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पॉक्सो एक्ट की धारा 15 | बालकों को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री के भण्डारकरण के लिए दण्ड | Pocso Act Section- 15 in hindi | Punishment for storage of pornographic material involving child.

POCSO Section- 15

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 15 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 15? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 15 के अंतर्गत क्या सजा का प्रावधान है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 15 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 15 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति  बालक संबधी किसी अश्लील साहित्य का साझा अथवा सबको बांटता है अथवा भंडारण करता है किन्तु उसे मिटाने या नष्ट करने या ऐसा अभिहित प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, रिपोर्ट करने में असफल होता है तो वह इस कृत्य के लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 15 के अंतर्गत दंड को परिभाषित करती है यह पॉक्सो की धारा 15 बालकों को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री के भण्डारकरण के लिए दण्ड का प्रावधान को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 15 के अनुसार-

बालकों को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री के भण्डारकरण के लिए दण्ड–

(1) कोई भी व्यक्ति, जो बालक सम्बन्धी अश्लील साहित्य को साझा या पोरषित करने के आशय से किसी बालक को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री का किसी भी रूप में भण्डारकरण करता है या रखता है, किन्तु उसे मिटाने या नष्ट करने या ऐसा अभिहित प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, रिपोर्ट करने में असफल होता है, वह पाँच हजार रुपए से अन्यून के जुर्माने से और दूसरे या पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, दायी होगा।
(2) कोई भी व्यक्ति, जो किसी बालक को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री का रिपोर्टिंग के ऐसे प्रयोजन के सिवाय, जो विहित किया जाए, किसी भी समय, किसी भी रीति में पारेषण या प्रदर्शन या प्रचार या वितरण करता है या न्यायालय में उसका साक्ष्य के रूप में उपयोग करता है, वह किसी भी भांति के कारावास से, जो तीन वर्ष का हो सकेगा, या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।
(3) कोई भी व्यक्ति, जो किसी बालक को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री का किसी भी रूप में वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए भंडारकरण करता है या रखता है, वह पहली दोषसिद्धि पर किसी भी भाँति के कारावास से, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो पाँच वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा और दूसरी और पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि को दशा में किसी भी भांति के कारावास से जो पाँच वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा, से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

Punishment for storage of pornographic material involving child-
(1) Any person, who stores or possesses pornographic material in any form involving a child, but fails to delete or destroy or report the same to the designated authority, as may be prescribed, with an intention to share or transmit child pornography, shall be liable to fine not less than five thousand rupees, and in the event of second or subsequent offence, with fine which shall not be less than ten thousand rupees.
(2) Any person, who stores or possesses pornographic material in any form involving a child for transmitting or propagating or displaying or distributing in any manner at any time except for the purpose of reporting, as may be prescribed, or for use as evidence in court, shall be punished with imprisonment of either description which may extend to three years, or with fine, or with both.
(3) Any person, who stores or possesses pornographic material in any form involving a child for commercial purpose shall be punished on the first conviction with imprisonment of either description which shall not be less than three years which may extend to five years, or with fine, or with both, and in the event of second or subsequent conviction, with imprisonment of either description which shall not be less than five years which may extend to seven years and shall also be liable to fine.

सजा (Punishment)

जो कोई किसी बालक सम्बन्धी अश्लील साहित्य को साझा या पोरषित करने के आशय से किसी बालक को सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री का किसी भी रूप में भण्डारकरण करता है या रखता है, किन्तु उसे मिटाने या नष्ट करने या ऐसा अभिहित प्राधिकारी को, जो विहित किया जाए, रिपोर्ट करने में असफल होता है, वह पाँच हजार रुपए से अन्यून के जुर्माने से और दूसरे या पश्चात्वर्ती अपराध की दशा में ऐसे जुर्माने से, जो दस हजार रुपए से कम का नहीं होगा, दायी होगा।

इसी तरह से यदि सम्मिलित करने वाली अश्लील सामग्री का रिपोर्टिंग के ऐसे प्रयोजन के सिवाय, जो विहित किया जाए, किसी भी समय, किसी भी रीति में पारेषण या प्रदर्शन या प्रचार या वितरण करता है या न्यायालय में उसका साक्ष्य के रूप में उपयोग करता है, वह किसी भी भांति के कारावास से, जो तीन वर्ष का हो सकेगा, या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

इसी तरह से अश्लील सामग्री का किसी भी रूप में वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए भंडारकरण करता है या रखता है, वह पहली दोषसिद्धि पर किसी भी भाँति के कारावास से, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो पाँच वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जाएगा और दूसरी और पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि को दशा में किसी भी भांति के कारावास से जो पाँच वर्ष से कम नहीं होगा, किन्तु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा, से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 15 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आप के मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 13 | अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग | Pocso Act Section- 13 in hindi | Use of child for pornographic purposes.

