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आईपीसी की धारा 372 | वेश्यावृत्ति आदि के प्रयोजन के लिये अप्राप्तवय को बेचना | IPC Section- 372 in hindi| Selling minor for purposes of prostitution, etc.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 372 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 372 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 372 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 372 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिये या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिये काम में लायेगा या उपयोग करेगा, तो वह धारा 372 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 372 के अनुसार

वेश्यावृत्ति आदि के प्रयोजन के लिये अप्राप्तवय को बेचना-

जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिये या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिये काम में लाया या उपयोग किया जाये या यह सम्भाव्य जानते हुये कि ऐसा व्यक्ति, किसी आयु में भी ऐसे किसी प्रयोजन के लिये काम में लाया जायेगा या उपयोग किया जायेगा, बेचेगा, भाड़े पर देगा या अन्यथा व्ययनित करेगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा। और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
स्पष्टीकरण 1- जब कि अठारह वर्ष से कम आयु की नारी किसी वेश्या को या किसी अन्य व्यक्ति को, जो वेश्यागृह चलाता हो या उसका प्रबन्ध करता हो, बेची जाये, भाड़े पर दी जाये या अन्यथा व्ययनित की जाये, तब इस प्रकार ऐसी नारी को व्ययनित करने वाले के बारे में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाये, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने उसको इस आशय से व्ययनित किया है कि वह वेश्यावृत्ति के लिये उपयोग में लाई जायेगी।
स्पष्टीकरण 2–” अयुक्त सम्भोग” से इस धारा के प्रयोजनों के लिये ऐसे व्यक्तियों में मैथुन अभिप्रेत है जो विवाह से संयुक्त नहीं हैं, या ऐसे किसी संयोग या बन्धन से संयुक्त नहीं हैं जो यद्यपि विवाह की कोटि में तो नहीं आता तथापि उस समुदाय की, जिसके वे हैं या यदि वे भिन्न समुदायों के हैं, तो ऐसे दोनों समुदायों की, स्वीय विधि या रूढ़ि विधि द्वारा उनके बीच में विवाह-सदृश सम्बन्ध अभिज्ञात किया जाता हो।

Selling minor for purposes of prostitution, etc-
Whoever sells, lets to hire, or otherwise disposes of any person under the age of eighteen years with intent that such person shall at any age be employed or used for the purpose of prostitution or illicit intercourse with any person or for any unlawful and immoral purpose, or knowing it to be likely that such person will at any age be employed or used for any such purpose, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
Explanation 1- When a female under the age of eighteen years is sold, let for hire, or otherwise disposed of to a prostitute or to any person who keeps or manages a brothel, the person so disposing of such female shall, until the contrary is proved, be presumed to have disposed of her with the intent that she shall be used for the purpose of prostitution.
Explanation 2- For the purpose of this section “illicit intercourse” means sexual intercourse between person not united by marriage, or by any union or tie which, though not amounting to marriage, is recognized by the personal law or custom of the community to which they belong or, where they belong to different communities, of both such communities, as constituting between them a quasi-marital relation.

लागू अपराध

वैश्यावृत्ति आदि, के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना या भाड़े पर देना।
सजा- दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 372 के अंतर्गत जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिये या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिये को बेचेगा या भाड़े पर देगा, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा। और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 372 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
वैश्यावृत्ति आदि, के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना या भाड़े पर देना।दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 372 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 371 | दासों का अभ्यासिक व्यवहार करना | IPC Section- 371 in hindi| Habitual dealing in slaves.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 371 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 371 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 371 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 371 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई अभ्यासत: दासों को आयात करेगा, निर्यात करेगा, अपसारित करेगा, खरीदेगा, बेचेगा या उनका दुर्व्यापार या व्यवहार करेगा, तो वह धारा 371 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 371 के अनुसार

