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आईपीसी की धारा 416 | प्रतिरूपण द्वारा छल | IPC Section- 416 in hindi | Cheating by personation.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 416 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 416? साथ ही हम आपको IPC की धारा 416, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 416 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 416 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 416 प्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by personation) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 416 के अनुसार

प्रतिरूपण द्वारा छल—

कोई व्यक्ति “प्रतिरूपण द्वारा छल करता है” यह तब कहा जाता है जब वह यह अपदेश करके कि वह कोई अन्य व्यक्ति है, या एक व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति के रूप में जानते हुये प्रतिस्थापित करके, या यह व्यपदिष्ट करके कि वह या कोई अन्य व्यक्ति, कोई ऐसा व्यक्ति है, जो वस्तुतः उससे या अन्य व्यक्ति से भिन्न है, छल करता है।
स्पष्टीकरण—यह अपराध हो जाता है चाहे वह व्यक्ति जिसका प्रतिरूपण किया गया है वास्तविक व्यक्ति हो या काल्पनिक ।
दृष्टान्त
(क) क, उसी नाम का अमुक धनवान बैंकर है, इस अपदेश द्वारा छल करता है। क प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।
(ख) ख, जिसकी मृत्यु हो चुकी है, होने का अपदेश करने द्वारा क छल करता है। क प्रतिरूपण द्वारा छल करता है।

Cheating by personation-
A person is said to ‘cheat by personation’ if he cheats by pretending to be some other person, or by knowingly substituting one person for another, or representing that he or any other person is a person other than he or such other person really is.
Explanation- The offence is committed whether the individual personated is a real or imaginary person.
Illustrations
(a) A cheats by pretending to be a certain rich banker of the same name. A cheats by presonation.
(b) A cheats by pretending to be B, a person who is deceased. A cheats by personation.

प्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by personation) क्या है?


साधारण भाषा में छल (Cheating), जो कोई भेष बदलकर किसी व्यक्ति को कपटपूर्वक बेईमानी से किसी कुचक्र को इस प्रकार रचकर, उसकी किसी वस्तु को पाने के उद्देश्य से इस प्रकार भेष बदलकर, या अपनी पहचान छिपाकर उत्प्रेरित करता है या कराता है या कोई ऐसा कोई कार्य करता है, जिससे वह कपटपूर्वक उसकी किसी मूल्यवान वस्तु या संपत्ति को उसे सौप दे। वह प्रतिरूपण द्वारा छल (Cheating by personation) करता है, यह कहा जायेगा।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 416 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 415 | छल | IPC Section- 415 in hindi | Cheating.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 415 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 415? साथ ही हम आपको IPC की धारा 415, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 415 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 415 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 415 छल (Cheating) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 415 के अनुसार

