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आईपीसी की धारा 438 | धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिये दण्ड | IPC Section- 438 in hindi| Punishment for the mischief described in Section 437 committed by fire or explosive substance.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 438 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 438 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 438 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 438 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी रिष्टि करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, तो वह धारा 438 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 438 के अनुसार

धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि के लिये दण्ड-

जो कोई अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी रिष्टि करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, जैसी अन्तिम पूर्ववर्ती धारा में वर्णित है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Punishment for the mischief described in Section 437 committed by fire or explosive substance-
Whoever commits, or attempts to commit, by fire or any explosive substance, such mischief as is described in the last preceding section, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

पिछली धारा में वर्णित रिष्टि जब अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई हो।
सजा- आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 438 के अंतर्गत जो कोई अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा ऐसी रिष्टि करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, जैसी अन्तिम पूर्ववर्ती धारा में वर्णित है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 438 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल नही सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पिछली धारा में वर्णित रिष्टि जब अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई हो।आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 438 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 437 | तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि | IPC Section- 437 in hindi| Mischief with intent to destroy or make unsafe a decked vessel or one of twenty tons burden.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 437 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 437 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 437 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 437 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बना देने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्द्वारा उसे नष्ट करेगा, या सापद बना देगा, उस जलयान की रिष्टि करेगा, तो वह धारा 437 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 437 के अनुसार

तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि–

जो कोई किसी तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बना देने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्द्वारा उसे नष्ट करेगा, या सापद बना देगा, उस जलयान की रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Mischief with intent to destroy or make unsafe a decked vessel or one of twenty tons burden-
Whoever commits mischief to any decked vessel or any vessel of a burden of twenty tons or upwards, intending to destroy or render unsafe, or knowing it to be likely that he will thereby destroy or render unsafe, that vessel, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि।
सजा- दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 437 के अंतर्गत जो कोई किसी तल्लायुक्त जलयान या बीस टन या उससे अधिक बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बना देने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्द्वारा उसे नष्ट करेगा, या सापद बना देगा, उस जलयान की रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 437 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या सापद बनाने के आशय से रिष्टि।दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 437 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 436 | गृह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि | IPC Section- 436 in hindi| Mischief by fire or explosive substance with intent to destroy house. etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 436 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 436 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 436 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 436 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी ऐसे निर्माण का, जो मामूली तौर पर उपासना-स्थान के रूप में या मानव विकास के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्वारा उसका नाश कारित करेगा, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह धारा 436 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 436 के अनुसार

गृह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि-

जो कोई किसी ऐसे निर्माण का, जो मामूली तौर पर उपासना-स्थान के रूप में या मानव विकास के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्वारा उसका नाश कारित करेगा, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Mischief by fire or explosive substance with intent to destroy house. etc-
Whoever commits mischief by fire or any explosive substance, intending to cause, or knowing it to be likely that he will thereby cause, the destruction of any building which is ordinarily used as a place of worship or as a human dwelling or as a place for the custody of property, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

गृह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि।
सजा- आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 436 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे निर्माण का, जो मामूली तौर पर उपासना-स्थान के रूप में या मानव विकास के रूप में या सम्पत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में आता हो, नाश कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्वारा उसका नाश कारित करेगा, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 436 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
गृह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि।आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 436 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 435 | सौ रुपये का या (कृषि उपज की दशा में) दस रुपये का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि | IPC Section- 435 in hindi| Mischief by fire or explosive substance with intent to cause damage to amount of one hundred or (in case of agricultural produce) ten rupees.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 435 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 435 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 435 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 435 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी सम्पत्ति को, एक सौ रुपये या उससे अधिक का या (जहाँ कि सम्पत्ति कृषि-उपज हो, वहाँ) दस रुपये या उससे अधिक का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्द्वारा ऐसा नुकसान कारित करेगा, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह धारा 435 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 435 के अनुसार

सौ रुपये का या (कृषि उपज की दशा में) दस रुपये का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि-

जो कोई किसी सम्पत्ति को, एक सौ रुपये या उससे अधिक का या (जहाँ कि सम्पत्ति कृषि-उपज हो, वहाँ) दस रुपये या उससे अधिक का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्द्वारा ऐसा नुकसान कारित करेगा, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Mischief by fire or explosive substance with intent to cause damage to amount of one hundred or (in case of agricultural produce) ten rupees-
Whoever commits mischief by fire or any explosive substance, intending to cause, or knowing it to be likely that he will thereby cause, damage to any property to the amount of one hundred rupees or upwards or (where the property is agricultural produce) ten rupees or upwards, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

