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आईपीसी की धारा 426 | रिष्टि के लिये दंड | IPC Section- 426 in hindi| Punishment for mischief.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 426 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 426 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 426 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 426 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी व्यक्ति की संपत्ति अथवा मूल्यवान वस्तु को नष्ट करने या स्थिति बदलने या किसी मूल्यवान वस्तु की उपयोगिता नष्ट करने या कम करने अथवा किसी मूल्यवान वस्तु को गलत इरादे से हानि पहुंचाना या नष्ट करेगा, तो वह व्यक्ति रिष्टि के लिये दंड का अपराधी होगा, यह धारा 426 रिष्टि के लिये दंड एवं जुर्माने को परिभाषित करती है।

आईपीसी की धारा 426 के अनुसार

रिष्टि के लिये दंड-

जो कोई रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

Punishment for mischief-
Whoever commits mischief shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months, or with fine, or with both.

लागू अपराध

रिष्टि।
सजा- तीन मास के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 426 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति की संपत्ति अथवा मूल्यवान वस्तु को नष्ट करने या स्थिति बदलने या किसी मूल्यवान वस्तु की उपयोगिता नष्ट करने या कम करने अथवा किसी मूल्यवान वस्तु को गलत इरादे से हानि पहुंचाना या नष्ट करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 426 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
रिष्टि।तीन मास के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 426 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 425 | रिष्टि | IPC Section- 425 in hindi | Mischief.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 425 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 425? साथ ही हम आपको IPC की धारा 425, क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

IPC की धारा 425 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 425 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। भारतीय दंड संहिता की धारा 425 रिष्टि (Mischief) को परिभाषित किया गया है, इस लेख के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे।

आईपीसी की धारा 425 के अनुसार

रिष्टि–

जो कोई इस आशय से, या यह सम्भाव्य जानते हुये कि, वह लोक को या किसी व्यक्ति को सदोष हानि या नुकसान कारित करे, किसी सम्पत्ति का नाश या किसी सम्पत्ति में या उसकी स्थिति में ऐसी तब्दीली कारित करता है, जिससे उसका मूल्य या उपयोगिता नष्ट या कम हो जाती है, या उस पर क्षतिकारक प्रभाव पड़ता है, वह “रिष्टि” करता है।
स्पष्टीकरण 1- रिष्टि के अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी क्षतिग्रस्त या नष्ट सम्पत्ति के स्वामी को हानि या नुकसान कारित करने का आशय रखे। यह पर्याप्त है कि उसका यह आशय है या वह यह सम्भाव्य जानता है कि वह किसी सम्पत्ति को क्षति करके किसी व्यक्ति को, चाहे वह सम्पत्ति उस व्यक्ति की हो या नहीं, सदोष हानि या नुकसान कारित करे।
स्पष्टीकरण 2- ऐसी सम्पत्ति पर प्रभाव डालने वाले कार्य द्वारा, जो उस कार्य को करने वाले व्यक्ति की हो, या संयुक्त रूप से उस व्यक्ति की और अन्य व्यक्तियों की हो, रिष्टि की जा सकेगी।
दृष्टान्त
(क) य की सदोष हानि कारित करने के आशय से य की मूल्यवान् प्रतिभूतियों को क स्वेच्छया जला देता है। क ने रिष्टि की है।
(ख) य की सदोष हानि करने के आशय से, उसके बर्फ घर में क पानी छोड़ देता है, और इस प्रकार बर्फ को गला देता है। क ने रिष्टि की है।
(ग) क इस आशय से य की अँगूठी नदी में स्वेच्छया फेंक देता है कि य को तद्द्वारा सदोष हानि कारित करे। क ने रिष्टि की है।

Mischief-
Whoever, with intent to cause, or knowing that he is likely to cause, wrongful loss or damage to the public or to any person, causes the destruction of any property, or any such change in any property or in the situation thereof as destroys or diminishes its value or utility, or affects it injuriously, commits “mischief”.
Explanation 1- It is not essential to the offence of mischief that the offender should intend to cause loss or damage to the owner of the property injured or destroyed. It is sufficient if he intends to cause, or knows that he is likely to cause, wrongful loss or damage to any person by injuring any property, whether it belongs to that person or not.
Explanation 2- Mischief may be committed by an act affecting property belonging to the person who commits the act, or to that person and others jointly.
Illustrations
(a) A voluntarily burns a valuable security belonging to Z intending to cause wrongful loss to Z. A has committed mischief.
(b) A introduces water into an ice-house belonging to Z, and thus causes the ice to melt, intending wrongful loss to Z. A has committed mischief.
(c) A voluntarily throws into a river a ring belonging to Z, with the intention of thereby causing wrongful loss to Z. A has committed mischief.