दासों का अभ्यासिक व्यवहार करना-

जो कोई अभ्यासत: दासों को आयात करेगा, निर्यात करेगा, अपसारित करेगा, खरीदेगा, बेचेगा या उनका दुर्व्यापार या व्यवहार करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक न होगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Habitual dealing in slaves-
Whoever habitually imports, exports, removes, buys, sells, traffics or deals in slaves, shall be punished with imprisonment for life or with imprisonment or either description for a term not exceeding ten years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

दासों का अभ्यासिक व्यवहार करना।
सजा- आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 371 के अंतर्गत जो कोई अभ्यासत: दासों को आयात करेगा, निर्यात करेगा, अपसारित करेगा, खरीदेगा, बेचेगा या उनका दुर्व्यापार या व्यवहार करेगा, वह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से अधिक न होगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 371 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
दासों का अभ्यासिक व्यवहार करना।आजीवन कारावास, या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

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आईपीसी की धारा 370A | दुर्व्यापार किये गये व्यक्ति का शोषण | IPC Section- 370A in hindi| Exploitation of a trafficked person.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 370A के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 370A के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 370A का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 370A के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि शिशु का या किसी व्यक्ति का दुर्व्यापार किया गया है, ऐसे अवयस्क या वयस्क को किसी ढंग में यौन शोषण के लिए संलग्न करेगा, तो वह धारा 370A के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 370A के अनुसार

दुर्व्यापार किये गये व्यक्ति का शोषण–

(1) जो कोई यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि शिशु का दुर्व्यापार किया गया है, ऐसे अवयस्क को किसी ढंग में यौन शोषण के लिए संलग्न करेगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
(2) जो कोई यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि किसी व्यक्ति का दुर्व्यापार किया गया है, ऐसे व्यक्ति को किसी ढंग में यौन शोषण के लिए संलग्न करेगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से न्यू नहीं होगी, किन्तु जो पाँच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और वह जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Exploitation of a trafficked person-
(1) Whoever, knowingly or having reason to believe that a minor has been trafficked, engages such minor for sexual exploitation in any manner, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than five years, but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
(2) Whoever, knowingly by or having reason to believe that a person has been trafficked, engages such person for sexual exploitation in any manner, shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than three years, but which may extend to five years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

जिस शिशु का दुर्व्यापार किया गया उसका शोषण।
सजा- कारावास, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगा, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
जिस व्यक्ति का दुर्व्यापार किया गया उसका शोषण।
सजा- कारावास, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा, किंतु जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 370A के अंतर्गत जो कोई शिशु का दुर्व्यापार किया गया है, ऐसे अवयस्क को किसी ढंग में यौन शोषण के लिए संलग्न करेगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा इसी तरह से किसी व्यक्ति का दुर्व्यापार किया गया है। किसी ढंग में यौन शोषण के लिए संलग्न करेगा, वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से न्यू नहीं होगी, किन्तु जो पाँच वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और वह जुर्माने से भी दण्डनीय होगा

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 370A अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
जिस शिशु का दुर्व्यापार किया गया उसका शोषण।कारावास, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगा, किंतु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
जिस व्यक्ति का दुर्व्यापार किया गया उसका शोषण।कारावास, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा, किंतु जो पांच वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 370A की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

आईपीसी की धारा 370 | व्यक्ति का दुर्व्यापार | IPC Section- 370 in hindi| Trafficking of person.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 370 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 370 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 370 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 370 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई किसी व्यक्ति का दुर्व्यापार (मानव तस्करी) Trafficking of person शोषण के प्रयोजन के लिए करता है साथ ही धमकियों द्वारा और बल एवम् प्रतारणना द्वारा ऐसे अपराध को कारित करता है तो वह धारा 370 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 370 के अनुसार