छल–

जो कोई किसी व्यक्ति से प्रवंचना कर उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, कपटपूर्वक या बेईमानी से उत्प्रेरित करता है कि वह कोई सम्पत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या यह सम्मति दे दे कि कोई व्यक्ति किसी सम्पत्ति को रख रखे या साशय उस व्यक्ति को, जिसे इस प्रकार प्रवंचित किया गया है, उत्प्रेरित करता है कि वह ऐसा कोई कार्य करे, या करने का लोप करे जिसे वह यदि उसे हर प्रकार प्रवंचित न किया गया होता तो, न करता, या करने का लोप न करता, और जिस कार्य या लोप से उस व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, ख्याति सम्बन्धी, या साम्पत्तिक नुकसान या अपहानि कारित होती है, या कारित होनी सम्भाव्य है, वह ‘छल’ करता है, यह कहा जाता है।
स्पष्टीकरण–तथ्यों का बेईमानी से छिपाना इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत प्रवंचना है।
दृष्टान्त
(क) क सिविल सेवा में होने का मिथ्या अपदेश करके साशय य से प्रवंचना करता है, और इस प्रकार बेईमानी से य को उत्प्रेरित करता है कि वह उसे उधार पर माल ले लेने दे, जिसका मूल्य चुकाने का उसका इरादा नहीं है। क छल करता है।
(ख) क एक वस्तु पर कूटकृत चिन्ह बना कर य से साशय प्रवंचना करके उसे यह विश्वास कराता है कि वह वस्तु किसी प्रसिद्ध विनिर्माता द्वारा बनायी गयी है, और इस प्रकार उस वस्तु का क्रय करने और उसका मूल्य चुकाने के लिये य को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। क छल करता है।
(ग) क, य को किसी वस्तु का नकली सैम्पल दिखलाकर य से साशय प्रवंचना करके उसे यह विश्वास कराता है कि वह वस्तु उस सैम्पल के अनुरूप है, और तद्द्वारा उस वस्तु को खरीदने और उसका मूल्य चुकाने के लिये य को बेईमानी से उत्प्रेरित करता है। क छल करता है।
(घ) क किसी वस्तु का मूल्य देने में ऐसी कोठी पर हुण्डी करके, जहाँ क का कोई धन जमा नहीं है, और जिसके द्वारा क को हुण्डी का अनादर किये जाने की प्रत्याशा है, आशय से य की प्रवंचना करता है, और तद्द्वारा बेईमानी से य को उत्प्रेरित करता है कि वह वस्तु परिदत्त कर दे, जिसका मूल्य चुकाने का उसका आशय नहीं है। क छल करता है।

Cheating-
Whoever, by deceiving any person, fraudulently or dishonestly induces the person so deceived to deliver any property to any person, or to consent that any person shall retain any property, or intentionally induces the person so deceived to do or omit to do anything which he would not do or omit if he were not so deceived, and which act or omission causes or is likely to cause damage or harm to that person in body, mind, reputation or property, is said to “cheat”.
Explanation- dishonest concealment of facts is a decep-tion within the meaning of this section.
Illustrations
(a) A, by falsely pretending to be in the Civil Service, intentionally deceives Z, and thus dishonestly induces Z to let him have on credit goods for which he does not mean to pay. A cheats.
(b) A, by putting a counterfeit mark on an article, intentionally deceives Z into a belief that this article was made by a certain celebrated manufacturer, and thus dishonestly induces Z to buy and pay for the article. A cheats.
(c) A, by exhibiting to Z a false sample of an article, intentionally deceives into believing that the article correspond with the sample, and thereby dishonestly induces Z to buy and pay for the article. A cheats.
(d) A, by tending in payment for an article a bill on a house with which A keeps no money, and by which A expects that the bill will be dishonoured, intentionally deceives Z, and thereby dishonestly induces Z to deliver the article, intending not to pay for it. A cheats.

छल क्या है?

साधारण भाषा में छल (Cheating), जो कोई किसी व्यक्ति को कपटपूर्वक बेईमानी से किसी कुचक्र को इस प्रकार रचकर, उसकी किसी वस्तु को पाने के उद्देश्य से इस प्रकार उत्प्रेरित करता है या ऐसा कोई कार्य करता है, जिससे वह कपटपूर्वक उसकी किसी मूल्यवान वस्तु या संपत्ति को उसे सौप दे। जिस कार्य या लोप के कारण किसी व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक ख्याति या संपत्ति नुकसान की अपहानी कारित होती है, या होने की संभावना होती है, वह छल (Cheating) करता है, यह कहा जायेगा।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 415 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 414 | चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना | IPC Section- 414 in hindi| Assisting in concealment of stolen property.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 414 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 414 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 414 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 414 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई ऐसी सम्पत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर-उधर करने में, स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, तो वह धारा 414 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 414 के अनुसार

चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना-

जो कोई ऐसी सम्पत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर-उधर करने में, स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Assisting in concealment of stolen property- Whoever voluntarily assists in concealing or disposing of or making away with property which he knows or has reason to believe to be stolen property, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