Pocso Section-13

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 13 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 13? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 13 के अंतर्गत क्या परिभाषित करती है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 13 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 13 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति किसी बालक का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, इंटरनेट अथवा किसी टीवी प्रोग्राम द्वारा अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करता है तो यह पॉक्सो एक्ट की धारा 13 ऐसे मामलो को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 13 के अनुसार-

अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग-

जो कोई किसी बालक का, मीडिया के (जिसमें टेलीविजन चैनलों या इंटरनेट या कोई अन्य इलेक्ट्रानिक प्ररूप या मुद्रित प्ररूप द्वारा प्रसारित कार्यक्रम या विज्ञापन चाहे ऐसे कार्यक्रम या विज्ञापन का आशय व्यक्तिगत उपयोग या वितरण के लिए हो या नहीं, सम्मिलित है) किसी प्ररूप में ऐसे लैंगिक परितोषण के प्रयोजनों के लिए उपयोग करता है, जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित हैं—
(क) किसी बालक की जननेंद्रियों का प्रतिदर्शन करना;
(ख) किसी बालक का उपयोग वास्तविक या नकली लैंगिक कार्यों में (प्रवेशन के साथ या उसके बिना) करना;
(ग) किसी बालक का अशोभनीय या अश्लीलतापूर्ण प्रतिदर्शन करना;
वह किसी बालक का अश्लील प्रयोजनों के लिए उपयोग करने के अपराध का दोषी होगा।
स्पष्टीकरण– इस धारा के प्रयोजनों के लिए “किसी बालक का उपयोग” पद में अश्लील सामग्री को तैयार, उत्पादन, प्रस्थापन, पारेषण प्रकाशन सुकर और वितरण करने के लिए मुद्रण, इलेक्ट्रानिक, कम्प्यूटर या किसी अन्य तकनीक के किसी माध्यम से किसी बालक को अंतर्वलित करना सम्मिलित है।

Use of child for pornographic purposes-
Whoever, uses a child in any form of media (including programme or advertisement telecast by television channels or internet or any other electronic form or printed form, whether or not such programme or advertisement is intended for personal use or for distribution), for the purposes of sexual gratification, which includes-
(a) representation of the sexual organs of a child;
(b) usage of a child engaged in real or simulated sexual acts (with or without penetration);
(c) the indecent or obscene representation of a child, shall be guilty of the offence of using a child for pornographic purposes.
Explanation- For the purposes of this section, the expression “use a child” shall include involving a child through any medium like print, electronic, computer or any other technology for preparation, production, offering, transmitting, publishing, facilitation and distribution of the pornographic material.

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 13 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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पॉक्सो एक्ट की धारा 14 | अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक के उपयोग के लिए दण्ड | Pocso Act Section- 14 in hindi | Punishment for using child for pornographic purposes.

Pocso Section-14

नमस्कार दोस्तों, आज हम पॉक्सो एक्ट की धारा 14 के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। क्या कहती है पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 14? साथ ही हम आपको POCSO ACT की धारा 14 के अंतर्गत क्या सजा का प्रावधान है, इस लेख के माध्यम से आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 14 का विवरण

पॉक्सो एक्ट की धारा 14 के अंतर्गत जो कोई व्यक्ति किसी बालक का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, इंटरनेट अथवा किसी टीवी प्रोग्राम द्वारा अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करता है तो इस कृत्य के लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 14 के अंतर्गत दंड को परिभाषित करती है यह पॉक्सो की धारा 14 अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक के उपयोग के लिए दंड के प्रावधान को परिभाषित करती है।

पॉक्सो एक्ट (POCSO ACT) की धारा 14 के अनुसार-

अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक के उपयोग के लिए दण्ड-

(1) जो कोई अश्लील प्रयोजनों के लिए किसी बालक या बालकों का उपयोग करेगा, वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा तथा दूसरे या पश्चात्वर्ती दोषसिद्धि की दशा में, ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
(2) जो कोई उपधारा (1) के अधीन अश्लील प्रयोजनों के लिए किसी बालक या बालकों का उपयोग करके, ऐसे अश्लील कृत्यों में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर, धारा 3 या धारा 5 या धारा 7 या धारा 9 में निर्दिष्ट कोई अपराध करेगा, वह उक्त अपराधों के लिए उपधारा (1) में उपबंधित दण्ड के अतिरिक्त क्रमश: धारा 4, धारा 6, धारा 8 और धारा 10 के अधीन भी दण्डित किया जाएगा।

