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आईपीसी की धारा 376C | प्राधिकारवान व्यक्ति द्वारा मैथुन | IPC Section- 376C in hindi| Sexual intercourse by a person in authority.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 376C के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 376C के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 376C का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 376C के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई प्राधिकार की स्थिति में या वैश्वासिक सम्बन्ध में रहते हुये या लोक सेवक या प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबन्धक उत्प्रेरित करने या विलुब्ध करने के लिए दुरुपयोग करेगा तो वह धारा 376C के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 376C के अनुसार

प्राधिकारवान व्यक्ति द्वारा मैथुन-

जो कोई, –
(क) प्राधिकार की स्थिति में या वैश्वासिक सम्बन्ध में रहते हुये; या
(ख) लोक सेवक या
(ग) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या विधि के अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबन्धक; या
(घ) अस्पताल के प्रबन्धन में होते हुये या अस्पताल का कर्मचारीवृन्द होते हुये; और ऐसी स्थिति या वैश्वासिक सम्बन्ध का या तो उसकी अभिरक्षा में या उसके प्रभार के अधीन या परिसर में उपस्थित किसी स्त्री को उसके साथ मैथुन करने के लिए, जब ऐसा मैथुन बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं है, उत्प्रेरित करने या विलुब्ध करने के लिए दुरुपयोग करेगा वह दोनों में से किसी भाँति के कठोर कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और वह जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
स्पष्टीकरण 1- इस धारा में, ‘मैथुन’ धारा 375 के खण्ड (क) से (घ) में वर्णित कार्यों में से कोई कार्य अभिप्रेत होगा।
स्पष्टीकरण 2- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 375 के स्पष्टीकरण 1 भी लागू होगा।
स्पष्टीकरण 3-कारागार, प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान अथवा स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था के सम्बन्ध में, ‘अधीक्षक’ के अन्तर्गत कोई ऐसा व्यक्ति शामिल है, जो ऐसे कारागार, ऐसे प्रतिप्रेषण गृह, स्थान या ऐसी संस्था में कोई अन्य पद धारण करता है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसा व्यक्ति उसके निवासियों पर किसी प्राधिकार या नियंत्रण का प्रयोग कर सकता है।
स्पष्टीकरण 4- पदों ‘अस्पताल’ एवं ‘स्त्रियों या बालकों की संस्था’ का क्रमशः वही अर्थ होगा, जैसा कि धारा 376 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में है।

Sexual intercourse by a person in authority-
Whoever, being-
(a) in a position of authority or in a fiduciary relationship; or
(b) a public servant; or
(c) superintendent or manager of a jail, remand home or other place of custody established by or under any law for the time being in force, or a women’s or children’s institution; or
(d) on the management of a hospital or being on the staff of a hospital, abuses such position or fiduciary relationship to induce or seduce any woman either in his custody or under his charge or present in the premises to have sexual intercourse with him, such sexual intercourse not amounting to the offence of rape, shall be punished with rigorous imprisonment of either description for a term which shall not be less than five years, but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Explanation 1- In this section, “sexual intercourse” shall mean any of the acts mentioned in clauses (a) to (d) of Section 375.
Explanation 2- For the purposes of this section, Explanation 1 to Section 375 shall also be applicable.
Explanation 3- “Superintendent”, in relation to a jail, remand home or other place of custody or a women’s or children’s institution, includes a person holding any other office in such jail, remand home, place or institution by virtue of which such person can exercise any authority or control over its inmates.
Explanation 4- The expressions “hospital” and “women’s or children’s institution” shall respectively have the same meaning as in Explanation to sub-section (2) of Section 376.

लागू अपराध

प्राधिकारवान व्यक्ति द्वारा मैथुन।
सजा- कठिन कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु, जो 10 वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 376C के अंतर्गत जो कोई प्राधिकार की स्थिति में या वैश्वासिक सम्बन्ध में रहते हुये या लोक सेवक या प्रतिप्रेषण गृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान स्त्रियों या बालकों की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबन्धक उत्प्रेरित करने या विलुब्ध करने के लिए दुरुपयोग करेगा, वह कठिन कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु, जो 10 वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना से भी दंडित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 376C अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
प्राधिकारवान व्यक्ति द्वारा मैथुन।कठिन कारावास, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु, जो 10 वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 376C की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 376B | पृथक् रहने के दौरान पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ मैथुन | IPC Section- 376B in hindi| Sexual intercourse by husband upon his wife during separation.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 376B के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 376B के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 376B का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 376B के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई अपनी पत्नी के साथ, जो चाहे पृथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या अन्यथा पृथक् रह रही हो, उसकी सम्मति के बिना मैथुन करेगा, तो वह धारा 376B के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 376B के अनुसार