चुराई हुई संपत्ति को यह जानते हुए कि वह चुराई हुई है, छिपाने में या व्ययनित करने में सहायता करना।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 414 के अंतर्गत जो कोई ऐसी सम्पत्ति को छिपाने में, या व्ययनित करने में, या इधर-उधर करने में, स्वेच्छया सहायता करेगा, जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 414 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
चुराई हुई संपत्ति को यह जानते हुए कि वह चुराई हुई है, छिपाने में या व्ययनित करने में सहायता करना।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट व्दारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 414 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 413 | चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना | IPC Section- 413 in hindi| Habitually dealing in stolen property.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 413 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 413 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासत: प्राप्त करेगा, या अभ्यासत: उसमें व्यवहार करेगा, तो वह धारा 413 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 413 के अनुसार

चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना-

जो कोई ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासत: प्राप्त करेगा, या अभ्यासत: उसमें व्यवहार करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Habitually dealing in stolen property-
Whoever habitually receives or deals in property which he knows or has reason to believe to be stolen property, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 413 के अंतर्गत जो कोई ऐसी सम्पत्ति, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, अभ्यासत: प्राप्त करेगा, या अभ्यासत: उसमें व्यवहार करेगा, तो वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 413 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासत: व्यापार करना।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 413 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 412 | ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है | IPC Section- 412 in hindi| Dishonestly receiving property stolen in the commission of a dacoity.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 412 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 412 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 412 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 412 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, यह जानते हुये या विश्वास करने का कारण रखते हुये कि वह डकैती द्वारा प्राप्त ही गई है, तो वह धारा 412 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 412 के अनुसार

ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है-

जो कोई ऐसी चुराई हुई सम्पत्ति को बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, जिसके कब्जे के विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डकैती द्वारा अन्तरित की गयी है, अथवा किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसके सम्बन्ध में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह डाकुओं की टोली का है या रहा है, ऐसी सम्पत्ति जिसके विषय में वह यह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है कि वह चुराई हुई है, बेईमानी से प्राप्त करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा, और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

Dishonestly receiving property stolen in the commission of a dacoity-
Whoever dishonestly receives or retains any stolen property, the possession whereof he knows or has reason to believe to have been transferred by the commission of dacoity, or dishonestly receives from a person, whom he knows or has reason to believe to belong or to have belonged to a gang of dacoits, property which he knows or has reason to believe to have been stolen, shall be punished with imprisonment for life, or with rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

चुराई हुई संपत्ति को उसे चुराई हुई जानते हुए, कि वह डकैती द्वारा प्राप्त की गई है, अभिप्राप्त करना।
सजा- आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 412 के अंतर्गत जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, यह जानते हुये या विश्वास करने का कारण रखते हुये कि वह डकैती द्वारा प्राप्त ही गई है, तो वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा, और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 412 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
चुराई हुई संपत्ति को उसे चुराई हुई जानते हुए, कि वह डकैती द्वारा प्राप्त की गई है, अभिप्राप्त करना।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठिन कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 412 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 411 | चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना | IPC Section- 411 in hindi| Dishonestly receiving stolen property.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 411 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 411 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 411 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 411 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुये या विश्वास करने का कारण रखते हुये कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, तो वह धारा 411 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 411 के अनुसार

चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना-

जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुये या विश्वास करने का कारण रखते हुये कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Dishonestly receiving stolen property- Whoever dishonestly receives or retains any stolen property, knowing or having reason to believe the same to be stolen property, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

चुराई हुई संपत्ति को उसे चुराई हुई जानते हुए, बेईमानी से प्राप्त करना।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 411 के अंतर्गत जो कोई किसी चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुये या विश्वास करने का कारण रखते हुये कि वह चुराई हुई सम्पत्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या रखेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा या जुर्माने से या दोनो से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 411 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नहीं मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
चुराई हुई संपत्ति को उसे चुराई हुई जानते हुए, बेईमानी से प्राप्त करना।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।संज्ञेयगैर-जमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 411 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।