Punishment for using child for pornographic purposes-
(1) Whoever uses a child or children for pornographic purposes shall be punished with imprisonment for a term which shall not be less than five years and shall also be liable to fine, and in the event of second or subsequent conviction with imprisonment for a term which shall not be less than seven years and also be liable to fine.
(2) Whoever using a child or children for pornographic purposes under sub section (1), commits an offence referred to in section 3 or section 5 or section 7 or section 9 by directly participating in such pornographic acts, shall be punished for the said offences also under section 4, section 6, section 8 and section 10, respectively, in addition to the punishment provided in sub-section (1).

सजा (Punishment)

जो कोई अश्लील प्रयोजनों के लिए किसी बालक या बालकों का उपयोग करेगा, वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि पाँच वर्ष से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा, साथ ही यदि कोई दूसरी बार दोषसिद्ध होने की दशा में ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

हमारा प्रयास पॉक्सो एक्ट की धारा 14 की पूर्ण जानकारी, आप तक प्रदान करने का है, उम्मीद है कि उपरोक्त लेख से आपको संतुष्ट जानकारी प्राप्त हुई होगी, फिर भी अगर आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप बेझिझक कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है।
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1 अप्रैल 2021 से जीएसटी मे महत्वपूर्ण बदलाव

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जीएसटी मे नये वित्तीय वर्ष 2021-2022 के शुरूआत होते जीएसटी मे महत्वपूर्ण बदलाव किए गए है, जिसके चलते सभी करदाताओ को अपने व्यापार को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी करने होगें । आइये जानते है ऐसे क्या बदलाव हुये है ।

पहला बदलाव- रेगूलर करदाताओ को बिल बनाते समय वस्तु का HSN Code डालना अब दिनांक 01 अप्रैल 2021 से अनिवार्य हो गया है । बिल बनाते समय कितने अंको का HSN Code डालना अनिवार्य किया गया है। आइये जानते है-
यदि किसी करदाता का वार्षिक टर्नओवर पांच करोड से नीचे है, तो उन करदाताओं को 4 अंको का HSN Code अपने जीएसटी इनवायस बनाते समय डालना अनिवार्य होगा।
और यदि किसी करदाता का वार्षिक टर्नओवर पांच करोड से ऊपर है, तो उन करदाताओं को 6 अंको का HSN Code अपने जीएसटी इनवायस बनाते समय डालना अनिवार्य होगा।

दूसरा बदलाव- जिन करदाताओ का वार्षिक टर्नओवर 50 करोड से अधिक है, उन करदाताओ को ई-इनवायस जारी करना 01 अप्रैल 2021 से अनिवार्य हो गया है।

तीसरा बदलाव-  जीएसटी मे रिफण्ड के लिये पहले अधिकतम् समय 1 वर्ष मे पूर्ण करना अनिवार्य होता था, लेकिन 01 अप्रैल से अधिकतम् समय बढाकर 2 वर्ष तक की प्रकिया पूर्ण करनी होगी, जैसा कि रिफण्ड वित्तीय वर्ष 2018-19 का दावा 31.03.2021 पूर्ण करना अनिवार्य होगा।
चौथा बदलाव- जीएसटी मे हम जीएसटीआर-1 भरते समय HSN Code डालना अब दिनांक 01 अप्रैल 2021 से अनिवार्य हो गया है। यदि किसी करदाता ने अपनी जीएसटी रिर्टन जीएसटीआर-1 मे HSN Code नही डाला है, तो क्रेता को आईटीसी का लाभ नही प्राप्त होगा।

GST में (QRMP) स्कीम के तहत मासिक टैक्स 35% कैश लेजर में जमा करना अनिवार्य होगा।

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जीएसटी काउंसिल की बैठक दिनांक 5 अक्टूबर 2020 को हुई थी जिसमे कहा गया था कि 5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले रजिस्‍टर्ड करदाताओं को जनवरी, 2021 से अपना रिटर्न तिमाही आधार पर दाखिल करने और टैक्‍स पेमेंट मासिक आधार पर जमा करने की अनुमति दी जाएगी।

