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संज्ञेय अपराध और गैर-संज्ञेय अपराध क्या है? What is Cognizable Offence and NonCognizable offence?

Cognizable Offence and NonCognizable offence-min

नमस्कार दोस्तो, आज हम बात करेंगे संज्ञेय अपराध और गैर-संज्ञेय अपराध के बारे मे, तो आइए जानते हैं।

संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence)

संज्ञेय अपराध को अंग्रेजी में Cognizable Offence कहते है। संज्ञेय अपराध को दंड प्रकिया संहिता की धारा-2(सी) मे वह सभी गम्भीर मामले अपराध की श्रेणी मे आते है जिसमें एक पुलिस अधिकारी पहली अनुसूची के अनुसार या किसी अन्य लागू कानून के तहत, बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है।

संज्ञेय अपराध वे अपराध हैं जो प्रकृति में गंभीर हैं। जैसे – हत्या, बलात्कार, दहेज मौत, अपहरण, चोरी, विश्वास का आपराधिक हनन, अप्राकृतिक अपराध
इस तरह के मामलों में पुलिस अधिकारी अपराध की सूचना प्राप्त होते ही दोषी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है, चाहे FIR दर्ज कराई गई हो अथवा नहीं कराई गई हो।

सीआरपीसी की धारा 154 में संज्ञेय अपराध मामले के तहत, पुलिस अधिकारी को संज्ञेय अपराध से संबंधित प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) (जो मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना हो सकता है) प्राप्त कर, और इसे सामान्य डायरी में दर्ज कर तुरंत जांच शुरू करें।
यदि किसी जगह संज्ञेय अपराध हुआ है, तो पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच कर सकती है।

गैर-संज्ञेय अपराध (NonCognizable Offence)

गैर-संज्ञेय अपराध को अंग्रेजी में NonCognizable offence कहते है, गैर-संज्ञेय अपराध दंड प्रकिया संहिता की धारा-2(एल) मे वह सभी गैर गंभीर अपराध की श्रेणी मे आते है जिसमे कोई पुलिस अधिकारी बिना वारंट के गिरफ्तार नही कर सकती है ।

गैर-संज्ञेय अपराध वे हैं जो गंभीर प्रकृति के नहीं होते। जैसे – आक्रमण, धोखाधड़ी, जालसाज़ी, मानहानि।

इस तरह के मामलों में पुलिस अधिकारी अपराध की सूचना बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के लिखित रूप से दर्ज नही कर सकता है और न ही बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के गिरफ्तार कर सकता है।

सीआरपीसी की धारा 155 यह बताती है कि गैर-संज्ञेय अपराध के मामले में, पुलिस अधिकारी तब तक एफआईआर प्राप्त या रिकॉर्ड नहीं कर सकती जब तक कि वह मजिस्ट्रेट से पूर्व अनुमति प्राप्त न करे।

एक गैर-संज्ञेय अपराध / मामले के तहत, जांच शुरू करने के लिए, पुलिस अधिकारी को मजिस्ट्रेट की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक है।

हमारा प्रयास संज्ञेय अपराध और गैर-संज्ञेय अपराध क्या है पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
धन्यवाद

सीआरपीसी धारा 82 | फरार व्यक्ति के लिए उद्दघोषणा | CrPC Section- 82 in hindi | Proclaimation for person absconding.