व्यक्ति का दुर्व्यापार–

(1) जो कोई, शोषण के प्रयोजन के लिए
प्रथम- धमकियों का प्रयोग करके, या
द्वितीय- बल या प्रपीड़न के किसी अन्य प्रकार का प्रयोग करके या
तीसरा- अपहरण द्वारा, या
चौथा-कपट का प्रयोग करके या प्रवंचना द्वारा या
पाँचवाँ- शक्ति के दुरुपयोग द्वारा, या
छठवां- उत्प्रेरण द्वारा, जिसके अन्तर्गत भर्ती किये गये, परिवहनित, संश्रित स्थानान्तरित या गृहीता व्यक्ति पर नियंत्रण रखने वाले किसी व्यक्ति की सम्पत्ति प्राप्त करने के लिए भुगतान या लाभ देना या प्राप्त करना भी शामिल हैं,
व्यक्ति या व्यक्तियों को (क) भर्ती करता है, (ख) परिवहन करता है, (ग) संश्रय देता है, (घ) स्थानान्तरित करता है, या (ङ) प्राप्त करता है, वह दुर्व्यापार का अपराध कारित करेगा।
स्पष्टीकरण 1-पद “शोषण” में शारीरिक शोषण का कोई कार्य या यौन शोषण का कोई रूप, दासता या दासता के समान व्यवहार, अधिसेविता या अंगों को बलपूर्वक हटाना शामिल होगा। स्पष्टीकरण 2-पीड़ित की सम्मति दुर्व्यापार के अपराध के अवधारण में अतात्विक है।
(2) जो कोई दुर्व्यापार का अपराध कारित करेगा, वह कठोर कारावास से, जिसको अवधि सात वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
(3) जहां अपराध में एक से अधिक व्यक्ति का दुर्व्यापार अन्तर्ग्रस्त होगा, वहाँ वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
(4) जहाँ अपराध में अवयस्क का दुर्व्यापार अन्तर्ग्रस्त होगा, वहां वह कठोर कारावास जिसकी अवधि दस वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
(5) जहाँ अपराध में एक ही समय एक से अधिक वयस्कों का दुर्व्यापार अन्तर्ग्रस्त होगा, वहाँ वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि चौदह वर्ष से न्यून नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी दण्डनीय होगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
(6) यदि व्यक्ति एक से अधिक अवसर पर अवयस्क के दुर्व्यापार के अपराध से दोषसिद्ध किया जाता है, तो ऐसा व्यक्ति आजीवन कारावास से दण्डित किया जायेगा, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष नैसर्गिक जीवन के कारावास से होगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।
(7) जब लोक सेवक या पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति के दुर्व्यापार में संलग्न है, तब ऐसा लोक सेवक या पुलिस अधिकारी आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष नैसर्गिक जीवन के कारावास से होगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Trafficking of person-
(1) Whoever, for the purpose of exploitation. (a) recruits, (b) transports. (c) harbours, (d) transfers, or (e) receives, a person or persons, by-
First- using threats, or
Secondly- using force, or any other form of coercion, or
Thirdly- by abduction, or
Fourthly- by practising fraud, or deception, or
Fifthly- by abuse of power, or
Sixthly- by inducement, including the giving or receiving of payments or benefits, in order to achieve the consent of any person having control over the person recruited, transported, harboured, transferred or received, commits the offence of trafficking.
Explanation 1- The expression “exploitation” shall include any act of physical exploitation or any form of sexual exploitation, slavery or practices similar to slavery. servitude, or the forced removal of organs.
Explanation 2- The consent of the victim is immaterial in determination of the offence of trafficking.
(2) Whoever commits the offence of trafficking shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than seven years, but which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
(3) Where the offence involves the trafficking of more than one person, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.
(4) Where the offence involves the trafficking of a minor, it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.
(5) Where the offence involves the trafficking of more than one minor it shall be punishable with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than fourteen years, but which may extend to imprisonment for life, and shall also be liable to fine.
(6) If a person is convicted of the offence of trafficking of minor on more than one occasion, then such person shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person’s natural life, and shall also be liable to fine.
(7) When a public servant or a police officer is involved in the trafficking of any person then, such public servant or police officer shall be punished with imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person’s natural life. and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