जीएसटी में हुए नए संशोधन के पश्चात् यदि कोई रजिस्टर्ड करदाता तिमाही रिटर्न (QRMP) स्कीम को चुनता है, तो उसे मासिक टैक्स का भुगतान भी प्रत्येक माह की 20 तारीख को करना होगा, इसके साथ ही वह रिटर्न GSTR-1 एवं रिटर्न GSTR-3B, भी तिमाही आधार पर प्रस्तुत करना होगा लेकिन उन्हें टैक्स मासिक आधार पर जमा कराना होगा । जब मासिक आधार पर टैक्स जमा कराना पड़ रहा है तो जाहिर है टैक्स की गणना भी करनी होगा। ऐसे में कुछ लोगों का मानना है कि जब हम टैक्स की गणना ही कर रहे है तो फिर रिटर्न भी प्रस्तुत कर देंगे। ऐसे में इस स्कीम का क्या फायदा हुआ। लेकिन ऐसा नहीं है। मासिक टैक्स जमा कराने के लिए इस स्कीम में अलग तरीके दिये है जिसके चलते ऐसे करदाताओं को विस्तृत गणना करने की आवश्यकता नहीं है।

इस स्कीम में महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई करदाता मासिक जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं कर पा रहा या उसका वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ से कम है, तो वह त्रैमासिक आधार पर कर सकता है अथवा वह यदि मासिक आधार पर ही GST Return दाखिल करना चाहता है, तो भी वह QRMP विंडो में जाकर Defult सेटिंग में तिमाही अथवा मासिक select कर सकता है, यदि ऐसा नहीं करेगा तो करदाता का वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ से कम है, वह GST QRMP scheme में स्वतः ही शामिल हो जायेगा। इसलिए QRMP विंडो में जाकर Defult सेटिंग में तिमाही अथवा मासिक select आवश्य कर ले, नही तो वह टर्नओवर 5 करोड़ से कम वाले करदाताओं को त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करना पड़ सकता हैं ।

इस संबंध में अधिसूचना स. 85/2020 – सीटी दिनांक 10.11.2020 जारी की गई है जिसमें इस स्कीम का लाभ लेने वाले करदाताओं के लिए मासिक भुगतान की गणना करने की विधि बताई गई है।

इस अधिसूचना के अनुसार वह करदाता जो धारा 39(1) के प्रोविजो के तहत तिमाही आधार पर GSTR-3B प्रस्तुत करते हैं, उन्हें 1 जनवरी 2021 से मासिक आधार पर तिमाही के पहले माह एवं दूसरे माह के लिए निम्न प्रकार टैक्स का भुगतान करना होगा-

(i) यदि रिटर्न तिमाही आधार पर प्रस्तुत की गई है तो पिछली तिमाही के कैश लेजर द्वारा भुगतान की गई राशि का 35 प्रतिशत।
(ii) यदि रिटर्न मासिक आधार पर प्रस्तुत की गई है, तो पिछली तिमाही के आखरी माह में केश लेजर द्वारा भुगतान की गई राशि।
हालांकि निम्न मामलों में कोई राशि जमा कराने की आवश्यकता नहीं है-

(i) तिमाही के पहले माह में यदि इलेक्ट्रोनिक कैश लेजर एवं इलेक्ट्रोनिक क्रेडिट लेजर में मिलाकर उस माह के कर दायित्व के बराबर राशि जमा हो या उस माह में कर दायित्व शून्य हो।

(ii) तिमाही के दूसरे माह में यदि इलेक्ट्रोनिक कैश लेजर एवं इलेक्ट्रोनिक क्रेडिट लेजर में मिलाकर राशि दोनों माह के कर दायित्व के बराबर हो या दोनों माह में कर दायित्व शून्य हो।

यदि किसी करदाता ने उस माह से पहले वाली टैक्स अवधि की रिटर्न प्रस्तुत नहीं की है, तो वह इस स्कीम के लिए योग्य नहीं होगा।

आवश्यक वस्तु अधिनियम,1955 (Essential Commodities Act) क्या है | हाल ही में क्या ऐसे संशोधन किए गए?