CrPC- 82

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82? साथ ही हम आपको CrPC की धारा 82 के अंतर्गत कैसे क्या उद्घोषणा की जाती है और कब तक की जाती है। इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

इस धारा के अंतर्गत “फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा” Proclamation for person absconding करना, अर्थात् जब कभी कोई व्यक्ति, किसी अपराध में लिप्त अथवा किसी कर्ज में डूबा हुआ, कही फरार (भाग जाना) हो जाता है, तब न्यायालय द्वारा उस फरार व्यक्ति की उद्घोषणा (सूचना या कोई कही हुई बात) करती है, कि यह व्यक्ति फरार है इस नगर या निवास में नहीं है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 फरार व्यक्ति को सूचित करने या कराने को बतलाती है।

धारा 82 का विवरण

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के अंतर्गत वह व्यक्ति जो किसी अपराध या किसी कर्ज, बच निकलने के उद्देश्य से कही फरार हो जाता है या भाग जाता है, तो न्यायालय  उसके फरार हो जाने की उद्घोषणा करते है। इस धारा में केवल वह फरार व्यक्ति के उद्घोषणा करने को बतलाती है।

सीआरपीसी की धारा 80 के अनुसार-

फरार व्यक्ति की उद्घोषणा-

1. यदि किसी न्यायालय को (चाहे लेने के पश्चात या लिए बिना) यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति, जिसके विरुद्ध उसने वारंट जारी किया है, फरार हो गया है या अपने आप को छुपा रहा है, जिससे ऐसे वारंट का निष्पादन नहीं किया जा सकता तो ऐसे न्यायालय उसे या उपेक्षा करने वाली लिखित उद्घोषणा प्रकाशित कर सकता है कि वह व्यक्ति विनिर्दिष्ट स्थान और विनिर्दिष्ट समय पर, जो उद्घोषणा के प्रकाशन की तारीख से कम से कम तीस दिन के पश्चात का होगा, हाजिर हो।

Proclamation for Person absconding-
If any Court has reason to believe (whether after taking evidence or not) that any person against whom warrant has been issued by it has absconded or is concealing himself so that such warrant cannot be executed, such court may publish a written proclamation requiring him to appear at a specified place and at a specified time not less than thirty days from the date of publishing such proclamation.

2. उद्घोषणा निम्नलिखित रूप से प्रकाशित की जाएगी-

i) (क) वह उस नगर या ग्राम के, जिसमे ऐसा व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है, किसी सहजदृश्य स्थान से सार्वजनिक रूप में पढ़ी जाएगी;
(ख) वह उस घर का या वासस्थान के, जिसमें ऐसा व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है, किसी सहजदृश्य भाग पर या ऐसे नगर या ग्राम के किसी सहजदृश्य स्थान पर लगाई जाएगी;
(ग) उसकी एक प्रति उस न्यास सदन के किसी सहजदृश्य भाग पर लगाई जाएगी;
ii) यदि न्यायालय ठीक समझता है तो वह यह निर्देश भी से सकता है कि उद्घोषणा की एक प्रति उस स्थान में, परिचालित किसी दैनिक समाचारपत्र में प्रकाशित की जाए जहां ऐसा व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है।
3) उद्घोषणा जारी करने वाले न्यायालय द्वारा इस लिखित कथन की उद्घोषणा विर्निदिष्ट दिन उपधारा (2) के खंड (i) में विर्निदिष्ट रीति में सम्यक् रूप से प्रकाशित कर दी गई है, इस बात का निश्चायक साक्ष्य होगा कि इस धारा की अपेक्षाओं का अनुपालन कर दिया गया है और उद्घोषणा उस दिन प्रकाशित कर दी गई थी।
[4) जहां उपधारा (1) के आधीन प्रकाशित की गई उद्घोषणा भारतीय दण्ड संहिता की धाराएं 302, 304, 364, 367, 382, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 400, 402, 436, 449, 459 या 460 के आधीन दंडनीय अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के संबंध में है और ऐसा व्यक्ति उद्घोषणा में अपेक्षित विर्निदिष्ट स्थान और समय पर उपस्थित होने में असफल रहता है तो न्यायालय, तब ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी वह ठीक समझता है, उसे उद्घोषित अपराधी प्रकट कर सकता है और उस प्रभाव की घोषणा कर सकता हैं।
5) उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंध न्यायालय द्वारा उपधारा (4) के आधीन की गई घोषणा को उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उपधारा (1) के आधीन प्रकाशित उद्घोषणा को लागू होते है।]