पृथक् रहने के दौरान पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ मैथुन-

जो कोई अपनी पत्नी के साथ, जो चाहे पृथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या अन्यथा पृथक् रह रही हो, उसकी सम्मति के बिना मैथुन करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और वह जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
स्पष्टीकरण – इस धारा में “मैथुन” से धारा 375 के खण्ड (क) से (घ) में वर्णित कार्यों में कोई कार्य अभिप्रेत होगा।

Sexual intercourse by husband upon his wife during separation-
Whoever has sexual intercourse with his own wife, who is living separately, whether under a decree of separation or otherwise, without her consent, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than two years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
Explanation. In this Section, “sexual intercourse” shall mean any of the acts mentioned in clauses (a) to (d) of Section 375.

लागू अपराध

पति द्वारा पृथक्करण के दौरान अपनी पत्नी से मैथुन।
सजा- कारावास, जो 2 वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो 7 वर्ष तक का हो | सकेगा और जुर्माना।
यह अपराध एक जमानतीय और पीड़िता के परिवाद पर ही संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 376B के अंतर्गत जो कोई अपनी पत्नी के साथ, जो चाहे पृथक्करण की किसी डिक्री के अधीन या अन्यथा पृथक् रह रही हो, उसकी सम्मति के बिना मैथुन करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और वह जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 376B अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में जमानतीय (Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
पति द्वारा पृथक्करण के दौरान अपनी पत्नी से मैथुन।कारावास, जो 2 वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो 7 वर्ष तक का हो | सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

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आईपीसी की धारा 376AB | बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दण्ड | IPC Section- 376AB in hindi| Punishment for rape on woman under twelve years of age.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 376AB के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है आईपीसी की धारा 376AB, कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 376AB का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 376AB के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई बारह वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा, तो वह आईपीसी की धारा 376AB के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 376AB के अनुसार

बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दण्ड–

जो कोई बारह वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा, तक की हो सकेगी और जुर्माने से, अथवा मृत्यु से दण्डित किया जाएगा :
परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़ित की चिकित्सा व्ययों और पुनर्वास की पूर्ति करने के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा :
परन्तु यह और कि इस उपधारा के अधीन अधिरोपित किसी भी जुर्माने का संदाय पीड़ित को किया जाएगा।

Punishment for rape on woman under twelve years of age-
Whoever, commits rape on a woman under twelve years of age shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person’s natural life, and with fine or with death:
Provided that such fine shall be just and reasonable to meet the medical expenses and rehabilitation of the victim :
Provided further that any fine imposed under this section shall be paid to the victim.

लागू अपराध

बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग का अपराध करने वाला व्यक्ति।
सजा- कठिन कारावास, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु, जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा और जुर्माना अथवा मृत्यु।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 376AB के अंतर्गत जो कोई बारह वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा, तक की हो सकेगी और जुर्माने से, अथवा मृत्यु से दण्डित किया जाएगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 376AB अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
बारह वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग का अपराध करने वाला व्यक्ति।कठिन कारावास, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु, जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, जिसका अभिप्राय उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा और जुर्माना अथवा मृत्यु।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 376AB की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 375 | बलात्संग | IPC Section- 375 in hindi| Rape.

IPC- 375

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है और सम्पूर्ण जानकारी, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 375 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 375 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। IPC की धारा 375 बलात्संग (Rape) जैसे अपराधो को परिभाषित करती है, जो व्यक्ति बलात्संग जैसे घृणित अपराध को अंजाम देते हैं, तो यह धारा 375 ऐसे अपराधो को परिभाषित करती है।