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नमस्कार दोस्तों आज हम चर्चा करेंगे- आवश्यक वस्तु अधिनियम जिसे हम अंग्रेजी में Essential Commodities Act भी कहते हैं, हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा इसमें महत्वपूर्ण संशोधन किया गया जिससे आने वाले समय खाद्य पदार्थों की पूर्ति कुछ विशेष परिस्थितियों में कैसे और कब लागू होगा ।

ऐसा मौजूदा सरकार द्वारा बदलाव किया जा चुका है। क्योंकि आज हमारा देश में कोविड-19 जैसी घातक महामारी से गुजर रहा है। इसी कारण सरकार द्वारा वर्ष 2020 को पुनः संशोधन किया गया। आज हम इसी बात पे चर्चा करने जा रहे हैं जिसमे आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) क्या है और साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) में क्या संशोधन और बदलाव किये गए हैं इसको भी यहाँ शामिल करेंगे और इसकी महत्वपूर्ण जानकारियां भी आपको देंगें।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 क्या है ?

केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में बनाया था जिसका उद्देश्य ऐसे खाद्य पदार्थों की पूर्ति हेतु जैसे अनाज, दाल, प्याज, खाद्य तेलहन और तेल इत्यादि केवल असाधारण परिस्थितियों जैसे युद्ध, आकाल, कीमत वृद्धि, गंभीर प्रकृति आपदा भी शामिल है। ऐसी परिस्थितियों में उपरोक्त खाद्य पदार्थों की पूर्ति अथवा नियंत्रित करना सरकार भी फर्ज बनता है। इसी कारण यह कानून बना जिसे हम आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) कहते हैं।

सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम

(Essential Commodities Act) में वर्ष 2020 में कोरोनाकाल में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है जिसमे कुछ वस्तुओं को आवश्यक वस्तु में शामिल किया गया है और कुछ को इस इस कानून से बाहर किया गया है |

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) में संशोधन 2020

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) में संशोधन करते हुए मास्क (2 प्लाई एवं 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन-95 मास्क) और हैंड सैनिटाइज़र को दिनांक 30 जून, 2020 तक आवश्यक वस्तु के रूप में घोषित किया था, और अब  सितम्बर 2020 में आलू, प्याज, टमाटर, अरहर, उरद, सेहत सभी दाल को और सरसो के साथ सभी तिलहन से भण्डारण की सीमा को समाप्त करने का बिल दोनों सदनों में पारित करवाया। हम सभी जानते हैं कोरोनाकाल में यह सभी वस्तुएं प्रत्येक नागरिकों के लिए कितनी आवश्यक है, इसी प्रकार इन वस्तुओं की पूर्ति कराना अथवा नियंत्रित करना सरकार द्वारा ही निर्धारित किया जा सकता है।

हम सभी जानते है कि ऐसे वक्त में भी यह सभी वस्तुएं सही मूल्य पर ही मिले, कोई किसी व्यक्ति को न लूटे, इसी को देखते हुए सरकार द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) में कुछ बदलाव किए है, जिसके चलते उन वस्तुंओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत सूचीबद्ध करती है जिस पर सरकार का नियंत्रण होता है | सरकार इस वस्तु सूची को समय-समय पर बदलाव भी करती रहती है | ऐसी खाद्य पदार्थों की बढ़ोत्तरी एवम् वृद्धि हेतु कृषि के क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करना | केंद्र सरकार का मानना है कि संशोधित विधेयक से उत्‍पाद, उत्‍पाद सीमा, आवाजाही, वितरण व आपूर्ति की आजादी मिलेगी और बिक्री की अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र और विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश आकर्षित होगा |

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 क्या कहती है ?

धारा 3 उपधारा 1 –  यदि केंद्र सरकार का यह विचार हो कि किसी आवश्यक वस्तु की आपूर्ति को बनाये रखने या वस्तु बढ़ाने के लिए या उचित मूल्य पर सामान वितरण और उपलब्धता को बनाये रखने के लिए ऐसा करना आवश्यक या उचित है और भारत की रक्षा के लिए या सैन्य संचालन के कुशल संचालन के लिए किसी आवश्यक वस्तु की प्राप्ति करने लिए ऐसा करना आवश्यक या उचित है, तो केंद्र सरकार आदेश द्वारा वस्तु के उत्पादन आपूर्ति और वितरण तथा उसमे व्यापर और वाणिज्यक को नियमित या प्रतिषेध के लिए प्रावधान कर सकेगी।

धारा 3 उपधारा 2 –  उपधारा 1 में दी गयी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव दाले बिना, एक आदेश द्वारा निम्नलिखित प्रावधान किया जा सकेगा :-

(क) :-  किसी आवश्यक वस्तु के उत्पादन या विनिर्माण के लिए लाइसेंस परमिट द्वारा या अन्यथा विनियमन के लिए प्रावधान,

