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आईपीसी की धारा 432 | लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि | IPC Section- 432 in hindi| Mischief by causing inundation or obstruction to public drainage attended with damage.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 432 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 432 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 432 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 432 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक जल-निकास में क्षतिप्रद नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो करेगा, तो वह धारा 432 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 432 के अनुसार

लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि–

जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक जल-निकास में क्षतिप्रद नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जायेगा।

Mischief by causing inundation or obstruction to public drainage attended with damage-
Whoever commits mischief by doing any act which causes or which he knows to be likely to cause an inundation or an obstruction to any public drainage attended with injury or damage, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि।
सजा- पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 432 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक जल-निकास में क्षतिप्रद नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित हो जाए, या होना वह सम्भाव्य जानता हो करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 432 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि।पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 432 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 431 | लोक सड़क, पुल, नदी या जल-सरणी को क्षति पहुँचाकर रिष्टि | IPC Section- 431 in hindi| Mischief by injury to public road, bridge, river or channel.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 431 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 431 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 431 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 431 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य नदीं या प्राकृतिक या कृत्रिम नाव्य जलसरिणी को यात्रा या सम्पत्ति प्रवहण के लिये अगम्य या कम निरापद बना दिया जाये या बना दिया जाना वह सम्भाव्य जानता हो करेगा, तो वह धारा 431 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 431 के अनुसार

लोक सड़क, पुल, नदी या जल-सरणी को क्षति पहुँचाकर रिष्टि–

जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य नदीं या प्राकृतिक या कृत्रिम नाव्य जलसरिणी को यात्रा या सम्पत्ति प्रवहण के लिये अगम्य या कम निरापद बना दिया जाये या बना दिया जाना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Mischief by injury to public road, bridge, river or channel-
Whoever commits mischief by doing any act which renders or which he knows to be likely to render any public road, bridge, navigable river or navigable channel, natural or artificial, impassable or less safe for travelling or conveying property, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

लोक सड़क, पुल, नाव्य नदी अथवा नाव्य जल सारणी को क्षति पहुंचाने और उसे यात्रा या संपत्ति प्रवहरण के लिए अगम्य या कम निरापद बना देने द्वारा रिष्टि।
सजा- पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 431 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे किसी लोक सड़क, पुल, नाव्य नदीं या प्राकृतिक या कृत्रिम नाव्य जलसरिणी को यात्रा या सम्पत्ति प्रवहण के लिये अगम्य या कम निरापद बना दिया जाये या बना दिया जाना वह सम्भाव्य जानता हो करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 431 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लोक सड़क, पुल, नाव्य नदी अथवा नाव्य जल सारणी को क्षति पहुंचाने और उसे यात्रा या संपत्ति प्रवहरण के लिए अगम्य या कम निरापद बना देने द्वारा रिष्टि।पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 431 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 430 | सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि | IPC Section- 430 in hindi| Mischief by injury to works of irrigation or by wrongfully diverting water.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 430 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 430 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 430 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 430 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कृषिक प्रयोजनों के लिए, या मानव-प्राणियों के या उन जीव जन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित करेगा, तो वह धारा 430 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 430 के अनुसार

सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि-

जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कृषिक प्रयोजनों के लिए, या मानव-प्राणियों के या उन जीव जन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित होती हो, या कमी कारित होना वह सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायगा।

Mischief by injury to works of irrigation or by wrongfully diverting water-
Whoever commits mischief by doing any act which causes, or which he knows to be likely to cause, a diminution of the supply of water for agricultural purposes, or for food or drink for human beings or for animals which are property, or for cleanliness or for carrying on any manufacture, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

कृषक प्रयोजनों, आदि के जलप्रदाय में कमी करने द्वारा रिष्टि।
सजा- पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 430 के अंतर्गत जो कोई किसी ऐसे कार्य के करने द्वारा रिष्टि करेगा, जिससे कृषिक प्रयोजनों के लिए, या मानव-प्राणियों के या उन जीव जन्तुओं के, जो सम्पत्ति है, खाने या पीने के या सफाई के या किसी विनिर्माण को चलाने के जलप्रदाय में कमी कारित करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 430 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
कृषक प्रयोजनों, आदि के जलप्रदाय में कमी करने द्वारा रिष्टि।पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 430 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 429 | किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपये के मूल्य के किसी जीव-जन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि | IPC Section- 429 in hindi| Mischief by killing or maiming cattle, etc., of any value or any animal of the value of fifty rupees.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 429 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 429 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 429 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 429 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी हाथी, ऊंट, घोड़े, खच्चर, भैंस, सांड़, गाय या बैल को, चाहे उसका कुछ भी मूल्य हो, या पचास रुपये या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीव-जन्तु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह धारा 429 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 429 के अनुसार

किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपये के मूल्य के किसी जीव-जन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि-

जो कोई किसी हाथी, ऊंट, घोड़े, खच्चर, भैंस, सांड़, गाय या बैल को, चाहे उसका कुछ भी मूल्य हो, या पचास रुपये या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीव-जन्तु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Mischief by killing or maiming cattle, etc., of any value or any animal of the value of fifty rupees-
Whoever commits mischief by killing, poisoning, maiming or rendering useless, any elephant, camel, horse, mule, buffalo, bull, cow or ox, whatever may be the value thereof, or any other animal of the value of fifty rupees or upwards, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to five years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

किसी मूल्य के हांथी, ऊंट, घोड़े आदि को अथवा पंचास रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीवजंतु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरूपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि।
सजा- पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 429 के अंतर्गत जो कोई किसी हाथी, ऊंट, घोड़े, खच्चर, भैंस, सांड़, गाय या बैल को, चाहे उसका कुछ भी मूल्य हो, या पचास रुपये या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीव-जन्तु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 429 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी मूल्य के हांथी, ऊंट, घोड़े आदि को अथवा पंचास रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी भी अन्य जीवजंतु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरूपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि।पांच वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 429 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 428 | दस रुपये के मूल्य के जीव-जन्तु का वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि | IPC Section- 428 in hindi| Mischief by killing or maiming animal of the value of ten rupees.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 428 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 428 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 428 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 428 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई दस रुपये या उससे अधिक के मूल्य के किसी जीव-जन्तु या जीव-जन्तुओं का वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह धारा 428 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 428 के अनुसार

दस रुपये के मूल्य के जीव-जन्तु का वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि–

जो कोई दस रुपये या उससे अधिक के मूल्य के किसी जीव-जन्तु या जीव-जन्तुओं का वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Mischief by killing or maiming animal of the value of ten rupees-
Whoever commits mischief by killing, poisoning, maiming or rendering useless, any animal or animals of the value of ten rupees or upwards, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

दस रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी जीवजंतु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरूपयोगी बनने द्वारा रिष्टि।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 428 के अंतर्गत जो कोई दस रुपये या उससे अधिक के मूल्य के किसी जीव-जन्तु या जीव-जन्तुओं का वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरुपयोगी बनाने द्वारा रिष्टि करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 428 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
दस रुपए या उससे अधिक मूल्य के किसी जीवजंतु को वध करने, विष देने, विकलांग करने या निरूपयोगी बनने द्वारा रिष्टि।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 428 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 427 | रिष्टि जिससे पचास रुपये का नुकसान होता है | IPC Section- 427 in hindi| Mischief causing damage to the amount of fifty rupees.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 427 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 427 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 427 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 427 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई रिष्टि करेगा और तद्द्वारा पचास रुपये या उससे अधिक की रिष्टि, हानि या नुकसान कारित करेगा, तो वह धारा 427 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 427 के अनुसार

रिष्टि जिससे पचास रुपये का नुकसान होता है-

जो कोई रिष्टि करेगा और तद्द्वारा पचास रुपये या उससे अधिक की रिष्टि, हानि या नुकसान कारित करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Mischief causing damage to the amount of fifty rupees―
Whoever commits mischief and thereby causes loss or damage to the amount of fifty rupees or upwards, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

रिष्टि और तद्दवारा पचास रुपये या उससे अधिक रकम का भुगतान कारित करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 427 के अंतर्गत जो कोई रिष्टि करेगा और तद्द्वारा पचास रुपये या उससे अधिक की रिष्टि, हानि या नुकसान कारित करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 427 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
रिष्टि और तद्दवारा पचास रुपये या उससे अधिक रकम का भुगतान कारित करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 427 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।