आईपीसी की धारा 375 के अनुसार

बलात्संग-

मनुष्य “बलात्संग” करता है, यह कहा जाता है, यदि वह व्यक्ति–
(क) अपने लिंग का किसी सीमा तक स्त्री की योनि, मुख, मूत्रनली या गुदा में प्रवेशन करता है या उससे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है, या
(ख) किसी वस्तु या शरीर के ऐसे किसी अंग को, जो लिंग नहीं है, स्त्री की योनि, मूत्रनली या गुदा में किसी सीमा तक प्रवेश करता है या उससे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है; या
(ग) स्त्री के शरीर के किसी अंग से इस प्रकार का हस्तसाधन करता है, जिससे कि ऐसी स्त्री की योनि, मूत्रनली, गुदा या शरीर के किसी अंग में प्रवेशन कारित किया जाय या उससे अपने या किसी अन्य व्यक्ति से साथ ऐसा कराता है; या
(घ) अपने मुख को स्त्री की योनि, गुदा, मूत्रनली पर लगाता है या उससे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा कराता है; या
निम्न सात विवरणों में से किसी के अधीन आने वाली परिस्थितियों के अधीन किया जाता है-
प्रथम- उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध ।
दूसरा- उस स्त्री की सम्मति के बिना।
तीसरा- उस स्त्री की सम्मति से, जबकि उसकी सम्मति उसे या ऐसे किसी व्यक्ति को, जिससे वह हितबद्ध है, मृत्यु या उपहति के भय में डालकर अभिप्राप्त की गयी है।
चौथा- उस स्त्री की सम्मति से, जबकि वह पुरुष यह जानता है कि वह उस स्त्री का पति नहीं है और उस स्त्री सम्मति इसलिए दी है, क्योंकि वह विश्वास करती है कि वह एक ऐसा पुरुष है, जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है।
पाँचवाँ- उस स्त्री की सम्मति से, जबकि ऐसी सम्मति देने के समय वह विकृत चित्त या मत्तता के कारण या उस पुरुष द्वारा व्यक्तिगत रूप में या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से कोई संज्ञा शून्यकारी या अस्वास्थ्यकर पदार्थ का सेवन कराये जाने के कारण, उस बात की, जिसके बारे में वह सम्मति देती है, प्रकृति एवं परिणामों को समझने में असमर्थ है।
छठवाँ – उस स्त्री की सम्मति से या बिना सम्मति के, जबकि वह अट्ठारह वर्ष से कम आयु की है;
सातवाँ – जब वह स्त्री सम्मति संसूचित करने में असमर्थ है।
स्पष्टीकरण 1- इस धारा के प्रयोजनों के लिये, ‘योनि’ में बृहद् भगोष्ठ भी शामिल होगा।
स्पष्टीकरण 2 – सम्मति से ऐसा स्पष्ट स्वैच्छिक करार सहमति अभिप्रेत है, जब स्त्री शब्दों, भावभंगिमाओं या मौखिक या गैर-मौखिक संसूचना के किसी भी रूप द्वारा विनिर्दिष्ट कार्य में भागीदारी करने की रजामन्दी संसूचित करती है :
परन्तु यह कि वह स्त्री, जो शारीरिक रूप से प्रवेशन के कार्य का प्रतिरोध नहीं करती, केवल उसी तथ्य के कारण यौन क्रिया-कलाप में सम्मति देने वाली नहीं मानी जाएगी।
अपवाद 1- चिकित्सा प्रक्रिया या अन्तःप्रवेशन बलात्संग गठित नहीं करेगा।
अपवाद 2 – पुरुष का अपनी ही पत्नी के साथ मैथुन या यौन क्रिया बलात्संग नहीं है, जब पत्नी पन्द्रह वर्ष से कम आयु की नहीं है।

Rape-
A man is said to commit “rape” if he-
(a) penetrates his penis, to any extent, into the vagina, mouth, urethra or anus of a woman or makes her to do so with him or any other person; or
(b) inserts, to any extent, any object or a part of the body, not being the penis, into the vagina, the urethra or anus of a woman or makes her to do so with him or any other person; or
(c) manipulates any part of the body of a woman so as to cause penetration into the vagina, urethra, anus or any part of body of such woman or makes her to do so with him or any other person; or
(d) applies his mouth to the vagina, anus, urethra of a woman or makes her to do so with him or any other person,
under the circumstances falling under any of the following seven descriptions:-
First- Against her will.
Secondly- Without her consent.
Thirdly- With her consent, when her consent has been obtained by putting her or any person in whom she is interested, in fear of death or of hurt.
Fourthly- With her consent, when the man knows that he is not her husband and that her consent is given because she believes that he is another man to whom she is or believes herself to be lawfully married.
Fifthly- With her consent when, at the time of giving such consent, by reason of unsoundness of mind or intoxication or the administration by him personally or through another of any stupefying or unwholesome substance, she is unable to understand the nature and consequences of that to which she gives consent.
Sixthly- With or without her consent, when she is under eighteen years of age. Seventhly- When she is unable to communicate consent.
Explanation 1- For the purposes of this section, “vagina” shall also include labia majora.
Explanation 2- Consent means an unequivocal voluntary agreement when the woman by words, gestures or any form of verbal or non-verbal communication. communicates willingness to participate in the specific sexual act:
Provided that a woman who does not physically resist to the act of penetration shall not by the reason only of that fact, be regarded as consenting to the sexual activity.
Exception 1- A medical procedure or intervention shall not constitute rape.
Exception 2- Sexual intercourse or sexual acts by a man with his own wife, the wife not being under fifteen years of age, is not rape.