(ख):- किसी बंजर भूमि या कृषि भूमि को, चाहे वह किसी भवन से जुडी हो या न हो उस पर सामान्यतः खाद्य फसलों या विनिर्दिष्ट फसलों को उगने के लिए खेती के अधीन लाना और सामान्यतः फसलों और विनिर्दिष्ट खाद्य फसलों की खेती को बनाये रखने या बढ़ाये रखने के लिए प्रावधान किये जा सकेंगे,

(ग):-  ऐसी कीमत नियंत्रित करना जिस पर किसी आवश्यक वस्तु को ख़रीदा या बेचा जा सकेगा,

(घ) :- किसी आवश्यक वस्तु के भंडारण ,परिवहन, वितरण, उपयोग, प्राप्ति, प्रयोग या उपभोग का लाइसेंस, परमिट द्वारा अन्यथा विनियमन,

(ड.) :- समान्तयः बेचे जाने के लिए रखी गयी किसी आवश्यक वस्तु को बेचने से रोकने के पर प्रतिबनध लगाना,

(च):- किसी व्यक्ति से , जो किसी आवश्यक वस्तु को स्टाक में रखता है व उसके उत्पादन में या उसे बेचने या खरीदने के कारोबार में लगा हुआ है, यह उम्मीद करना कि वह :-

(क) :- उस सम्पूर्ण मात्रा या उसके विनिर्दिष्ट भाग का, जिसे वह स्टाक में रखता है या जिसका उसने उत्पादन किया हुआ या जिसे वह प्राप्त करता है, उस उत्पादन की बिक्री करेगा,
(ख़):- किसी ऐसी वस्तु की दशा में , जिसका वह सम्भवतः उत्पादन करेगा या जिसे सम्भवतः प्राप्त करेगा, उसके द्वारा उत्पादन या प्राप्त करने पर उस सम्पूर्ण वस्तु या उसके विनिर्दिष्ट भाग की बिक्री करेगा।
     
आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 दंड का प्रावधान करती है, यदि कोई व्यक्ति धारा 3 के अधीन किये गए  किसी भी आदेश का उल्लंघन करता है या करेगा, तो वह दण्डित किया जायेगा।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत ऐसे आवश्यक वस्तु की कालाबाजारी अथवा मूल्य में परिवर्तन अथवा जो भी कोई इसका उल्लंघन करेगा वह व्यक्ति को 7 वर्ष का कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है तथा काला बाजारी, महंगाई जैसा कृत्य करेगा, आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत उसे अधिकतम 6 माह के लिये नजरबंद भी किया जा सकता है।

आवश्यक वस्तु (Essential Commodities) सूची श्रेणीवार-

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, की धारा 2 उपखण्ड (क) के अंतर्गत 7 बड़ी चीजों को आवश्यक वस्तुओं की सूची में डाला गया है –

औषधि
उर्वरक – कार्बनिक, अकार्बनिक या मिश्रित हो,
खाद्य पदार्थ जिसके अंतर्गत खाद्य :- दाल, चावल, गेंहूं, गन्ना, गुड़, चीनी, तेल और तिलहन शामिल है। (सितंबर 2020 से संशोधित बिल द्वारा अब हटा दिया गया है।)
पूर्णयता कपास से बना अट्टु सूत
पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद
कच्चा जूट और जूट टेक्सटाइल
खाद्य फसलों के बीज और फलो तथा वनस्पतियों की बीज, पशु चारे के बीज, जूट और कपास के बीज

समय समय पर सरकार देश की परिस्थित के अनुसार इन 7 आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में अन्य आवश्यक वस्तुओं को जोड़ भी सकती और हटा ही सकती है। हाल ही में देश विदेश में फैली कोरोना वायरस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इस सूची में दो वस्तुओ को आवश्यक वस्तुओ की सूची में जोड़ा गया ;-

सैनिटाइजर
मास्क

शिकायत कैसे दर्ज कराएं ?

केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा को उपरोक्त वस्तुओं की शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन भी जारी किया है। और यदि कोई आपसे किसी वस्तु का ज्यादा दाम वसूलता है या जमाखोरी करता है तो आप इसकी शिकायत नैशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4000 पर कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत विभागीय वेबसाइट www.consumerhelpline.gov.in पर की जा सकती है।

हमारा प्रयास आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act, 1955) की पूर्ण जानकारी और कोरोना काल में क्या बदलाव किए गए थे इत्यादि जानकारी आप तक प्रदान करने का है, अगर आपके पास कोई सवाल हो,तो आप कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते है ।