रिष्टि क्या है?

साधारण भाषा में रिष्टि (Mischief), जो कोई किसी व्यक्ति की संपत्ति अथवा मूल्यवान वस्तु को नष्ट करने या स्थिति बदलने या किसी मूल्यवान वस्तु की उपयोगिता नष्ट करने या कम करने अथवा किसी मूल्यवान वस्तु को गलत इरादे से हानि पहुंचाना या नष्ट करना ही वह रिष्टि (Mischief) कहा जाता है।

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 425 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

आईपीसी की धारा 424 | अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के सम्बन्ध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन | IPC Section- 424 in hindi| Dishonest or fraudulent execution of deed of transfer containing false statement of consideration.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 424 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 424 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 424 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 424 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की किसी सम्पत्ति को छिपाएगा या अपसारित करेगा, या उसके छिपाये जाने में, या अपसारित किये जाने में बेईमानी से या कपटपूर्वक सहायता करेगा, या बेईमानी से किसी ऐसी मांग या दावे को, जिसका वह हकदार है, छोड़ देगा, तो वह धारा 424 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 424 के अनुसार

सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना—

जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की किसी सम्पत्ति को छिपाएगा या अपसारित करेगा, या उसके छिपाये जाने में, या अपसारित किये जाने में बेईमानी से या कपटपूर्वक सहायता करेगा, या बेईमानी से किसी ऐसी मांग या दावे को, जिसका वह हकदार है, छोड़ देगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Dishonest or fraudulent removal or concealment of property-
Whoever dishonestly or fraudulently conceals or removes any property of himself or any other person, or dishonestly or fraudulently assists in the concealment or removal thereof, or dishonestly releases any demand or claim to which he is entitled, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति का कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना अथवा उसके करने में सहायता करना अथवा जिस मांग या दावे का वह हकदार है, उसे बेईमानी से छोड़ देना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 424 के अंतर्गत जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की किसी सम्पत्ति को छिपाएगा या अपसारित करेगा, या उसके छिपाये जाने में, या अपसारित किये जाने में बेईमानी से या कपटपूर्वक सहायता करेगा, या बेईमानी से किसी ऐसी मांग या दावे को, जिसका वह हकदार है, छोड़ देगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 424 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति का कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना अथवा उसके करने में सहायता करना अथवा जिस मांग या दावे का वह हकदार है, उसे बेईमानी से छोड़ देना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 424 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 423 | अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के सम्बन्ध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन | IPC Section- 423 in hindi| Dishonest or fraudulent execution of deed of transfer containing false statement of consideration.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 423 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 423 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या लिखत को हस्ताक्षरित करेगा, निष्पादित करेगा या उसका पक्षकार बनेगा, जिससे किसी सम्पत्ति का, या उसमें के किसी हित का, अन्तरित किया जाना, या किसी भार के अधीन किया जाना, तात्पर्यित है और जिसमें ऐसे अन्तरण या भार के प्रतिफल से सम्बन्धित, या उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों से सम्बन्धित, जिसके या जिनके उपयोग या फायदे के लिये उसका प्रवर्तित होना वास्तव में आशयित है, कोई मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, तो वह धारा 423 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 423 के अनुसार

अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के सम्बन्ध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन-

जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या लिखत को हस्ताक्षरित करेगा, निष्पादित करेगा या उसका पक्षकार बनेगा, जिससे किसी सम्पत्ति का, या उसमें के किसी हित का, अन्तरित किया जाना, या किसी भार के अधीन किया जाना, तात्पर्यित है और जिसमें ऐसे अन्तरण या भार के प्रतिफल से सम्बन्धित, या उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों से सम्बन्धित, जिसके या जिनके उपयोग या फायदे के लिये उसका प्रवर्तित होना वास्तव में आशयित है, कोई मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायगा।