दंड प्रकिया संहिता की धारा 82 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति अपने किसी अपराध से बचने के लिए कही छिप जाता या कही भाग जाता है तो न्यायालय किस तरह से फरार व्यक्ति के खिलाफ लिखित रूप से उद्घोषणा प्रकाशित कराती है और साथ न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए एक निश्चित समय प्रदान करती है, यदि फरार व्यक्ति निश्चित समय पर उपस्थित नही होता है तो CrPC Section- 82 के अंतर्गत कुर्की जैसे आगे की कार्यवाही करती है।

हमारा प्रयास CrPC की धारा 82 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी , फिर भी अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

चल और अचल सम्पत्ति क्या है definition of movable and immovable

movable property

नमस्कार दोस्तो, आज हम बात करेंगे चल और अचल संपत्ति के बारे मे। हम मे बहुत से लोग जानते है और बहुत से लोग नही भी जानते है कि चल और अचल संपत्ति क्या है। वैसे हम साधारण भाषा कह सकते है कि जो संपत्ति चलयमान है हम उसे चल संपत्ति कह सकते है और जो संपत्ति चलयमान नही है, वह सम्पत्ति अचल सम्पत्ति कहलाती है।

Movable Property (चल संपत्ति) वह संपत्ति होती है, जिस संपत्ति को, हम किसी एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते, उसे हम चल संपत्ति कहते है। इसी को हम अंग्रेजी भाषा में Movable Property भी कहते है। चल संपत्ति में जैसे- धन, आभूषण, बर्तन, घर का सामान, पशु-पंछी इत्यादि यह सभी वह चलयमान संपत्ति है, जिन्हे हम कभी भी कही भी ले जा सकते है।
चल सम्पत्ति को हिन्दी मे हम चलयमान संपत्ति भी कह सकते है।
दूसरी भाषा में- जो संपत्ति भूमि से जुड़ी हुई नहीं होती है, उन्हे हम चल संपत्ति कहते है अर्थात् जिन्हे हम आवश्यकतानुसार अपनी जगह से परिवर्तन कर सकते है।

Immovable property (अचल सम्पत्ति) वह संपत्ति होती है, जिस संपत्ति को हम किसी एक जगह से दूसरी जगह नही ले जा सकते, उसे हम अचल संपत्ति कहते है। इसी को हम अंग्रेजी भाषा में Immovable Property भी कहते है। अचल संपत्ति में जैसे- भूमि, घर, प्लाट इत्यादि यह सभी वह स्थिर संपत्ति है, जिन्हे हम कभी भी कही भी नही ले जा सकते है।
अचल सम्पत्ति को हिन्दी मे हम स्थिर संपत्ति भी कह सकते है।

दूसरी भाषा में- जो संपत्ति भूमि से जुड़ी हुई होती है, उन्हे हम अचल संपत्ति कहते है अर्थात् जिन्हे हम आवश्यकतानुसार अपनी जगह से परिवर्तन नहीं कर सकते है और वे स्थिर रहती है।

क्या हम से कोई जानता है कि आपका घर अचल संपत्ति है, लेकिन दरवाजे और खिड़कियां चल संपत्तियां हैं? एक घर पूरी तरह टूटे बिना परिवर्तन नहीं किया जा सकता है, लेकिन दरवाजे और खिड़कियों को निकालकर दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए दरवाजे और खिड़कियों चल संपत्ति है, लेकिन यदि कानूनी भाषा से बात करे तो घर के दरवाजे और खिड़कियां चल संपत्तियां भी नहीं हैं।