सौ रुपये का या उससे अधिक का, अथवा कृषि उपज की दशा में दस रुपये या उससे अधिक का, नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 435 के अंतर्गत जो कोई किसी सम्पत्ति को, एक सौ रुपये या उससे अधिक का या (जहाँ कि सम्पत्ति कृषि-उपज हो, वहाँ) दस रुपये या उससे अधिक का नुकसान कारित करने के आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि वह तद्द्वारा ऐसा नुकसान कारित करेगा, अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 435 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
सौ रुपये का या उससे अधिक का, अथवा कृषि उपज की दशा में दस रुपये या उससे अधिक का, नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 435 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 434 | लोक प्राधिकारी द्वारा लगाये गये भूमि-चिन्ह को नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि | IPC Section- 434 in hindi| Mischief by destroying or moving, etc., a land-mark fixed by public authority.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 434 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 434 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 434 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 434 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाये गये किसी भूमि-चिन्ह के नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिन्ह ऐसे भूमि-चिन्ह के रूप में कम उपयोगी बन जाए, रिष्टि करेगा, तो वह धारा 434 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 434 के अनुसार

लोक प्राधिकारी द्वारा लगाये गये भूमि-चिन्ह को नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि-

जो कोई लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाये गये किसी भूमि-चिन्ह के नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिन्ह ऐसे भूमि-चिन्ह के रूप में कम उपयोगी बन जाए, रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Mischief by destroying or moving, etc., a land-mark fixed by public authority-
Whoever commits mischief by destroying or moving any land-mark fixed by the authority of a public servant, or by any act which renders such landmark less useful as such, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक प्राधिकारी द्वारा लगाये गये भूमि-चिन्ह को नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 434 के अंतर्गत जो कोई लोक-सेवक के प्राधिकार द्वारा लगाये गये किसी भूमि-चिन्ह के नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे ऐसा भूमि चिन्ह ऐसे भूमि-चिन्ह के रूप में कम उपयोगी बन जाए, रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 434 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक प्राधिकारी द्वारा लगाये गये भूमि-चिन्ह को नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि।एक वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 434 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 433 | किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि | IPC Section- 433 in hindi| Mischief by destroying, moving or rendering less useful a lighthouse or sea-mark.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 433 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 433 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 433 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 433 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी दीपगृह को या समुद्री चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिये मार्ग प्रदर्शन के लिये रखी गयी हो, नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा दीपगृह, समुद्री चिह्न, बोया या, पूर्वोक्त जैसी अन्य चीज नौचालकों के लिये मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाये, रिष्टि करेगा, तो वह धारा 433 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 433 के अनुसार

किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि–

जो कोई किसी दीपगृह को या समुद्री चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिये मार्ग प्रदर्शन के लिये रखी गयी हो, नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा दीपगृह, समुद्री चिह्न, बोया या, पूर्वोक्त जैसी अन्य चीज नौचालकों के लिये मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाये, रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

Mischief by destroying, moving or rendering less useful a lighthouse or sea-mark-
Whoever commits mischief by destroying or moving any light-house or other light used as a sea-mark, or any sea-mark or buoy or other thing placed as a guide for navigators, or by any act which renders any such light-house, sea-mark. buoy or other such thing as aforesaid less useful as a guide for navigators, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करने या हटाने या कम उपयोगी बनाने अथवा किसी मिथ्या प्रकाश को प्रदर्शित करने द्वारा रिष्टि।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 433 के अंतर्गत जो कोई किसी दीपगृह को या समुद्री चिह्न के रूप में उपयोग में आने वाले अन्य प्रकाश के, या किसी समुद्री चिह्न या बोया या अन्य चीज के, जो नौ-चालकों के लिये मार्ग प्रदर्शन के लिये रखी गयी हो, नष्ट करने या हटाने द्वारा अथवा कोई ऐसा कार्य करने द्वारा, जिससे कोई ऐसा दीपगृह, समुद्री चिह्न, बोया या, पूर्वोक्त जैसी अन्य चीज नौचालकों के लिये मार्ग प्रदर्शक के रूप में कम उपयोगी बन जाये, रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 433 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी दीपगृह या समुद्री चिन्ह को नष्ट करने या हटाने या कम उपयोगी बनाने अथवा किसी मिथ्या प्रकाश को प्रदर्शित करने द्वारा रिष्टि।सात वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 433 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।