Dishonest or fraudulent execution of deed of transfer containing false statement of consideration-
Whoever dishonestly or fraudulently signs, executes or becomes a party to any deed or instrument which purports to transfer or subject to any charge any property, or any interest therein, and which contains any false statement relating to the consideration for such transfer or charge, or relating to the person or persons for whose use or benefit it is really intended to operate, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के सम्बन्ध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, कपटपूर्वक निष्पादन।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के अंतर्गत जो कोई बेईमानी से या कपटपूर्वक किसी ऐसे विलेख या लिखत को हस्ताक्षरित करेगा, निष्पादित करेगा या उसका पक्षकार बनेगा, जिससे किसी सम्पत्ति का, या उसमें के किसी हित का, अन्तरित किया जाना, या किसी भार के अधीन किया जाना, तात्पर्यित है और जिसमें ऐसे अन्तरण या भार के प्रतिफल से सम्बन्धित, या उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों से सम्बन्धित, जिसके या जिनके उपयोग या फायदे के लिये उसका प्रवर्तित होना वास्तव में आशयित है, कोई मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 423 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के सम्बन्ध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, कपटपूर्वक निष्पादन।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 423 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 418 | इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिये अपराधी आबद्ध है | IPC Section- 418 in hindi| Cheating with knowledge that wrongful loss may ensue to person whose interest offender is bound to protect.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 418 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 418 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 418 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 418 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई इस ज्ञान के साथ छल करेगा कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा उस व्यक्ति को सदोष हानि पहुँचाए, जिसका हित उस सम्यवहार में, जिससे वह छल सम्बन्धित है, संरक्षित रखने के लिये वह या तो विधि द्वारा, या वैध संविदा द्वारा, आबद्ध था, तो वह धारा 418 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 418 के अनुसार

इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिये अपराधी आबद्ध है-

जो कोई इस ज्ञान के साथ छल करेगा कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा उस व्यक्ति को सदोष हानि पहुँचाए, जिसका हित उस सम्यवहार में, जिससे वह छल सम्बन्धित है, संरक्षित रखने के लिये वह या तो विधि द्वारा, या वैध संविदा द्वारा, आबद्ध था, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Cheating with knowledge that wrongful loss may ensue to person whose interest offender is bound to protect-
Whoever cheats with the knowledge that he is likely thereby to cause wrongful loss to a person whose interest in the transaction to which the cheating relates, he was bound, either by law, or by a legal contract, to protect, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

उस व्यक्ति से छल करना जिसका हित संरक्षित रखने के लिये अपराधी या तो विधि द्वारा वैध संविदा द्वारा आबद्ध था।
सजा- तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 418 के अंतर्गत जो कोई इस ज्ञान के साथ छल करेगा कि यह संभाव्य है कि वह तद्द्वारा उस व्यक्ति को सदोष हानि पहुँचाए, जिसका हित उस सम्यवहार में, जिससे वह छल सम्बन्धित है, संरक्षित रखने के लिये वह या तो विधि द्वारा, या वैध संविदा द्वारा, आबद्ध था, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 418 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उस व्यक्ति से छल करना जिसका हित संरक्षित रखने के लिये अपराधी या तो विधि द्वारा वैध संविदा द्वारा आबद्ध था।तीन वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 418 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 422 | ऋण को लेनदारों के लिये उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना | IPC Section- 422 in hindi| Dishonestly or fraudulently preventing debt being available for creditors.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 422 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 422 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 422 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 422 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे जो कोई किसी ऋण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिये विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, तो वह धारा 422 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 422 के अनुसार

ऋण को लेनदारों के लिये उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना-

जो कोई किसी ऋण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिये विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Dishonestly or fraudulently preventing debt being available for creditors-
Whoever dishonestly or fraudulently prevents any debt or demand due to himself or to any other person from being made available according to law for payment of his debts or the debts of such other person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both.

लागू अपराध

अपराधी का अपने को शोध्य ऋण या मांग का लेनदारों के लिये उपलब्ध किया जाना कपटपूर्वक निवारित करना।
सजा- दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 422 के अंतर्गत जो कोई किसी ऋण का या मांग का, जो स्वयं उसको या किसी अन्य व्यक्ति को शोध्य हो, अपने या ऐसे अन्य व्यक्ति के ऋणों को चुकाने के लिये विधि के अनुसार उपलभ्य होना कपटपूर्वक या बेईमानी से निवारित करेगा, तो वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 422 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
अपराधी का अपने को शोध्य ऋण या मांग का लेनदारों के लिये उपलब्ध किया जाना कपटपूर्वक निवारित करना।दो वर्ष के लिए कारावास या जुर्माना या दोनो।गैर-संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 422 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।