क्या आप जानते हैं कि पेड़ और पौधे, उगी हुई फसल और उगी हुई घास को अचल संपत्ति नहीं माना जा सकता है क्योंकि फसल, लकड़ी और घास, जिनकी जड़ें भूमि से जुड़ी होती है, जिन्हे हम अचल सम्पत्ति नही कह सकते है ऐसे बात करे तो जिन्हे हम बेचकर पैसा कमा सकते हैं। (इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक अगर आप अपनी जमीन पर पेड़ उगाकर उसे बाद में टिम्बर के तौर पर बेचते हैं तो इस पर आयकर लगेगा) इससे यह अचल संपत्तियां नहीं कहलाती है।

आईपीसी की धारा 396 | हत्या सहित डकैती | IPC Section- 396 in hindi | dacoity with murder.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 396 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 396? साथ ही हम आपको IPC की धारा 396 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 396 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा 396 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई पांच या पांच से अधिक व्यक्ति डकैती करते समय, किसी एक व्यक्ति द्वारा, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो डकैती में शामिल प्रत्येक व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत अपराधी होगा, साथ ही धारा 396 के अंतर्गत दंड और जुर्माने का भागीदार होगा।

आईपीसी की धारा 396 के अनुसार –

हत्या सहित डकैती-

यदि ऐसे पांच या अधिक व्यक्तियों में से, जो संयुक्त होकर डकैती कर रहे हो, कोई एक व्यक्ति इस प्रकार डकैती करने पर हत्या कर देगा, तो उन व्यक्तियों में से हर व्यक्ति मृत्यु से, या आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

Dacoity with murder-
if anyone or five or more person, who are conjointly committing dacoity, commits murder in so committing dacoity, every one of those persons shall be punished with death, or imprisonment for life, or rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

हत्या सहित डकैती अर्थ कब लागू होगी-

साधारण भाषा में जब पांच या पांच से अधिक व्यक्ति मिलकर डकैती जैसा गंभीर अपराध को अंजाम देते है, यदि उन संयुक्त व्यक्ति में से किसी व्यक्ति ने किसी निर्दोष व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उन सभी संयुक्त व्यक्ति पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 396 लागू होगी, साथ ही डकैती में शामिल सभी व्यक्ति बराबर के अपराधी होंगे।

लागू अपराध

डकैती में हत्या।
सजा– आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

यदि ऐसे पांच या अधिक व्यक्तियों में से, जो संयुक्त होकर डकैती कर रहे हो, कोई एक व्यक्ति इस प्रकार डकैती करने पर हत्या कर देगा, तो डकैती में शामिल प्रत्येक व्यक्ति आजीवन कारावास अथवा दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
इस धारा में संबंधित अपराध की गहराइयों को देखकर न्यायालय दोषी व्यक्ति को दस वर्ष अथवा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैरजमानतीय होने के कारण आसानी से जमानत नहीं मिलना मुश्किल पड़ जाती है।
इस धारा में डाली जा चुकी याचिकाओं में न के बराबर जमानत मिलने के चांस होते है, साथ ऐसे अपराध के दृष्टिकोण पर ध्यान देते हुए, जमानत खारिज कर दी जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
डकैती में हत्या।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनोंसंज्ञेयगैर-जमानतीयसेशन न्यायालय द्वारा

हमारा प्रयास धारा 396 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 395 | डकैती के लिए दंड | IPC Section- 395 in hindi | Punishment for dacoity.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 395 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 395? साथ ही हम आपको IPC की धारा 395 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 395 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा 395 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई व्यक्ति डकैती जैसा गंभीर अपराध करेगा, तो वह धारा 395 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा। इस लेख के माध्यम से हम आपको दंड, जमानत कैसे मिलेगी इत्यादि की जानकारी आप को देगें।

आईपीसी की धारा 395 के अनुसार-

डकैती के लिए दंड-

जो कोई डकैती करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

Punishment for dacoity-
whoever commits the dacoity shall be punished with imprisonment for life, or with rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.

डकैती किसे कहते है, आइए जानते हैं?

