को कब्जे में रखना।आजीवन कारावास या सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।गैर-संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 475 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।