1. व्यक्ति का दुर्व्यापार करना।
सजा- कारावास, जो सात वर्ष से कम नही, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।
2. एक से अधिक व्यक्तियो का दुर्व्यापार करना।
सजा- कारावास, जो दस वर्ष से कम नही, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।
3. अवयस्क का दुर्व्यापार करना।
सजा- कारावास, जो दस वर्ष से कम नही, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।
4. एक से अधिक अवयस्क का दुर्व्यापार करना।
सजा- कारावास, जो चौदह वर्ष से कम नही, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।
5. एक बार से अधिक अवयस्क का दुर्व्यापार के अपराध का दोषसिद्ध व्यक्ति।
सजा- आजीवन कारावास, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष बचे नैसर्गिक जीवन से होगा और जुर्माना।
6. अवयस्क के दुर्व्यापार में संलिप्त लोकसेवक या पुलिस अधिकारी।
सजा- आजीवन कारावास, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष बचे नैसर्गिक जीवन से होगा और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 370 के अंतर्गत जो कोई किसी मानव का दुर्व्यापार (Trafficking of person) करेगा। वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 370 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
व्यक्ति का दुर्व्यापार करना।कारावास, जो सात वर्ष से कम नही, किंतु जो दस वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
एक से अधिक व्यक्तियो का दुर्व्यापार करना।कारावास, जो दस वर्ष से कम नही, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
अवयस्क का दुर्व्यापार करना।कारावास, जो दस वर्ष से कम नही, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
एक से अधिक अवयस्क का दुर्व्यापार करना।कारावास, जो चौदह वर्ष से कम नही, किंतु जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
एक बार से अधिक अवयस्क का दुर्व्यापार के अपराध का दोषसिद्ध व्यक्ति।आजीवन कारावास, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष बचे नैसर्गिक जीवन से होगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा
अवयस्क के दुर्व्यापार में संलिप्त लोकसेवक या पुलिस अधिकारी।आजीवन कारावास, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष बचे नैसर्गिक जीवन से होगा और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास आईपीसी की धारा 370 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।

GST में किन परिस्थितियों में कैंसिल किया जा सकता है और कैंसिल किये गये पंजीयनो को पुनः चालू करवाने के लिए कितने दिन के अंदर Revocation का आवेदन किया जा सकता हैं?

Central Goods and Service Tax Act, 2017 की धारा 29(2) के अनुसार निम्न मामलों में ऑफिसर किसी भी प्रार्थी के रजिस्ट्रेशन को निरस्त कर सकता है-

(1) यदि प्रार्थी जीएसटी एक्ट या रूल्स के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है।
(2) यदि प्रार्थी जो धारा 10 के तहत कंपोजिशन स्कीम में है लगातार तीन टैक्स अवधी की रिटर्न प्रस्तुत नहीं कर रहा है। कंपोजिशन के अतिरिक्त अन्य मामले में यदि लगातार 6 माह की रिटर्न प्रस्तुत नहीं करता है, तब भी प्रार्थी के रजिस्ट्रेशन को निरस्त किया जा सकता है।
(3) यदि किसी प्रार्थी ने धारा 25(3) के तहत Voluntary GST Registration लिया है 6 माह के भीतर व्यापार प्रारंभ नहीं करता है, तब भी प्रार्थी के रजिस्ट्रेशन को निरस्त किया जा सकता है।
(4) यदि प्रार्थी ने रजिस्ट्रेशन Fraud तरीके से या गलत जानकारी देकर प्राप्त किया है, हालांकि ऑफिसर प्रार्थी को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करके ही रजिस्ट्रेशन को निरस्त कर सकता है।