डकैती को भारतीय दंड संहिता की धारा 391 में परिभाषित किया गया है। इस धारा के अनुसार डकैती वह घटना है जिसमे पांच या अधिक व्यक्ति एक साथ लूट करते हैं या लूट का प्रयास करते हैं। अब इसमें ये सारे व्यक्ति या तो संयुक्त रूप से लूट करते हैं या लूट का प्रयास करते हैं या उपस्थित व्यक्ति लूट करने वाले व्यक्ति की सहायता करते हैं। डकैती की घटना में इन तत्वों की अनिवार्य उपस्थिति होती है।

स्पष्ट भाषा में- यदि पांच से अधिक व्यक्ति किसी राजमार्ग (Public Place) में डराधमका कर किसी वस्तु अथवा चुराई किसी संपत्ति को ले जाते है, तो उसे डकैती कहा जाएगा।

लागू अपराध

डकैती।
सजा– आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

यदि कोई व्यक्ति डकैती जैसा गंभीर अपराध करता है, तो वह आजीवन कारावास अथवा दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
इस धारा में संबंधित अपराध की गहराइयों को देखकर न्यायालय दोषी व्यक्ति को दस वर्ष अथवा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैरजमानतीय होने के कारण आसानी से जमानत नहीं मिलना मुश्किल पड़ जाती है।
इस धारा में डाली जा चुकी याचिकाओं में न के बराबर जमानत मिलने के चांस होते है, साथ ऐसे अपराध के दृष्टिकोण पर ध्यान देते हुए, जमानत खारिज कर दी जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
डकैती।आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास धारा 395 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।

आईपीसी की धारा 392 | लूट के लिए दंड | IPC Section- 392 in hindi | Punishment for robbery.

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 392 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है भारतीय दंड संहिता की धारा 392? साथ ही हम आपको IPC की धारा 392 के अंतर्गत कैसे क्या सजा मिलती है और जमानत कैसे मिलती है, और यह अपराध किस श्रेणी में आता है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

धारा 392 का विवरण

भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में आज हम आपको महत्वपूर्ण धारा 392 के विषय में पूर्ण जानकारी देंगे। यदि कोई व्यक्ति लूट जैसा गंभीर अपराध करेगा, तो वह धारा 392 के अंतर्गत दंड का भागीदार होगा।

आईपीसी की धारा 392 के अनुसार –

लूट के लिए दंड-

जो कोई लूट करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा, और यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की जाए तो कारावास 14 वर्ष तक का हो सकेगा।

Punishment for robbery-
Whoever commit robbery shall be punished with rigorous imprisonment for a term which may extend to ten years, and shall should be liable to fine, and if the robbery be committed on the highway between sunset and sunrise, the imprisonment may be extended to fourteen years.

लागू अपराध

लूट करने पर दंड
सजा – दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की गयी हो
सजा – चौदह वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।
यह एक अजमानती, संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
यह अपराध समझौता योग्य नहीं है।

सजा (Punishment) का प्रावधान

यदि कोई व्यक्ति लूट जैसा गंभीर अपराध करता है, तो वह   दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा। साथ यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की गयी हो, तब उस दशा में वह चौदह वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों का भागीदार होगा।

जमानत (Bail) का प्रावधान

यह अपराध एक गैर जमानतीय, संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध गैरजमानतीय होने के कारण आसानी से जमानत नहीं मिलना मुश्किल पड़ जाती है।
इस धारा में डाली जा चुकी याचिकाओं में न के बराबर जमानत मिलने के चांस होते है, साथ ऐसे अपराध के दृष्टिकोण पर ध्यान देते हुए, जमानत खारिज कर दी जाती है।

अपराधसजाअपराध श्रेणीजमानतविचारणीय
लूट करने पर दंड।दस वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा
यदि लूट राजमार्ग पर सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच की गयी हो।चौदह वर्ष के लिए कठोर कारावास व आर्थिक दंड या दोनों।संज्ञेयगैर-जमानतीयप्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा

हमारा प्रयास धारा 392 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।