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आईपीसी की धारा 374 | विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम | IPC Section- 374 in hindi| Unlawful compulsory labour.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 374 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 374 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध श्रम करने के लिये विधिविरुद्ध तौर पर विवश करेगा, तो वह धारा 374 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 374 के अनुसार

विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम-

जो कोई किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध श्रम करने के लिये विधिविरुद्ध तौर पर विवश करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसको अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा।

Unlawful compulsory labour-
Whoever unlawfully compels any person to labour against the will of that person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to one year, or with fine, or with both.

लागू अपराध

विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम।
सजा- एक वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना या दोनो।
यह अपराध एक जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
किसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 374 के अंतर्गत जो कोई किसी व्यक्ति को उस व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध श्रम करने के लिये विधिविरुद्ध तौर पर विवश करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 374 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
विधिविरुद्ध अनिवार्य श्रम।एक वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना या दोनो।संज्ञेयजमानतीयकिसी भी श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

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आईपीसी की धारा 373 | वेश्यावृत्ति, आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना | IPC Section- 373 in hindi| Buying minor for purposes of prostitution, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 373 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 373 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 373 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 373 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त सम्भोग करने के लिये या किसी विधिविरुद्ध दुराचारिक प्रयोजन के लिये काम में लाया या उपयोग किया जाये या यह संभाव्य जानते हुये कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी ऐसे किसी प्रयोजन के लिये काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, खरीदेगा, भाड़े पर लेगा या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करेगा, तो वह धारा 373 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 373 के अनुसार

वेश्यावृत्ति, आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना-

जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त सम्भोग करने के लिये या किसी विधिविरुद्ध दुराचारिक प्रयोजन के लिये काम में लाया या उपयोग किया जाये या यह संभाव्य जानते हुये कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी ऐसे किसी प्रयोजन के लिये काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, खरीदेगा, भाड़े पर लेगा या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
स्पष्टीकरण 1- अटठारह वर्ष से कम आयु की नारी को खरीदने वाली, भाड़े पर लेने वाली या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करने वाली किसी वेश्या के या वेश्यागृह चलाने या उसका प्रबन्ध करने वाले किसी व्यक्ति के बारे में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जायेगी कि ऐसी नारी का कब्जा उसने इस आशय से अभिप्राप्त किया है कि वह वेश्यावृत्ति के प्रयोजनों के लिये उपयोग में लायी जायेगी।
स्पष्टीकरण 2 – ” अयुक्त संभोग” का वही अर्थ है, जो धारा 372 में है।

Buying minor for purposes of prostitution, etc-
Whoever buys, hires, or otherwise obtains possession of any person under the age of eighteen years with intent that such person shall at any age be employed or used for the purpose of prostitution or illicit intercourse with any person or for any unlawful and immoral purpose, or knowing it to be likely that such person will at any age be employed or used for any such purpose, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Explanation 1- Any prostitute or any person keeping or managing a brothel, who buys, hires or otherwise obtains possession of a female under the age of eighteen years shall, until the contrary is proved, be presumed to have obtained possession of such female with the intent that she shall be used for the purpose of prostitution.
Explanation 2- “Illicit intercourse” has the same meaning as in Section 372.

लागू अपराध

उन्ही प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय को खरीदना या उसका कब्जा अभिप्राप्त करना।
सजा- दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 373 के अंतर्गत जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त सम्भोग करने के लिये या किसी विधिविरुद्ध दुराचारिक प्रयोजन के लिये काम में लाया या उपयोग किया जाये या यह संभाव्य जानते हुये कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी ऐसे किसी प्रयोजन के लिये काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, खरीदेगा, भाड़े पर लेगा या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 373 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
उन्ही प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय को खरीदना या उसका कब्जा अभिप्राप्त करना।दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

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