यदि उपरोक्त आधार पर आफिसर प्रार्थी के रजिस्ट्रेशन को निरस्त कर देता है तो प्रार्थी रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के आदेश की प्राप्ति के 30 दिन के भीतर फार्म GST REG-21 प्रस्तुत करके कैंसिल किये गये रजिस्ट्रेशन को पुनः चालू करवाने के लिए आवेदन पेश कर सकता है। यह 30 दिन की अवधि काफी कम थी जिसे अब बढ़ाकर 90 दिन किया गया है। लेकिन सीधे ही इसे 90 दिन नहीं किया गया है।

पहले 30 दिन में यदि प्रार्थी इसके लिए आवेदन प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो वह अगले 30 दिन में ऑफिसर को आवेदन पेश करके इसे निरस्त करने के लिए प्रार्थना कर सकता है। ऐसा करने पर आफिसर प्रार्थी के प्रार्थना पत्र को एडिशनल/ज्वाइंट कमिश्नर को प्रेषित कर देगा। एडिशनल / ज्वाइंट कमिश्नर देरी का उचित कारण जानने के पश्चात प्रार्थी को फार्म GST REG-21 पेश करने की मंजूरी प्रदान कर सकता है।
इस संबंध में एक विस्तृत परिपत्र संख्या- 148/04/2021जीएसटी दिनांक 18.5.2021 सरकार द्वारा जारी किया गया है।

जिसमें इस संबंध में संपूर्ण जानकारी दी गई है। इस परिपत्र का सार इस पत्रिका के नोटिफिकेशन/परिपत्र वाले सेक्शन में प्रस्तुत किया गया है। रिटर्न न प्रस्तुत करने के कारण निरस्त आवेदन को 90 दिन के भीतर पुनः चालू करा सकेंगे।

यदि किसी प्रार्थी का रजिस्ट्रेशन इस कारण से निरस्त कर दिया गया है कि उसने समय पर रिटर्न प्रस्तुत नहीं की है तो रजिस्ट्रेशन को पुनः चालू करवाने के लिए पेश किए जाने वाले फार्म REG-21 को प्रस्तुत करने से पहले उसे समस्त बकाया रिटर्न को प्रस्तुत करना होगा। बिना बकाया रिटर्न को प्रस्तुत किये तथा समस्त टैक्स की राशि जमा कराये रजिस्ट्रेशन को चालू करने का प्रार्थना पत्र पेश नहीं किया जा सकेगा।

आईपीसी की धारा 369 | दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण | IPC Section- 369 in hindi| Kidnapping or abducting child under ten years with intent to steal from its person.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 369 के बारे में पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 369 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 369 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में धारा 369 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। जो कोई दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले ले, तो वह धारा 369 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

आईपीसी की धारा 369 के अनुसार

दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण-

जो कोई दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले ले, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

Kidnapping or abducting child under ten years with intent to steal from its person- Whoever kidnaps or abducts any child under the age of ten years with the intention of taking dishonestly any movable property from the person of such child, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.

लागू अपराध

किसी शिशु के शरीर पर से संपत्ति लेने के आशय से उस शिशु का व्यपहरण या अपहरण।
सजा- सात वर्ष के लिए कारावास, और जुर्माना।
यह अपराध एक गैर-जमानतीय और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।
प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।

जुर्माना/सजा (Fine/Punishment) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 369 के अंतर्गत जो कोई दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यपहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम सम्पत्ति बेईमानी से ले ले, वह दोनों में से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 369 अंतर्गत जो अपराध कारित किए जाते है वह अपराध दंड प्रक्रिया संहिता में गैर-जमानतीय (Non-Baileble) अपराध की श्रेणी में आते है, इसलिए इस धारा के अंतर्गत किए गए अपराध में जमानत नही मिल सकेगी।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
किसी शिशु के शरीर पर से संपत्ति लेने के आशय से उस शिशु का व्यपहरण या अपहरण।सात वर्ष के लिए कारावास, और जुर्माना।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

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